सांतत्य (Continuity) और अवकलनीयता (Differentiability) कलन (Calculus) की आधारशिला है। अवकलज की संकल्पना सीमा की अवधारणा पर आधारित है। इस अध्याय में हम फलनों की सांतत्य की जाँच, बिंदु पर अवकलनीयता, श्रृंखला नियम द्वारा अवकलन, लघुगणकीय अवकलन, प्राचलिक फलनों का अवकलन, द्वितीय कोटि अवकलज, तथा रोल और माध्य मान प्रमेय का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आगे के सभी अध्यायों के लिए आधार प्रदान करता है।
एक फलन $f$ बिंदु $x = c$ पर सतत (continuous) होता है यदि: $$\lim_{x \to c} f(x) = f(c)$$
अर्थात तीन शर्तें पूरी होनी चाहिए: 1. $f(c)$ परिभाषित हो। 2. $\lim_{x \to c} f(x)$ विद्यमान हो (वाम पक्ष और दक्षिण पक्ष सीमाएँ बराबर हों)। 3. $\lim_{x \to c} f(x) = f(c)$।
यदि फलन अपने प्रांत के प्रत्येक बिंदु पर सतत है, तो वह संपूर्ण फलन सतत कहलाता है।
यदि $f$ और $g$ सतत हों, तो $f + g$, $f - g$, $fg$, $cf$ सतत होंगे तथा $f/g$ उन बिंदुओं पर सतत होगा जहाँ $g \neq 0$। सतत फलनों का संयोजन भी सतत होता है।
फलन $f$ का बिंदु $x$ पर अवकलज: $$f'(x) = \lim_{h \to 0} \frac{f(x + h) - f(x)}{h}$$
यदि यह सीमा विद्यमान हो, तो $f$ बिंदु $x$ पर अवकलनीय है।
यदि $f'(a^+) = f'(a^-)$, तो $f$ बिंदु $a$ पर अवकलनीय है।
यदि $f$ बिंदु $x$ पर अवकलनीय है, तो वह उस बिंदु पर सतत भी है। परंतु विलोम सत्य नहीं है — सतत फलन अवकलनीय नहीं भी हो सकता। उदाहरण: $f(x) = |x|$ बिंदु $x = 0$ पर सतत है परंतु अवकलनीय नहीं।
$$\frac{d}{dx}(x^n) = nx^{n-1}, \quad \frac{d}{dx}(\sin x) = \cos x, \quad \frac{d}{dx}(\cos x) = -\sin x$$ $$\frac{d}{dx}(\tan x) = \sec^2 x, \quad \frac{d}{dx}(\sec x) = \sec x \tan x$$ $$\frac{d}{dx}(e^x) = e^x, \quad \frac{d}{dx}(a^x) = a^x \ln a, \quad \frac{d}{dx}(\ln x) = \frac{1}{x}$$
$$\frac{d}{dx}(\sin^{-1}x) = \frac{1}{\sqrt{1-x^2}}, \quad \frac{d}{dx}(\cos^{-1}x) = -\frac{1}{\sqrt{1-x^2}}, \quad \frac{d}{dx}(\tan^{-1}x) = \frac{1}{1+x^2}$$
$$\frac{d}{dx}(u \pm v) = u' \pm v', \quad \frac{d}{dx}(uv) = u'v + uv'$$ $$\frac{d}{dx}\left(\frac{u}{v}\right) = \frac{u'v - uv'}{v^2}, \quad \frac{d}{dx}(k) = 0$$
यदि $y = f(u)$ और $u = g(x)$, तो: $$\frac{dy}{dx} = \frac{dy}{du} \cdot \frac{du}{dx}$$
यह नियम संयोजित फलनों के अवकलन के लिए आधारभूत है। उदाहरण: $\frac{d}{dx}(\sin x^2) = \cos x^2 \cdot 2x$।
$f(x) = [u(x)]^{v(x)}$ प्रकार के फलनों के लिए दोनों पक्षों का $\ln$ लेकर अवकलन किया जाता है: $$\ln y = v(x) \ln u(x)$$ $$\frac{1}{y}\frac{dy}{dx} = v'(x)\ln u(x) + v(x)\frac{u'(x)}{u(x)}$$
$y = x^x$: $\ln y = x\ln x \Rightarrow \frac{y'}{y} = \ln x + 1 \Rightarrow y' = x^x(\ln x + 1)$।
यदि $x = f(t)$ और $y = g(t)$, तो: $$\frac{dy}{dx} = \frac{dy/dt}{dx/dt}, \quad dx/dt \neq 0$$
यदि $y = f(x)$ है, तो $\frac{dy}{dx}$ का पुनः अवकलन करने पर $\frac{d^2y}{dx^2}$ प्राप्त होता है: $$\frac{d^2y}{dx^2} = \frac{d}{dx}\left(\frac{dy}{dx}\right)$$
प्राचलिक रूप में: $\frac{d^2y}{dx^2} = \frac{d}{dt}\left(\frac{dy}{dx}\right) \cdot \frac{dt}{dx}$।
यदि $f$ अंतराल $[a, b]$ पर सतत, $(a, b)$ पर अवकलनीय हो और $f(a) = f(b)$ हो, तो $(a, b)$ में कम से कम एक बिंदु $c$ विद्यमान है जिसके लिए $f'(c) = 0$।
यदि $f$ अंतराल $[a, b]$ पर सतत और $(a, b)$ पर अवकलनीय हो, तो $(a, b)$ में कम से कम एक बिंदु $c$ विद्यमान है जिसके लिए: $$f'(c) = \frac{f(b) - f(a)}{b - a}$$
सांतत्य और अवकलनीयता की अवधारणाओं को निम्न उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया गया है।
उदाहरण 1: फलन $f(x) = \begin{cases} 2x + 1, & x < 1 \ 3, & x = 1 \ x^2 + 2, & x > 1 \end{cases}$ की $x = 1$ पर सांतत्य की जाँच कीजिए।
हल: वाम पक्ष सीमा: $\lim_{x \to 1^-}(2x + 1) = 3$। दक्षिण पक्ष सीमा: $\lim_{x \to 1^+}(x^2 + 2) = 3$। चूँकि दोनों सीमाएँ बराबर हैं, $\lim_{x \to 1}f(x) = 3$। साथ ही $f(1) = 3$। अतः $\lim_{x \to 1}f(x) = f(1)$, इसलिए फलन $x = 1$ पर सतत है।
उदाहरण 2: $f(x) = \frac{x^2 - 4}{x - 2}$ के लिए सांतत्य की स्थिति बताइए।
हल: $x \neq 2$ के लिए $\frac{x^2 - 4}{x - 2} = x + 2$। परंतु $x = 2$ पर फलन $0/0$ रूप में परिभाषित नहीं है। यदि हम $f(2) = 4$ परिभाषित कर दें, तो फलन हटाने योग्य असांतत्य वाला सतत फलन बन जाता है। यह हटाने योग्य (removable) असांतत्य का उदाहरण है।
उदाहरण 3: सिद्ध कीजिए कि $f(x) = |x|$ बिंदु $x = 0$ पर सतत है परंतु अवकलनीय नहीं है।
हल: $\lim_{x \to 0}|x| = 0 = f(0)$, अतः फलन सतत है। अब दक्षिण पक्ष अवकलज: $\lim_{h \to 0^+}\frac{|0+h| - 0}{h} = \lim_{h \to 0^+}\frac{h}{h} = 1$। वाम पक्ष अवकलज: $\lim_{h \to 0^-}\frac{|h|}{h} = -1$। चूँकि दोनों अवकलज बराबर नहीं हैं, फलन $x = 0$ पर अवकलनीय नहीं है।
उदाहरण 4: $y = \sin(x^2 + 1)$ का $\frac{dy}{dx}$ ज्ञात कीजिए।
हल: श्रृंखला नियम से $\frac{dy}{dx} = \cos(x^2 + 1) \cdot \frac{d}{dx}(x^2 + 1) = \cos(x^2 + 1) \cdot 2x = 2x\cos(x^2 + 1)$।
उदाहरण 5: $y = x^{\sin x}$ का $\frac{dy}{dx}$ ज्ञात कीजिए।
हल: दोनों पक्षों का $\ln$ लेने पर $\ln y = \sin x \cdot \ln x$। अवकलन करने पर: $$\frac{1}{y}\frac{dy}{dx} = \cos x \cdot \ln x + \frac{\sin x}{x}$$ $$\frac{dy}{dx} = x^{\sin x}\left(\cos x \ln x + \frac{\sin x}{x}\right)$$ यह लघुगणकीय अवकलन का विशिष्ट उदाहरण है, जो $[f(x)]^{g(x)}$ रूप के फलनों के लिए अपरिहार्य है।
उदाहरण 6: यदि $x = a\cos t$, $y = a\sin t$ है, तो $\frac{dy}{dx}$ ज्ञात कीजिए।
हल: $\frac{dx}{dt} = -a\sin t$ और $\frac{dy}{dt} = a\cos t$। अतः: $$\frac{dy}{dx} = \frac{dy/dt}{dx/dt} = \frac{a\cos t}{-a\sin t} = -\cot t$$
उदाहरण 7: $f(x) = x^2 - 4x + 3$ पर $[1, 3]$ के लिए रोल प्रमेय सत्यापित कीजिए।
हल: $f$ बहुपद है, अतः $[1, 3]$ पर सतत और $(1, 3)$ पर अवकलनीय है। $f(1) = 1 - 4 + 3 = 0$ और $f(3) = 9 - 12 + 3 = 0$, अतः $f(1) = f(3)$। $f'(x) = 2x - 4 = 0 \Rightarrow x = 2$, जो $(1, 3)$ में स्थित है। अतः रोल प्रमेय सत्यापित हो गया।
सांतत्य की जाँच में खंडशः परिभाषित फलनों (piecewise functions) पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए। ऐसे फलनों में सीमा बिंदु पर बाएँ और दाएँ दोनों पक्षों की सीमाओं की गणना अलग-अलग सूत्रों से करनी पड़ती है। यदि दोनों सीमाएँ समान हों और फलन का मान भी वही हो, तभी फलन उस बिंदु पर सतत होता है। इसके अतिरिक्त, महत्तम पूर्णांक फलन $[x]$ प्रत्येक पूर्णांक बिंदु पर असतत होता है, जबकि मापांक फलन $|x|$ हर बिंदु पर सतत है।
अवकलनीयता की परिभाषा में बाएँ और दाएँ अवकलजों की समानता की जाँच की जाती है। यह जाँच विशेष रूप से मापांक फलन, महत्तम पूर्णांक फलन और खंडशः फलनों में आवश्यक है। यदि फलन किसी बिंदु पर अवकलनीय है, तो उस बिंदु पर उसके ग्राफ की स्पर्श रेखा अद्वितीय होती है। जहाँ ग्राफ में नुकीला मोड़ (corner) होता है, वहाँ फलन अवकलनीय नहीं होता, भले ही वह सतत हो।
लघुगणकीय अवकलन केवल $[f(x)]^{g(x)}$ रूप के फलनों तक सीमित नहीं है। यह विधि बहुपदों और परिमेय फलनों के लंबे गुणनफलों के अवकलन में भी उपयोगी है, क्योंकि $\ln$ लेने से गुणन योग में और भाग अंतर में बदल जाते हैं। इससे अवकलन सरल हो जाता है। परंतु $\ln$ लेते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि फलन के मान धनात्मक हों; यदि ऋणात्मक मान संभव हों, तो $\ln|f(x)|$ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
प्राचलिक फलनों के द्वितीय कोटि अवकलज में विद्यार्थी अक्सर $\frac{d^2y}{dx^2} = \frac{d}{dt}\left(\frac{dy}{dx}\right)$ लिखकर $dt/dx$ से गुणा करना भूल जाते हैं। सही प्रक्रिया यह है कि पहले $\frac{dy}{dx}$ को $t$ के फलन के रूप में ज्ञात करें, फिर उसका $t$ के सापेक्ष अवकलन कर उसे $\frac{dt}{dx}$ से गुणा करें। यहीं श्रृंखला नियम का पूर्ण उपयोग होता है। इन सूक्ष्म बिंदुओं का अभ्यास परीक्षा में पूर्ण अंक दिलाने में सहायक होता है।
| फलन | अवकलज |
|---|---|
| $x^n$ | $nx^{n-1}$ |
| $\sin x$ | $\cos x$ |
| $\cos x$ | $-\sin x$ |
| $\tan x$ | $\sec^2 x$ |
| $e^x$ | $e^x$ |
| $\ln x$ | $1/x$ |
| $a^x$ | $a^x \ln a$ |
| फलन | अवकलज |
|---|---|
| $\sin^{-1}x$ | $1/\sqrt{1-x^2}$ |
| $\cos^{-1}x$ | $-1/\sqrt{1-x^2}$ |
| $\tan^{-1}x$ | $1/(1+x^2)$ |
| $\cot^{-1}x$ | $-1/(1+x^2)$ |
| फलन | x = 0 पर सतत | x = 0 पर अवकलनीय |
|---|---|---|
| $ | x | $ |
| $x^2$ | हाँ | हाँ |
| $\sqrt{x}$ | हाँ (दाएँ से) | नहीं |
| $\frac{1}{x}$ | नहीं | नहीं |
सांतत्य तथा अवकलनीयता कलन का केंद्रीय अध्याय है। इसमें हमने सांतत्य की शर्तें, सीमा की अवधारणा, अवकलज की परिभाषा, मानक अवकलन सूत्र, श्रृंखला नियम, लघुगणकीय अवकलन, प्राचलिक अवकलन, द्वितीय कोटि अवकलज तथा रोल और माध्य मान प्रमेय का अध्ययन किया। "अवकलनीय फलन सतत होता है परंतु सतत फलन आवश्यक नहीं कि अवकलनीय हो" — यह सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है। यह अध्याय अवकलज के अनुप्रयोग, समाकलन और अवकल समीकरण जैसे अध्यायों की नींव रखता है।