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1. परिचय

नियोजन का अर्थ है संसाधनों का पूर्व-निर्धारित उद्देश्यों के लिए व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध उपयोग। भारत में आर्थिक नियोजन का आरंभ 1950 में योजना आयोग की स्थापना से हुआ। योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे। भारत में पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans) बनाई गईं। 2015 में योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना की गई। धारणीय विकास (Sustainable Development) का अर्थ है वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करना कि आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति की क्षमता से समझौता न हो। धारणीय विकास की अवधारणा को सर्वप्रथम ब्रंटलैंड रिपोर्ट (1987) ने प्रस्तुत किया।

2. भारत में नियोजन की आवश्यकता एवं उद्देश्य

भारत जैसे विकासशील देश में नियोजन की आवश्यकता है क्योंकि: - संसाधनों का समुचित उपयोग एवं आवंटन। - गरीबी एवं बेरोजगारी में कमी। - क्षेत्रीय असमानताओं का निवारण। - आर्थिक विकास में तीव्रता लाना। - बुनियादी ढाँचे का विकास।

भारत में नियोजन का मुख्य उद्देश्य — आर्थिक विकास, रोजगार, समानता, सामाजिक न्याय एवं गरीबी उन्मूलन।

3. पंचवर्षीय योजनाएँ

भारत में 1951 से पंचवर्षीय योजनाएँ प्रारंभ हुईं। प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) में कृषि एवं सिंचाई पर बल दिया गया। द्वितीय योजना (1956-61) में औद्योगिक विकास पर। इसी प्रकार प्रत्येक योजना के अपने प्राथमिकता क्षेत्र रहे। 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के बाद से पंचवर्षीय योजनाओं की परंपरा समाप्त कर 'विकास पहल' का नया ढाँचा अपनाया गया। नीति आयोग अब योजना निर्माण का कार्य करता है।

4. नीति आयोग (NITI Aayog)

नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई। इसका पूर्ण नाम 'नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' है। नीति आयोग एक सलाहकार निकाय है, जो राज्यों के सहयोग से नीति निर्माण एवं विकास एजेंडा तय करता है। नीति आयोग ने 'विजन इंडिया @ 2047' एवं 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स' (SDGs) पर कार्य किया है।

5. धारणीय विकास (Sustainable Development)

धारणीय विकास की अवधारणा 'आवश्यकताओं' एवं 'सीमाओं' पर आधारित है। ब्रंटलैंड रिपोर्ट के अनुसार, "धारणीय विकास वह विकास है जो वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति करे, बिना भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति की क्षमता से समझौता किए।" धारणीय विकास के तीन स्तंभ हैं — आर्थिक विकास, सामाजिक समानता एवं पर्यावरण संरक्षण। इसे 'ट्रिपल बॉटम लाइन' भी कहते हैं।

6. क्षेत्रीय नियोजन

भारत में क्षेत्रीय नियोजन के अंतर्गत पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर बल दिया गया। हिल एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (HADP), डेजर्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम (DDP), ट्राइबल एरिया डेवलपमेंट (TAD) तथा विशेष पिछड़ा क्षेत्र विकास जैसे कार्यक्रम चलाए गए। क्षेत्रीय नियोजन से क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में सहायता मिली है। उदाहरण — लद्दाख, हिमालयी क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष कार्यक्रम।

7. धारणीय विकास के लक्ष्य (SDGs)

संयुक्त राष्ट्र ने 2015 में 17 सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) निर्धारित किए, जिन्हें 2030 तक प्राप्त करना है। इनमें गरीबी उन्मूलन, भूख समाप्ति, अच्छा स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, स्वच्छ ऊर्जा, उचित कार्य एवं आर्थिक वृद्धि आदि शामिल हैं। भारत ने SDGs को अपनी विकास नीतियों में समाहित किया है।

8. भारत में धारणीय विकास के प्रयास

भारत में धारणीय विकास हेतु निम्न प्रयास किए जा रहे हैं — नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) का विस्तार, वन संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा मिशन, प्रदूषण नियंत्रण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (लैंगिक समानता), स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन एवं वृक्षारोपण। राष्ट्रीय हरित मिशन भी सक्रिय है। भारत 'क्लाइमेट चेंज' से निपटने हेतु अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं (पेरिस समझौता) पर हस्ताक्षर कर चुका है।

9. धारणीय विकास के व्यावहारिक उपाय

धारणीय विकास को व्यवहार में लाने हेतु निम्न उपाय आवश्यक हैं: - संसाधनों का पुनर्चक्रण (Recycling): कागज, धातु, प्लास्टिक का पुनः उपयोग। - नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा: सौर पैनल, पवन चक्कियाँ, बायोगैस। - जैविक कृषि: रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद। - जल संरक्षण: वर्षा जल संचयन, बूंद-बूंद सिंचाई। - सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन से प्रदूषण में कमी। - वनरोपण एवं हरित आवरण में वृद्धि। - ग्रीन बिल्डिंग: ऊर्जा-कुशल भवनों का निर्माण।

इन उपायों से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास भी संभव है। 'ईको-टूरिज्म', 'ग्रीन इकोनॉमी' एवं 'सर्कुलर इकोनॉमी' जैसी अवधारणाएँ धारणीय विकास की नई दिशाएँ हैं। सर्कुलर इकोनॉमी में 'कम करो, पुनः उपयोग करो, रीसाइकिल करो' के सिद्धांत पर बल दिया जाता है। धारणीय विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग — नागरिक, उद्यमी, किसान एवं विद्यार्थी — की सहभागिता से ही सफल हो सकता है। स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण, ऊर्जा बचत एवं कचरा प्रबंधन से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: नियोजन संस्थाएँ

संस्था वर्ष भूमिका
योजना आयोग 1950 पंचवर्षीय योजनाएँ
नीति आयोग 2015 नीति निर्माण एवं सलाह

तालिका 2: धारणीय विकास के स्तंभ

स्तंभ विवरण
आर्थिक विकास वृद्धि एवं रोजगार
सामाजिक समानता सबका समावेश
पर्यावरण संरक्षण प्राकृतिक संसाधन संरक्षण

तालिका 3: क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम

कार्यक्रम क्षेत्र
HADP पहाड़ी क्षेत्र
DDP मरुस्थलीय क्षेत्र
TAD जनजातीय क्षेत्र

माइंड मैप

graph TD A["नियोजन तथा धारणीय विकास"] --> B["योजना आयोग"] A --> C["नीति आयोग"] A --> D["धारणीय विकास"] A --> E["क्षेत्रीय नियोजन"] D --> D1["ब्रंटलैंड रिपोर्ट 1987"] D --> D2["तीन स्तंभ"] D --> D3["SDGs"] E --> E1["HADP, DDP, TAD"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: धारणीय विकास के तीन स्तंभ

धारणीय विकास के तीन स्तंभ धारणीय विकास आर्थिक विकास सामाजिक समानता पर्यावरण संरक्षण तीनों स्तंभों का संतुलन ही ट्रिपल बॉटम लाइन Golden Rule: ब्रंटलैंड रिपोर्ट (1987) ने धारणीय विकास की संकल्पना दी।

आरेख 2: भारत में नियोजन का विकास

भारत में नियोजन का विकास योजना आयोग (1950) प्रथम अध्यक्ष — जवाहरलाल नेहरू पंचवर्षीय योजनाएँ (1951 से) प्रथम योजना — कृषि एवं सिंचाई पर बल नीति आयोग (2015) योजना आयोग का स्थान लिया, SDGs पर कार्य संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) 2030 तक प्राप्त करने का लक्ष्य स्वर्ण नियम: वर्तमान आवश्यकताएँ पूरी करें, भावी पीढ़ी की क्षमता से समझौता न करें।

सामान्य गलतियाँ

  1. योजना आयोग की स्थापना: योजना आयोग 1950 में स्थापित हुआ, नीति आयोग 2015 में; वर्षों को उल्टा न बताएँ।
  2. प्रथम अध्यक्ष: योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे; इसे किसी और से नहीं जोड़ना चाहिए।
  3. प्रथम पंचवर्षीय योजना: प्रथम योजना (1951-56) में कृषि एवं सिंचाई पर बल था, द्वितीय में उद्योग; इन्हें मिलाना गलत है।
  4. ब्रंटलैंड रिपोर्ट का वर्ष: धारणीय विकास की अवधारणा ब्रंटलैंड रिपोर्ट (1987) से जुड़ी है, इसे अन्य वर्ष से न जोड़ें।
  5. SDGs की संख्या: सतत विकास लक्ष्य 17 हैं; इन्हें 10 या 20 नहीं बताना चाहिए।
  6. धारणीय विकास के स्तंभ: तीन स्तंभ (आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरण) हैं; इनमें से किसी को हटाना गलत है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. योजना आयोग एवं नीति आयोग की स्थापना, अध्यक्ष एवं कार्य याद रखें।
  2. धारणीय विकास की ब्रंटलैंड रिपोर्ट वाली परिभाषा शब्दशः लिखने का अभ्यास करें।
  3. धारणीय विकास के तीन स्तंभों को उदाहरण सहित समझाएँ।
  4. क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (HADP, DDP, TAD) को उनके क्षेत्रों के साथ याद करें।
  5. SDGs (17 लक्ष्य) तथा भारत के धारणीय विकास प्रयासों की सूची बनाएँ।

निष्कर्ष

नियोजन भारत के विकास की रीढ़ रहा है। योजना आयोग से लेकर नीति आयोग तक, भारत ने विकास की दिशा बदलते हुए समावेशी एवं धारणीय विकास पर बल दिया है। धारणीय विकास की अवधारणा यह सुनिश्चित करती है कि विकास केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित हो। आर्थिक विकास, सामाजिक समानता एवं पर्यावरण संरक्षण का संतुलन ही सतत विकास है। संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों को अपनाकर भारत '2030 एजेंडा' की दिशा में अग्रसर है। सतत नियोजन एवं धारणीय विकास ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।