इस अध्याय में हम विकिरण (प्रकाश) तथा द्रव्य (पदार्थ) की द्वैत प्रकृति का अध्ययन करेंगे। पिछले अध्याय में हमने देखा कि प्रकाश तरंग प्रकृति रखता है। परंतु कुछ घटनाएँ (जैसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव) ऐसी हैं जिन्हें तरंग सिद्धांत द्वारा नहीं समझाया जा सकता। इन्हें समझाने के लिए प्रकाश को फोटॉन नामक कणों के रूप में मानना पड़ता है। इस प्रकार प्रकाश की द्वैत (तरंग-कण) प्रकृति है। साथ ही, डी-ब्रॉगली ने सिद्ध किया कि द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) भी तरंग गुण रखते हैं। इस अध्याय में प्रकाश-विद्युत प्रभाव, फोटॉन, आइंस्टीन का समीकरण, डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य तथा इलेक्ट्रॉन विवर्तन का अध्ययन किया जाता है।
जब उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु की सतह पर आपतित होता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। इस घटना को प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहते हैं। इन उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश-इलेक्ट्रॉन (Photoelectrons) कहते हैं।
आइंस्टीन ने 1905 में प्रकाश-विद्युत प्रभाव की व्याख्या प्लांक की क्वांटम संकल्पना के आधार पर की। उन्होंने कहा कि प्रकाश ऊर्जा के कणों (फोटॉन) से बना है। प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा:
$$E = h\nu$$
यहाँ $h = 6.63 \times 10^{-34}$ J s प्लांक स्थिरांक है। फोटॉन का संवेग:
$$p = \frac{h}{\lambda} = \frac{h\nu}{c}$$
फोटॉन विराम द्रव्यमान-रहित होता है। प्रकाश की तीव्रता फोटॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।
आइंस्टीन के अनुसार, आपतित फोटॉन की ऊर्जा दो भागों में विभाजित होती है — कार्य फलन (Work Function $\phi$) और अधिकतम गतिज ऊर्जा:
$$h\nu = \phi + K_{max}$$
$$K_{max} = h\nu - \phi = h(\nu - \nu_0)$$
जहाँ $\phi = h\nu_0$ कार्य फलन है। निरोधी विभव (Stopping Potential):
$$eV_0 = K_{max}$$
$$V_0 = \frac{h}{e}(\nu - \nu_0)$$
निरोधी विभव वह न्यूनतम विपरीत विभव है जो सबसे तेज इलेक्ट्रॉन को रोक सके। $V_0$ और $\nu$ के बीच ग्राफ सरल रेखा होती है जिसकी प्रवणता $h/e$ होती है। इस ग्राफ से ही प्लांक स्थिरांक का मान ज्ञात किया जा सकता है।
फोटॉन के गुण:
1924 में डी-ब्रॉगली ने प्रस्तावित किया कि जिस प्रकार प्रकाश (तरंग) का कण स्वरूप होता है, उसी प्रकार द्रव्य कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) का भी तरंग स्वरूप होता है। किसी गतिशील कण का संवेग $p$ हो, तो उसकी तरंगदैर्घ्य:
$$\lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv}$$
त्वरित इलेक्ट्रॉन के लिए (विभवान्तर $V$ पर):
$$\lambda = \frac{h}{\sqrt{2meV}}$$
संख्यात्मक रूप में:
$$\lambda = \frac{1.227}{\sqrt{V}} \text{ nm}$$
जहाँ $V$ वोल्ट में है। 54 V पर इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्घ्य लगभग 0.165 nm होती है। सामान्य वस्तुओं का द्रव्यमान बहुत बड़ा होने के कारण उनकी डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य नगण्य होती है, इसलिए हम मैक्रोस्कोपिक वस्तुओं में तरंग गुण नहीं देखते।
डेविसन और जर्मर ने 1927 में प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉनों की तरंग प्रकृति सिद्ध की। उन्होंने इलेक्ट्रॉनों को निकेल क्रिस्टल से प्रकीर्णित कराया और विवर्तन पैटर्न प्राप्त किया। इस प्रयोग ने डी-ब्रॉगली सिद्धांत की पुष्टि की। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी इसी सिद्धांत पर आधारित है — इलेक्ट्रॉनों की तरंगदैर्घ्य प्रकाश से बहुत कम होती है, इसलिए इसका विभेदन अधिक होता है।
प्रकाश तथा द्रव्य दोनों की द्वैत प्रकृति होती है। कुछ घटनाएँ (व्यतिकरण, विवर्तन, ध्रुवण) तरंग स्वरूप को दर्शाती हैं, जबकि कुछ (प्रकाश-विद्युत प्रभाव, कॉम्पटन प्रभाव) कण स्वरूप को। न्यूटन का कणिका सिद्धांत प्रकाश के परावर्तन व अपवर्तन को समझा सकता है, परंतु व्यतिकरण व विवर्तन को नहीं। इसी प्रकार तरंग सिद्धांत प्रकाश-विद्युत प्रभाव को नहीं समझा सकता। अतः प्रकाश की सम्पूर्ण व्याख्या के लिए दोनों दृष्टिकोण आवश्यक हैं।
| राशि | सूत्र |
|---|---|
| फोटॉन ऊर्जा | $E = h\nu$ |
| फोटॉन संवेग | $p = h/\lambda$ |
| आइंस्टीन समीकरण | $K_{max} = h\nu - \phi$ |
| निरोधी विभव | $eV_0 = K_{max}$ |
| डी-ब्रॉगली तरंगदैर्घ्य | $\lambda = h/mv$ |
| त्वरित इलेक्ट्रॉन | $\lambda = 1.227/\sqrt{V}$ nm |
| घटना | तरंग | कण |
|---|---|---|
| व्यतिकरण | ✔ | ✖ |
| विवर्तन | ✔ | ✖ |
| प्रकाश-विद्युत प्रभाव | ✖ | ✔ |
| कॉम्पटन प्रभाव | ✖ | ✔ |
विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति आधुनिक भौतिकी की एक मौलिक संकल्पना है। प्रकाश-विद्युत प्रभाव प्रकाश की कण प्रकृति को सिद्ध करता है और आइंस्टीन के समीकरण ने क्वांटम सिद्धांत की नींव रखी। डी-ब्रॉगली की परिकल्पना ने द्रव्य कणों की तरंग प्रकृति को स्थापित किया, जिसकी पुष्टि डेविसन-जर्मर प्रयोग द्वारा हुई। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी जैसे उपकरण इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित हैं। तरंग-कण द्वैत प्रकृति और वस्तुओं के व्यवहार को समझने के लिए दोनों दृष्टिकोण आवश्यक हैं। अगले अध्याय — परमाणु — में हम इन्हीं संकल्पनाओं को परमाणु संरचना पर लागू करेंगे।