अवकलज के अनुप्रयोग (Application of Derivatives) कलन का वह अध्याय है जिसमें हम सीखते हैं कि अवकलन केवल एक सैद्धांतिक उपकरण नहीं बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने का शक्तिशाली औजार है। इस अध्याय में हम वृद्धि दर (rate of change), स्पर्श रेखा (tangent) और अभिलंब (normal), वर्धमान और ह्रासमान फलन, उच्चिष्ठ (maxima) और निम्निष्ठ (minima), तथा अधिकतम-न्यूनतम की समस्याओं का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय व्यावहारिक गणित की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है।
यदि $y = f(x)$ है, तो $\frac{dy}{dx}$ को $x$ के सापेक्ष $y$ की तात्क्षणिक वृद्धि दर कहते हैं। सामान्यतः: $$\frac{dy}{dx} = \lim_{\Delta x \to 0} \frac{\Delta y}{\Delta x}$$
यदि $x$ और $y$ समय $t$ के फलन हैं, तो समय के सापेक्ष $y$ की वृद्धि दर: $$\frac{dy}{dt} = \frac{dy}{dx} \cdot \frac{dx}{dt}$$
एक वृत्त के क्षेत्रफल के परिवर्तन की दर $A = \pi r^2$ से $\frac{dA}{dt} = 2\pi r \frac{dr}{dt}$।
बिंदु $(x_1, y_1)$ पर फलन $y = f(x)$ के ग्राफ की स्पर्श रेखा की प्रवणता (slope) $m = f'(x_1)$ होती है।
$$y - y_1 = f'(x_1)(x - x_1)$$
अभिलंब की प्रवणता $= -\frac{1}{f'(x_1)}$ (जब $f'(x_1) \neq 0$) $$y - y_1 = -\frac{1}{f'(x_1)}(x - x_1)$$
फलन $f$ अंतराल $I$ पर: - वर्धमान (Increasing) है यदि $x_1 < x_2 \Rightarrow f(x_1) \leq f(x_2)$ - दृढ़तः वर्धमान यदि $x_1 < x_2 \Rightarrow f(x_1) < f(x_2)$ - ह्रासमान (Decreasing) यदि $x_1 < x_2 \Rightarrow f(x_1) \geq f(x_2)$
बंद अंतराल $[a, b]$ में निरपेक्ष उच्चिष्ठ/निम्निष्ठ स्थिर बिंदुओं और अंतिम बिंदुओं पर $f$ के मानों की तुलना से प्राप्त होते हैं।
छोटे परिवर्तन $\Delta x$ के लिए: $$\Delta y \approx dy = f'(x) \Delta x$$
इसका उपयोग $f(x + \Delta x) \approx f(x) + f'(x)\Delta x$ करके निकट मान ज्ञात करने में होता है।
व्यावहारिक समस्याओं को हल करने के चरण: 1. फलन $f(x)$ बनाएँ जिसका अधिकतम/न्यूनतम ज्ञात करना है। 2. $f'(x) = 0$ करके स्थिर बिंदु ज्ञात करें। 3. द्वितीय अवकलज परीक्षण से उच्चिष्ठ/निम्निष्ठ की पहचान करें।
$x$ और $y$ दो धनात्मक संख्याएँ हैं जिनका योग 20 है। उनके गुणनफल का अधिकतम मान: $P = x(20 - x) = 20x - x^2$। $P' = 20 - 2x = 0 \Rightarrow x = 10$। द्वितीय अवकलज $-2 < 0$, अतः $x = 10, y = 10$ पर अधिकतम गुणनफल $100$।
अवकलज के अनुप्रयोगों की व्यावहारिक समझ के लिए निम्न उदाहरण महत्वपूर्ण हैं।
उदाहरण 1: वृत्त के क्षेत्रफल की त्रिज्या के सापेक्ष वृद्धि दर ज्ञात कीजिए जब त्रिज्या 5 सेमी है।
हल: $A = \pi r^2$। त्रिज्या के सापेक्ष क्षेत्रफल की वृद्धि दर $\frac{dA}{dr} = 2\pi r$। $r = 5$ पर, $\frac{dA}{dr} = 2\pi(5) = 10\pi$ वर्ग सेमी प्रति सेमी। इसका अर्थ है कि त्रिज्या में एक इकाई की वृद्धि पर क्षेत्रफल में लगभग $10\pi$ वर्ग इकाई की वृद्धि होती है।
उदाहरण 2: फलन $f(x) = x^2 - 4x + 6$ के वर्धमान और ह्रासमान अंतराल ज्ञात कीजिए।
हल: $f'(x) = 2x - 4$। $f'(x) = 0 \Rightarrow x = 2$। अब $x < 2$ के लिए $f'(x) < 0$, अतः $( -\infty, 2)$ पर फलन ह्रासमान है; $x > 2$ के लिए $f'(x) > 0$, अतः $(2, \infty)$ पर फलन वर्धमान है। $x = 2$ पर $f''(x) = 2 > 0$, अतः $x = 2$ पर स्थानीय निम्निष्ठ है और न्यूनतम मान $f(2) = 4 - 8 + 6 = 2$ है।
उदाहरण 3: एक आयताकार खेत के चारों ओर बाड़ लगाने के लिए 100 मीटर तार उपलब्ध है। अधिकतम क्षेत्रफल का आयत ज्ञात कीजिए।
हल: माना आयत की लंबाई $x$ और चौड़ाई $y$ है। परिमाप $2(x + y) = 100 \Rightarrow y = 50 - x$। क्षेत्रफल $A = xy = x(50 - x) = 50x - x^2$। $\frac{dA}{dx} = 50 - 2x = 0 \Rightarrow x = 25$। $\frac{d^2A}{dx^2} = -2 < 0$, अतः $x = 25$ पर अधिकतम। चौड़ाई $y = 25$। अतः $25 \times 25$ मीटर का वर्ग ही अधिकतम क्षेत्रफल $625$ वर्ग मीटर देता है।
उदाहरण 4: सन्निकटन द्वारा $\sqrt{16.2}$ का निकटतम मान ज्ञात कीजिए।
हल: माना $f(x) = \sqrt{x}$, $x = 16$ और $\Delta x = 0.2$। $f'(x) = \frac{1}{2\sqrt{x}}$। सन्निकटन सूत्र $f(x + \Delta x) \approx f(x) + f'(x)\Delta x$ से: $$\sqrt{16.2} \approx \sqrt{16} + \frac{1}{2\sqrt{16}}(0.2) = 4 + \frac{0.2}{8} = 4 + 0.025 = 4.025$$
उदाहरण 5: सिद्ध कीजिए कि $f(x) = \sin x$ अंतराल $(0, \pi)$ में वर्धमान नहीं बल्कि $(0, \frac{\pi}{2})$ में वर्धमान है।
हल: $f'(x) = \cos x$। $(0, \frac{\pi}{2})$ में $\cos x > 0$, अतः फलन वर्धमान; $(\frac{\pi}{2}, \pi)$ में $\cos x < 0$, अतः फलन ह्रासमान। यह उदाहरण बताता है कि $f'(x)$ के चिह्न से ही वर्धमान/ह्रासमान का निर्णय लेना चाहिए।
वृद्धि दर की अवधारणा में समय $t$ के सापेक्ष परिवर्तन सबसे व्यावहारिक है। यदि कोई चर $x$ समय के साथ बदल रहा है, तो $x$ पर निर्भर राशि $y$ के परिवर्तन की दर $\frac{dy}{dt} = \frac{dy}{dx}\frac{dx}{dt}$ से प्राप्त होती है। यह श्रृंखला नियम का ही विस्तार है। भौतिकी के प्रश्नों में विस्थापन, वेग और त्वरण के बीच यही संबंध कार्य करता है, जहाँ वेग विस्थापन की समय के सापेक्ष अवकलज है।
अधिकतम-न्यूनतम की समस्याओं में समीकरण स्थापित करना सबसे कठिन चरण होता है। व्यावहारिक प्रश्नों में पहले दी गई जानकारी से चर घोषित करें, फिर उद्देश्य फलन लिखें। यदि फलन में दो चर हों, तो दिए गए अवरोध (जैसे कुल लागत, कुल परिमाप) से एक चर को दूसरे के पदों में व्यक्त करके फलन को एक चर में बदलें। इसके बाद ही $f'(x) = 0$ करके स्थिर बिंदु ज्ञात करें। द्वितीय अवकलज परीक्षण से पुष्टि करें कि प्राप्त मान उच्चिष्ठ है या निम्निष्ठ।
सन्निकटन की विधि में $\Delta x$ के छोटे होने पर ही $\Delta y \approx f'(x)\Delta x$ मान्य है। $\sqrt{17}$ जैसे मानों के लिए $x = 16$ और $\Delta x = 1$ रखने पर $\sqrt{17} \approx 4 + \frac{1}{8} = 4.125$ प्राप्त होता है, जो वास्तविक मान $4.123$ के अत्यंत निकट है। इस विधि में $x$ का चयन ऐसा करें जिसका मान सर्वविदित हो और $\Delta x$ न्यूनतम हो, ताकि त्रुटि कम से कम रहे।
स्थिर बिंदुओं पर $f''(x) = 0$ होने पर द्वितीय अवकलज परीक्षण विफल होता है। ऐसी स्थिति में प्रथम अवकलज परीक्षण का उपयोग करें, जिसमें बिंदु के बाएँ और दाएँ $f'(x)$ के चिह्नों की तुलना की जाती है। यदि चिह्न नहीं बदलता, तो वह बिंदु न तो उच्चिष्ठ है और न ही निम्निष्ठ, बल्कि विक्षेप बिंदु (inflection point) हो सकता है। $f(x) = x^3$ का $x = 0$ पर यही व्यवहार है। इन तथ्यों का नियमित अभ्यास परीक्षा में गलतियाँ कम करता है।
| रेखा | प्रवणता | समीकरण |
|---|---|---|
| स्पर्श रेखा | $f'(x_1)$ | $y - y_1 = f'(x_1)(x - x_1)$ |
| अभिलंब | $-1/f'(x_1)$ | $y - y_1 = -\frac{1}{f'(x_1)}(x - x_1)$ |
| शर्त | परिणाम |
|---|---|
| $f'(c) = 0$, $f''(c) < 0$ | स्थानीय उच्चिष्ठ |
| $f'(c) = 0$, $f''(c) > 0$ | स्थानीय निम्निष्ठ |
| $f'(c) = 0$, $f''(c) = 0$ | परीक्षण विफल |
| $f'(x) > 0$ | वर्धमान |
| $f'(x) < 0$ | ह्रासमान |
| चिह्न परिवर्तन | निष्कर्ष |
|---|---|
| $+$ से $-$ | उच्चिष्ठ |
| $-$ से $+$ | निम्निष्ठ |
| कोई परिवर्तन नहीं | न उच्चिष्ठ न निम्निष्ठ |
अवकलज के अनुप्रयोग से हम गणित को वास्तविक जीवन से जोड़ पाते हैं। इस अध्याय में हमने वृद्धि दर, स्पर्श रेखा और अभिलंब, वर्धमान-ह्रासमान फलन, स्थानीय एवं निरपेक्ष उच्चिष्ठ-निम्निष्ठ, सन्निकटन और व्यावहारिक अधिकतम-न्यूनतम समस्याओं का अध्ययन किया। $f'(x)$ का चिह्न फलन के व्यवहार को निर्धारित करता है और स्थिर बिंदुओं पर $f''(x)$ उच्चिष्ठ/निम्निष्ठ का निर्णय करता है। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इंजीनियरिंग और अर्थशास्त्र जैसी शाखाओं में भी उपयोगी है।