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1. परिचय

इस अध्याय में हम विकिरण (प्रकाश) तथा द्रव्य (पदार्थ) की द्वैत प्रकृति का अध्ययन करेंगे। पिछले अध्याय में हमने देखा कि प्रकाश तरंग प्रकृति रखता है। परंतु कुछ घटनाएँ (जैसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव) ऐसी हैं जिन्हें तरंग सिद्धांत द्वारा नहीं समझाया जा सकता। इन्हें समझाने के लिए प्रकाश को फोटॉन नामक कणों के रूप में मानना पड़ता है। इस प्रकार प्रकाश की द्वैत (तरंग-कण) प्रकृति है। साथ ही, डी-ब्रॉगली ने सिद्ध किया कि द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) भी तरंग गुण रखते हैं। इस अध्याय में प्रकाश-विद्युत प्रभाव, फोटॉन, आइंस्टीन का समीकरण, डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य तथा इलेक्ट्रॉन विवर्तन का अध्ययन किया जाता है।

2. प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect)

जब उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु की सतह पर आपतित होता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। इस घटना को प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहते हैं। इन उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश-इलेक्ट्रॉन (Photoelectrons) कहते हैं।

प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नियम:

  1. प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की संख्या आपतित प्रकाश की तीव्रता के समानुपाती होती है।
  2. प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है, तीव्रता पर नहीं।
  3. प्रत्येक धातु के लिए एक न्यूनतम आवृत्ति होती है, जिसे देहली आवृत्ति ($\nu_0$) कहते हैं। इससे कम आवृत्ति के प्रकाश से कोई उत्सर्जन नहीं होता।
  4. प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन बिना किसी समय विलंब के तुरंत होता है (काले समय से कम)।

तरंग सिद्धांत से अस्पष्टीकृत बिंदु:

  1. तरंग सिद्धांत के अनुसार अधिकतम गतिज ऊर्जा तीव्रता पर निर्भर होनी चाहिए, परंतु वास्तव में यह आवृत्ति पर निर्भर करती है।
  2. तरंग सिद्धांत देहली आवृत्ति की व्याख्या नहीं कर सकता।
  3. तरंग सिद्धांत के अनुसार उत्सर्जन में समय विलंब होना चाहिए, जबकि वास्तव में यह तत्काल होता है।

3. फोटॉन और आइंस्टीन का सिद्धांत (Photon and Einstein's Theory)

आइंस्टीन ने 1905 में प्रकाश-विद्युत प्रभाव की व्याख्या प्लांक की क्वांटम संकल्पना के आधार पर की। उन्होंने कहा कि प्रकाश ऊर्जा के कणों (फोटॉन) से बना है। प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा:

$$E = h\nu$$

यहाँ $h = 6.63 \times 10^{-34}$ J s प्लांक स्थिरांक है। फोटॉन का संवेग:

$$p = \frac{h}{\lambda} = \frac{h\nu}{c}$$

फोटॉन विराम द्रव्यमान-रहित होता है। प्रकाश की तीव्रता फोटॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।

4. आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण (Einstein's Photoelectric Equation)

आइंस्टीन के अनुसार, आपतित फोटॉन की ऊर्जा दो भागों में विभाजित होती है — कार्य फलन (Work Function $\phi$) और अधिकतम गतिज ऊर्जा:

$$h\nu = \phi + K_{max}$$

$$K_{max} = h\nu - \phi = h(\nu - \nu_0)$$

जहाँ $\phi = h\nu_0$ कार्य फलन है। निरोधी विभव (Stopping Potential):

$$eV_0 = K_{max}$$

$$V_0 = \frac{h}{e}(\nu - \nu_0)$$

निरोधी विभव वह न्यूनतम विपरीत विभव है जो सबसे तेज इलेक्ट्रॉन को रोक सके। $V_0$ और $\nu$ के बीच ग्राफ सरल रेखा होती है जिसकी प्रवणता $h/e$ होती है। इस ग्राफ से ही प्लांक स्थिरांक का मान ज्ञात किया जा सकता है।

5. प्रकाश-विद्युत प्रभाव के उपयोग

  1. प्रकाश-विद्युत सेल का उपयोग द्वारों के स्वचालित उद्घाटन (सेंसर) में।
  2. सिनेमा में ध्वनि रिकॉर्डिंग (साउंड ट्रैक) के पुनरुत्पादन में।
  3. टेलीविजन प्रसारण में।
  4. फोटो-मल्टीप्लायर में।
  5. विद्युत अलार्म तथा धुआँ संसूचक में।

6. विकिरण का कण स्वरूप (Particle Nature of Radiation)

फोटॉन के गुण:

  1. फोटॉन की चाल हमेशा प्रकाश की चाल $c$ होती है।
  2. फोटॉन विराम अवस्था में नहीं रह सकता; विराम द्रव्यमान शून्य होता है।
  3. फोटॉन की ऊर्जा $E = h\nu$ तथा संवेग $p = h/\lambda$ होता है।
  4. फोटॉन विद्युत आवेशरहित होता है।
  5. फोटॉनों की संख्या निर्धारित होती है, परंतु व्यक्तिगत फोटॉन की ऊर्जा तीव्रता से स्वतंत्र होती है।

7. डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य (de Broglie Wavelength)

1924 में डी-ब्रॉगली ने प्रस्तावित किया कि जिस प्रकार प्रकाश (तरंग) का कण स्वरूप होता है, उसी प्रकार द्रव्य कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) का भी तरंग स्वरूप होता है। किसी गतिशील कण का संवेग $p$ हो, तो उसकी तरंगदैर्घ्य:

$$\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$$

त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए (विभवान्तर $V$ पर):

$$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$$

संख्यात्मक रूप में:

$$\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}} \text{ nm}$$

जहाँ $V$ वोल्ट में है। 54 V पर इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्घ्य लगभग 0.165 nm होती है। सामान्य वस्तुओं का द्रव्यमान बहुत बड़ा होने के कारण उनकी डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य नगण्य होती है, इसलिए हम मैक्रोस्कोपिक वस्तुओं में तरंग गुण नहीं देखते।

8. इलेक्ट्रॉन विवर्तन (Electron Diffraction)

डेविसन और जर्मर ने 1927 में प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉनों की तरंग प्रकृति सिद्ध की। उन्होंने इलेक्ट्रॉनों को निकेल क्रिस्टल से प्रकीर्णित कराया और विवर्तन पैटर्न प्राप्त किया। इस प्रयोग ने डी-ब्रॉगली सिद्धांत की पुष्टि की। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी इसी सिद्धांत पर आधारित है — इलेक्ट्रॉनों की तरंगदैर्घ्य प्रकाश से बहुत कम होती है, इसलिए इसका विभेदन अधिक होता है।

9. तरंग-कण द्वैत (Wave-Particle Duality)

प्रकाश तथा द्रव्य दोनों की द्वैत प्रकृति होती है। कुछ घटनाएँ (व्यतिकरण, विवर्तन, ध्रुवण) तरंग स्वरूप को दर्शाती हैं, जबकि कुछ (प्रकाश-विद्युत प्रभाव, कॉम्पटन प्रभाव) कण स्वरूप को। न्यूटन का कणिका सिद्धांत प्रकाश के परावर्तन व अपवर्तन को समझा सकता है, परंतु व्यतिकरण व विवर्तन को नहीं। इसी प्रकार तरंग सिद्धांत प्रकाश-विद्युत प्रभाव को नहीं समझा सकता। अतः प्रकाश की सम्पूर्ण व्याख्या के लिए दोनों दृष्टिकोण आवश्यक हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: महत्वपूर्ण सूत्र

राशि सूत्र
फोटॉन ऊर्जा $E = h\nu$
फोटॉन संवेग $p = h/\lambda$
आइंस्टीन समीकरण $K_{max} = h\nu - \phi$
निरोधी विभव $eV_0 = K_{max}$
डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य $\lambda = h/mv$
त्वरित इलेक्ट्रॉन $\lambda = 1.227/\sqrt{V}$ nm

तालिका 2: तरंग और कण गुण

घटना तरंग कण
व्यतिकरण
विवर्तन
प्रकाश-विद्युत प्रभाव
कॉम्पटन प्रभाव

माइंड मैप

graph TD A["द्वैत प्रकृति"] --> B["प्रकाश का कण स्वरूप"] B --> B1["प्रकाश-विद्युत प्रभाव"] B --> B2["फोटॉन E = hν"] B --> B3["आइंस्टीन समीकरण"] A --> C["प्रकाश का तरंग स्वरूप"] C --> C1["व्यतिकरण"] C --> C2["विवर्तन"] A --> D["द्रव्य का तरंग स्वरूप"] D --> D1["डी-ब्रॉगली λ = h/mv"] D --> D2["डेविसन-जर्मर प्रयोग"] A --> E["उपयोग"] E --> E1["इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी"] E --> E2["प्रकाश-विद्युत सेल"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: प्रकाश-विद्युत प्रभाव

प्रकाश-विद्युत प्रभाव धातु प्लेट (एनोड) प्रकाश hν e⁻ (प्रकाश-इलेक्ट्रॉन) संग्राहक (कैथोड) Kmax = hν - φ वनदिश: ν < ν₀ पर उत्सर्जन नहीं निरोधी विभव eV₀ = Kmax स्वर्ण नियम: Kmax = hν - hν₀, ग्राफ की प्रवणता h/e गतिज ऊर्जा आवृत्ति पर, संख्या तीव्रता पर निर्भर

आरेख 2: डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य ग्राफ

V₀ - ν ग्राफ (प्रकाश-विद्युत प्रभाव) ν V₀ ν₀ (देहली आवृत्ति) (ν, V₀) प्रवणता = h/e ν-अक्ष पर प्रतिच्छेद = ν₀ V₀ = (h/e)(ν - ν₀) Golden Rule: V₀-ν ग्राफ सरल रेखा, प्रवणता h/e, अंत:खंड ν₀ इसी से प्लांक स्थिरांक ज्ञात होता है

सामान्य गलतियाँ

  1. प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा तीव्रता पर निर्भर मानना; वास्तव में यह आवृत्ति पर निर्भर करती है, संख्या तीव्रता पर।
  2. फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य होता है, इसे इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के बराबर मानना गलत है।
  3. डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य के सूत्र में $h/mv$ के स्थान पर गलत सूत्र लिखना।
  4. त्वरित इलेक्ट्रॉन के सूत्र $\lambda = 1.227/\sqrt{V}$ nm में इकाइयाँ भूलना; V वोल्ट में होता है।
  5. निरोधी विभव को अधिकतम गतिज ऊर्जा नहीं बल्कि सभी इलेक्ट्रॉनों को रोकने वाला विभव मानना।
  6. वनदिश आवृत्ति पर धातु का कार्य फलन निर्भर करता है यह भ्रम; कार्य फलन धातु का गुण है।
  7. V₀-ν ग्राफ की प्रवणता को $e/h$ लिखना; सही मान $h/e$ है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण $K_{max} = h\nu - \phi$ रटें और संख्यात्मक प्रश्नों में प्रयोग करें।
  2. निरोधी विभव $eV_0 = K_{max}$ से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें।
  3. डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य के तीनों रूप ($\lambda = h/mv$, $\lambda = h/\sqrt{2mK}$, $\lambda = 1.227/\sqrt{V}$ nm) याद रखें।
  4. प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नियमों को सूचीबद्ध करने वाले सैद्धांतिक प्रश्न परीक्षा में नियमित रूप से आते हैं।
  5. तरंग सिद्धांत के असफलताओं के कारणों की सूची याद रखें।
  6. डेविसन-जर्मर प्रयोग का वर्णन और उसके निष्कर्ष लिखना सीखें।
  7. फोटॉन के गुण (विराम द्रव्यमान शून्य, चाल c, आवेश शून्य) याद रखें।

निष्कर्ष

विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति आधुनिक भौतिकी की एक मौलिक संकल्पना है। प्रकाश-विद्युत प्रभाव प्रकाश की कण प्रकृति को सिद्ध करता है और आइंस्टीन के समीकरण ने क्वांटम सिद्धांत की नींव रखी। डी-ब्रॉगली की परिकल्पना ने द्रव्य कणों की तरंग प्रकृति को स्थापित किया, जिसकी पुष्टि डेविसन-जर्मर प्रयोग द्वारा हुई। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी जैसे उपकरण इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित हैं। तरंग-कण द्वैत प्रकृति और वस्तुओं के व्यवहार को समझने के लिए दोनों दृष्टिकोण आवश्यक हैं। अगले अध्याय — परमाणु — में हम इन्हीं संकल्पनाओं को परमाणु संरचना पर लागू करेंगे।