आव्यूह (Matrix) आधुनिक गणित की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। संख्याओं (या फलनों) को आयताकार क्रम में व्यवस्थित करने से आव्यूह का निर्माण होता है। कक्षा 12 में हम आव्यूहों के विभिन्न प्रकार, उनकी संक्रियाएँ (योग, व्यवकलन, गुणन), आव्यूह का स्थानांतरण (transpose), सममित एवं विषम सममित आव्यूह, आव्यूहों का क्रम विनिमेय न होना तथा विशेष आव्यूहों का अध्ययन करेंगे। आव्यूहों का उपयोग सारणिक, रैखिक समीकरणों के निकाय, तथा अवकल समीकरणों जैसे विषयों में होता है।
$m$ पंक्तियों और $n$ स्तंभों में व्यवस्थित संख्याओं $a_{ij}$ के आयताकार सारणी को $m \times n$ कोटि का आव्यूह कहते हैं।
$$A = [a_{ij}]{m \times n} = \begin{bmatrix} a$$} & a_{12} & \dots & a_{1n} \ a_{21} & a_{22} & \dots & a_{2n} \ \vdots & \vdots & \ddots & \vdots \ a_{m1} & a_{m2} & \dots & a_{mn} \end{bmatrix
यहाँ $a_{ij}$ आव्यूह का वह अवयव है जो $i$-वीं पंक्ति और $j$-वें स्तंभ में स्थित है। आव्यूह की कोटि (order) $m \times n$ होती है।
दो आव्यूह $A$ और $B$ समान होते हैं यदि उनकी कोटियाँ समान हों और प्रत्येक संगत अवयव बराबर हों, अर्थात $a_{ij} = b_{ij}$ सभी $i, j$ के लिए।
केवल एक पंक्ति वाला आव्यूह, कोटि $1 \times n$। जैसे $[1 \ 2 \ 3]_{1 \times 3}$।
केवल एक स्तंभ वाला आव्यूह, कोटि $m \times 1$।
सभी अवयव शून्य हों, जैसे $\begin{bmatrix} 0 & 0 \ 0 & 0 \end{bmatrix}$।
जिसमें पंक्तियों की संख्या स्तंभों की संख्या के बराबर हो, कोटि $n \times n$। विकर्ण पर स्थित अवयव $a_{11}, a_{22}, \dots, a_{nn}$ को विकर्ण अवयव कहते हैं।
वर्ग आव्यूह जिसमें विकर्ण के अतिरिक्त सभी अवयव शून्य हों।
विकर्ण आव्यूह जिसमें सभी विकर्ण अवयव समान (अशून्य) हों, जैसे $\begin{bmatrix} 3 & 0 \ 0 & 3 \end{bmatrix}$।
विकर्ण आव्यूह जिसमें सभी विकर्ण अवयव 1 हों। इसे $I_n$ से निरूपित करते हैं।
दो आव्यूहों $A$ और $B$ का योग केवल तभी संभव है जब उनकी कोटि समान हो। $$(A + B){ij} = a$$ योग की संक्रिया क्रम-विनिमेय और साहचर्य होती है: $$A + B = B + A, \quad (A + B) + C = A + (B + C)$$} + b_{ij
$$kA = [k \cdot a_{ij}]$$ यदि $A$ कोई आव्यूह है और $k$ अदिश, तो $kA$ में प्रत्येक अवयव $k$ से गुणा होता है।
दो आव्यूहों $A_{m \times n}$ और $B_{n \times p}$ का गुणन संभव है यदि $A$ के स्तंभों की संख्या $B$ की पंक्तियों की संख्या के बराबर हो। $$(AB){ij} = \sum$$ }^{n} a_{ik} b_{kjध्यान दें: आव्यूह गुणन क्रम-विनिमेय नहीं होता, अर्थात $AB \neq BA$ सामान्यतः। परंतु यह साहचर्य और वितरण नियम का पालन करता है।
$m \times n$ कोटि के आव्यूह $A$ का स्थानांतरण $A'$ या $A^T$ वह $n \times m$ आव्यूह है जो $A$ की पंक्तियों और स्तंभों को आपस में बदलने से प्राप्त होता है।
यदि $A' = A$, तो $A$ सममित आव्यूह कहलाता है। इसमें $a_{ij} = a_{ji}$।
यदि $A' = -A$, तो $A$ विषम सममित आव्यूह कहलाता है। इसमें $a_{ij} = -a_{ji}$ और सभी विकर्ण अवयव शून्य होते हैं।
प्राथमिक संक्रियाओं का प्रयोग करके आव्यूह को परिवर्तित किया जा सकता है: - $R_i \leftrightarrow R_j$ (पंक्तियों का परस्पर परिवर्तन) - $R_i \rightarrow kR_i$ (पंक्ति को अदिश से गुणा) - $R_i \rightarrow R_i + kR_j$ (किसी पंक्ति में दूसरी पंक्ति का अदिश गुणज जोड़ना)
इसी प्रकार स्तंभ संक्रियाएँ $C_i$ भी होती हैं। इनका उपयोग व्युत्क्रम ज्ञात करने में होगा।
उदाहरण 1: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$, तो $2A = \begin{bmatrix} 2 & 4 \ 6 & 8 \end{bmatrix}$।
उदाहरण 2: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 & 3 \end{bmatrix}$ और $B = \begin{bmatrix} 4 \ 5 \ 6 \end{bmatrix}$, तो $AB = [4 + 10 + 18] = [32]$ (कोटि $1 \times 1$)।
उदाहरण 3: यदि $A = \begin{bmatrix} 0 & 1 \ -1 & 0 \end{bmatrix}$, तो $A' = \begin{bmatrix} 0 & -1 \ 1 & 0 \end{bmatrix} = -A$। अतः $A$ विषम सममित आव्यूह है।
आव्यूहों की संक्रियाओं की स्पष्ट समझ के लिए निम्न उदाहरण दिए गए हैं।
उदाहरण 1: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ और $B = \begin{bmatrix} 4 & 5 \ 6 & 7 \end{bmatrix}$ है, तो $A + B$ और $2A$ ज्ञात कीजिए।
हल: दोनों आव्यूहों की कोटि $2 \times 2$ समान है, अतः योग संभव है: $$A + B = \begin{bmatrix} 1+4 & 2+5 \ 3+6 & 4+7 \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} 5 & 7 \ 9 & 11 \end{bmatrix}$$ अदिश गुणन से $2A = \begin{bmatrix} 2 & 4 \ 6 & 8 \end{bmatrix}$।
उदाहरण 2: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ और $B = \begin{bmatrix} 2 & 0 \ 1 & 2 \end{bmatrix}$ है, तो $AB$ और $BA$ ज्ञात कीजिए।
हल: $AB = \begin{bmatrix} 1(2)+2(1) & 1(0)+2(2) \ 3(2)+4(1) & 3(0)+4(2) \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} 4 & 4 \ 10 & 8 \end{bmatrix}$ $BA = \begin{bmatrix} 2(1)+0(3) & 2(2)+0(4) \ 1(1)+2(3) & 1(2)+2(4) \end{bmatrix} = \begin{bmatrix} 2 & 4 \ 7 & 10 \end{bmatrix}$ यहाँ $AB \neq BA$, जो यह सिद्ध करता है कि आव्यूह गुणन क्रम-विनिमेय नहीं होता।
उदाहरण 3: $A = \begin{bmatrix} 0 & 2 \ -2 & 0 \end{bmatrix}$ के लिए सिद्ध कीजिए कि $A$ विषम सममित है।
हल: $A' = \begin{bmatrix} 0 & -2 \ 2 & 0 \end{bmatrix} = -\begin{bmatrix} 0 & 2 \ -2 & 0 \end{bmatrix} = -A$। चूँकि $A' = -A$, अतः $A$ विषम सममित आव्यूह है। ध्यान दीजिए कि इसके विकर्ण अवयव शून्य हैं।
उदाहरण 4: एक आव्यूह $P$ की कोटि $2 \times 3$ है। किस कोटि के आव्यूह $Q$ से $PQ$ परिभाषित होगा?
हल: $P$ की कोटि $2 \times 3$ है। $PQ$ परिभाषित होने के लिए $Q$ की पंक्तियों की संख्या $P$ के स्तंभों की संख्या के बराबर होनी चाहिए, अर्थात $Q$ की कोटि $3 \times n$ होगी, जहाँ $n$ कोई धनात्मक पूर्णांक है।
उदाहरण 5: $A = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ है, तो $(A')'$ ज्ञात कीजिए।
हल: $A' = \begin{bmatrix} 1 & 3 \ 2 & 4 \end{bmatrix}$। पुनः स्थानांतरण करने पर $(A')' = \begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix} = A$। यह गुणधर्म $(A')' = A$ की पुष्टि करता है।
उदाहरण 6: प्रारंभिक संक्रियाओं से दिखाइए कि तत्समक आव्यूह $I_2 = \begin{bmatrix} 1 & 0 \ 0 & 1 \end{bmatrix}$ किसी भी $2 \times 2$ आव्यूह $A$ के लिए $AI_2 = A$ संतुष्ट करता है।
हल: $AI_2$ में $I_2$ के स्तंभ $(1, 0)$ और $(0, 1)$ हैं। $A$ के पहले स्तंभ से $1$ का गुणन और $0$ का गुणन $A$ के स्तंभों को ही पुनः लौटाते हैं, अतः $AI_2 = A$ सत्य है।
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| पंक्ति आव्यूह | एक पंक्ति | $[1 \ 2]$ |
| स्तंभ आव्यूह | एक स्तंभ | $\begin{bmatrix} 1 \ 2 \end{bmatrix}$ |
| वर्ग आव्यूह | पंक्ति = स्तंभ | $\begin{bmatrix} 1 & 2 \ 3 & 4 \end{bmatrix}$ |
| विकर्ण आव्यूह | विकर्ण के अतिरिक्त शून्य | $\begin{bmatrix} 2 & 0 \ 0 & 3 \end{bmatrix}$ |
| अदिश आव्यूह | विकर्ण अवयव समान | $\begin{bmatrix} 5 & 0 \ 0 & 5 \end{bmatrix}$ |
| तत्समक आव्यूह | विकर्ण अवयव 1 | $\begin{bmatrix} 1 & 0 \ 0 & 1 \end{bmatrix}$ |
| शून्य आव्यूह | सभी अवयव शून्य | $\begin{bmatrix} 0 & 0 \ 0 & 0 \end{bmatrix}$ |
| क्रम | गुणधर्म |
|---|---|
| 1 | $(A')' = A$ |
| 2 | $(A + B)' = A' + B'$ |
| 3 | $(kA)' = kA'$ |
| 4 | $(AB)' = B'A'$ |
| स्थिति | शर्त | परिणामी कोटि |
|---|---|---|
| $AB$ | $A$ की कोटि $m \times n$, $B$ की $n \times p$ | $m \times p$ |
| $BA$ | $B$ की $p \times n$? | सामान्यतः परिभाषित नहीं या भिन्न |
आव्यूह गणित की वह शाखा है जिसमें संख्याओं को आयताकार रूप में व्यवस्थित किया जाता है। इस अध्याय में हमने आव्यूह की परिभाषा, विभिन्न प्रकार (पंक्ति, स्तंभ, वर्ग, विकर्ण, अदिश, तत्समक, शून्य, त्रिभुजाकार), संक्रियाएँ (योग, अदिश गुणन, आव्यूह गुणन), स्थानांतरण, सममित एवं विषम सममित आव्यूह तथा प्राथमिक संक्रियाओं का अध्ययन किया। आव्यूह गुणन की शर्त और क्रम-विनिमेय न होना सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं। आव्यूहों का उपयोग अगले अध्याय (सारणिक) तथा रैखिक समीकरणों के हल में किया जाता है, अतः इस अध्याय में दृढ़ पकड़ बनाना अत्यंत आवश्यक है।