इस अध्याय में हम संचार व्यवस्था (Communication Systems) का अध्ययन करेंगे। संचार प्रणाली में सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया शामिल होती है। किसी भी संचार प्रणाली के तीन मुख्य अवयव होते हैं — संचारक (Transmitter), संचार चैनल (Communication Channel) और संग्राही (Receiver)। रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, मोबाइल और इंटरनेट सभी संचार व्यवस्था के उदाहरण हैं। आधुनिक युग में संचार प्रणाली सूचना क्रांति का आधार है। इस अध्याय में संचार प्रणाली के मूल तत्व, मॉडुलन, मॉडुलन के प्रकार, संचरण माध्यम तथा विभिन्न संचार तकनीकों का अध्ययन किया जाता है।
किसी संचार प्रणाली में निम्न अवयव होते हैं:
किसी मूल सूचना सिग्नल को संचरण के लिए उपयुक्त बनाने के लिए उसका आरोपण उच्च आवृत्ति वाहक (Carrier) तरंग पर किया जाता है। इस प्रक्रिया को मॉडुलन कहते हैं। मूल सूचना सिग्नल को मॉडुलन सिग्नल (Modulating Signal) कहते हैं। मॉडुलन की आवश्यकता क्यों है:
मूल सिग्नल के तीन गुण (आयाम, आवृत्ति, कला) होते हैं, इसलिए मॉडुलन तीन प्रकार के होते हैं:
इसमें वाहक तरंग का आयाम मॉडुलन सिग्नल के अनुसार बदलता है, जबकि वाहक की आवृत्ति और कला नियत रहती हैं। AM में संशोधित तरंग:
$$c(t) = (A_c + A_m\sin\omega_m t)\sin\omega_c t$$
इसमें वाहक की आवृत्ति मॉडुलन सिग्नल के अनुसार बदलती है, जबकि आयाम नियत रहता है।
इसमें वाहक की कला मॉडुलन सिग्नल के अनुसार बदलती है।
FM में रव (Noise) प्रभाव AM से कम होता है, इसलिए FM का संगीत प्रसारण उच्च गुणवत्ता का होता है। परंतु FM को अधिक बैंडविड्थ चाहिए होती है।
मॉडुलन सूचकांक (Modulation Index):
$$\mu = \frac{A_m}{A_c}$$
जहाँ $A_m$ मॉडुलन सिग्नल का आयाम और $A_c$ वाहक का आयाम है। मॉडुलन गहराई $\mu$: - $0 < \mu < 1$: सामान्य (विकृति रहित) AM - $\mu = 1$: 100% मॉडुलन - $\mu > 1$: अधिमॉडुलन (विकृति)
AM सिग्नल में तीन आवृत्ति घटक होते हैं: - वाहक आवृत्ति: $f_c$ - ऊपरी पार्श्व बैंड (Upper Side Band, USB): $f_c + f_m$ - निचला पार्श्व बैंड (Lower Side Band, LSB): $f_c - f_m$
AM की बैंडविड्थ:
$$BW = 2f_m$$
रेडियो तरंगों का संचरण तीन प्रकार से होता है:
कम आवृत्ति (500 kHz से कम) की तरंगें पृथ्वी की सतह के समानांतर संचरण करती हैं। इन्हें भू तरंगें कहते हैं। इनका उपयोग AM रेडियो प्रसारण में होता है।
आयनमंडल (Ionosphere) द्वारा परावर्तित होकर संचरण करने वाली तरंगें आकाश तरंगें कहलाती हैं। आयनमंडल पृथ्वी से लगभग 65 से 400 km की ऊँचाई पर होता है। आयनमंडल की परतें आवेशित कणों से युक्त होती हैं। सामान्यतः 2 MHz से लगभग 30 MHz की तरंगें इस प्रकार संचरण करती हैं। आयनमंडल की परावर्तकता आवृत्ति पर निर्भर करती है।
बहुत उच्च आवृत्ति (30 MHz से अधिक) की तरंगें सीधी रेखा में (लाइन ऑफ साइट) संचरण करती हैं। टेलीविजन और सूक्ष्म तरंग संचार में इसका उपयोग होता है। अंतरिक्ष तरंगों की सीमा रेखा-दृष्टि क्षितिज तक सीमित होती है।
उपग्रह संचार में सूचना को उपग्रह के माध्यम से भेजा जाता है। उपग्रह विद्युतचुंबकीय सिग्नल प्राप्त कर उन्हें पुनः प्रसारित करता है। भूस्थैतिक उपग्रह (Geostationary Satellite) पृथ्वी से लगभग 36,000 km की ऊँचाई पर होता है और पृथ्वी के घूर्णन के साथ समकालिक रूप से घूमता है, इसलिए वह पृथ्वी से स्थिर प्रतीत होता है। इसकी परिक्रमण अवधि 24 घंटे होती है। भूस्थैतिक उपग्रह का उपयोग टीवी प्रसारण, मौसम पूर्वानुमान और संचार में होता है।
टेलीफोन एक पूर्ण-डुप्लेक्स संचार उपकरण है। आधुनिक युग में डेटा संचरण के लिए प्रकाशीय तंतु का उपयोग होता है, जिसमें प्रकाश के रूप में डेटा संचरण होता है। प्रकाशीय तंतु में सूचना की गति बहुत अधिक होती है। इंटरनेट, ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सभी आधुनिक संचार प्रणालियों के उदाहरण हैं। मोबाइल संचार में सूक्ष्म तरंगों और रेडियो तरंगों का उपयोग होता है।
संचरण के दौरान सिग्नल में अवांछित परिवर्तन को रव कहते हैं। रव के कारण सिग्नल की गुणवत्ता घटती है। सिग्नल की गुणवत्ता को सिग्नल-से-रव अनुपात (Signal to Noise Ratio, SNR) से मापा जाता है। FM की रव प्रतिरोधक क्षमता AM से अधिक होती है। सिग्नल को रव से अलग करने के लिए संग्राही में सिग्नल को बढ़ाकर और फिल्टर किया जाता है।
| तरंग प्रकार | आवृत्ति परास | उपयोग |
|---|---|---|
| भू तरंग | < 500 kHz | AM रेडियो |
| आकाश तरंग | 2 - 30 MHz | अंतर्राष्ट्रीय रेडियो |
| अंतरिक्ष तरंग | > 30 MHz | टीवी, सूक्ष्म तरंग |
| सैटेलाइट | उच्च आवृत्ति | उपग्रह संचार |
| गुण | AM | FM |
|---|---|---|
| बदलने वाली राशि | आयाम | आवृत्ति |
| बैंडविड्थ | $2f_m$ | अधिक |
| रव प्रभाव | अधिक | कम |
| गुणवत्ता | निम्न | उच्च |
संचार व्यवस्था आधुनिक सूचना क्रांति का आधार है। संचार प्रणाली के अवयवों, संचरण माध्यमों तथा मॉडुलन की संकल्पनाओं की समझ के बिना रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल और इंटरनेट के कार्य को समझना असंभव है। AM और FM जैसी मॉडुलन तकनीकें सूचना को दूर तक भेजने के साधन प्रदान करती हैं। भू तरंग, आकाश तरंग और अंतरिक्ष तरंग संचरण के विभिन्न माध्यम हैं, जबकि भूस्थैतिक उपग्रहों ने वैश्विक संचार को संभव बनाया है। ये संकल्पनाएँ इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और कंप्यूटर नेटवर्किंग के क्षेत्र में आगे के अध्ययन के लिए आधार प्रदान करती हैं। संचार प्रौद्योगिकी का ज्ञान आधुनिक युग के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है।