भारत आज अनेक भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है। इनमें नगरीकरण से उत्पन्न मलिन बस्तियाँ, भुखमरी एवं गरीबी, भूस्खलन, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा शहरीकरण की समस्याएँ प्रमुख हैं। इन मुद्दों का भौगोलिक विश्लेषण आवश्यक है, क्योंकि इनका वितरण, कारण एवं समाधान क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े हैं। ये समस्याएँ न केवल पर्यावरण को प्रभावित करती हैं, बल्कि मानव जीवन की गुणवत्ता को भी बिगाड़ती हैं।
तेजी से शहरीकरण के कारण बड़े नगरों में मलिन बस्तियाँ (Slums) तेजी से बढ़ी हैं। मलिन बस्तियों में आवास, स्वच्छता, पेयजल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव होता है। मुंबई में धारावी एशिया की सबसे बड़ी मलिन बस्ती है। मलिन बस्तियों के प्रमुख कारण — ग्रामीण-नगरीय प्रवास, रोजगार की तलाश, सस्ते आवास की कमी एवं नगरों में बढ़ती जनसंख्या। मलिन बस्तियों की समस्याएँ — बीमारियाँ, अपराध, शिक्षा का अभाव, गरीबी। सरकार 'प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)' एवं 'स्लम रिहैबिलिटेशन योजनाओं' से मलिन बस्तियों के सुधार का प्रयास कर रही है।
भारत में भुखमरी एवं गरीबी एक गंभीर समस्या है। गरीबी से आशय मूलभूत आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र, आवास) की पूर्ति में असमर्थता है। भुखमरी का अर्थ है पर्याप्त पोषण का अभाव। भारत में गरीबी का वितरण असमान है — मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड जैसे राज्यों में गरीबी अधिक है। गरीबी के कारण — बेरोजगारी, निरक्षरता, कम उत्पादकता, प्राकृतिक आपदाएँ, भूमि का असमान वितरण। सरकार 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम', मनरेगा, 'आयुष्मान भारत' एवं 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना' जैसे कार्यक्रमों से गरीबी-भुखमरी से लड़ रही है।
भूस्खलन का अर्थ है ढलानों पर मिट्टी एवं चट्टानों का नीचे खिसकना। भारत में भूस्खलन मुख्यतः हिमालय क्षेत्र, पश्चिमी घाट एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र के पर्वतीय क्षेत्रों में होता है। भूस्खलन के कारण — भारी वर्षा, भूकंप, वनों की कटाई, सड़क निर्माण, अनुचित कृषि एवं भूमि उपयोग। भूस्खलन से जन-धन की हानि, सड़कों का टूटना एवं नदियों का अवरुद्ध होना होता है। भूस्खलन नियंत्रण के उपाय — वृक्षारोपण, रिटेनिंग दीवारें, ड्रेनेज सुधार, भू-उपयोग नियोजन एवं चेतावनी प्रणाली। हिमालयी राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश) में भूस्खलन की घटनाएँ अधिक होती हैं।
जल प्रदूषण का अर्थ है जल में हानिकारक पदार्थों का मिलना। भारत की नदियाँ (गंगा, यमुना, सतलुज) गंभीर रूप से प्रदूषित हैं। जल प्रदूषण के कारण — औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू मल, कृषि रसायन, सीवेज, प्लास्टिक कचरा। जल प्रदूषण से स्वास्थ्य समस्याएँ, जलीय जीवों की मृत्यु, मृदा प्रदूषण एवं पेयजल संकट उत्पन्न होता है। सरकार 'नमामि गंगे परियोजना', 'स्वच्छ भारत मिशन' एवं जल गुणवत्ता निगरानी से जल प्रदूषण रोकने का प्रयास कर रही है। गंगा नदी को स्वच्छ करने हेतु 'नमामि गंगे' प्रमुख परियोजना है।
वायु प्रदूषण आधुनिक युग की प्रमुख समस्या है। भारत के बड़े नगरों (दिल्ली, कानपुर, लखनऊ) में वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर है। दिल्ली विश्व के सबसे प्रदूषित नगरों में से एक है। वायु प्रदूषण के कारण — वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक धुआँ, निर्माण धूल, पराली जलाना, कोयला जलाना। वायु प्रदूषण से श्वसन रोग, हृदय रोग, धुंध (smog) एवं जलवायु परिवर्तन होता है। भारत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) से प्रदूषण की निगरानी होती है। सरकार 'ग्रैंड अपरेशन' जैसे उपायों से वायु प्रदूषण कम कर रही है।
जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन) के उत्सर्जन से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। भारत पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव — हिमनदों का पिघलना, मानसून में अनियमितता, चक्रवातों की आवृत्ति में वृद्धि, सूखा एवं बाढ़, समुद्र स्तर में वृद्धि। जलवायु परिवर्तन से कृषि उत्पादन, जल उपलब्धता एवं तटीय जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। भारत ने 'राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना' (NAPCC) बनाई है तथा पेरिस समझौते के तहत नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया है।
| समस्या | प्रमुख कारण |
|---|---|
| जल प्रदूषण | औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज |
| वायु प्रदूषण | वाहन उत्सर्जन, धुआँ |
| भूस्खलन | भारी वर्षा, वन कटाई |
| मलिन बस्तियाँ | ग्रामीण-नगरीय प्रवास |
| समस्या | योजना |
|---|---|
| जल प्रदूषण | नमामि गंगे |
| गरीबी | मनरेगा, आयुष्मान भारत |
| मलिन बस्तियाँ | प्रधानमंत्री आवास योजना |
| जलवायु | NAPCC |
| आपदा | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| भूस्खलन | हिमालय, पश्चिमी घाट |
| वायु प्रदूषण | दिल्ली, कानपुर |
| मलिन बस्तियाँ | मुंबई (धारावी) |
भारत में नगरीकरण, गरीबी, भुखमरी, भूस्खलन, जल-वायु प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएँ विद्यमान हैं। इन समस्याओं का भौगोलिक विश्लेषण उनके क्षेत्रीय वितरण एवं कारणों को समझने में सहायक है। मलिन बस्तियाँ, प्रदूषित नदियाँ एवं शहरों की भारी धुंध मानव जीवन की गुणवत्ता को बिगाड़ रही हैं। नमामि गंगे, मनरेगा, आयुष्मान भारत एवं NAPCC जैसी योजनाओं से समस्याओं के समाधान का प्रयास हो रहा है। धारणीय विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं जन भागीदारी से ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है। भौगोलिक चेतना एवं संसाधनों का समुचित प्रबंधन भारत के सतत भविष्य का आधार है।