इस अध्याय में हम परमाणु की संरचना का अध्ययन करेंगे। परमाणु पदार्थ का सबसे छोटा कण है जो रासायनिक गुणों को बनाए रखता है। प्रारंभ में परमाणु को अविभाज्य माना जाता था, परंतु आधुनिक प्रयोगों ने यह सिद्ध किया कि परमाणु की एक जटिल आंतरिक संरचना होती है। इस अध्याय में रदरफोर्ड का प्रकीर्णन प्रयोग, बोर का परमाणु मॉडल, ऊर्जा स्तर, हाइड्रोजन परमाणु का स्पेक्ट्रम तथा परमाणु संरचना से संबंधित विभिन्न मॉडलों का अध्ययन किया जाता है। परमाणु की संरचना को समझना रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान दोनों का आधार है।
2. परमाणु मॉडलों का विकास (Development of Atomic Models)
थॉमसन का मॉडल (Plum Pudding Model)
जे.जे. थॉमसन ने 1898 में परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया जिसके अनुसार परमाणु में धनात्मक आवेश समान रूप से वितरित होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें दबे हुए होते हैं (जैसे बेर में किशमिश)। इसे प्लम-पुडिंग मॉडल कहा जाता था।
रदरफोर्ड का मॉडल (Rutherford's Model)
रदरफोर्ड ने 1911 में गोल्ड फॉइल पर अल्फा कणों की बौछार करके परमाणु की संरचना का अध्ययन किया। प्रकीर्णन प्रयोग के अवलोकन:
अधिकांश अल्फा कण (99%) बिना विक्षेपित निकल जाते हैं — यह दर्शाता है कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है।
कुछ अल्फा कण छोटे कोणों पर विक्षेपित होते हैं — धनात्मक आवेश की उपस्थिति।
बहुत कम अल्फा कण (लगभग 1 में से 8000) बड़े कोणों पर विक्षेपित होते हैं, यहाँ तक कि कुछ $180^\circ$ पर लौट आते हैं — यह दर्शाता है कि धनात्मक आवेश और द्रव्यमान अत्यंत सूक्ष्म क्षेत्र (नाभिक) में केंद्रित है।
रदरफोर्ड के निष्कर्ष:
परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान तथा सारा धनात्मक आवेश अत्यंत सूक्ष्म नाभिक में केंद्रित होता है।
नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या से लगभग $10^{-5}$ गुना होती है।
इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
नाभिक का आकार:
रदरफोर्ड के सूत्र के अनुसार $r \propto A^{1/3}$, नाभिकीय त्रिज्या:
$$R = R_0 A^{1/3}$$
जहाँ $R_0 = 1.2 \times 10^{-15}$ m और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
3. रदरफोर्ड मॉडल की कमियाँ (Defects of Rutherford Model)
रदरफोर्ड मॉडल दो समस्याओं का सामना करता है:
मैक्सवेल के सिद्धांत के अनुसार, त्वरित गति करने वाला आवेशित इलेक्ट्रॉन विद्युतचुंबकीय विकिरण उत्सर्जित करेगा। इससे इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा घटती जाएगी और वह सर्पिल रूप से नाभिक में गिर जाएगा। परंतु वास्तव में परमाणु स्थिर होते हैं।
इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा लगातार घटती रहेगी, जिससे स्पेक्ट्रम में निरंतर विकिरण मिलना चाहिए, जबकि वास्तव में रैखिक स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
इन कमियों को बोर के मॉडल द्वारा दूर किया गया।
4. बोर का परमाणु मॉडल (Bohr's Model)
नील्स बोर ने 1913 में हाइड्रोजन परमाणु के लिए मॉडल प्रस्तुत किया। इसके मुख्य अभिगृहीत:
इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में चक्कर लगा सकता है जिनमें उसका कोणीय संवेग $h/2\pi$ का पूर्ण गुणज होता है।
$$mvr = \frac{nh}{2\pi}$$
इन विशिष्ट कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन कोई ऊर्जा उत्सर्जित नहीं करता (स्थिर कक्षाएँ)।
जब इलेक्ट्रॉन उच्च कक्षा से निम्न कक्षा में जाता है, तो ऊर्जा का अंतर फोटॉन के रूप में उत्सर्जित होता है:
$$h\nu = E_{n_2} - E_{n_1}$$
बोर कक्षा की त्रिज्या:
$$r_n = \frac{n^2 h^2 \epsilon_0}{\pi m e^2}$$
पहली बोर कक्षा की त्रिज्या $r_1 = 0.53 \times 10^{-10}$ m होती है, जिसे बोर त्रिज्या कहते हैं। $r_n = n^2 r_1$।
बोर कक्षा की ऊर्जा:
$$E_n = -\frac{13.6}{n^2} \text{ eV}$$
हाइड्रोजन की जमीनी अवस्था (n = 1) की ऊर्जा $-13.6$ eV होती है। उत्सर्जन के लिए ऊर्जा धनात्मक होती है जब इलेक्ट्रॉन बाहर जाता है।
कक्षीय वेग:
$$v_n = \frac{e^2}{2n\epsilon_0 h}$$
पहली कक्षा में वेग $v_1 \approx 2.18 \times 10^6$ m/s।
5. हाइड्रोजन परमाणु का स्पेक्ट्रम (Spectrum of Hydrogen Atom)
जब इलेक्ट्रॉन उच्च कक्षा ($n_2$) से निम्न कक्षा ($n_1$) में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित विकिरण की तरंग संख्या:
यहाँ $R$ रिडबर्ग नियतांक है जिसका मान $R = 1.097 \times 10^7$ m⁻¹ है।
हाइड्रोजन की श्रेणियाँ (Spectral Series):
श्रेणी
$n_1$
$n_2$
क्षेत्र
लाइमन
1
2, 3, 4, ...
पराबैंगनी
बामर
2
3, 4, 5, ...
दृश्य
पाश्चन
3
4, 5, 6, ...
अवरक्त
ब्रैकेट
4
5, 6, 7, ...
अवरक्त
फुंड
5
6, 7, 8, ...
अवरक्त
दृश्य क्षेत्र में केवल बामर श्रेणी होती है। लाइमन श्रेणी पराबैंगनी में होती है।
6. ऊर्जा स्तर आरेख (Energy Level Diagram)
हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तरों को चित्र में दर्शाया जाता है:
$n = 1$: $E = -13.6$ eV (जमीनी अवस्था)
$n = 2$: $E = -3.4$ eV
$n = 3$: $E = -1.51$ eV
$n = \infty$: $E = 0$ (आयनन स्तर)
जमीनी अवस्था से इलेक्ट्रॉन को पूर्णतः निकालने के लिए 13.6 eV ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे आयनन ऊर्जा कहते हैं। इस मान को हाइड्रोजन की आयनन ऊर्जा कहते हैं।
7. हाइड्रोजन परमाणु का वर्णक्रमीय विश्लेषण
हाइड्रोजन के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम में प्रत्येक श्रेणी की सबसे बड़ी तरंगदैर्घ्य वाली रेखा को $H_\alpha$ कहते हैं। बामर श्रेणी में:
$H_\alpha$ (लाल): $n = 3 \to 2$
$H_\beta$ (नीला): $n = 4 \to 2$
$H_\gamma$ (बैंगनी): $n = 5 \to 2$
अवशोषण स्पेक्ट्रम में इलेक्ट्रॉन निम्न से उच्च स्तर पर जाता है और उतनी ही तरंगदैर्घ्य की रेखाएँ अवशोषित होती हैं। फोटॉन की ऊर्जा को अवशोषण के लिए उस संक्रमण की ऊर्जा के ठीक बराबर होना चाहिए।
8. बोर मॉडल की सीमाएँ (Limitations of Bohr Model)
यह केवल हाइड्रोजन जैसे एक-इलेक्ट्रॉन तंत्र (H, He⁺, Li²⁺) पर ही लागू होता है।
यह बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं की व्याख्या नहीं कर सकता।
यह ज़ीमन प्रभाव (चुंबकीय क्षेत्र में रेखाओं का विभाजन) और स्टार्क प्रभाव (विद्युत क्षेत्र में विभाजन) की व्याख्या नहीं कर सकता।
यह स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तीव्रता में अंतर की व्याख्या नहीं कर सकता।
यह रिशेबर्ग मॉडल के अनुसार सूक्ष्म संरचना की व्याख्या नहीं करता।
इन सीमाओं को क्वांटम यांत्रिकी द्वारा दूर किया गया। आधुनिक क्वांटम मॉडल में इलेक्ट्रॉन की सटीक स्थिति नहीं बताई जा सकती, केवल उसके पाए जाने की प्रायिकता बताई जाती है।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: महत्वपूर्ण सूत्र
राशि
सूत्र
बोर क्वांटम शर्त
$mvr = nh/2\pi$
कक्षा त्रिज्या
$r_n = n^2 r_1$, $r_1 = 0.53 \times 10^{-10}$ m
कक्षीय ऊर्जा
$E_n = -13.6/n^2$ eV
रिडबर्ग सूत्र
$1/\lambda = R(1/n_1^2 - 1/n_2^2)$
नाभिकीय त्रिज्या
$R = R_0A^{1/3}$
कक्षीय वेग
$v_n = e^2/2n\epsilon_0h$
तालिका 2: हाइड्रोजन की श्रेणियाँ
श्रेणी
निचला स्तर
क्षेत्र
लाइमन
n₁ = 1
पराबैंगनी
बामर
n₁ = 2
दृश्य
पाश्चन
n₁ = 3
अवरक्त
ब्रैकेट
n₁ = 4
अवरक्त
फुंड
n₁ = 5
अवरक्त
माइंड मैप
graph TD
A["परमाणु"] --> B["रदरफोर्ड मॉडल"]
B --> B1["नाभिक केंद्रित"]
B --> B2["अल्फा प्रकीर्णन"]
A --> C["बोर मॉडल"]
C --> C1["mvr = nh/2π"]
C --> C2["En = -13.6/n² eV"]
C --> C3["rn = n² × 0.53 Å"]
A --> D["स्पेक्ट्रम"]
D --> D1["लाइमन (पराबैंगनी)"]
D --> D2["बामर (दृश्य)"]
D --> D3["पाश्चन (अवरक्त)"]
A --> E["ऊर्जा स्तर"]
E --> E1["आयनन ऊर्जा 13.6 eV"]
A --> F["सीमाएँ"]
F --> F1["बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु"]
F --> F2["ज़ीमन प्रभाव"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: बोर मॉडल — ऊर्जा स्तर
आरेख 2: रदरफोर्ड का प्रकीर्णन प्रयोग
सामान्य गलतियाँ
बोर कक्षा की त्रिज्या को $r_n = nr_1$ मानना; सही सूत्र $r_n = n^2r_1$ है।
ऊर्जा को धनात्मक लिखना; हाइड्रोजन की कक्षीय ऊर्जा ऋणात्मक होती है ($E_n = -13.6/n^2$ eV)।
लाइमन श्रेणी को दृश्य क्षेत्र में मानना; लाइमन पराबैंगनी और बामर दृश्य क्षेत्र में होती है।
रदरफोर्ड मॉडल की कमी को न समझना — यह स्थिर परमाणु और रैखिक स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सकता।
आयनन ऊर्जा को $+13.6$ eV से नहीं, बल्कि संक्रमण ऊर्जा से भ्रमित करना।
रिडबर्ग सूत्र में $n_1$ और $n_2$ का क्रम उलट देना; $n_1 < n_2$ होना चाहिए।
बामर श्रेणी में सबसे लंबी तरंगदैर्घ्य को सबसे अधिक ऊर्जा का संक्रमण मानना; सबसे लंबी तरंगदैर्घ्य वाली रेखा की ऊर्जा सबसे कम होती है।
परीक्षा युक्तियाँ
बोर के तीनों अभिगृहीतों को याद रखें और उन्हें लिखने का अभ्यास करें।
$r_n = n^2r_1$ और $E_n = -13.6/n^2$ eV से संख्यात्मक प्रश्न बनते हैं, इन्हें रटें।
हाइड्रोजन की पाँचों श्रेणियों (लाइमन, बामर, पाश्चन, ब्रैकेट, फुंड) का क्षेत्र और $n_1$ मान याद रखें।
रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करके तरंगदैर्घ्य ज्ञात करने का अभ्यास करें।
रदरफोर्ड के प्रयोग के तीन अवलोकन और तीन निष्कर्ष लिखना सीखें।
बोर मॉडल की सीमाएँ (ज़ीमन प्रभाव, बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु) सैद्धांतिक प्रश्नों में पूछी जाती हैं।
बामर श्रेणी की दृश्य क्षेत्र में होने की विशेषता का कथन लिखें।
निष्कर्ष
परमाणु अध्याय परमाणु संरचना के विकास को रेखांकित करता है। रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग ने नाभिक की खोज की, जबकि बोर के मॉडल ने क्वांटम संकल्पनाओं को परमाणु पर लागू करके हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की व्याख्या की। हाइड्रोजन की श्रेणियाँ और ऊर्जा स्तर आधुनिक परमाणु भौतिकी का आधार हैं। बोर मॉडल की सीमाओं ने क्वांटम यांत्रिकी के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। इन संकल्पनाओं की समझ अगले अध्याय — नाभिक — के लिए आवश्यक है, जहाँ हम नाभिकीय भौतिकी का अध्ययन करेंगे। नियमित अभ्यास से इस अध्याय में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।