भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। स्वतंत्रता के बाद भारत का व्यापार निरंतर विस्तारित हुआ है। भारत विश्व के प्रमुख व्यापारिक देशों में शामिल है। भारत का कुल निर्यात एवं आयात 'विदेश व्यापार' कहलाता है। भारत का विदेशी व्यापार नीति (FTP) द्वारा निर्देशित होता है। भारत में विदेशी व्यापार से संबंधित मुख्य संस्था DGFT (डीजीएफटी) तथा वाणिज्य मंत्रालय है। भारत की विदेशी मुद्रा भंडार में व्यापार का महत्वपूर्ण योगदान है।
भारत के प्रमुख निर्यात पदार्थ हैं: - कृषि उत्पाद: चावल, गेहूँ, मसाले, चाय, कॉफी, फल, सब्जियाँ। - खनिज एवं अयस्क: लौह अयस्क, बॉक्साइट, ग्रेनाइट। - इंजीनियरिंग वस्तुएँ: मशीनरी, वाहन, इस्पात उत्पाद। - रत्न एवं आभूषण: हीरे-जवाहरात — भारत का प्रमुख निर्यात। - वस्त्र एवं वस्त्र उत्पाद: सूती वस्त्र, तैयार वस्त्र। - रसायन एवं दवाएँ: फार्मास्युटिकल्स। - सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ: सॉफ्टवेयर निर्यात।
रत्न एवं आभूषण भारत का सबसे बड़ा निर्यात वर्ग है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) सेवाओं के निर्यात में भारत विश्व में अग्रणी है।
भारत के प्रमुख आयात पदार्थ हैं: - पेट्रोलियम एवं कच्चा तेल: भारत का सबसे बड़ा आयात वर्ग। - सोना: आभूषण एवं निवेश हेतु। - मशीनरी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स। - रासायनिक पदार्थ एवं उर्वरक। - मोती एवं रत्न (कच्चे)। - यांत्रिक उपकरण।
भारत कच्चा तेल, सोना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा आयातक है। पेट्रोलियम आयात पर भारत की निर्भरता उच्च है।
भारत का व्यापार संतुलन प्रायः घाटे में रहता है, क्योंकि आयात निर्यात से अधिक होता है। भारत का व्यापार घाटा मुख्यतः कच्चे तेल एवं सोने के बड़े आयात के कारण होता है। हालाँकि, सेवाओं का निर्यात (IT, पर्यटन) व्यापार घाटे को कुछ सीमा तक संतुलित करता है। भारत की भुगतान संतुलन में प्रेषण (Remittances) का महत्वपूर्ण योगदान है।
भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश हैं — संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जर्मनी, रूस, जापान, सिंगापुर, ब्रिटेन। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत है। भारत का व्यापार ASEAN, EU, SAARC जैसे क्षेत्रीय ब्लॉकों से भी होता है। खाड़ी देशों से भारत मुख्यतः कच्चा तेल आयात करता है।
भारत का अधिकांश (लगभग 95 प्रतिशत) माल व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। भारत के प्रमुख व्यापारिक बंदरगाह — मुंबई, न्हावा शेवा (जवाहरलाल नेहरू), कांडला, चेन्नई, कोलकाता, विशाखापत्तनम, कोच्चि, पारादीप, मंगलुरु। न्हावा शेवा भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार हेतु हवाई मार्ग (माल वायु सेवा) भी महत्वपूर्ण हैं।
भारत की विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) निर्यात को बढ़ावा देती है। इसके मुख्य उपाय हैं — निर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), मेक इन इंडिया, विदेशी निवेश को बढ़ावा। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में निर्यात हेतु कर राहत एवं सुविधाएँ दी जाती हैं। भारत G20 एवं WTO का सदस्य है। भारत की व्यापार नीति 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में भी कार्य कर रही है।
भारत का व्यापार विश्व के सभी महाद्वीपों से होता है। एशिया भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक क्षेत्र है, जिसमें चीन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जापान, सिंगापुर प्रमुख हैं। उत्तरी अमेरिका (अमेरिका) भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। यूरोप (जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, नीदरलैंड) भी भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र हैं। अफ्रीका (दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया) से भारत का व्यापार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया से कोयला एवं खनिजों का आयात होता है। भारत 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों (वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड) के साथ व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ कर रहा है। भारत-यूएई, भारत-ऑस्ट्रेलिया एवं भारत-जापान जैसे द्विपक्षीय व्यापार समझौते भारत के व्यापार के विस्तार में सहायक हैं।
भारतीय व्यापार की प्रमुख समस्याएँ हैं — कच्चे तेल एवं सोने के आयात पर अधिक निर्भरता, व्यापार घाटा, गैर-पारंपरिक बाजारों तक सीमित पहुँच, बुनियादी ढाँचे की कमी, निर्यात की गुणवत्ता एवं प्रतिस्पर्धा, मानकों का पालन तथा बंदरगाहों की भीड़। इन समस्याओं के समाधान हेतु भारत निर्यात को विविधता दे रहा है, विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है तथा नए व्यापारिक समझौते कर रहा है। जीएसटी एवं ई-वे बिल से व्यापारिक प्रक्रियाएँ सुगम हुई हैं। लॉजिस्टिक्स एवं सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में सुधार से निर्यात लागत घटी है। भारत का लक्ष्य विश्व व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है। सर्वेक्षणों के अनुसार भारत विश्व का तेजी से उभरता व्यापारिक देश है, जो 'वैश्विक विनिर्माण केंद्र' बनने की दिशा में अग्रसर है।
| वर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| रत्न एवं आभूषण | हीरे-जवाहरात |
| कृषि उत्पाद | चावल, मसाले, चाय |
| इंजीनियरिंग | मशीनरी, वाहन |
| सेवाएँ | IT, BPO |
| वर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| पेट्रोलियम | कच्चा तेल |
| सोना | आभूषण हेतु |
| इलेक्ट्रॉनिक्स | मशीनरी |
| रासायनिक | उर्वरक |
| देश | व्यापार |
|---|---|
| अमेरिका | सबसे बड़ा साझेदार |
| चीन | सबसे बड़ा आयात स्रोत |
| UAE | प्रमुख साझेदार |
भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देश की आर्थिक समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार है। भारत रत्न-आभूषण, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएँ एवं IT सेवाओं का निर्यात करता है, जबकि कच्चा तेल, सोना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात। भारत का व्यापार संतुलन तेल एवं सोने के आयात के कारण प्रायः घाटे में रहता है। अमेरिका, चीन, UAE भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। SEZ, मेक इन इंडिया एवं विदेश व्यापार नीति से निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार एवं भुगतान संतुलन में व्यापार एवं प्रेषण का योगदान भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाता है।