सारणिक (Determinant) वर्ग आव्यूह से संबंधित एक अदिश राशि है। प्रत्येक वर्ग आव्यूह के लिए एक अदिश संख्या निर्धारित की जा सकती है, जिसे उस आव्यूह का सारणिक कहते हैं। सारणिक का अध्ययन रैखिक समीकरणों के निकाय को हल करने, आव्यूह का व्युत्क्रम ज्ञात करने, तथा कुछ क्षेत्रफल और आयतन की गणना करने में किया जाता है। इस अध्याय में हम सारणिकों की संकल्पना, उनके गुणधर्म, क्षेत्रफल की गणना, सारणिकों का अनुप्रयोग (क्रेमर नियम) तथा आव्यूह का व्युत्क्रम ज्ञात करना सीखेंगे।
वर्ग आव्यूह $A = [a_{ij}]$ के लिए सारणिक को $\det(A)$ या $|A|$ से निरूपित करते हैं।
$$\begin{vmatrix} a_{11} & a_{12} \ a_{21} & a_{22} \end{vmatrix} = a_{11}a_{22} - a_{12}a_{21}$$
$$\begin{vmatrix} a_{11} & a_{12} & a_{13} \ a_{21} & a_{22} & a_{23} \ a_{31} & a_{32} & a_{33} \end{vmatrix} = a_{11}(a_{22}a_{33} - a_{23}a_{32}) - a_{12}(a_{21}a_{33} - a_{23}a_{31}) + a_{13}(a_{21}a_{32} - a_{22}a_{31})$$
यह विधि पहली पंक्ति के अनुदिश प्रसार (expansion along first row) कहलाती है।
किसी भी पंक्ति (या स्तंभ) के अनुदिश प्रसार द्वारा सारणिक का मान समान प्राप्त होता है: $$\Delta = \sum_{j=1}^{n} a_{ij} C_{ij}$$
यदि किसी पंक्ति के अवयवों को किसी अन्य पंक्ति के सहखंडों से गुणा करके जोड़ा जाए, तो योग शून्य होता है: $$\sum_{j=1}^{n} a_{ij} C_{kj} = 0, \quad i \neq k$$
सारणिकों के प्रमुख गुणधर्म निम्नलिखित हैं: 1. किसी पंक्ति और स्तंभ को परस्पर बदलने पर सारणिक का मान नहीं बदलता, अर्थात $|A'| = |A|$। 2. किन्हीं दो पंक्तियों (या स्तंभों) को परस्पर बदलने पर सारणिक का चिह्न बदल जाता है। 3. यदि किसी पंक्ति (या स्तंभ) के सभी अवयव शून्य हों, तो सारणिक शून्य होता है। 4. यदि किसी पंक्ति के अवयव किसी अदिश $k$ से गुणित हों, तो सारणिक भी $k$ से गुणित होता है। 5. किसी पंक्ति के अवयवों को दूसरी पंक्ति के संगत अवयवों में जोड़ने या घटाने से सारणिक का मान अपरिवर्तित रहता है। 6. यदि दो पंक्तियाँ (या स्तंभ) समान हों, तो सारणिक शून्य होता है। 7. यदि किसी पंक्ति के अवयवों में एक समान गुणनखंड हो, तो उसे सारणिक से बाहर निकाला जा सकता है। 8. आव्यूह गुणन का नियम: $|AB| = |A| \cdot |B|$
जिन तीन बिंदुओं के निर्देशांक $(x_1, y_1), (x_2, y_2), (x_3, y_3)$ हैं, उनसे बने त्रिभुज का क्षेत्रफल: $$\Delta = \frac{1}{2}\begin{vmatrix} x_1 & y_1 & 1 \ x_2 & y_2 & 1 \ x_3 & y_3 & 1 \end{vmatrix}$$
यदि सारणिक का मान शून्य है, तो तीनों बिंदु संरेख (collinear) होते हैं। क्षेत्रफल हमेशा धनात्मक लिया जाता है।
आव्यूह $A$ का सहखंडज $\text{adj}(A)$ सहखंडों के आव्यूह का स्थानांतरण होता है: $$\text{adj}(A) = [C_{ij}]'$$
यदि $|A| \neq 0$ है, तो $A$ व्युत्क्रमणीय आव्यूह है और: $$A^{-1} = \frac{1}{|A|}\text{adj}(A)$$
$a_1x + b_1y + c_1z = d_1$, $a_2x + b_2y + c_2z = d_2$, $a_3x + b_3y + c_3z = d_3$ को आव्यूह रूप में: $$AX = B, \quad \text{जहाँ } A = \begin{bmatrix} a_1 & b_1 & c_1 \ a_2 & b_2 & c_2 \ a_3 & b_3 & c_3 \end{bmatrix}, X = \begin{bmatrix} x \ y \ z \end{bmatrix}, B = \begin{bmatrix} d_1 \ d_2 \ d_3 \end{bmatrix}$$
$x = \frac{D_1}{D}, \quad y = \frac{D_2}{D}, \quad z = \frac{D_3}{D}$ जहाँ $D = |A|$, तथा $D_1, D_2, D_3$ क्रमशः $B$ स्तंभ को प्रतिस्थापित करने से प्राप्त सारणिक हैं।
उदाहरण 1: $\begin{vmatrix} 2 & 3 \ 4 & 5 \end{vmatrix} = (2)(5) - (3)(4) = 10 - 12 = -2$।
उदाहरण 2: यदि $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ है, तो $|A| = 4 - 6 = -2$ और $\text{adj}(A) = \begin{bmatrix} 4 & -2 \ -3 & 1 \end{bmatrix}$। अतः $A^{-1} = \frac{1}{-2}\begin{bmatrix} 4 & -2 \ -3 & 1 \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} -2 & 1 \ 3/2 & -1/2 \end{bmatrix}$।
सारणिकों की गणना और अनुप्रयोग को निम्न उदाहरणों द्वारा समझिए।
उदाहरण 1: $\begin{vmatrix} 1 & 2 & 3 \ 4 & 5 & 6 \ 7 & 8 & 9 \end{vmatrix}$ का मान ज्ञात कीजिए।
हल: इस सारणिक में $R_3 - R_2$ और $R_2 - R_1$ करने पर $R_3$ में प्रत्येक अवयव समान आ जाता है, अतः गुणधर्म से मान शून्य होगा। वैकल्पिक रूप से प्रसार करने पर: $1(45 - 48) - 2(36 - 42) + 3(32 - 35) = -3 + 12 - 9 = 0$। अतः सारणिक का मान शून्य है।
उदाहरण 2: बिंदुओं $(1, 2), (3, 4)$ और $(5, 6)$ की संरेखता की जाँच कीजिए।
हल: क्षेत्रफल सारणिक $\frac{1}{2}\begin{vmatrix} 1 & 2 & 1 \ 3 & 4 & 1 \ 5 & 6 & 1 \end{vmatrix}$ की गणना करते हैं: $1(4-6) - 2(3-5) + 1(18-20) = -2 + 4 - 2 = 0$। चूँकि सारणिक का मान शून्य है, अतः क्षेत्रफल शून्य है और तीनों बिंदु संरेख हैं।
उदाहरण 3: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ का व्युत्क्रम ज्ञात कीजिए।
हल: $|A| = 1(4) - 2(3) = 4 - 6 = -2 \neq 0$। सहखंड: $C_{11} = 4, C_{12} = -3, C_{21} = -2, C_{22} = 1$। सहखंड आव्यूह का स्थानांतरण करने पर $\text{adj}(A) = \begin{bmatrix} 4 & -2 \ -3 & 1 \end{bmatrix}$। अतः: $$A^{-1} = \frac{1}{|A|}\text{adj}(A) = \frac{1}{-2}\begin{bmatrix} 4 & -2 \ -3 & 1 \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} -2 & 1 \ \frac{3}{2} & -\frac{1}{2} \end{bmatrix}$$
उदाहरण 4: समीकरणों $x + 2y = 5$ और $2x + 4y = 7$ की संगतता की जाँच कीजिए।
हल: $D = \begin{vmatrix} 1 & 2 \ 2 & 4 \end{vmatrix} = 4 - 4 = 0$। चूँकि $|A| = 0$ और दोनों समीकरणों के गुणांक अनुपात $\frac{1}{2} = \frac{2}{4} \neq \frac{5}{7}$, अतः निकाय असंगत है, कोई हल नहीं है। यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि दोनों समीकरण समांतर रेखाओं को निरूपित करते हैं।
उदाहरण 5: समीकरणों $2x + y = 5$ और $x - y = 1$ को क्रेमर नियम से हल कीजिए।
हल: $D = \begin{vmatrix} 2 & 1 \ 1 & -1 \end{vmatrix} = -2 - 1 = -3$। $D_1 = \begin{vmatrix} 5 & 1 \ 1 & -1 \end{vmatrix} = -5 - 1 = -6$। $D_2 = \begin{vmatrix} 2 & 5 \ 1 & 1 \end{vmatrix} = 2 - 5 = -3$। अतः $x = \frac{D_1}{D} = 2$ और $y = \frac{D_2}{D} = 1$।
उदाहरण 6: सिद्ध कीजिए कि $\begin{vmatrix} a & b \ -b & a \end{vmatrix} = a^2 + b^2$।
हल: सारणिक का मान $a(a) - b(-b) = a^2 + b^2$। यह परिणाम सम्मिश्र संख्याओं के मापांक की गणना से जुड़ा है और इसे कंठस्थ रखना उपयोगी है।
| क्रम | गुण |
|---|---|
| 1 | स्थानांतरण से मान अपरिवर्तित |
| 2 | दो पंक्तियाँ बदलने पर चिह्न बदलता है |
| 3 | शून्य पंक्ति होने पर मान शून्य |
| 4 | समान पंक्तियाँ होने पर मान शून्य |
| 5 | पंक्ति का अदिश गुणन सारणिक में भी गुणित होता है |
| 6 | $R_i \rightarrow R_i + kR_j$ से मान अपरिवर्तित |
| 7 | $ |
| स्थिति | शर्त | परिणाम |
|---|---|---|
| $ | A | \neq 0$ |
| $ | A | = 0$, adj(A)B ≠ 0 |
| $ | A | = 0$, adj(A)B = 0 |
| सूत्र | मान |
|---|---|
| $A^{-1}$ | $\frac{1}{ |
| $ | A^{-1} |
| $ | \text{adj}(A) |
| $A \cdot \text{adj}(A)$ | $ |
सारणिक वर्ग आव्यूह से जुड़ा एक अदिश मान है जो रैखिक बीजगणित की रीढ़ है। इस अध्याय में हमने सारणिक की परिभाषा, प्रसार विधि, उपसारणिक और सहखंड, सारणिकों के गुणधर्म, क्षेत्रफल की गणना, सहखंडज, व्युत्क्रम आव्यूह तथा रैखिक समीकरणों के निकाय के हल की विधियों का अध्ययन किया। सारणिकों के गुणधर्म प्रश्नों को सरल बनाने में सबसे शक्तिशाली औजार हैं। क्रेमर नियम और व्युत्क्रम विधि रैखिक समीकरणों को हल करने के प्रमुख तरीके हैं। $|A| \neq 0$ होने पर ही अद्वितीय हल संभव है, यह सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है।