इस अध्याय में हम पदार्थों के चुंबकीय गुणों का अध्ययन करेंगे। सभी पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र के प्रति कुछ प्रतिक्रिया करते हैं, चाहे वह कम ही क्यों न हो। कुछ पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र में हल्के से आकर्षित होते हैं, कुछ प्रतिकर्षित होते हैं, तथा कुछ (लोहा, निकेल, कोबाल्ट) प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं। इन गुणों के आधार पर पदार्थों को अनुचुंबकीय (Paramagnetic), प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) तथा लौहचुंबकीय (Ferromagnetic) में वर्गीकृत किया जाता है। इस अध्याय में चुंबकीय द्विध्रुव, चुंबकत्व के कारण, चुंबकीय फ्लक्स, ध्रुव प्रबलता, चुंबकीय क्षेत्र में बल आघूर्ण तथा चुंबकीय पदार्थों के विस्तृत गुणों का अध्ययन किया जाता है।
बार चुंबक (Bar Magnet) एक चुंबकीय द्विध्रुव है जिसके दो ध्रुव होते हैं — उत्तरी ध्रुव (N) और दक्षिणी ध्रुव (S)। बार चुंबक का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण:
$$m = q_m \times 2l$$
यहाँ $q_m$ ध्रुव प्रबलता (Pole Strength) और $2l$ दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी है। चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण एक सदिश राशि है जिसकी दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है। ध्रुव प्रबलता की इकाई एम्पियर-मीटर (A m) और चुंबकीय आघूर्ण की इकाई एम्पियर-मीटर² (A m²) होती है।
किसी चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में रखे चुंबकीय द्विध्रुव पर बल आघूर्ण:
$$\tau = mB\sin\theta$$
जहाँ $\theta$ द्विध्रुव आघूर्ण और क्षेत्र के बीच का कोण है। जब चुंबक क्षेत्र के अनुदिश संरेखित होता है, तो $\theta = 0$ और बल आघूर्ण शून्य होता है।
चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा:
$$U = -mB\cos\theta$$
संरेखित अवस्था ($\theta = 0$) में ऊर्जा न्यूनतम ($-mB$) और प्रति-संरेखित अवस्था ($\theta = 180^\circ$) में अधिकतम ($+mB$) होती है।
चुंबक के केंद्र से दूरी $r$ पर अक्षीय स्थिति में (जब $r \gg 2l$):
$$B_{ax} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2m}{r^3}$$
चुंबक के केंद्र से दूरी $r$ पर निरक्षीय स्थिति में:
$$B_{eq} = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{m}{r^3}$$
ध्यान दें कि अक्षीय क्षेत्र निरक्षीय क्षेत्र का दोगुना होता है, ठीक वैसे ही जैसे वैद्युत द्विध्रुव के लिए था। बार चुंबक की अक्ष पर तथा समद्विभाजक पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशाएँ विपरीत होती हैं।
गॉस के चुंबकत्व नियम के अनुसार, किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुंबकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है।
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{A} = 0$$
इसका कारण यह है कि चुंबकीय एकल ध्रुव (Monopole) का अस्तित्व नहीं होता। चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा बंद लूप बनाती हैं। चुंबक को काटने पर भी हमें एकल ध्रुव नहीं मिलते, बल्कि हर टुकड़ा एक नया द्विध्रुव बन जाता है।
धारा $I$ वाला क्षेत्रफल $A$ का लूप चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण रखता है:
$$m = IA$$
किसी बिंदु पर लूप का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण दाएँ हाथ के नियम से ज्ञात होता है। N फेरों के लिए $m = NIA$। इलेक्ट्रॉन के परिक्रमण से भी चुंबकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है:
$$m = \frac{e}{2m_e} L$$
जहाँ $L$ कोणीय संवेग है। इसी कारण परमाणुओं में चुंबकीय आघूर्ण होता है और पदार्थ चुंबकीय गुण प्रदर्शित करते हैं। प्रति कण चुंबकीय आघूर्ण को बोर मैग्नेटन (Bohr Magneton) कहते हैं:
$$\mu_B = \frac{eh}{4\pi m_e} = 9.27 \times 10^{-24} \text{ A m}^2$$
पदार्थों में चुंबकत्व का मूल कारण इलेक्ट्रॉनों की गति है। प्रत्येक इलेक्ट्रॉन परिक्रमण के कारण कक्षीय चुंबकीय आघूर्ण तथा स्वयं के चक्रण (Spin) के कारण चक्रण चुंबकीय आघूर्ण रखता है। अधिकांश परमाणुओं में कुल चुंबकीय आघूर्ण शून्य या बहुत कम होता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन जोड़ों में होते हैं और उनके चक्रण विपरीत होते हैं। कुछ परमाणुओं में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिसके कारण कुल चुंबकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है।
इन पदार्थों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं और प्रत्येक परमाणु का चुंबकीय आघूर्ण शून्य नहीं होता। बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में इनके परमाणु आंशिक रूप से संरेखित हो जाते हैं, जिससे हल्का आकर्षण होता है। इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति (Susceptibility) धनात्मक और बहुत कम होती है। ताप बढ़ने पर अनुचुंबकत्व घटता है (क्यूरी का नियम)। उदाहरण: एल्युमिनियम, सोडियम, कैल्शियम, ऑक्सीजन।
इन पदार्थों में सभी इलेक्ट्रॉन जोड़े में होते हैं और परमाणु का कुल चुंबकीय आघूर्ण शून्य होता है। बाहरी क्षेत्र में इनमें विपरीत दिशा में दुर्बल चुंबकत्व उत्पन्न होता है। इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है। प्रतिचुंबकीय पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र द्वारा हल्के से प्रतिकर्षित होते हैं। उदाहरण: बिस्मथ, ताँबा, सीसा, जल। प्रतिचुंबकत्व ताप से स्वतंत्र होता है।
इन पदार्थों में प्रबल चुंबकत्व होता है। इनमें चुंबकीय आघूर्ण वाले परमाणु बड़े क्षेत्रों (डोमेन) में स्वतः संरेखित रहते हैं। बाहरी क्षेत्र में डोमेन संरेखित होकर प्रबल चुंबकत्व उत्पन्न करते हैं। इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति बहुत बड़ी और धनात्मक होती है। उदाहरण: लोहा, कोबाल्ट, निकेल। इनमें पारगम्यता (Permeability) अत्यधिक होती है। क्यूरी तापमान से ऊपर लौहचुंबकीय पदार्थ अनुचुंबकीय बन जाते हैं।
लौहचुंबकीय पदार्थ के लिए क्यूरी तापमान ($T_c$) के ऊपर, अनुचुंबकीय क्षेत्र में उनकी प्रवृत्ति:
$$\chi = \frac{C}{T - T_c}$$
यहाँ $C$ क्यूरी नियतांक है। अनुचुंबकीय पदार्थों के लिए यह $\chi = C/T$ होता है (क्यूरी का नियम)।
$$\vec{B} = \mu_0(\vec{H} + \vec{M})$$
यहाँ $\vec{H}$ चुंबकीय क्षेत्र तीव्रता और $\vec{M}$ चुंबकन (Magnetization) है। चुंबकन:
$$M = \frac{m}{V} = \chi H$$
यहाँ $\chi$ चुंबकीय प्रवृत्ति है। चुंबकीय पारगम्यता:
$$\mu = \mu_0(1 + \chi)$$
आपेक्षिक पारगम्यता $\mu_r = 1 + \chi$। लौहचुंबकीय पदार्थों में $\mu_r$ बहुत बड़ा होता है।
जब लौहचुंबकीय पदार्थ को चक्रीय रूप से चुंबकित किया जाता है, तो चुंबकन क्षेत्र में पीछे रह जाता है। इस घटना को शैथिल्य कहते हैं। B-H वक्र में शैथिल्य लूप (Hysteresis Loop) बनता है। लूप का क्षेत्रफल प्रति चक्र व्यय ऊर्जा को दर्शाता है। ट्रांसफार्मर कोर के लिए नरम लोहे का उपयोग किया जाता है, जिसमें शैथिल्य ह्रास कम होता है, जबकि स्थायी चुंबक बनाने के लिए कठोर स्टील का उपयोग होता है।
| गुण | अनुचुंबकीय | प्रतिचुंबकीय | लौहचुंबकीय |
|---|---|---|---|
| प्रवृत्ति (χ) | धनात्मक, छोटी | ऋणात्मक, छोटी | बहुत बड़ी धनात्मक |
| परमाणु आघूर्ण | शून्य नहीं | शून्य | शून्य नहीं (डोमेन) |
| ताप प्रभाव | घटता है | स्वतंत्र | क्यूरी ताप पर परिवर्तन |
| उदाहरण | Al, Na, O₂ | Bi, Cu, Pb | Fe, Co, Ni |
| राशि | सूत्र |
|---|---|
| चुंबकीय आघूर्ण | $m = q_m \times 2l$ |
| अक्षीय क्षेत्र | $B_{ax} = \frac{\mu_0}{4\pi}\frac{2m}{r^3}$ |
| निरक्षीय क्षेत्र | $B_{eq} = \frac{\mu_0}{4\pi}\frac{m}{r^3}$ |
| बल आघूर्ण | $\tau = mB\sin\theta$ |
| स्थितिज ऊर्जा | $U = -mB\cos\theta$ |
| बोर मैग्नेटन | $\mu_B = \frac{eh}{4\pi m_e}$ |
| प्रवृत्ति | $\chi = C/(T - T_c)$ |
चुंबकत्व एवं द्रव्य अध्याय पदार्थों के चुंबकीय व्यवहार को समझाता है। चुंबकीय द्विध्रुव, गॉस का चुंबकत्व नियम, चुंबकन तथा पदार्थों का वर्गीकरण इस अध्याय के मुख्य बिंदु हैं। अनुचुंबकीय, प्रतिचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थों के गुणों की समझ विद्युत मोटर, ट्रांसफार्मर, स्थायी चुंबक तथा डेटा संग्रहण उपकरणों के निर्माण में सहायक है। इन संकल्पनाओं की दृढ़ पकड़ आगे के अध्यायों — विद्युतचुंबकीय प्रेरण तथा प्रत्यावर्ती धारा — को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अध्याय की सैद्धांतिक संकल्पनाएँ परीक्षा में सरलता से पूर्ण अंक दिलाती हैं।