Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for परमाणु.
इस अध्याय में हम परमाणु की संरचना का अध्ययन करेंगे। परमाणु पदार्थ का सबसे छोटा कण है जो रासायनिक गुणों को बनाए रखता है। प्रारंभ में परमाणु को अविभाज्य माना जाता था, परंतु आधुनिक प्रयोगों ने यह सिद्ध किया कि परमाणु की एक जटिल आंतरिक संरचना होती है। इस अध्याय में रदरफोर्ड का प्रकीर्णन प्रयोग, बोर का परमाणु मॉडल, ऊर्जा स्तर, हाइड्रोजन परमाणु का स्पेक्ट्रम तथा परमाणु संरचना से संबंधित विभिन्न मॉडलों का अध्ययन किया जाता है। परमाणु की संरचना को समझना रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान दोनों का आधार है।
जे.जे. थॉमसन ने 1898 में परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया जिसके अनुसार परमाणु में धनात्मक आवेश समान रूप से वितरित होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें दबे हुए होते हैं (जैसे बेर में किशमिश)। इसे प्लम-पुडिंग मॉडल कहा जाता था।
रदरफोर्ड ने 1911 में गोल्ड फॉइल पर अल्फा कणों की बौछार करके परमाणु की संरचना का अध्ययन किया। प्रकीर्णन प्रयोग के अवलोकन:
रदरफोर्ड के सूत्र के अनुसार $r \propto A^{1/3}$, नाभिकीय त्रिज्या:
$$R = R_0 A^{1/3}$$
जहाँ $R_0 = 1.2 \times 10^{-15}$ m और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
रदरफोर्ड मॉडल दो समस्याओं का सामना करता है:
इन कमियों को बोर के मॉडल द्वारा दूर किया गया।
नील्स बोर ने 1913 में हाइड्रोजन परमाणु के लिए मॉडल प्रस्तुत किया। इसके मुख्य अभिगृहीत:
$$mvr = \frac{nh}{2\pi}$$
$$h\nu = E_{n_2} - E_{n_1}$$
$$r_n = \frac{n^2 h^2 \epsilon_0}{\pi m e^2}$$
पहली बोर कक्षा की त्रिज्या $r_1 = 0.53 \times 10^{-10}$ m होती है, जिसे बोर त्रिज्या कहते हैं। $r_n = n^2 r_1$।
$$E_n = -\frac{13.6}{n^2} \text{ eV}$$
हाइड्रोजन की जमीनी अवस्था (n = 1) की ऊर्जा $-13.6$ eV होती है। उत्सर्जन के लिए ऊर्जा धनात्मक होती है जब इलेक्ट्रॉन बाहर जाता है।
$$v_n = \frac{e^2}{2n\epsilon_0 h}$$
पहली कक्षा में वेग $v_1 \approx 2.18 \times 10^6$ m/s।
जब इलेक्ट्रॉन उच्च कक्षा ($n_2$) से निम्न कक्षा ($n_1$) में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित विकिरण की तरंग संख्या:
$$\frac{1}{\lambda} = R\left(\frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2}\right)$$
यहाँ $R$ रिडबर्ग नियतांक है जिसका मान $R = 1.097 \times 10^7$ m⁻¹ है।
| श्रेणी | $n_1$ | $n_2$ | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| लाइमन | 1 | 2, 3, 4, ... | पराबैंगनी |
| बामर | 2 | 3, 4, 5, ... | दृश्य |
| पाश्चन | 3 | 4, 5, 6, ... | अवरक्त |
| ब्रैकेट | 4 | 5, 6, 7, ... | अवरक्त |
| फुंड | 5 | 6, 7, 8, ... | अवरक्त |
दृश्य क्षेत्र में केवल बामर श्रेणी होती है। लाइमन श्रेणी पराबैंगनी में होती है।
हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तरों को चित्र में दर्शाया जाता है:
जमीनी अवस्था से इलेक्ट्रॉन को पूर्णतः निकालने के लिए 13.6 eV ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे आयनन ऊर्जा कहते हैं। इस मान को हाइड्रोजन की आयनन ऊर्जा कहते हैं।
हाइड्रोजन के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम में प्रत्येक श्रेणी की सबसे बड़ी तरंगदैर्घ्य वाली रेखा को $H_\alpha$ कहते हैं। बामर श्रेणी में:
अवशोषण स्पेक्ट्रम में इलेक्ट्रॉन निम्न से उच्च स्तर पर जाता है और उतनी ही तरंगदैर्घ्य की रेखाएँ अवशोषित होती हैं। फोटॉन की ऊर्जा को अवशोषण के लिए उस संक्रमण की ऊर्जा के ठीक बराबर होना चाहिए।
इन सीमाओं को क्वांटम यांत्रिकी द्वारा दूर किया गया। आधुनिक क्वांटम मॉडल में इलेक्ट्रॉन की सटीक स्थिति नहीं बताई जा सकती, केवल उसके पाए जाने की प्रायिकता बताई जाती है।
| राशि | सूत्र |
|---|---|
| बोर क्वांटम शर्त | $mvr = nh/2\pi$ |
| कक्षा त्रिज्या | $r_n = n^2 r_1$, $r_1 = 0.53 \times 10^{-10}$ m |
| कक्षीय ऊर्जा | $E_n = -13.6/n^2$ eV |
| रिडबर्ग सूत्र | $1/\lambda = R(1/n_1^2 - 1/n_2^2)$ |
| नाभिकीय त्रिज्या | $R = R_0A^{1/3}$ |
| कक्षीय वेग | $v_n = e^2/2n\epsilon_0h$ |
| श्रेणी | निचला स्तर | क्षेत्र |
|---|---|---|
| लाइमन | n₁ = 1 | पराबैंगनी |
| बामर | n₁ = 2 | दृश्य |
| पाश्चन | n₁ = 3 | अवरक्त |
| ब्रैकेट | n₁ = 4 | अवरक्त |
| फुंड | n₁ = 5 | अवरक्त |
graph TD
A["परमाणु"] --> B["रदरफोर्ड मॉडल"]
B --> B1["नाभिक केंद्रित"]
B --> B2["अल्फा प्रकीर्णन"]
A --> C["बोर मॉडल"]
C --> C1["mvr = nh/2π"]
C --> C2["En = -13.6/n² eV"]
C --> C3["rn = n² × 0.53 Å"]
A --> D["स्पेक्ट्रम"]
D --> D1["लाइमन (पराबैंगनी)"]
D --> D2["बामर (दृश्य)"]
D --> D3["पाश्चन (अवरक्त)"]
A --> E["ऊर्जा स्तर"]
E --> E1["आयनन ऊर्जा 13.6 eV"]
A --> F["सीमाएँ"]
F --> F1["बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु"]
F --> F2["ज़ीमन प्रभाव"]
परमाणु अध्याय परमाणु संरचना के विकास को रेखांकित करता है। रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग ने नाभिक की खोज की, जबकि बोर के मॉडल ने क्वांटम संकल्पनाओं को परमाणु पर लागू करके हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की व्याख्या की। हाइड्रोजन की श्रेणियाँ और ऊर्जा स्तर आधुनिक परमाणु भौतिकी का आधार हैं। बोर मॉडल की सीमाओं ने क्वांटम यांत्रिकी के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। इन संकल्पनाओं की समझ अगले अध्याय — नाभिक — के लिए आवश्यक है, जहाँ हम नाभिकीय भौतिकी का अध्ययन करेंगे। नियमित अभ्यास से इस अध्याय में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।