इस अध्याय में हम वैद्युतचुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) का अध्ययन करेंगे। वैद्युतचुंबकीय तरंगें दोलनशील विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की तरंगें हैं, जो प्रकाश की चाल से अंतरिक्ष में संचरण करती हैं। जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने 1864 में सैद्धांतिक रूप से सिद्ध किया कि विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर सृजित कर सकते हैं और तरंगों के रूप में संचरित होते हैं। बाद में हेनरिक हर्ट्ज ने प्रयोगात्मक रूप से इन तरंगों का उत्पादन और संसूचन किया। वैद्युतचुंबकीय तरंगों में दृश्य प्रकाश, रेडियो तरंगें, सूक्ष्म तरंगें, अवरक्त विकिरण, पराबैंगनी विकिरण, X-किरणें तथा गामा किरणें शामिल हैं। इनका उपयोग संचार, चिकित्सा, रडार और खगोल विज्ञान में होता है।
मैक्सवेल ने यह दिखाया कि एम्पियर का परिपथीय नियम अपूर्ण था। संधारित्र वाले परिपथ में, जब संधारित्र आवेशित हो रहा होता है, तो संधारित्र की प्लेटों के बीच कोई चालन धारा नहीं होती, परंतु चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। मैक्सवेल ने इसे समझाने के लिए विस्थापन धारा की अवधारणा प्रस्तुत की:
$$I_d = \epsilon_0 \frac{d\phi_E}{dt}$$
यहाँ $\phi_E$ विद्युत फ्लक्स है। विस्थापन धारा चालन धारा के समान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। संशोधित एम्पियर-मैक्सवेल नियम:
$$\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 (I_c + I_d) = \mu_0 I_c + \mu_0\epsilon_0\frac{d\phi_E}{dt}$$
विस्थापन धारा का महत्व यह है कि इसके बिना विद्युतचुंबकीय तरंगों का संचरण संभव नहीं होता।
विद्युत और चुंबकत्व के चार मौलिक नियमों को मिलाकर मैक्सवेल की चार समीकरणें प्राप्त होती हैं:
$$\oint \vec{E}\cdot d\vec{A} = \frac{q}{\epsilon_0}$$
$$\oint \vec{B}\cdot d\vec{A} = 0$$
$$\oint \vec{E}\cdot d\vec{l} = -\frac{d\phi_B}{dt}$$
$$\oint \vec{B}\cdot d\vec{l} = \mu_0 I + \mu_0\epsilon_0\frac{d\phi_E}{dt}$$
ये चारों समीकरणें संपूर्ण विद्युतचुंबकत्व का गणितीय सार हैं। मैक्सवेल ने इन समीकरणों के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकाला कि विद्युतचुंबकीय तरंगें अस्तित्व में होती हैं।
मैक्सवेल के सिद्धांत के अनुसार, विद्युतचुंबकीय तरंगों में दोलनशील विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ और चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ एक-दूसरे के लंबवत होते हैं और दोनों ही संचरण की दिशा के लंबवत होते हैं। अतः विद्युतचुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves) होती हैं।
मैक्सवेल ने सिद्ध किया कि विद्युतचुंबकीय तरंगों की चाल:
$$c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}$$
$\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7}$ T m/A और $\epsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}$ C²/N m² रखने पर:
$$c = 3 \times 10^8 \text{ m/s}$$
यह मान प्रकाश की प्रयोगात्मक चाल के बिल्कुल समान निकला, जिससे यह सिद्ध हुआ कि प्रकाश भी एक विद्युतचुंबकीय तरंग है।
$$v = \frac{1}{\sqrt{\mu\epsilon}} = \frac{c}{n}$$
यहाँ $n$ माध्यम का अपवर्तनांक है। विद्युतचुंबकीय तरंग में $\vec{E}$ और $\vec{B}$ के परिमाणों में संबंध:
$$\frac{E_0}{B_0} = c$$
तरंग की ऊर्जा घनत्व:
$$u = \frac{1}{2}\epsilon_0 E_0^2 = \frac{B_0^2}{2\mu_0}$$
विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की ऊर्जा बराबर होती है।
विद्युतचुंबकीय तरंगों का आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य के आधार पर क्रमिक वर्गीकरण विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहलाता है। सभी विद्युतचुंबकीय तरंगों की निर्वात में चाल $c = 3 \times 10^8$ m/s समान होती है।
$$c = \nu\lambda$$
स्पेक्ट्रम में बढ़ती आवृत्ति (घटते तरंगदैर्घ्य) के क्रम में: रेडियो तरंगें, सूक्ष्म तरंगें, अवरक्त विकिरण, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी विकिरण, X-किरणें, गामा किरणें।
| तरंग | तरंगदैर्घ्य परास |
|---|---|
| रेडियो तरंगें | $10^3$ m से $10^{-1}$ m |
| सूक्ष्म तरंगें | $10^{-1}$ m से $10^{-3}$ m |
| अवरक्त | $10^{-3}$ m से $7 \times 10^{-7}$ m |
| दृश्य प्रकाश | $7 \times 10^{-7}$ m से $4 \times 10^{-7}$ m |
| पराबैंगनी | $4 \times 10^{-7}$ m से $10^{-8}$ m |
| X-किरणें | $10^{-8}$ m से $10^{-13}$ m |
| गामा किरणें | $10^{-13}$ m से छोटी |
AM और FM प्रसारण, टेलीविजन, रेडियो नेविगेशन में उपयोग।
रडार, माइक्रोवेव ओवन, उपग्रह संचार में उपयोग। ये रात में अच्छी तरह संचरण करती हैं।
ऊष्मा विकिरण, नाइट विजन उपकरण, रिमोट कंट्रोल, उष्मा कैमरा।
दृष्टि, प्रकाशिकी, फोटोग्राफी।
कीटाणुनाशक लैंप, सनटैन, विटामिन D निर्माण। इससे त्वचा कैंसर भी हो सकता है।
चिकित्सा निदान (हड्डी टूटने का पता), औद्योगिक परीक्षण, क्रिस्टलोग्राफी।
कैंसर उपचार (रेडियोथेरेपी), खाद्य परिरक्षण, नाभिकीय रिएक्टर।
हेनरिक हर्ट्ज ने 1888 में स्पार्क अंतराल (Spark Gap) तकनीक द्वारा रेडियो तरंगों का उत्पादन किया। उन्होंने एक परिपथ में उच्च वोल्टता से स्पार्क उत्पन्न करके दूसरे परिपथ (रेजोनेटर) में तरंगें ग्रहण कीं। बाद में गुग्लिल्मो मार्कोनी ने रेडियो संचार का व्यावसायिक रूप से विकास किया। रेडियो तरंगों के संसूचन के लिए ऐन्टिना, ट्यूनर और डेमोडुलेटर का उपयोग होता है।
| विकिरण | तरंगदैर्घ्य | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| रेडियो तरंगें | > $10^{-1}$ m | प्रसारण |
| सूक्ष्म तरंगें | $10^{-1}$ - $10^{-3}$ m | रडार, ओवन |
| अवरक्त | $10^{-3}$ - $7\times10^{-7}$ m | नाइट विजन |
| दृश्य प्रकाश | $7\times10^{-7}$ - $4\times10^{-7}$ m | दृष्टि |
| पराबैंगनी | $4\times10^{-7}$ - $10^{-8}$ m | कीटाणुशोधन |
| X-किरणें | $10^{-8}$ - $10^{-13}$ m | चिकित्सा |
| गामा किरणें | < $10^{-13}$ m | कैंसर उपचार |
| समीकरण | नियम |
|---|---|
| $\oint E\cdot dA = q/\epsilon_0$ | गाउस का विद्युत नियम |
| $\oint B\cdot dA = 0$ | गाउस का चुंबकत्व नियम |
| $\oint E\cdot dl = -d\phi_B/dt$ | फैराडे का नियम |
| $\oint B\cdot dl = \mu_0I + \mu_0\epsilon_0 d\phi_E/dt$ | एम्पियर-मैक्सवेल |
वैद्युतचुंबकीय तरंगें अध्याय विद्युत और चुंबकत्व को एकीकृत करने वाली संकल्पनाओं को प्रस्तुत करता है। मैक्सवेल की समीकरणें संपूर्ण विद्युतचुंबकत्व का गणितीय सार हैं। विस्थापन धारा और वैद्युतचुंबकीय तरंगों की चाल $c = 1/\sqrt{\mu_0\epsilon_0}$ की खोज ने यह सिद्ध किया कि प्रकाश भी एक विद्युतचुंबकीय तरंग है। विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम रेडियो तरंगों से गामा किरणों तक फैला हुआ है, और प्रत्येक तरंग के अद्वितीय अनुप्रयोग हैं। इन संकल्पनाओं की समझ संचार प्रणाली, रिमोट सेंसिंग, चिकित्सा इमेजिंग तथा खगोल विज्ञान के आगे के अध्ययन के लिए आवश्यक है। इस अध्याय का सैद्धांतिक अभ्यास परीक्षा में उच्च अंक दिलाता है।