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1. परिचय

इस अध्याय में हम नाभिक (Nucleus) का अध्ययन करेंगे। नाभिक परमाणु का केन्द्रीय सघन भाग है जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन (सामूहिक रूप से न्यूक्लियॉन) होते हैं। नाभिकीय भौतिकी में नाभिक के गुण, नाभिकीय बल, द्रव्यमान क्षति (Mass Defect), बंधन ऊर्जा (Binding Energy), रेडियोधर्मिता, नाभिकीय विखंडन तथा संलयन का अध्ययन किया जाता है। नाभिकीय ऊर्जा और रेडियोधर्मिता आधुनिक युग की सबसे शक्तिशाली और उपयोगी खोजों में से हैं। इनके सिद्धांतों पर परमाणु बम, परमाणु रिएक्टर तथा रेडियोधर्मी समस्थानिकों के चिकित्सकीय उपयोग आधारित हैं।

2. नाभिक की संरचना (Composition of Nucleus)

परमाणु के केंद्र में स्थित नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं।

द्रव्यमान संख्या (Mass Number):

$$A = Z + N$$

जहाँ $Z$ परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) और $N$ न्यूट्रॉनों की संख्या है। नाभिक का प्रतीक $^{A}_{Z}X$ लिखा जाता है।

समस्थानिक, समभारिक, समन्यूट्रॉनिक:

3. नाभिक का आकार और घनत्व (Size and Density of Nucleus)

नाभिकीय त्रिज्या:

$$R = R_0 A^{1/3}$$

जहाँ $R_0 = 1.2 \times 10^{-15}$ m है। नाभिकीय घनत्व सभी नाभिकों के लिए लगभग समान होता है:

$$\rho = \frac{m_N}{V} \approx 2.3 \times 10^{17} \text{ kg/m}^3$$

नाभिकीय घनत्व सामान्य पदार्थ के घनत्व से अत्यधिक (लगभग $10^{14}$ गुना) होता है। इसीलिए नाभिक अत्यंत सघन होता है।

4. नाभिकीय बल (Nuclear Force)

नाभिक को परस्पर बांधे रखने वाला बल नाभिकीय बल कहलाता है। इसके गुण:

  1. यह सबसे प्रबल बल है — यह वैद्युत स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण से कई गुना अधिक प्रबल है।
  2. यह आकर्षणात्मक होता है और अल्प परास (Short Range) का होता है — केवल लगभग $10^{-15}$ m तक।
  3. यह आवेश पर निर्भर नहीं करता — प्रोटॉन-प्रोटॉन, न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन और प्रोटॉन-न्यूट्रॉन के बीच समान रूप से कार्य करता है।
  4. यह संतृप्त बल (Saturated Force) है।

5. द्रव्यमान क्षति और बंधन ऊर्जा (Mass Defect and Binding Energy)

द्रव्यमान क्षति (Mass Defect):

नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान उसके घटक न्यूक्लियॉनों के कुल द्रव्यमान से कम होता है। इस अंतर को द्रव्यमान क्षति कहते हैं:

$$\Delta m = [Zm_p + (A-Z)m_n] - M_{nucleus}$$

बंधन ऊर्जा (Binding Energy):

नाभिक को उसके घटक न्यूक्लियॉनों में अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा बंधन ऊर्जा कहलाती है:

$$E_b = \Delta m \times c^2$$

आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध $E = mc^2$ के अनुसार, $1$ u द्रव्यमान क्षति लगभग $931.5$ MeV ऊर्जा के बराबर होती है:

$$1 \text{ u} \equiv 931.5 \text{ MeV}$$

प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा (Binding Energy per Nucleon):

$$BE/A = \frac{E_b}{A}$$

बंधन ऊर्जा वक्र से ज्ञात होता है कि:

  1. मध्यम द्रव्यमान वाले नाभिक (लगभग $A = 56$, लोहा) की प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा अधिकतम होती है, लगभग 8.75 MeV।
  2. बहुत हल्के और बहुत भारी नाभिकों की बंधन ऊर्जा कम होती है।
  3. भारी नाभिकों का विखंडन और हल्के नाभिकों का संलयन दोनों ऊर्जा मुक्त करते हैं।

6. रेडियोधर्मिता (Radioactivity)

1896 में हेनरी बेकुरल ने रेडियोधर्मिता की खोज की। कुछ अस्थिर नाभिक स्वतः विकिरण उत्सर्जित करके क्षयित होते हैं। इस घटना को रेडियोधर्मिता कहते हैं। तीन प्रकार की रेडियोधर्मी किरणें:

अल्फा क्षय (Alpha Decay):

नाभिक से अल्फा कण ($^{4}_2He^{2+}$) उत्सर्जित होता है:

$$^{A}{Z}X \to ^{A-4}_2He$$}Y + ^{4

बीटा क्षय (Beta Decay):

नाभिक से इलेक्ट्रॉन ($\beta^-$) या पॉज़िट्रॉन ($\beta^+$) उत्सर्जित होता है। $\beta^-$ क्षय में न्यूट्रॉन प्रोटॉन में बदलता है:

$$^{A}{Z}X \to ^{A}_e$$}Y + e^- + \bar{\nu

गामा उत्सर्जन (Gamma Emission):

उत्सर्जित नाभिक से गामा फोटॉन उत्सर्जित होता है, जिससे परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है:

$$^{A}{Z}X^* \to ^{A}X + \gamma$$

गामा किरणें विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं, इनकी भेदन क्षमता सबसे अधिक होती है। अल्फा कणों की भेदन क्षमता सबसे कम (कागज से भी रुक जाते हैं), बीटा कणों की मध्यम (धातु की पतली चादर से रुकते हैं), गामा की सबसे अधिक (कई cm मोटे सीसे से रुकते हैं)।

7. रेडियोधर्मी क्षय नियम (Radioactive Decay Law)

रेडियोधर्मी क्षय की दर उपस्थित नाभिकों की संख्या के समानुपाती होती है:

$$\frac{dN}{dt} = -\lambda N$$

यहाँ $\lambda$ क्षय नियतांक है। इस समीकरण का हल:

$$N = N_0 e^{-\lambda t}$$

यहाँ $N_0$ प्रारंभिक नाभिकों की संख्या है।

अर्धायु काल (Half-life):

जिस समय में रेडियोधर्मी पदार्थ की मात्रा आधी हो जाती है:

$$T_{1/2} = \frac{0.693}{\lambda}$$

औसत जीवनकाल (Mean Life):

$$\tau = \frac{1}{\lambda} = 1.44 T_{1/2}$$

रेडियोधर्मिता की इकाइयाँ:

  1. क्यूरी (Ci): $1 \text{ Ci} = 3.7 \times 10^{10}$ क्षय/सेकंड
  2. रदरफोर्ड: $10^6$ क्षय/सेकंड
  3. बेकुरल (Bq): $1$ क्षय/सेकंड (SI इकाई)

8. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

भारी नाभिकों (जैसे यूरेनियम-235) के दो मध्यम नाभिकों में विभाजित होने की प्रक्रिया नाभिकीय विखंडन कहलाती है। हान और स्ट्रासमैन ने 1939 में इसकी खोज की। यूरेनियम-235 के न्यूट्रॉन द्वारा विखंडन:

$$^{235}{92}U + ^1_0n \to ^{141}$$}Ba + ^{92}_{36}Kr + 3^1_0n + \text{ऊर्जा

एक विखंडन में लगभग 200 MeV ऊर्जा मुक्त होती है। विखंडन में 2-3 न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं, जो श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) उत्पन्न करते हैं। श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए नियंत्रक छड़ों (कैडमियम या बोरॉन) का उपयोग होता है। परमाणु रिएक्टर में नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया होती है, जबकि परमाणु बम में अनियंत्रित होती है।

परमाणु रिएक्टर के घटक:

  1. ईंधन: U-235 या प्लूटोनियम-239
  2. मंदक (Moderator): भारी जल या ग्रेफाइट
  3. नियंत्रक छड़: कैडमियम या बोरॉन
  4. शीतलक: जल या गैस
  5. परिरोधक (Shielding): कंक्रीट और सीसा

9. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

हल्के नाभिकों के परस्पर संयोजन से भारी नाभिक बनने की प्रक्रिया नाभिकीय संलयन कहलाती है। सूर्य और तारों में होने वाली ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन है। प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला में 4 हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम बनाते हैं:

$$4^1_1H \to ^4_2He + 2e^+ + \text{ऊर्जा}$$

संलयन के लिए अत्यधिक उच्च तापमान (लगभग $10^7$ K) आवश्यक होता है। हाइड्रोजन बम संलयन पर आधारित है। संलयन का नियंत्रित रूप प्राप्त करना अभी तक व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हुआ है, परंतु इसे स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। विखंडन से संलयन में प्रति इकाई द्रव्यमान अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: महत्वपूर्ण सूत्र

राशि सूत्र
द्रव्यमान संख्या $A = Z + N$
नाभिकीय त्रिज्या $R = R_0A^{1/3}$
द्रव्यमान क्षति $\Delta m = Zm_p + (A-Z)m_n - M$
बंधन ऊर्जा $E_b = \Delta mc^2$
क्षय नियम $N = N_0e^{-\lambda t}$
अर्धायु काल $T_{1/2} = 0.693/\lambda$
औसत जीवनकाल $\tau = 1/\lambda$

तालिका 2: रेडियोधर्मी किरणें

किरण आवेश भेदन क्षमता
अल्फा (α) +2e सबसे कम
बीटा (β) -e मध्यम
गामा (γ) 0 सबसे अधिक

माइंड मैप

graph TD A["नाभिक"] --> B["संरचना"] B --> B1["प्रोटॉन + न्यूट्रॉन"] B --> B2["A = Z + N"] B --> B3["R = R₀A¹ᐟ³"] A --> C["बंधन ऊर्जा"] C --> C1["द्रव्यमान क्षति"] C --> C2["Eb = Δmc²"] C --> C3["1 u = 931.5 MeV"] A --> D["रेडियोधर्मिता"] D --> D1["अल्फा क्षय"] D --> D2["बीटा क्षय"] D --> D3["गामा उत्सर्जन"] D --> D4["T½ = 0.693/λ"] A --> E["विखंडन"] E --> E1["U-235"] E --> E2["श्रृंखला अभिक्रिया"] A --> F["संलयन"] F --> F1["सूर्य का स्रोत"] F --> F2["हाइड्रोजन बम"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: रेडियोधर्मी क्षय वक्र

रेडियोधर्मी क्षय वक्र t N N₀/2 N₀/4 N = N₀e^(-λt) T½ = 0.693/λ, τ = 1/λ = 1.44T½ स्वर्ण नियम: N = N₀e^(-λt), T½ = 0.693/λ

आरेख 2: नाभिकीय विखंडन — श्रृंखला अभिक्रिया

नाभिकीय विखंडन: श्रृंखला अभिक्रिया न्यूट्रॉन U-235 Ba-141 Kr-92 n n n U-235 U-235 + n → Ba-141 + Kr-92 + 3n + ~200 MeV 3 न्यूट्रॉन → आगे का विखंडन (श्रृंखला अभिक्रिया) नियंत्रक छड़ (कैडमियम) से नियंत्रण Golden Rule: विखंडन में ~200 MeV, संलयन में अधिक ऊर्जा रिएक्टर: नियंत्रित, बम: अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया

सामान्य गलतियाँ

  1. अल्फा क्षय में द्रव्यमान संख्या 4 घटती है और परमाणु क्रमांक 2 घटता है; इसे भूलना।
  2. बीटा क्षय में न्यूट्रॉन प्रोटॉन में बदलता है और परमाणु क्रमांक 1 बढ़ता है; इसे उलटा लिखना गलत है।
  3. $1$ u द्रव्यमान को $931.5$ MeV के बजाय $931.5$ keV के बराबर लिखना।
  4. अर्धायु काल को क्षय नियतांक से जोड़ते समय $T_{1/2} = 0.693/\lambda$ के स्थान पर $\lambda/0.693$ लिखना।
  5. गामा किरणों की भेदन क्षमता को सबसे कम मानना; गामा की भेदन क्षमता सबसे अधिक होती है।
  6. बंधन ऊर्जा वक्र में सबसे अधिक बंधन ऊर्जा वाला नाभिक यूरेनियम मानना; लोहा (Fe-56) सबसे अधिक स्थिर होता है।
  7. संलयन के लिए उच्च तापमान की आवश्यकता नहीं होती यह मानना; संलयन के लिए लगभग $10^7$ K ताप चाहिए।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. अल्फा, बीटा, गामा क्षय के समीकरण लिखना सीखें; ये परीक्षा में नियमित रूप से आते हैं।
  2. क्षय नियम $N = N_0e^{-\lambda t}$, अर्धायु काल और औसत जीवनकाल से संख्यात्मक प्रश्न हल करें।
  3. बंधन ऊर्जा वक्र का आरेख और उसके निष्कर्ष लिखने का अभ्यास करें।
  4. $E = mc^2$ तथा $1$ u $\equiv 931.5$ MeV का संख्यात्मक उपयोग करें।
  5. विखंडन और संलयन की तुलनात्मक तालिका याद रखें (ईंधन, ताप, ऊर्जा)।
  6. परमाणु रिएक्टर के घटक (ईंधन, मंदक, नियंत्रक छड़, शीतलक) याद रखें।
  7. रेडियोधर्मिता की इकाइयाँ (क्यूरी, बेकुरल, रदरफोर्ड) याद रखें।

निष्कर्ष

नाभिक अध्याय नाभिक की संरचना, नाभिकीय बल, बंधन ऊर्जा, रेडियोधर्मिता तथा नाभिकीय ऊर्जा स्रोतों की गहन समझ प्रदान करता है। द्रव्यमान क्षति और $E = mc^2$ का संबंध नाभिकीय ऊर्जा का मूल है। रेडियोधर्मी क्षय और अर्धायु काल की संकल्पनाएँ चिकित्सा एवं डेटिंग तकनीकों में उपयोगी हैं। विखंडन और संलयन दोनों विशाल ऊर्जा मुक्त करते हैं, परंतु उनके नियंत्रित उपयोग के लिए सावधानी और प्रौद्योगिकी आवश्यक है। परमाणु रिएक्टर विद्युत उत्पादन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जबकि संलयन भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा का वादा करता है। इस अध्याय की संकल्पनाएँ आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के केंद्र में हैं।