इस अध्याय में हम गतिमान आवेशों तथा चुंबकीय क्षेत्र के बीच के संबंध का अध्ययन करेंगे। जब कोई आवेश गति करता है, तो वह चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है तथा चुंबकीय क्षेत्र में गति करने वाले आवेश पर बल भी अनुभव होता है। इस अध्याय में लॉरेंज बल, बायो-सावर्ट नियम, एम्पियर का परिपथीय नियम, सोलेनॉइड, टोरॉयड, चल कुंडली गैल्वेनोमीटर तथा आवेश पर चुंबकीय क्षेत्र के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। इन सिद्धांतों पर ही विद्युत मोटर, गैल्वेनोमीटर, मास स्पेक्ट्रोमीटर तथा त्वरक जैसे उपकरण कार्य करते हैं। यह अध्याय विद्युत और चुंबकत्व को जोड़ने वाला सेतु है।
किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता वहाँ रखे एकांक ध्रुव प्रबलता वाले उत्तरी ध्रुव पर लगने वाले बल के बराबर होती है। चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक टेस्ला (T) है। किसी आवेश $q$ पर, वेग $\vec{v}$ से चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में गति करते हुए लगने वाला बल:
$$\vec{F} = q(\vec{v} \times \vec{B})$$
चुंबकीय बल का परिमाण $F = qvB\sin\theta$ होता है, जहाँ $\theta$ वेग और क्षेत्र के बीच का कोण है। चुंबकीय बल की दिशा वेग और क्षेत्र दोनों के अभिलंब होती है, इसलिए चुंबकीय बल आवेश पर कोई कार्य नहीं करता और इसकी गतिज ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है। जब आवेश पर विद्युत तथा चुंबकीय दोनों क्षेत्र कार्य करते हैं, तो कुल बल लॉरेंज बल कहलाता है:
$$\vec{F} = q\vec{E} + q(\vec{v} \times \vec{B})$$
जब कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र के अभिलंब दिशा में गति करता है, तो वह वृत्ताकार पथ पर गति करता है। चुंबकीय बल अभिकेंद्री बल प्रदान करता है:
$$\frac{mv^2}{r} = qvB$$
पथ की त्रिज्या: $r = \frac{mv}{qB}$
कोणीय आवृत्ति: $\omega = \frac{v}{r} = \frac{qB}{m}$
आवर्तकाल: $T = \frac{2\pi m}{qB}$
ध्यान दें कि आवर्तकाल वेग से स्वतंत्र होता है। गतिज ऊर्जा $K$ के संदर्भ में त्रिज्या $r = \frac{\sqrt{2mK}}{qB}$ होती है। यदि वेग क्षेत्र के साथ $\theta$ कोण बनाता है, तो आवेश कुंडलिनी (Helix) पथ पर चलता है। कुंडलिनी की त्रिज्या $r = \frac{mv\sin\theta}{qB}$ तथा पिच $p = \frac{2\pi m v \cos\theta}{qB}$ होती है।
वेग चयनक में विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर लंबवत होते हैं। जब आवेशित कण पर विद्युत बल और चुंबकीय बल संतुलित होते हैं:
$$qE = qvB \implies v = \frac{E}{B}$$
इस वेग वाले आवेश कण ही बिना विक्षेपित हुए बाहर निकलते हैं, अतः यह कणों के वेग का चयन करता है।
साइक्लोट्रॉन में आवेशित कणों को दो अर्धवृत्ताकार डी (Dee) में चुंबकीय क्षेत्र द्वारा वृत्ताकार पथ पर गतिमान रखते हुए उच्च आवृत्ति वोल्टता से त्वरित किया जाता है। कण का आवर्तकाल वेग से स्वतंत्र होने के कारण, एक निश्चित आवृत्ति के वोल्टता से कण को लगातार त्वरित किया जा सकता है। साइक्लोट्रॉन की आवृत्ति:
$$\nu = \frac{qB}{2\pi m}$$
साइक्लोट्रॉन अति उच्च ऊर्जा के लिए उपयुक्त नहीं होता, क्योंकि उच्च वेग पर सापेक्षता के कारण कण का द्रव्यमान बढ़ता है और आवर्तकाल बदल जाता है।
बायो-सावर्ट नियम के अनुसार, धारा तत्व $I\vec{dl}$ के कारण दूरी $r$ पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र:
$$dB = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{I dl \sin\theta}{r^2}$$
यहाँ $\mu_0 = 4\pi \times 10^{-7}$ T m/A निर्वात की पारगम्यता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के नियम से ज्ञात होती है।
अनंत लंबाई के सीधे धारावाही चालक से लंबवत दूरी $d$ पर चुंबकीय क्षेत्र:
$$B = \frac{\mu_0 I}{2\pi d}$$
परिमित लंबाई के चालक के लिए, जिसके सिरे त्रिज्या सदिश से $\theta_1$ और $\theta_2$ कोण बनाते हैं:
$$B = \frac{\mu_0 I}{4\pi d}(\sin\theta_1 + \sin\theta_2)$$
त्रिज्या $R$ के वृत्ताकार लूप में धारा $I$ हो, तो केंद्र पर:
$$B = \frac{\mu_0 I}{2R}$$
$N$ फेरों वाले लूप के केंद्र पर: $B = \frac{\mu_0 N I}{2R}$
केंद्र से अक्षीय दूरी $x$ पर:
$$B = \frac{\mu_0 I R^2}{2(R^2 + x^2)^{3/2}}$$
एम्पियर के नियम के अनुसार, किसी बंद वक्र के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखा समाकल उस वक्र द्वारा परिबद्ध कुल धारा के $\mu_0$ गुना के बराबर होता है।
$$\oint \vec{B} \cdot d\vec{l} = \mu_0 I$$
सोलेनॉइड में लंबे तार को कुंडलित करके बेलनाकार संरचना बनाई जाती है। अनंत लंबाई के सोलेनॉइड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है:
$$B = \mu_0 n I$$
यहाँ $n$ प्रति एकांक लंबाई में फेरों की संख्या है। सोलेनॉइड के बाहर चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।
टोरॉयड एक सोलेनॉइड होता है जिसे वृत्ताकार रूप में मोड़ा जाता है। टोरॉयड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र:
$$B = \mu_0 n I$$
टोरॉयड के बाहर चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।
दो समानांतर धारावाही चालकों के बीच प्रति एकांक लंबाई बल:
$$\frac{F}{l} = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi d}$$
यदि धाराएँ समान दिशा में हों, तो चालक आकर्षित होते हैं; यदि विपरीत दिशा में हों, तो प्रतिकर्षित होते हैं। इसी सिद्धांत पर एम्पियर की SI परिभाषा आधारित है — दो समानांतर चालकों में $1$ A धारा, जब $1$ m दूरी पर रखे जाएँ, तो प्रति मीटर $2 \times 10^{-7}$ N बल उत्पन्न करती है।
धारा $I$ वाले लंबाई $l$ के चालक पर चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में बल:
$$\vec{F} = I(\vec{l} \times \vec{B})$$
बल का परिमाण $F = IBl\sin\theta$ होता है। वृत्ताकार धारा लूप चुंबकीय क्षेत्र में बल आघूर्ण अनुभव करता है:
$$\tau = N I A B \sin\theta = m B \sin\theta$$
यहाँ $m = NIA$ लूप का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है। यह वही संबंध है जो वैद्युत द्विध्रुव के लिए $\tau = pE\sin\theta$ था।
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर एक धारा ज्ञात करने का उपकरण है। इसमें एक कुंडली को रेडियल चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है। धारा प्रवाहित होने पर कुंडली पर बल आघूर्ण कार्य करता है और संतुलन पर बल आघूर्ण स्प्रिंग के प्रत्यानयन बल आघूर्ण के बराबर हो जाता है।
$$N I A B = k\theta$$
यहाँ $k$ स्प्रिंग का मरोड़ नियतांक है। गैल्वेनोमीटर की धारा सुग्राहिता (Current Sensitivity):
$$I_s = \frac{\theta}{I} = \frac{NAB}{k}$$
वोल्टता सुग्राहिता (Voltage Sensitivity):
$$V_s = \frac{\theta}{V} = \frac{NAB}{kR}$$
आवेशित कणों की वृत्ताकार गति से चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण उत्पन्न होता है। कोणीय संवेग $L$ के साथ आवेश $q$ के लिए चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण:
$$m = \frac{q}{2m} L$$
आवेश का चक्रण अनुपात (Gyromagnetic Ratio) $\frac{m}{L} = \frac{q}{2m}$ होता है। इसी कारण इलेक्ट्रॉन के परिक्रमण से परमाणु में चुंबकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है, जो पदार्थों के चुंबकीय गुणों का मूल है।
| परिस्थिति | सूत्र |
|---|---|
| लॉरेंज बल | $\vec{F} = q\vec{E} + q(\vec{v}\times\vec{B})$ |
| वृत्ताकार गति त्रिज्या | $r = mv/qB$ |
| बायो-सावर्ट नियम | $dB = \frac{\mu_0 I dl\sin\theta}{4\pi r^2}$ |
| सीधे चालक | $B = \mu_0 I/2\pi d$ |
| लूप केंद्र | $B = \mu_0 NI/2R$ |
| सोलेनॉइड | $B = \mu_0 nI$ |
| समानांतर चालक | $F/l = \mu_0 I_1 I_2/2\pi d$ |
| गैल्वेनोमीटर | $\theta = NABI/k$ |
| राशि | विद्युत क्षेत्र | चुंबकीय क्षेत्र |
|---|---|---|
| क्षेत्र स्रोत | स्थिर आवेश | गतिमान आवेश/धारा |
| बल | $\vec{F} = q\vec{E}$ | $\vec{F} = q(\vec{v}\times\vec{B})$ |
| कार्य करता है? | हाँ | नहीं |
| मात्रक | N/C या V/m | टेस्ला (T) |
गतिमान आवेश और चुंबकत्व अध्याय विद्युत और चुंबकत्व के बीच की गहरी कड़ी को स्थापित करता है। लॉरेंज बल, बायो-सावर्ट नियम तथा एम्पियर का नियम चुंबकीय क्षेत्र की गणना की तीन प्रमुख विधियाँ हैं। धारावाही चालकों के बीच बल, सोलेनॉइड और टोरॉयड के क्षेत्र तथा गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत व्यावहारिक इंजीनियरिंग की नींव हैं। ये संकल्पनाएँ विद्युत मोटर, जनरेटर, मास स्पेक्ट्रोमीटर और त्वरक में प्रयुक्त होती हैं। अगले अध्याय में हम पदार्थों के चुंबकीय गुणों का अध्ययन करेंगे, जो इसी अध्याय की नींव पर आधारित हैं।