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1. परिचय

आव्यूह (Matrix) आधुनिक गणित की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। संख्याओं (या फलनों) को आयताकार क्रम में व्यवस्थित करने से आव्यूह का निर्माण होता है। कक्षा 12 में हम आव्यूहों के विभिन्न प्रकार, उनकी संक्रियाएँ (योग, व्यवकलन, गुणन), आव्यूह का स्थानांतरण (transpose), सममित एवं विषम सममित आव्यूह, आव्यूहों का क्रम विनिमेय न होना तथा विशेष आव्यूहों का अध्ययन करेंगे। आव्यूहों का उपयोग सारणिक, रैखिक समीकरणों के निकाय, तथा अवकल समीकरणों जैसे विषयों में होता है।

2. आव्यूह की परिभाषा एवं अवयव

$m$ पंक्तियों और $n$ स्तंभों में व्यवस्थित संख्याओं $a_{ij}$ के आयताकार सारणी को $m \times n$ कोटि का आव्यूह कहते हैं।

$$A = [a_{ij}]{m \times n} = \begin{bmatrix} a$$} & a_{12} & \dots & a_{1n} \ a_{21} & a_{22} & \dots & a_{2n} \ \vdots & \vdots & \ddots & \vdots \ a_{m1} & a_{m2} & \dots & a_{mn} \end{bmatrix

यहाँ $a_{ij}$ आव्यूह का वह अवयव है जो $i$-वीं पंक्ति और $j$-वें स्तंभ में स्थित है। आव्यूह की कोटि (order) $m \times n$ होती है।

आव्यूहों की समानता

दो आव्यूह $A$ और $B$ समान होते हैं यदि उनकी कोटियाँ समान हों और प्रत्येक संगत अवयव बराबर हों, अर्थात $a_{ij} = b_{ij}$ सभी $i, j$ के लिए।

3. आव्यूहों के प्रकार

पंक्ति आव्यूह (Row Matrix)

केवल एक पंक्ति वाला आव्यूह, कोटि $1 \times n$। जैसे $[1 \ 2 \ 3]_{1 \times 3}$।

स्तंभ आव्यूह (Column Matrix)

केवल एक स्तंभ वाला आव्यूह, कोटि $m \times 1$।

शून्य आव्यूह (Zero/Null Matrix)

सभी अवयव शून्य हों, जैसे $\begin{bmatrix} 0 & 0 \ 0 & 0 \end{bmatrix}$।

वर्ग आव्यूह (Square Matrix)

जिसमें पंक्तियों की संख्या स्तंभों की संख्या के बराबर हो, कोटि $n \times n$। विकर्ण पर स्थित अवयव $a_{11}, a_{22}, \dots, a_{nn}$ को विकर्ण अवयव कहते हैं।

विकर्ण आव्यूह (Diagonal Matrix)

वर्ग आव्यूह जिसमें विकर्ण के अतिरिक्त सभी अवयव शून्य हों।

अदिश आव्यूह (Scalar Matrix)

विकर्ण आव्यूह जिसमें सभी विकर्ण अवयव समान (अशून्य) हों, जैसे $\begin{bmatrix} 3 & 0 \ 0 & 3 \end{bmatrix}$।

तत्समक आव्यूह (Identity Matrix)

विकर्ण आव्यूह जिसमें सभी विकर्ण अवयव 1 हों। इसे $I_n$ से निरूपित करते हैं।

अधिकांश विकर्णीय आव्यूह (Upper/Lower Triangular)

4. आव्यूहों की संक्रियाएँ

आव्यूहों का योग

दो आव्यूहों $A$ और $B$ का योग केवल तभी संभव है जब उनकी कोटि समान हो। $$(A + B){ij} = a$$ योग की संक्रिया क्रम-विनिमेय और साहचर्य होती है: $$A + B = B + A, \quad (A + B) + C = A + (B + C)$$} + b_{ij

अदिश गुणन (Scalar Multiplication)

$$kA = [k \cdot a_{ij}]$$ यदि $A$ कोई आव्यूह है और $k$ अदिश, तो $kA$ में प्रत्येक अवयव $k$ से गुणा होता है।

आव्यूहों का गुणन

दो आव्यूहों $A_{m \times n}$ और $B_{n \times p}$ का गुणन संभव है यदि $A$ के स्तंभों की संख्या $B$ की पंक्तियों की संख्या के बराबर हो। $$(AB){ij} = \sum$$ }^{n} a_{ik} b_{kjध्यान दें: आव्यूह गुणन क्रम-विनिमेय नहीं होता, अर्थात $AB \neq BA$ सामान्यतः। परंतु यह साहचर्य और वितरण नियम का पालन करता है।

गुणन के गुणधर्म

5. आव्यूह का स्थानांतरण (Transpose)

$m \times n$ कोटि के आव्यूह $A$ का स्थानांतरण $A'$ या $A^T$ वह $n \times m$ आव्यूह है जो $A$ की पंक्तियों और स्तंभों को आपस में बदलने से प्राप्त होता है।

स्थानांतरण के गुणधर्म

  1. $(A')' = A$
  2. $(A + B)' = A' + B'$
  3. $(kA)' = kA'$
  4. $(AB)' = B'A'$ — क्रम बदल जाता है

6. सममित एवं विषम सममित आव्यूह

सममित आव्यूह (Symmetric Matrix)

यदि $A' = A$, तो $A$ सममित आव्यूह कहलाता है। इसमें $a_{ij} = a_{ji}$।

विषम सममित आव्यूह (Skew-symmetric Matrix)

यदि $A' = -A$, तो $A$ विषम सममित आव्यूह कहलाता है। इसमें $a_{ij} = -a_{ji}$ और सभी विकर्ण अवयव शून्य होते हैं।

महत्वपूर्ण प्रमेय

7. प्राथमिक संक्रियाएँ (Elementary Operations)

प्राथमिक संक्रियाओं का प्रयोग करके आव्यूह को परिवर्तित किया जा सकता है: - $R_i \leftrightarrow R_j$ (पंक्तियों का परस्पर परिवर्तन) - $R_i \rightarrow kR_i$ (पंक्ति को अदिश से गुणा) - $R_i \rightarrow R_i + kR_j$ (किसी पंक्ति में दूसरी पंक्ति का अदिश गुणज जोड़ना)

इसी प्रकार स्तंभ संक्रियाएँ $C_i$ भी होती हैं। इनका उपयोग व्युत्क्रम ज्ञात करने में होगा।

8. उदाहरण सहित अभ्यास

उदाहरण 1: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$, तो $2A = \begin{bmatrix} 2 & 4 \ 6 & 8 \end{bmatrix}$।

उदाहरण 2: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 & 3 \end{bmatrix}$ और $B = \begin{bmatrix} 4 \ 5 \ 6 \end{bmatrix}$, तो $AB = [4 + 10 + 18] = [32]$ (कोटि $1 \times 1$)।

उदाहरण 3: यदि $A = \begin{bmatrix} 0 & 1 \ -1 & 0 \end{bmatrix}$, तो $A' = \begin{bmatrix} 0 & -1 \ 1 & 0 \end{bmatrix} = -A$। अतः $A$ विषम सममित आव्यूह है।

9. हल किए गए उदाहरण (Worked Examples)

आव्यूहों की संक्रियाओं की स्पष्ट समझ के लिए निम्न उदाहरण दिए गए हैं।

उदाहरण 1: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ और $B = \begin{bmatrix} 4 & 5 \ 6 & 7 \end{bmatrix}$ है, तो $A + B$ और $2A$ ज्ञात कीजिए।

हल: दोनों आव्यूहों की कोटि $2 \times 2$ समान है, अतः योग संभव है: $$A + B = \begin{bmatrix} 1+4 & 2+5 \ 3+6 & 4+7 \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} 5 & 7 \ 9 & 11 \end{bmatrix}$$ अदिश गुणन से $2A = \begin{bmatrix} 2 & 4 \ 6 & 8 \end{bmatrix}$।

उदाहरण 2: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ और $B = \begin{bmatrix} 2 & 0 \ 1 & 2 \end{bmatrix}$ है, तो $AB$ और $BA$ ज्ञात कीजिए।

हल: $AB = \begin{bmatrix} 1(2)+2(1) & 1(0)+2(2) \ 3(2)+4(1) & 3(0)+4(2) \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} 4 & 4 \ 10 & 8 \end{bmatrix}$ $BA = \begin{bmatrix} 2(1)+0(3) & 2(2)+0(4) \ 1(1)+2(3) & 1(2)+2(4) \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} 2 & 4 \ 7 & 10 \end{bmatrix}$ यहाँ $AB \neq BA$, जो यह सिद्ध करता है कि आव्यूह गुणन क्रम-विनिमेय नहीं होता।

उदाहरण 3: $A = \begin{bmatrix} 0 & 2 \ -2 & 0 \end{bmatrix}$ के लिए सिद्ध कीजिए कि $A$ विषम सममित है।

हल: $A' = \begin{bmatrix} 0 & -2 \ 2 & 0 \end{bmatrix} = -\begin{bmatrix} 0 & 2 \ -2 & 0 \end{bmatrix} = -A$। चूँकि $A' = -A$, अतः $A$ विषम सममित आव्यूह है। ध्यान दीजिए कि इसके विकर्ण अवयव शून्य हैं।

उदाहरण 4: एक आव्यूह $P$ की कोटि $2 \times 3$ है। किस कोटि के आव्यूह $Q$ से $PQ$ परिभाषित होगा?

हल: $P$ की कोटि $2 \times 3$ है। $PQ$ परिभाषित होने के लिए $Q$ की पंक्तियों की संख्या $P$ के स्तंभों की संख्या के बराबर होनी चाहिए, अर्थात $Q$ की कोटि $3 \times n$ होगी, जहाँ $n$ कोई धनात्मक पूर्णांक है।

उदाहरण 5: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ है, तो $(A')'$ ज्ञात कीजिए।

हल: $A' = \begin{bmatrix} 1 & 3 \ 2 & 4 \end{bmatrix}$। पुनः स्थानांतरण करने पर $(A')' = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix} = A$। यह गुणधर्म $(A')' = A$ की पुष्टि करता है।

उदाहरण 6: प्रारंभिक संक्रियाओं से दिखाइए कि तत्समक आव्यूह $I_2 = \begin{bmatrix} 1 & 0 \ 0 & 1 \end{bmatrix}$ किसी भी $2 \times 2$ आव्यूह $A$ के लिए $AI_2 = A$ संतुष्ट करता है।

हल: $AI_2$ में $I_2$ के स्तंभ $(1, 0)$ और $(0, 1)$ हैं। $A$ के पहले स्तंभ से $1$ का गुणन और $0$ का गुणन $A$ के स्तंभों को ही पुनः लौटाते हैं, अतः $AI_2 = A$ सत्य है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: आव्यूहों के प्रकार

प्रकार परिभाषा उदाहरण
पंक्ति आव्यूह एक पंक्ति $[1 \ 2]$
स्तंभ आव्यूह एक स्तंभ $\begin{bmatrix} 1 \ 2 \end{bmatrix}$
वर्ग आव्यूह पंक्ति = स्तंभ $\begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$
विकर्ण आव्यूह विकर्ण के अतिरिक्त शून्य $\begin{bmatrix} 2 & 0 \ 0 & 3 \end{bmatrix}$
अदिश आव्यूह विकर्ण अवयव समान $\begin{bmatrix} 5 & 0 \ 0 & 5 \end{bmatrix}$
तत्समक आव्यूह विकर्ण अवयव 1 $\begin{bmatrix} 1 & 0 \ 0 & 1 \end{bmatrix}$
शून्य आव्यूह सभी अवयव शून्य $\begin{bmatrix} 0 & 0 \ 0 & 0 \end{bmatrix}$

तालिका 2: स्थानांतरण के गुण

क्रम गुणधर्म
1 $(A')' = A$
2 $(A + B)' = A' + B'$
3 $(kA)' = kA'$
4 $(AB)' = B'A'$

तालिका 3: गुणन की शर्त

स्थिति शर्त परिणामी कोटि
$AB$ $A$ की कोटि $m \times n$, $B$ की $n \times p$ $m \times p$
$BA$ $B$ की $p \times n$? सामान्यतः परिभाषित नहीं या भिन्न

माइंड मैप

graph TD A["आव्यूह"] --> B["प्रकार"] B --> C["वर्ग आव्यूह"] B --> D["विकर्ण आव्यूह"] B --> E["तत्समक आव्यूह I"] B --> F["शून्य आव्यूह"] A --> G["संक्रियाएँ"] G --> H["योग (A + B)"] G --> I["अदिश गुणन (kA)"] G --> J["गुणन (AB) ≠ (BA)"] A --> K["स्थानांतरण A'"] K --> L["(AB)' = B'A'"] A --> M["सममित A' = A"] A --> N["विषम सममित A' = -A"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: आव्यूह की संरचना

m × n आव्यूह की संरचना m पंक्तियाँ, n स्तंभ a₁₁ a₁₂ a₁₃ a₁ₙ a₂₁ a₂₂ a₂₃ a₂ₙ aₘ₁ aₘ₂ aₘ₃ aₘₙ aᵢⱼ: i-वीं पंक्ति, j-वें स्तंभ का अवयव स्वर्ण नियम: aᵢⱼ में i पंक्ति की संख्या और j स्तंभ की संख्या दर्शाता है।

आरेख 2: आव्यूह गुणन की शर्त

आव्यूह गुणन की शर्त A कोटि m × n × B कोटि n × p A के स्तंभ = B की पंक्तियाँ (n = n) AB की कोटि m × p (अंदर की कोटियाँ समान होनी चाहिए) सामान्यतः AB ≠ BA गुणन क्रम-विनिमेय नहीं होता Golden Rule: गुणन संभव होने के लिए भीतरी कोटियाँ बराबर होनी चाहिए।

सामान्य गलतियाँ

  1. अलग-अलग कोटि के आव्यूहों का योग करना - योग केवल समान कोटि वाले आव्यूहों का ही संभव है।
  2. $AB = BA$ मान लेना - आव्यूह गुणन क्रम-विनिमेय नहीं होता।
  3. $(AB)' = A'B'$ लिखना - सही सूत्र $(AB)' = B'A'$ है, क्रम बदलता है।
  4. $AB = 0$ से $A = 0$ या $B = 0$ निकालना - शून्य आव्यूह नहीं होते हुए भी $AB = 0$ हो सकता है।
  5. विषम सममित आव्यूह के विकर्ण अवयव शून्य होते हैं - यह तथ्य अक्सर भुला दिया जाता है।
  6. सभी वर्ग आव्यूह को विकर्ण या तत्समक समझना - वर्ग आव्यूह में पंक्ति और स्तंभ समान होते हैं, बाकी अवयव कुछ भी हो सकते हैं।
  7. गुणन में $a_{ik} b_{kj}$ के योग में i, j की सीमा भ्रमित करना - योग $k = 1$ से $n$ तक होता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. सममित/विषम सममित सिद्ध करने के लिए सदैव $A'$ ज्ञात करके $A$ से तुलना करें।
  2. $(AB)' = B'A'$ का उपयोग करते समय क्रम बदलना कभी न भूलें।
  3. अवयव $a_{ij}$ वाले प्रश्नों में सूत्र में $i, j$ रखकर मान निकालें।
  4. गुणन के प्रश्नों में पहले कोटि की जाँच करें, फिर गुणन करें।
  5. "$A$ सममित और विषम सममित दोनों है" का अर्थ $A = 0$ होता है।
  6. तत्समक आव्यूह $I$ के लिए $AI = IA = A$ हमेशा सत्य है, इसे गुणन प्रश्नों में प्रयोग करें।

निष्कर्ष

आव्यूह गणित की वह शाखा है जिसमें संख्याओं को आयताकार रूप में व्यवस्थित किया जाता है। इस अध्याय में हमने आव्यूह की परिभाषा, विभिन्न प्रकार (पंक्ति, स्तंभ, वर्ग, विकर्ण, अदिश, तत्समक, शून्य, त्रिभुजाकार), संक्रियाएँ (योग, अदिश गुणन, आव्यूह गुणन), स्थानांतरण, सममित एवं विषम सममित आव्यूह तथा प्राथमिक संक्रियाओं का अध्ययन किया। आव्यूह गुणन की शर्त और क्रम-विनिमेय न होना सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं। आव्यूहों का उपयोग अगले अध्याय (सारणिक) तथा रैखिक समीकरणों के हल में किया जाता है, अतः इस अध्याय में दृढ़ पकड़ बनाना अत्यंत आवश्यक है।