प्रायिकता (Probability) गणित की वह शाखा है जो अनिश्चित घटनाओं की संभावना का मापन करती है। कक्षा 11 में आप प्रायिकता की मूलभूत अवधारणाओं का अध्ययन कर चुके हैं। कक्षा 12 में हम सप्रतिबंध प्रायिकता (Conditional Probability), गुणन प्रमेय (Multiplication Theorem), स्वतंत्र घटनाएँ (Independent Events), बेज़ प्रमेय (Bayes' Theorem), यादृच्छिक चर और उसका प्रायिकता बंटन तथा माध्य और प्रसरण, बरनौली परीक्षण (Bernoulli Trials) और द्विपद बंटन (Binomial Distribution) का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय सांख्यिकी एवं निर्णय विज्ञान का आधार है।
यदि $A$ और $B$ एक प्रतिदर्श समष्टि $S$ की घटनाएँ हैं, तो $A$ दिए जाने पर $B$ की सप्रतिबंध प्रायिकता: $$P(B|A) = \frac{P(A \cap B)}{P(A)}, \quad P(A) \neq 0$$
$$P(A \cap B) = P(A) \cdot P(B|A) = P(B) \cdot P(A|B)$$
सामान्यतः $n$ घटनाओं के लिए: $$P(A_1 \cap A_2 \cap \dots \cap A_n) = P(A_1)P(A_2|A_1)P(A_3|A_1 \cap A_2)\dots$$
दो घटनाएँ $A$ और $B$ स्वतंत्र होती हैं यदि: $$P(A \cap B) = P(A) \cdot P(B)$$
स्वतंत्र घटनाओं के लिए $P(A|B) = P(A)$ और $P(B|A) = P(B)$।
यदि $A$ और $B$ स्वतंत्र हैं, तो $A$ और $B'$; $A'$ और $B$; $A'$ और $B'$ भी स्वतंत्र होते हैं।
यदि $E_1, E_2, \dots, E_n$ परस्पर अपवर्जी और निःशेष (exhaustive) घटनाएँ हैं और $A$ एक ऐसी घटना है जो $P(A) > 0$ के साथ किसी भी $E_i$ के साथ घट सकती है, तो: $$P(E_i|A) = \frac{P(E_i) \cdot P(A|E_i)}{\sum_{j=1}^{n} P(E_j) \cdot P(A|E_j)}$$
बेज़ प्रमेय "परिणाम दिए जाने पर कारण की प्रायिकता" ज्ञात करने में सहायक है।
यदि $E_1, E_2, \dots, E_n$ प्रतिदर्श समष्टि $S$ का विभाजन है, तो किसी घटना $A$ के लिए: $$P(A) = \sum_{i=1}^{n} P(E_i) \cdot P(A|E_i)$$
यादृच्छिक चर (Random Variable) वह चर है जो प्रत्येक परिणाम को एक वास्तविक संख्या निर्धारित करता है।
यदि यादृच्छिक चर $X$ के मान $x_1, x_2, \dots, x_n$ हैं और संगत प्रायिकताएँ $P(X = x_i) = p_i$ हैं, तो: $$\sum_{i=1}^{n} p_i = 1, \quad p_i \geq 0$$
$$E(X) = \mu = \sum_{i=1}^{n} x_i p_i$$
$$\text{Var}(X) = \sum_{i=1}^{n} (x_i - \mu)^2 p_i = \sum x_i^2 p_i - \mu^2$$ $$\sigma = \sqrt{\text{Var}(X)}$$
$n$ बरनौली परीक्षणों में $x$ सफलताओं की प्रायिकता: $$P(X = x) = {}^{n}C_x \, p^x q^{n-x}, \quad q = 1 - p$$
जहाँ $x = 0, 1, 2, \dots, n$।
प्रायिकता की अवधारणाओं के अनुप्रयोग को निम्न उदाहरणों द्वारा समझिए।
उदाहरण 1: एक पासे को उछाला जाता है। दिया गया है कि परिणाम सम संख्या है, तो उसके 6 होने की सप्रतिबंध प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल: माना $A$ = परिणाम सम है ${2, 4, 6}$, $B$ = परिणाम 6 है। $P(A) = \frac{3}{6}$, $P(A \cap B) = P(6) = \frac{1}{6}$। अतः $P(B|A) = \frac{P(A \cap B)}{P(A)} = \frac{1/6}{3/6} = \frac{1}{3}$।
उदाहरण 2: दो सिक्के उछाले जाते हैं। दोनों चित आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए जब यह ज्ञात है कि कम से कम एक चित आया है।
हल: प्रतिदर्श समष्टि ${HH, HT, TH, TT}$। माना $A$ = कम से कम एक चित ${HH, HT, TH}$, $B$ = दोनों चित ${HH}$। $P(B|A) = \frac{P(A\cap B)}{P(A)} = \frac{1/4}{3/4} = \frac{1}{3}$।
उदाहरण 3: एक थैले में 3 लाल और 2 सफेद गेंदें हैं। बिना प्रतिस्थापन के दो गेंदें निकाली जाती हैं। दोनों लाल आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल: $P(\text{पहली लाल}) = \frac{3}{5}$, फिर शेष 4 में 2 लाल बचती हैं, $P(\text{दूसरी लाल | पहली लाल}) = \frac{2}{4}$। गुणन प्रमेय से कुल $= \frac{3}{5} \times \frac{2}{4} = \frac{3}{10}$।
उदाहरण 4: एक निर्माता की दो मशीनें $M_1$ और $M_2$ क्रमशः 60% और 40% वस्तुएँ बनाती हैं। $M_1$ की वस्तुओं में 2% और $M_2$ की में 3% खराब हैं। बाजार से यादृच्छिक रूप से चुनी गई एक खराब वस्तु के $M_1$ द्वारा बनाए जाने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल: माना $A$ = खराब वस्तु। $P(M_1) = 0.6$, $P(M_2) = 0.4$, $P(A|M_1) = 0.02$, $P(A|M_2) = 0.03$। बेज़ प्रमेय से: $$P(M_1|A) = \frac{0.6 \times 0.02}{0.6 \times 0.02 + 0.4 \times 0.03} = \frac{0.012}{0.012 + 0.012} = \frac{1}{2}$$ यह बेज़ प्रमेय का एक विशिष्ट व्यावहारिक उपयोग है।
उदाहरण 5: एक सिक्के को 4 बार उछाला जाता है। ठीक 2 चित आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल: यह द्विपद बंटन है जिसमें $n = 4$, $p = \frac{1}{2}$, $q = \frac{1}{2}$। $P(X = 2) = {}^4C_2\left(\frac{1}{2}\right)^2\left(\frac{1}{2}\right)^2 = 6 \times \frac{1}{16} = \frac{3}{8}$।
उदाहरण 6: एक यादृच्छिक चर $X$ का प्रायिकता बंटन $P(X = x) = kx$ है, जहाँ $x = 1, 2, 3$। $k$ का मान ज्ञात कीजिए।
हल: कुल प्रायिकता 1 होनी चाहिए: $k(1 + 2 + 3) = 1 \Rightarrow 6k = 1 \Rightarrow k = \frac{1}{6}$। इसके बाद माध्य $E(X) = \sum x p(x) = \frac{1}{6}(1 + 4 + 9) = \frac{14}{6} = \frac{7}{3}$ प्राप्त होता है।
सप्रतिबंध प्रायिकता की संकल्पना सभी आगे के विषयों की आधारशिला है। इसे समझने के लिए सबसे सरल दृष्टिकोण प्रतिदर्श समष्टि को सीमित करना है। जब हम $P(B|A)$ की बात करते हैं, तो प्रतिदर्श समष्टि घटना $A$ तक सिमट जाती है और हम $A$ के भीतर $B$ के घटित होने के अनुपात की गणना करते हैं। यह समझ सीधे गणना किए बिना ही मानसिक रूप से उत्तर का अनुमान लगाने में सहायक है।
स्वतंत्र घटनाओं और परस्पर अपवर्जी घटनाओं में अंतर विद्यार्थियों के लिए सदैव भ्रम का स्रोत रहता है। परस्पर अपवर्जी घटनाओं में एक घटना के घटने पर दूसरी की प्रायिकता शून्य हो जाती है, जबकि स्वतंत्र घटनाओं में एक घटना दूसरी की प्रायिकता को प्रभावित नहीं करती। दो अशून्य प्रायिकता वाली घटनाएँ एक साथ परस्पर अपवर्जी और स्वतंत्र नहीं हो सकतीं, क्योंकि अपवर्जी में $P(A \cap B) = 0$ जबकि स्वतंत्र में $P(A \cap B) = P(A)P(B) > 0$।
बरनौली परीक्षणों की पहचान में मुख्य शर्तें परीक्षणों की स्वतंत्रता, सफलता की स्थिर प्रायिकता और केवल दो परिणामों का होना हैं। यदि गेंदें बिना प्रतिस्थापन के निकाली जाएँ, तो प्रायिकताएँ बदलती रहती हैं, अतः वे बरनौली परीक्षण नहीं होंगे। परंतु बड़े समुच्चय से थोड़े-से अवयव निकालने पर स्थिर प्रायिकता का सन्निकटन किया जा सकता है। इसी कारण परीक्षाओं में "प्रतिस्थापन सहित" या "बिना प्रतिस्थापन" के शब्द विशेष महत्व रखते हैं।
प्रायिकता बंटन में सभी प्रायिकताओं का योग 1 होना आवश्यक है। यदि यह योग 1 से कम या अधिक है, तो बंटन दोषपूर्ण है। माध्य और प्रसरण की गणना में सारणी बनाकर $x_i, p_i, x_i p_i, x_i^2 p_i$ के स्तंभों की गणना करना सबसे सुरक्षित तरीका है। इस सारणी से $E(X) = \sum x_i p_i$ और $E(X^2) = \sum x_i^2 p_i$ प्राप्त होते हैं, जिनसे प्रसरण $E(X^2) - [E(X)]^2$ तुरंत निकाला जा सकता है। यह व्यवस्थित विधि गणना की गलतियों को कम करती है।
| सूत्र | मान |
|---|---|
| $P(B | A)$ |
| गुणन प्रमेय | $P(A \cap B) = P(A)P(B |
| स्वतंत्र घटनाएँ | $P(A \cap B) = P(A)P(B)$ |
| कुल प्रायिकता | $\sum P(E_i)P(A |
| बेज़ प्रमेय | $\frac{P(E_i)P(A |
| मापदंड | मान |
|---|---|
| प्रायिकता | $P(X=x) = {}^{n}C_x p^x q^{n-x}$ |
| माध्य | $np$ |
| प्रसरण | $npq$ |
| मानक विचलन | $\sqrt{npq}$ |
| प्रकार | शर्त |
|---|---|
| परस्पर अपवर्जी | $P(A \cap B) = 0$ |
| स्वतंत्र | $P(A \cap B) = P(A)P(B)$ |
| निःशेष | $A \cup B = S$ |
| समप्रायिक | $P(A) = P(B)$ |
प्रायिकता अनिश्चितता का गणितीय माप है। इस अध्याय में हमने सप्रतिबंध प्रायिकता, गुणन प्रमेय, स्वतंत्र घटनाएँ, बेज़ प्रमेय, कुल प्रायिकता, यादृच्छिक चर और उसका प्रायिकता बंटन, माध्य, प्रसरण तथा बरनौली परीक्षण और द्विपद बंटन का अध्ययन किया। बेज़ प्रमेय कारण की पश्च प्रायिकता ज्ञात करने का शक्तिशाली साधन है, जबकि द्विपद बंटन स्वतंत्र परीक्षणों में सफलताओं की संख्या का वर्णन करता है। माध्य $np$ और प्रसरण $npq$ के सूत्र तथा सप्रतिबंध प्रायिकता की संरचना परीक्षा के प्रमुख बिंदु हैं। यह अध्याय सांख्यिकी, अर्थशास्त्र और डेटा विज्ञान का आधार है।