⚛️
🔭
🌌
🚀
💡
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

इस अध्याय में हम गतिमान आवेशों तथा चुंबकीय क्षेत्र के बीच के संबंध का अध्ययन करेंगे। जब कोई आवेश गति करता है, तो वह चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तथा चुंबकीय क्षेत्र में गति करने वाले आवेश पर बल भी अनुभव होता है। इस अध्याय में लॉरेंज बल, बायो-सावर्ट नियम, एम्पियर का परिपथीय नियम, सोलेनॉइड, टोरॉयड, चल कुंडली गैल्वेनोमीटर तथा आवेश पर चुंबकीय क्षेत्र के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। इन सिद्धांतों पर ही विद्युत मोटर, गैल्वेनोमीटर, मास स्पेक्ट्रोमीटर तथा त्वरक जैसे उपकरण कार्य करते हैं। यह अध्याय विद्युत और चुंबकत्व को जोड़ने वाला सेतु है।

2. चुंबकीय क्षेत्र और लॉरेंज बल (Magnetic Field and Lorentz Force)

किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता वहाँ रखे एकांक ध्रुव प्रबलता वाले उत्तरी ध्रुव पर लगने वाले बल के बराबर होती है। चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक टेस्ला (T) है। किसी आवेश $q$ पर, वेग $\vec{v}$ से चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में गति करते हुए लगने वाला बल:

$$\vec{F} = q(\vec{v} \times \vec{B})$$

चुंबकीय बल का परिमाण $F = qvB\sin\theta$ होता है, जहाँ $\theta$ वेग और क्षेत्र के बीच का कोण है। चुंबकीय बल की दिशा वेग और क्षेत्र दोनों के अभिलंब होती है, इसलिए चुंबकीय बल आवेश पर कोई कार्य नहीं करता और इसकी गतिज ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है। जब आवेश पर विद्युत तथा चुंबकीय दोनों क्षेत्र कार्य करते हैं, तो कुल बल लॉरेंज बल कहलाता है:

$$\vec{F} = q\vec{E} + q(\vec{v} \times \vec{B})$$

3. आवेश की वृत्ताकार गति (Circular Motion of Charge)

जब कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र के अभिलंब दिशा में गति करता है, तो वह वृत्ताकार पथ पर गति करता है। चुंबकीय बल अभिकेंद्री बल प्रदान करता है:

$$\frac{mv^2}{r} = qvB$$

पथ की त्रिज्या: $r = \frac{mv}{qB}$

कोणीय आवृत्ति: $\omega = \frac{v}{r} = \frac{qB}{m}$

आवर्तकाल: $T = \frac{2\pi m}{qB}$

ध्यान दें कि आवर्तकाल वेग से स्वतंत्र होता है। गतिज ऊर्जा $K$ के संदर्भ में त्रिज्या $r = \frac{\sqrt{2mK}}{qB}$ होती है। यदि वेग क्षेत्र के साथ $\theta$ कोण बनाता है, तो आवेश कुंडलिनी (Helix) पथ पर चलता है। कुंडलिनी की त्रिज्या $r = \frac{mv\sin\theta}{qB}$ तथा पिच $p = \frac{2\pi m v \cos\theta}{qB}$ होती है।

4. वेग चयनक और साइक्लोट्रॉन (Velocity Selector and Cyclotron)

वेग चयनक (Velocity Selector)

वेग चयनक में विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर लंबवत होते हैं। जब आवेशित कण पर विद्युत बल और चुंबकीय बल संतुलित होते हैं:

$$qE = qvB \implies v = \frac{E}{B}$$

इस वेग वाले आवेश कण ही बिना विक्षेपित हुए बाहर निकलते हैं, अतः यह कणों के वेग का चयन करता है।

साइक्लोट्रॉन (Cyclotron)

साइक्लोट्रॉन में आवेशित कणों को दो अर्धवृत्ताकार डी (Dee) में चुंबकीय क्षेत्र द्वारा वृत्ताकार पथ पर गतिमान रखते हुए उच्च आवृत्ति वोल्टता से त्वरित किया जाता है। कण का आवर्तकाल वेग से स्वतंत्र होने के कारण, एक निश्चित आवृत्ति के वोल्टता से कण को लगातार त्वरित किया जा सकता है। साइक्लोट्रॉन की आवृत्ति:

$$\nu = \frac{qB}{2\pi m}$$

साइक्लोट्रॉन अति उच्च ऊर्जा के लिए उपयुक्त नहीं होता, क्योंकि उच्च वेग पर सापेक्षता के कारण कण का द्रव्यमान बढ़ता है और आवर्तकाल बदल जाता है।

5. बायो-सावर्ट नियम (Biot-Savart Law)

बायो-सावर्ट नियम के अनुसार, धारा तत्व $I\vec{dl}$ के कारण दूरी $r$ पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र:

$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin\theta}{r^2}$$

यहाँ $\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7}$ T m/A निर्वात की पारगम्यता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के नियम से ज्ञात होती है।

धारावाही सीधे चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र

अनंत लंबाई के सीधे धारावाही चालक से लंबवत दूरी $d$ पर चुंबकीय क्षेत्र:

$$B = \frac{\mu_0 I}{2\pi d}$$

परिमित लंबाई के चालक के लिए, जिसके सिरे त्रिज्या सदिश से $\theta_1$ और $\theta_2$ कोण बनाते हैं:

$$B = \frac{\mu_0 I}{4\pi d}(\sin\theta_1 + \sin\theta_2)$$

वृत्ताकार धारा लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र

त्रिज्या $R$ के वृत्ताकार लूप में धारा $I$ हो, तो केंद्र पर:

$$B = \frac{\mu_0 I}{2R}$$

$N$ फेरों वाले लूप के केंद्र पर: $B = \frac{\mu_0 N I}{2R}$

वृत्ताकार लूप के अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र

केंद्र से अक्षीय दूरी $x$ पर:

$$B = \frac{\mu_0 I R^2}{2(R^2 + x^2)^{3/2}}$$

6. एम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law)

एम्पियर के नियम के अनुसार, किसी बंद वक्र के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखा समाकल उस वक्र द्वारा परिबद्ध कुल धारा के $\mu_0$ गुना के बराबर होता है।

$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I$$

सोलेनॉइड (Solenoid)

सोलेनॉइड में लंबे तार को कुंडलित करके बेलनाकार संरचना बनाई जाती है। अनंत लंबाई के सोलेनॉइड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है:

$$B = \mu_0 n I$$

यहाँ $n$ प्रति एकांक लंबाई में फेरों की संख्या है। सोलेनॉइड के बाहर चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।

टोरॉयड (Toroid)

टोरॉयड एक सोलेनॉइड होता है जिसे वृत्ताकार रूप में मोड़ा जाता है। टोरॉयड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र:

$$B = \mu_0 n I$$

टोरॉयड के बाहर चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।

7. समानांतर धारावाही चालकों के बीच बल (Force between Parallel Currents)

दो समानांतर धारावाही चालकों के बीच प्रति एकांक लंबाई बल:

$$\frac{F}{l} = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi d}$$

यदि धाराएँ समान दिशा में हों, तो चालक आकर्षित होते हैं; यदि विपरीत दिशा में हों, तो प्रतिकर्षित होते हैं। इसी सिद्धांत पर एम्पियर की SI परिभाषा आधारित है — दो समानांतर चालकों में $1$ A धारा, जब $1$ m दूरी पर रखे जाएँ, तो प्रति मीटर $2 \times 10^{-7}$ N बल उत्पन्न करती है।

8. धारावाही चालक पर चुंबकीय बल (Force on Current Carrying Conductor)

धारा $I$ वाले लंबाई $l$ के चालक पर चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में बल:

$$\vec{F} = I(\vec{l} \times \vec{B})$$

बल का परिमाण $F = IBl\sin\theta$ होता है। वृत्ताकार धारा लूप चुंबकीय क्षेत्र में बल आघूर्ण अनुभव करता है:

$$\tau = N I A B \sin\theta = m B \sin\theta$$

यहाँ $m = NIA$ लूप का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है। यह वही संबंध है जो वैद्युत द्विध्रुव के लिए $\tau = pE\sin\theta$ था।

9. चल कुंडली गैल्वेनोमीटर (Moving Coil Galvanometer)

चल कुंडली गैल्वेनोमीटर एक धारा ज्ञात करने का उपकरण है। इसमें एक कुंडली को रेडियल चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है। धारा प्रवाहित होने पर कुंडली पर बल आघूर्ण कार्य करता है और संतुलन पर बल आघूर्ण स्प्रिंग के प्रत्यानयन बल आघूर्ण के बराबर हो जाता है।

$$N I A B = k\theta$$

यहाँ $k$ स्प्रिंग का मरोड़ नियतांक है। गैल्वेनोमीटर की धारा सुग्राहिता (Current Sensitivity):

$$I_s = \frac{\theta}{I} = \frac{NAB}{k}$$

वोल्टता सुग्राहिता (Voltage Sensitivity):

$$V_s = \frac{\theta}{V} = \frac{NAB}{kR}$$

10. आवेश का चक्रण और चुंबकत्व

आवेशित कणों की वृत्ताकार गति से चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण उत्पन्न होता है। कोणीय संवेग $L$ के साथ आवेश $q$ के लिए चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण:

$$m = \frac{q}{2m} L$$

आवेश का चक्रण अनुपात (Gyromagnetic Ratio) $\frac{m}{L} = \frac{q}{2m}$ होता है। इसी कारण इलेक्ट्रॉन के परिक्रमण से परमाणु में चुंबकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है, जो पदार्थों के चुंबकीय गुणों का मूल है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: महत्वपूर्ण सूत्र

परिस्थिति सूत्र
लॉरेंज बल $\vec{F} = q\vec{E} + q(\vec{v}\times\vec{B})$
वृत्ताकार गति त्रिज्या $r = mv/qB$
बायो-सावर्ट नियम $dB = \frac{\mu_0 I dl\sin\theta}{4\pi r^2}$
सीधे चालक $B = \mu_0 I/2\pi d$
लूप केंद्र $B = \mu_0 NI/2R$
सोलेनॉइड $B = \mu_0 nI$
समानांतर चालक $F/l = \mu_0 I_1 I_2/2\pi d$
गैल्वेनोमीटर $\theta = NABI/k$

तालिका 2: विद्युत-चुंबकीय तुलना

राशि विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र
क्षेत्र स्रोत स्थिर आवेश गतिमान आवेश/धारा
बल $\vec{F} = q\vec{E}$ $\vec{F} = q(\vec{v}\times\vec{B})$
कार्य करता है? हाँ नहीं
मात्रक N/C या V/m टेस्ला (T)

माइंड मैप

graph TD A["गतिमान आवेश और चुंबकत्व"] --> B["चुंबकीय बल"] B --> B1["F = qvB sinθ"] B --> B2["कार्य शून्य"] B --> B3["वृत्ताकार गति r = mv/qB"] A --> C["बायो-सावर्ट नियम"] C --> C1["सीधा चालक B = μ₀I/2πd"] C --> C2["वृत्ताकार लूप B = μ₀NI/2R"] A --> D["एम्पियर नियम ∮B·dl = μ₀I"] D --> D1["सोलेनॉइड B = μ₀nI"] D --> D2["टोरॉयड B = μ₀nI"] A --> E["बल आघूर्ण"] E --> E1["τ = N I A B sinθ"] E --> E2["चालक बल F = I l B"] A --> F["गैल्वेनोमीटर"] F --> F1["NABI = kθ"] F --> F2["सुग्राहिता"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की वृत्ताकार गति

चुंबकीय क्षेत्र में धनावेश की गति v B (पृष्ठ के अभिलंब) r = mv/qB T = 2πm/qB चुंबकीय बल हमेशा वेग के लंबवत इसलिए कार्य शून्य, गतिज ऊर्जा स्थिर स्वर्ण नियम: आवर्तकाल T = 2πm/qB, वेग से स्वतंत्र

आरेख 2: सोलेनॉइड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र

सोलेनॉइड में चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀nI (एकसमान) अंदर क्षेत्र एकसमान बाहर क्षेत्र लगभग शून्य n = प्रति मीटर फेरों की संख्या Golden Rule: सोलेनॉइड के बाहर B ≈ 0, अंदर B = μ₀nI

सामान्य गलतियाँ

  1. चुंबकीय बल द्वारा आवेश पर किया गया कार्य शून्य होता है, क्योंकि बल हमेशा वेग के अभिलंब होता है; इसे कार्य-शून्य मानने की गलती अक्सर होती है।
  2. लॉरेंज बल में सदिश गुणनफल का क्रम बदलना; $\vec{F} = q(\vec{v}\times\vec{B})$ होता है, क्रम बदलने पर दिशा उलट जाती है।
  3. सोलेनॉइड और टोरॉयड के क्षेत्र सूत्रों में प्रति एकांक लंबाई फेरों की संख्या $n$ को कुल फेरों की संख्या $N$ समझना गलत है।
  4. बायो-सावर्ट नियम में $\mu_0/4\pi$ के स्थान पर $\mu_0$ लिखना।
  5. समानांतर चालकों में धारा की दिशा के साथ आकर्षण/प्रतिकर्षण का संबंध उलटा करना।
  6. गैल्वेनोमीटर के विक्षेपण सूत्र में $k$ (मरोड़ नियतांक) को छोड़ देना।
  7. साइक्लोट्रॉन के लिए यह मान लेना कि इसकी आवृत्ति कण की गतिज ऊर्जा पर निर्भर करती है; वास्तव में आवर्तकाल वेग से स्वतंत्र है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. लॉरेंज बल से संबंधित संख्यात्मक प्रश्नों का नियमित अभ्यास करें; दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम का प्रयोग करें।
  2. बायो-सावर्ट नियम के तीनों अनुप्रयोगों (सीधा चालक, वृत्ताकार लूप, लूप अक्ष) के सूत्र रट लें।
  3. एम्पियर के परिपथीय नियम से सोलेनॉइड और टोरॉयड के क्षेत्रों की व्युत्पत्ति आरेख सहित लिखना सीखें।
  4. वेग चयनक में $v = E/B$ संबंध याद रखें; यहाँ से 2 अंक के प्रश्न आते हैं।
  5. गैल्वेनोमीटर की धारा और वोल्टता सुग्राहिता के सूत्रों में अंतर समझें।
  6. एम्पियर की परिभाषा (1 A) तथा समानांतर चालक बल सूत्र से संख्यात्मक प्रश्न बनते हैं।
  7. आवेश के कुंडलिनी पथ की त्रिज्या और पिच के सूत्रों को याद रखें।

निष्कर्ष

गतिमान आवेश और चुंबकत्व अध्याय विद्युत और चुंबकत्व के बीच की गहरी कड़ी को स्थापित करता है। लॉरेंज बल, बायो-सावर्ट नियम तथा एम्पियर का नियम चुंबकीय क्षेत्र की गणना की तीन प्रमुख विधियाँ हैं। धारावाही चालकों के बीच बल, सोलेनॉइड और टोरॉयड के क्षेत्र तथा गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत व्यावहारिक इंजीनियरिंग की नींव हैं। ये संकल्पनाएँ विद्युत मोटर, जनरेटर, मास स्पेक्ट्रोमीटर और त्वरक में प्रयुक्त होती हैं। अगले अध्याय में हम पदार्थों के चुंबकीय गुणों का अध्ययन करेंगे, जो इसी अध्याय की नींव पर आधारित हैं।