पिछले अध्यायों में हमने स्थिरवैद्युतिकी का अध्ययन किया, जिसमें आवेश स्थिर रहते हैं। इस अध्याय में हम गतिशील आवेशों अर्थात विद्युत धारा का अध्ययन करेंगे। विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर है। इस अध्याय में ओम का नियम, प्रतिरोध, प्रतिरोधकता, चालकता, धारा का तापीय प्रभाव, विद्युत वाहक बल (emf), आंतरिक प्रतिरोध, विभवमापी, व्हीटस्टोन सेतु तथा विभिन्न उपकरणों का अध्ययन किया जाता है। विद्युत धारा के अध्ययन के बिना आधुनिक जीवन की कल्पना असंभव है, क्योंकि प्रत्येक विद्युत उपकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करता है। यह अध्याय विद्युत परिपथों की मूलभूत संकल्पनाओं पर आधारित है।
किसी चालक में आवेश प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।
$$I = \frac{Q}{t}$$
विद्युत धारा की SI इकाई एम्पियर (A) है। $1 \text{ A} = 1 \text{ C/s}$। धारा की दिशा धनावेश के प्रवाह की दिशा में होती है, जिसे पारंपरिक धारा (Conventional Current) कहते हैं। वास्तव में इलेक्ट्रॉन का प्रवाह धारा की दिशा के विपरीत होता है। धारा एक अदिश राशि है, यद्यपि इसकी दिशा को निर्दिष्ट किया जा सकता है। धारा घनत्व (Current Density) $J$ प्रति एकांक क्षेत्रफल में प्रवाहित धारा है:
$$J = \frac{I}{A}$$
किसी चालक में $n$ इलेक्ट्रॉन घनत्व, $A$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल, $e$ इलेक्ट्रॉन आवेश तथा $v_d$ अपवाह वेग (Drift Velocity) हो, तो धारा:
$$I = n e A v_d$$
ओम के नियम के अनुसार, किसी चालक में प्रवाहित धारा उसके सिरों के बीच लगाए गए विभवांतर के समानुपाती होती है, बशर्ते भौतिक अवस्थाएँ (तापमान आदि) स्थिर रहें।
$$V = IR$$
यहाँ $R$ चालक का प्रतिरोध है, जिसकी SI इकाई ओम ($\Omega$) है। $1 \Omega = 1 \text{ V/A}$। ओम का नियम एक अनुभवजन्य नियम है और सभी पदार्थों पर लागू नहीं होता। अर्धचालक डायोड, थायरिस्टर जैसे उपकरण ओम के नियम का पालन नहीं करते, इन्हें अरैखिक तत्व (Non-ohmic) कहते हैं।
किसी चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल तथा पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।
$$R = \rho \frac{l}{A}$$
यहाँ $\rho$ पदार्थ की प्रतिरोधकता (Resistivity) है। प्रतिरोधकता की SI इकाई ओम-मीटर ($\Omega$ m) है। प्रतिरोधकता केवल पदार्थ की प्रकृति तथा तापमान पर निर्भर करती है, न कि आकार पर।
चालकता प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम है:
$$\sigma = \frac{1}{\rho}$$
इसकी इकाई सीमेंस प्रति मीटर (S/m) है।
इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग, जिससे वे विद्युत क्षेत्र की दिशा में गति करते हैं, अपवाह वेग कहलाता है। विश्रांति काल ($\tau$) वह औसत समय है जो इलेक्ट्रॉन दो क्रमिक संघट्टों के बीच बिना किसी अंतर्क्रिया के व्यतीत करते हैं। अपवाह वेग:
$$v_d = \frac{eE\tau}{m}$$
अपवाह वेग तथा विश्रांति काल से धारा घनत्व:
$$J = n e v_d = \frac{n e^2 \tau}{m} E$$
अतः चालकता $\sigma = \frac{n e^2 \tau}{m}$।
तापमान में वृद्धि के साथ धातुओं की प्रतिरोधकता बढ़ती है। तापमान $T$ पर प्रतिरोधकता:
$$\rho_T = \rho_0 [1 + \alpha (T - T_0)]$$
यहाँ $\alpha$ प्रतिरोध का ताप गुणांक है। धातुओं के लिए $\alpha$ धनात्मक होता है, जबकि अर्धचालकों के लिए ऋणात्मक होता है। अर्धचालकों में ताप बढ़ने पर प्रतिरोधकता घटती है। बहुत निम्न तापमान पर कुछ पदार्थों का प्रतिरोध शून्य हो जाता है, इस घटना को अतिचालकता (Superconductivity) कहते हैं। सामान्य तापमान पर भी कार्बन का ताप गुणांक ऋणात्मक होता है।
विद्युत धारा द्वारा किए गए कार्य की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं।
$$P = VI = I^2R = \frac{V^2}{R}$$
विद्युत शक्ति की SI इकाई वाट (W) है। $1 \text{ W} = 1 \text{ J/s}$। विद्युत ऊर्जा (Electric Energy):
$$W = Pt = VIt = I^2Rt$$
विद्युत ऊर्जा की व्यावहारिक इकाई किलोवाट घंटा (kWh) है। $1 \text{ kWh} = 3.6 \times 10^6 \text{ J}$। यह घरेलू विद्युत मीटर की इकाई है।
किसी बल्ब या उपकरण पर लिखी वाट क्षमता उस उपकरण की विद्युत शक्ति को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, 220 V, 100 W के बल्ब का प्रतिरोध:
$$R = \frac{V^2}{P} = \frac{220^2}{100} = 484 \text{ }\Omega$$
किसी सेल (Cell) द्वारा एकांक आवेश को परिपथ के चारों ओर प्रवाहित करने में दी गई कुल ऊर्जा उसका विद्युत वाहक बल (emf) कहलाता है। सेल का आंतरिक प्रतिरोध $r$ होता है। परिपथ में प्रवाहित धारा:
$$I = \frac{\varepsilon}{R + r}$$
जहाँ $\varepsilon$ emf है तथा $R$ बाह्य प्रतिरोध है। टर्मिनल विभवांतर (Terminal Potential Difference):
$$V = \varepsilon - Ir$$
आंतरिक प्रतिरोध से ही धारा प्रवाह के दौरान टर्मिनल विभवांतर emf से कम होता है। जब परिपथ खुला होता है, तो टर्मिनल विभवांतर emf के बराबर होता है।
किसी संधि बिंदु पर मिलने वाली धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। संधि पर प्रवेश करने वाली धाराएँ = संधि से निकलने वाली धाराएँ। यह आवेश के संरक्षण पर आधारित है।
किसी बंद परिपथ में विभवांतरों का बीजगणितीय योग शून्य होता है। यह ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है। किसी बंद लूप में $\sum \varepsilon = \sum IR$।
विभवमापी एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग emf की सटीक माप के लिए किया जाता है। इसका सिद्धांत यह है कि किसी समान अनुप्रस्थ काट के तार में विभव प्रवणता स्थिर होती है। विभवमापी तार की लंबाई $l$ पर विभवांतर:
$$V = \frac{l}{L} \times V_{total}$$
विभवमापी का मुख्य लाभ यह है कि माप के समय सेल से कोई धारा नहीं ली जाती, इसलिए emf की माप बहुत सटीक होती है। विभवमापी सेल का आंतरिक प्रतिरोध ज्ञात करने की विधि:
$$r = R\left(\frac{l_1 - l_2}{l_2}\right)$$
जहाँ $l_1$ खुले परिपथ की संतुलन लंबाई और $l_2$ $R$ जुड़े होने पर संतुलन लंबाई है।
मीटर ब्रिज व्हीटस्टोन सेतु का व्यावहारिक रूप है। इसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए होता है। संतुलन की स्थिति में:
$$\frac{R}{S} = \frac{l}{100 - l}$$
व्हीटस्टोन सेतु चार प्रतिरोधों का संयोजन है। जब गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य होती है, तो संतुलन की स्थिति होती है:
$$\frac{P}{Q} = \frac{R}{S}$$
संतुलन की स्थिति में सेतु के मध्य भाग से कोई धारा नहीं गुजरती। व्हीटस्टोन सेतु का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध की सटीक माप के लिए किया जाता है।
| भौतिक राशि | सूत्र | इकाई |
|---|---|---|
| विद्युत धारा | $I = Q/t$ | एम्पियर (A) |
| ओम का नियम | $V = IR$ | वोल्ट |
| प्रतिरोध | $R = \rho l/A$ | ओम ($\Omega$) |
| अपवाह वेग | $v_d = eE\tau/m$ | m/s |
| शक्ति | $P = VI = I^2R = V^2/R$ | वाट (W) |
| ऊर्जा | $W = VIt$ | जूल (J) |
| टर्मिनल विभव | $V = \varepsilon - Ir$ | वोल्ट (V) |
| उपकरण | उपयोग | सिद्धांत/सूत्र |
|---|---|---|
| विभवमापी | emf की सटीक माप | स्थिर विभव प्रवणता |
| मीटर ब्रिज | अज्ञात प्रतिरोध | $R/S = l/(100-l)$ |
| व्हीटस्टोन सेतु | प्रतिरोधों की तुलना | $P/Q = R/S$ |
| गैल्वेनोमीटर | धारा की उपस्थिति का पता | चुंबकीय बल आघूर्ण |
विद्युत धारा का अध्ययन व्यावहारिक जीवन में विद्युत का उपयोग करने वाले प्रत्येक उपकरण को समझने का आधार है। ओम का नियम, प्रतिरोध, शक्ति, विद्युत वाहक बल तथा किरखॉफ के नियम विद्युत परिपथों के विश्लेषण की कुंजी हैं। विभवमापी और व्हीटस्टोन सेतु जैसे उपकरण मापन की सटीकता को प्रदर्शित करते हैं। इन संकल्पनाओं की गहरी समझ आगे के अध्यायों — चुंबकत्व, विद्युतचुंबकीय प्रेरण तथा प्रत्यावर्ती धारा — के लिए आवश्यक है। नियमित समस्या-समाधान अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।