'अतीत में दबे पाँव' ओम थानवी द्वारा रचित पुरातत्व-विषयक लेख है। इस लेख में लेखक ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे पुरातात्विक स्थलों के महत्व को समझाया है। शीर्षक ही स्पष्ट करता है कि अतीत की सभ्यताएँ हमारे पाँवों के नीचे धरती में दबी हैं, और पुरातत्व उन्हें खोजकर इतिहास को रोशन करता है।
लेख में लेखक ने पुरातत्व की विधियों, उत्खनन की प्रक्रिया और अतीत की सभ्यता की खोज के रोमांच का वर्णन किया है। यह लेख इस बात पर जोर देता है कि अतीत केवल इतिहास की पुस्तकों में नहीं, बल्कि धरती की गहराइयों में भी संजोया हुआ है। इसे खोजना पुरातत्व का कार्य है।
ओम थानवी हिंदी के प्रसिद्ध पत्रकार, संपादक और लेखक हैं। वे कई वर्षों तक जनसत्ता अखबार से जुड़े रहे। उन्होंने पुरातत्व, इतिहास और सांस्कृतिक विषयों पर गहरा लेखन किया है। 'अतीत में दबे पाँव' उनका महत्वपूर्ण लेख है, जो पुरातत्व के क्षेत्र में रुचि जगाता है।
ओम थानवी का लेखन पत्रकारिता और साहित्य के संगम का उदाहरण है। उन्होंने जनसत्ता में कई वर्षों तक संपादन कार्य किया। उनके लेखों में विषय की गहराई, स्पष्टता और जन-रुचि का ध्यान दिखाई देता है। 'अतीत में दबे पाँव' में उन्होंने जटिल पुरातत्वीय विषय को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है।
थानवी जी पुरातत्व और इतिहास के प्रति गहरी जिज्ञासा रखते हैं। उनका यह लेख पाठक को अतीत की यात्रा पर ले जाता है और हड़प्पा-मोहनजोदड़ो जैसी प्राचीन सभ्यताओं से परिचित कराता है। उनका लेखन जिज्ञासा और रोचकता से भरपूर है।
लेख की शुरुआत में लेखक पुरातत्व की अवधारणा को स्पष्ट करता है। पुरातत्व अतीत की सभ्यताओं और संस्कृतियों के अवशेषों का अध्ययन है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे स्थल इस बात के प्रमाण हैं कि हमारा अतीत धरती की गहराइयों में दबा हुआ है। इन स्थलों की खोज ने सिंधु घाटी सभ्यता को प्रकाश में लाया।
लेखक बताता है कि उत्खनन की प्रक्रिया से अतीत की वस्तुएँ प्राप्त होती हैं - मुहरें, बर्तन, मूर्तियाँ, इमारतों के अवशेष आदि। इन वस्तुओं के अध्ययन से उस सभ्यता के जीवन, व्यापार, धर्म और संस्कृति के बारे में जानकारी मिलती है। पुरातत्व इतिहास को जीवंत बनाता है।
लेख का मुख्य आकर्षण पुरातत्व के रोमांच का वर्णन है। जब खुदाई में कोई पुरानी वस्तु मिलती है, तो वह क्षण अत्यंत रोमांचक होता है। लेखक ने अपने इस लेख में पुरातत्व के महत्व, उसकी विधियों और अतीत से जुड़ने के आनंद को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। यह लेख पाठक में अतीत के प्रति जिज्ञासा जगाता है।
लेख में कोई काल्पनिक पात्र नहीं हैं, बल्कि प्रमुख तत्व हैं:
लेख का मूलभाव अतीत की सभ्यताओं के ज्ञान का महत्व है। लेखक बताता है कि हमारा अतीत धरती में दबा है और पुरातत्व उसे खोजकर इतिहास को समृद्ध करता है। सिंधु घाटी सभ्यता की खोज इसका प्रमाण है।
संदेश यह है कि अतीत को जानना हमारे भविष्य के लिए आवश्यक है। इतिहास से ही हम अपनी सभ्यता और संस्कृति की जड़ों को समझ सकते हैं। लेख पाठक में पुरातत्व और इतिहास के प्रति रुचि जगाता है।
लेख विश्लेषणात्मक और वर्णनात्मक शैली में लिखा गया है। भाषा सरल, स्पष्ट और रोचक है। लेखक ने जटिल पुरातत्वीय विषय को सरल उदाहरणों से स्पष्ट किया है। यह एक ज्ञानवर्धक लेख है।
लेख में वर्णन का रोमांच है - खुदाई के दौरान मिलने वाली वस्तुओं का वर्णन पाठक को बाँधता है। लेखक की भाषा में पत्रकारिता की स्पष्टता और साहित्य की रोचकता है।
| पहलू | विवरण | महत्व |
|---|---|---|
| विषय | पुरातत्व | अतीत का ज्ञान |
| प्रमुख स्थल | हड़प्पा, मोहनजोदड़ो | सिंधु सभ्यता |
| मूल भाव | अतीत का ज्ञान | इतिहास-बोध |
| शैली | विश्लेषणात्मक | ज्ञानवर्धक |
| वस्तु | उपयोग | जानकारी |
|---|---|---|
| मुहरें | व्यापार, पहचान | व्यापार-संबंध |
| बर्तन | दैनिक जीवन | रहन-सहन |
| मूर्तियाँ | धर्म, कला | संस्कृति |
'अतीत में दबे पाँव' ओम थानवी का ज्ञानवर्धक लेख है, जो पाठक को पुरातत्व की रोमांचक यात्रा पर ले जाता है। लेख स्पष्ट करता है कि हमारा अतीत धरती की गहराइयों में दबा है, और पुरातत्व उसे खोजकर इतिहास को जीवंत बनाता है। यह लेख अतीत के ज्ञान और पुरातत्व के प्रति रुचि जगाने का सशक्त माध्यम है।