निर्माण उद्योग अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र है जो कच्चे माल का प्रसंस्करण कर मूल्यवर्धित वस्तुओं का निर्माण करता है। निर्माण उद्योग को 'द्वितीयक क्षेत्र' की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि यह प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों को तैयार वस्तुओं में बदलता है। भारत में निर्माण उद्योग का विकास औद्योगिक क्रांति तथा स्वतंत्रता के बाद की नीतियों से हुआ है। भारत में निर्माण उद्योग को 'मैकेनिकल मैन्युफैक्चरिंग' के रूप में भी जाना जाता है। निर्माण उद्योग रोजगार, विदेशी मुद्रा एवं आय का प्रमुख स्रोत है। भारत में निर्माण उद्योग में सूती वस्त्र, लौह-इस्पात, सीमेंट, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण, पटसन आदि प्रमुख हैं।
सूती वस्त्र उद्योग: भारत का सबसे पुराना एवं प्रमुख उद्योग। महाराष्ट्र (मुंबई — भारत का मैनचेस्टर), गुजरात (अहमदाबाद), तमिलनाडु (कोयंबटूर) प्रमुख केंद्र हैं। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सूती वस्त्र उत्पादक देश है।
लौह-इस्पात उद्योग: 'बुनियादी उद्योग' कहलाता है। भारत के प्रमुख इस्पात संयंत्र — जमशेदपुर (टाटा स्टील), भिलाई (छत्तीसगढ़), बोकारो (झारखंड), राउरकेला (ओडिशा), दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल), सलेम (तमिलनाडु), विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)। भिलाई इस्पात संयंत्र रूसी सहायता से बनाया गया था। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है।
पटसन उद्योग: 'सोने का रेशा' (Golden Fibre) कहलाता है। पश्चिम बंगाल (हुगली क्षेत्र) भारत का प्रमुख पटसन उद्योग क्षेत्र है। भारत विश्व का सबसे बड़ा पटसन उत्पादक देश है।
सीमेंट उद्योग: मध्य प्रदेश (रेवा), राजस्थान (चित्तौड़गढ़), तमिलनाडु (विशेषकर दक्षिण भारत) में केंद्रित। सीमेंट उद्योग चूना पत्थर पर आधारित है।
रसायन उद्योग: गुजरात, महाराष्ट्र में केंद्रित। उर्वरक, दवाएँ, पेट्रोरसायन शामिल।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग: भारत के कृषि आधारित उद्योगों में तेजी से बढ़ता क्षेत्र।
भारत में निम्न प्रमुख औद्योगिक प्रदेश हैं: 1. मुंबई-पुणे क्षेत्र: सूती वस्त्र, रसायन, इंजीनियरिंग। 2. हुगली क्षेत्र (कोलकाता): पटसन, इंजीनियरिंग, रसायन। 3. गुजरात-महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र: रसायन, पेट्रोरसायन, सीमेंट। 4. दिल्ली-मेरठ-गाजियाबाद क्षेत्र: इंजीनियरिंग, खाद्य, वस्त्र। 5. चोटा नागपुर क्षेत्र: लौह-इस्पात, कोयला आधारित। 6. दक्षिणी क्षेत्र (बेंगलुरु-कोयंबटूर-चेन्नई): इलेक्ट्रॉनिक्स, IT, सूती वस्त्र।
भारत में उद्योगों के स्थानीकरण को प्रभावित करने वाले कारक हैं — कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार, शक्ति (ऊर्जा), श्रम, परिवहन, पूँजी, सरकारी नीतियाँ एवं बंदरगाहों की निकटता। इस्पात उद्योग कोयला एवं लौह अयस्क के क्षेत्रों (छोटानागपुर) के निकट स्थापित हुए, जबकि सूती वस्त्र उद्योग बाजार एवं बंदरगाहों (मुंबई) के निकट विकसित हुए।
भारत में कुटीर एवं लघु उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का प्रमुख स्रोत हैं। हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी, सिलाई, खिलौने, अगरबत्ती, जूट बैग आदि छोटे उद्योग हैं। 'स्वर्णिम वर्ष' (Golden Jubilee) में लघु उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया गया। 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम ने निर्माण उद्योग को नई गति दी है।
भारतीय निर्माण उद्योग की प्रमुख समस्याएँ — अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे माल की कमी, तकनीकी पिछड़ापन, अप्रचलित मशीनरी, पूँजी की कमी, ऊर्जा की कमी, विदेशी प्रतिस्पर्धा एवं श्रम समस्याएँ। सरकार औद्योगिक सुधारों, विदेशी निवेश एवं तकनीकी उन्नयन से इन समस्याओं का समाधान कर रही है।
निर्माण उद्योग आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन है। यह रोजगार सृजित करता है, विदेशी मुद्रा अर्जित करता है, कृषि उत्पादों को बाजार देता है और बुनियादी ढाँचे का विकास करता है। सकल घरेलू उत्पाद में निर्माण क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत का लक्ष्य 'निर्माण क्षेत्र' को जीडीपी में 25 प्रतिशत तक ले जाना है।
| उद्योग | प्रमुख केंद्र |
|---|---|
| सूती वस्त्र | मुंबई, अहमदाबाद |
| लौह-इस्पात | जमशेदपुर, भिलाई, बोकारो |
| पटसन | हुगली (पश्चिम बंगाल) |
| सीमेंट | मध्य प्रदेश, राजस्थान |
| संयंत्र | राज्य |
|---|---|
| जमशेदपुर | झारखंड |
| भिलाई | छत्तीसगढ़ |
| बोकारो | झारखंड |
| राउरकेला | ओडिशा |
| दुर्गापुर | पश्चिम बंगाल |
| प्रदेश | मुख्य उद्योग |
|---|---|
| मुंबई-पुणे | सूती वस्त्र, रसायन |
| हुगली | पटसन |
| छोटानागपुर | लौह-इस्पात |
| बेंगलुरु | इलेक्ट्रॉनिक्स, IT |
निर्माण उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है। सूती वस्त्र, लौह-इस्पात, पटसन, सीमेंट एवं रसायन जैसे उद्योग देश के औद्योगिक विकास को गति देते हैं। भारत इस्पात एवं सूती वस्त्र उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। औद्योगिक स्थानीकरण कच्चे माल, बाजार, श्रम एवं परिवहन से निर्धारित होता है। तकनीकी पिछड़ापन एवं पूँजी की कमी जैसी समस्याओं के बावजूद 'मेक इन इंडिया' एवं औद्योगिक सुधारों से निर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भारत को औद्योगिक महाशक्ति बनाने की दिशा में अग्रसर है।