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1. परिचय

इस अध्याय में हम प्रकाश के कण (किरण) रूप का अध्ययन करेंगे, जिसमें प्रकाश को सरल रेखाओं (किरणों) के रूप में माना जाता है। किरण प्रकाशिकी में परावर्तन, अपवर्तन, प्रिज्म द्वारा विक्षेपण, लेंस, दर्पण तथा विभिन्न प्रकाशिक यंत्रों का अध्ययन किया जाता है। प्रकाश की चाल निर्वात में सबसे अधिक ($3 \times 10^8$ m/s) होती है। जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो वह अपवर्तित होता है। इस अध्याय में हम प्रकाशिकी की मूलभूत संकल्पनाओं और सूत्रों का विस्तार से अध्ययन करेंगे, जो आगे के अध्याय — तरंग प्रकाशिकी — की नींव हैं।

2. परावर्तन (Reflection)

जब प्रकाश किसी चिकनी सतह से टकराकर लौटता है, तो इसे परावर्तन कहते हैं। परावर्तन के नियम:

  1. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
  2. आपतन कोण ($i$) सदैव परावर्तन कोण ($r$) के बराबर होता है ($i = r$)। इसे परावर्ती प्रकाशिकी में समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब के लिए लागू किया जाता है।

समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु के आकार के बराबर होता है। वस्तु और प्रतिबिंब की दूरी दर्पण से समान होती है। समतल दर्पण में वस्तु की गति के लिए प्रतिबिंब की आभासी गति वस्तु की गति की दिशा में होती है।

गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)

गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं — अवतल दर्पण (जो वस्तु की ओर मुड़ा होता है) और उत्तल दर्पण (जो बाहर की ओर उभरा होता है)। दर्पण का सूत्र:

$$\frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$$

यहाँ $u$ वस्तु दूरी, $v$ प्रतिबिंब दूरी और $f$ फोकस दूरी है। चिह्न परिपाटी के अनुसार दर्पण के सम्मुख की दूरियाँ धनात्मक ली जाती हैं, और पीछे की ऋणात्मक। आवर्धन:

$$m = -\frac{v}{u} = \frac{h_i}{h_o}$$

दर्पण की फोकस दूरी $f = R/2$ होती है, जहाँ $R$ वक्रता त्रिज्या है। उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए इनका उपयोग वाहनों के रियर-व्यू मिरर में होता है। अवतल दर्पण वस्तु की स्थिति के अनुसार विभिन्न प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है और इसका उपयोग दंत चिकित्सा, शेविंग मिरर और सोलर कुकर में होता है।

3. अपवर्तन (Refraction)

जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करता है, तो उसकी चाल बदलती है और किरण मुड़ जाती है। इसे अपवर्तन कहते हैं। स्नेल का नियम:

$$n_1 \sin i = n_2 \sin r$$

यहाँ $n_1$ और $n_2$ दोनों माध्यमों के अपवर्तनांक हैं। निर्वात के सापेक्ष किसी माध्यम का अपवर्तनांक:

$$n = \frac{c}{v}$$

यहाँ $c$ निर्वात में प्रकाश की चाल और $v$ माध्यम में चाल है। सघन माध्यम में प्रकाश की चाल कम होती है, इसलिए सघन माध्यम का अपवर्तनांक अधिक होता है।

कुल आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection)

जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण ($i_c$) से अधिक होता है, तो सारा प्रकाश परावर्तित हो जाता है। क्रांतिक कोण:

$$\sin i_c = \frac{n_2}{n_1}$$

कांच के लिए क्रांतिक कोण लगभग $42^\circ$ होता है। कुल आंतरिक परावर्तन के उपयोग: प्रकाशीय तंतु (Optical Fibre), हीरे की चमक, मरीचिका (Mirage)। प्रकाशीय तंतु में प्रकाश कुल आंतरिक परावर्तन द्वारा लंबी दूरी तक संचरण करता है।

4. लेंस (Lenses)

लेंस पारदर्शी पदार्थ से बना होता है जिसकी सतहें गोलीय होती हैं। लेंस दो प्रकार के होते हैं — उत्तल (अभिसारी) लेंस और अवतल (अपसारी) लेंस। लेंस का सूत्र:

$$\frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f}$$

आवर्धन:

$$m = \frac{v}{u} = \frac{h_i}{h_o}$$

उत्तल लेंस द्वारा बनाए गए आभासी प्रतिबिंब के लिए आवर्धन धनात्मक होता है। लेंस के लिए भी चिह्न परिपाटी लागू होती है: वस्तु की दूरी $u$ ऋणात्मक होती है।

लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula):

$$\frac{1}{f} = (n - 1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$$

यहाँ $n$ लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक और $R_1, R_2$ लेंस की सतहों की वक्रता त्रिज्याएँ हैं।

लेंसों का संयोजन

दो पतले लेंसों के सम्पर्क में रखने पर तुल्य क्षमता:

$$P = P_1 + P_2$$

लेंस की क्षमता (Power):

$$P = \frac{1}{f(\text{m})}$$

क्षमता की इकाई डायोप्टर (D) है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल लेंस की ऋणात्मक होती है। लेंसों के बीच दूरी $d$ होने पर:

$$P = P_1 + P_2 - dP_1P_2$$

5. प्रिज्म द्वारा अपवर्तन और विक्षेपण (Refraction and Dispersion by Prism)

प्रिज्म से गुजरने पर प्रकाश का न्यूनतम विचलन कोण $\delta_m$:

$$n = \frac{\sin\left(\frac{A + \delta_m}{2}\right)}{\sin\left(\frac{A}{2}\right)}$$

यहाँ $A$ प्रिज्म का कोण है। न्यूनतम विचलन की स्थिति में प्रकाश किरण प्रिज्म के अंदर सममित रूप से गुजरती है। सफेद प्रकाश प्रिज्म से गुजरने पर सात रंगों में विक्षेपित (Disperse) हो जाता है। यह क्योंकि प्रत्येक रंग के लिए अपवर्तनांक अलग होता है — बैंगनी के लिए अधिकतम और लाल के लिए न्यूनतम। इसीलिए बैंगनी प्रकाश का विचलन सबसे अधिक होता है। प्रिज्म में कौन-सा रंग सबसे अधिक विचलित होता है? बैंगनी (Violet)।

6. अपवर्तनांक (Refractive Index)

किसी माध्यम का अपवर्तनांक उस माध्यम में प्रकाश की चाल पर निर्भर करता है। सापेक्ष अपवर्तनांक:

$$n_{12} = \frac{n_1}{n_2} = \frac{v_2}{v_1}$$

प्रकाश की चाल घनत्व पर निर्भर करती है, इसलिए सघन माध्यम में चाल कम और अपवर्तनांक अधिक होता है। हीरे का अपवर्तनांक लगभग 2.42 होता है, जो बहुत अधिक है। कांच का अपवर्तनांक लगभग 1.5 होता है।

समांतर पट्टिका (Slab) में विस्थापन:

$$x = t\frac{\sin(i - r)}{\cos r}$$

7. प्रकाशिक यंत्र (Optical Instruments)

सूक्ष्मदर्शी (Microscope)

सरल सूक्ष्मदर्शी एक उत्तल लेंस है जो आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब बनाता है। इसका आवर्धन:

$$m = 1 + \frac{D}{f}$$

जहाँ $D = 25$ cm स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी है।

यौगिक सूक्ष्मदर्शी में दो लेंस होते हैं — अभिदृश्यक (Objective) और नेत्रिका (Eyepiece)। इसका कुल आवर्धन दोनों के आवर्धन का गुणनफल है:

$$m = m_o \times m_e$$

दूरदर्शी (Telescope)

खगोलीय दूरदर्शी में भी अभिदृश्यक और नेत्रिका होते हैं। सामान्य समायोजन में आवर्धन:

$$m = \frac{f_o}{f_e}$$

अभिदृश्यक की फोकस दूरी बड़ी होती है, इसलिए दूरदर्शी लंबी होती है। दूरदर्शी की लंबाई $L = f_o + f_e$।

8. विक्षेपण का उपयोग

विक्षेपण के उपयोग द्वारा रंगों का पृथक्करण होता है। इंद्रधनुष जल की बूंदों में परावर्तन और अपवर्तन के कारण बनता है। वायुमंडल में कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश का रंग नीला दिखता है। ये सभी घटनाएँ किरण प्रकाशिकी के मूल सिद्धांतों पर आधारित हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: महत्वपूर्ण सूत्र

यंत्र/राशि सूत्र
दर्पण सूत्र $1/v + 1/u = 1/f$
लेंस सूत्र $1/v - 1/u = 1/f$
आवर्धन $m = v/u$ या $-v/u$
स्नेल का नियम $n_1\sin i = n_2\sin r$
क्रांतिक कोण $\sin i_c = n_2/n_1$
लेंस क्षमता $P = 1/f$ (D)
प्रिज्म $n = \sin[(A+\delta_m)/2]/\sin(A/2)$

तालिका 2: प्रतिबिंब निर्माण

स्थिति अवतल दर्पण उत्तल दर्पण
वस्तु अनंत पर वास्तविक, फोकस पर आभासी, फोकस पर
वस्तु C पर वास्तविक, C पर, समान आकार
फोकस और ध्रुव के बीच आभासी, बड़ा, सीधा आभासी, छोटा, सीधा

माइंड मैप

graph TD A["किरण प्रकाशिकी"] --> B["परावर्तन"] B --> B1["i = r"] B --> B2["दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f"] A --> C["अपवर्तन"] C --> C1["स्नेल का नियम"] C --> C2["n = c/v"] C --> C3["कुल आंतरिक परावर्तन"] A --> D["लेंस"] D --> D1["1/v - 1/u = 1/f"] D --> D2["लेंस निर्माता सूत्र"] D --> D3["क्षमता P = 1/f"] A --> E["प्रिज्म"] E --> E1["विक्षेपण"] E --> E2["न्यूनतम विचलन"] A --> F["यंत्र"] F --> F1["सूक्ष्मदर्शी"] F --> F2["दूरदर्शी"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण

अवतल दर्पण: वस्तु C से बाहर C F P वस्तु वस्तु से समांतर किरण फोकस से होकर जाती है C से जाने वाली किरण अपने पथ पर लौटती है प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा, C और F के बीच बनता है स्वर्ण नियम: 1/v + 1/u = 1/f, f = R/2, m = -v/u चिह्न परिपाटी: दर्पण के सम्मुख दूरियाँ धनात्मक

आरेख 2: प्रिज्म द्वारा विक्षेपण

प्रिज्म द्वारा सफेद प्रकाश का विक्षेपण सफेद प्रकाश लाल (सबसे कम विचलन) बैंगनी (सबसे अधिक विचलन) δm = न्यूनतम विचलन कोण n = sin[(A+δm)/2] / sin(A/2) Golden Rule: बैंगनी का विचलन अधिकतम, लाल का न्यूनतम अपवर्तनांक: बैंगनी > लाल

सामान्य गलतियाँ

  1. दर्पण और लेंस के सूत्रों में चिह्न नियम गलत लगाना; दर्पण में $1/v + 1/u = 1/f$ और लेंस में $1/v - 1/u = 1/f$ होता है।
  2. आवर्धन का चिह्न भूल जाना; दर्पण में $m = -v/u$ और लेंस में $m = v/u$ होता है।
  3. सघन माध्यम में प्रकाश की चाल अधिक मानना; सघन माध्यम में चाल कम होती है।
  4. क्रांतिक कोण को सघन माध्यम के सापेक्ष परिभाषित करते समय यह भूलना कि यह सघन से विरल माध्यम में संक्रमण के लिए होता है।
  5. लेंस की क्षमता की इकाई को मीटर लिखना; क्षमता की इकाई डायोप्टर होती है।
  6. प्रिज्म में रंगों के विचलन का क्रम उलट देना; बैंगनी का विचलन सबसे अधिक और लाल का सबसे कम होता है।
  7. यौगिक सूक्ष्मदर्शी में आवर्धन को दोनों लेंसों के आवर्धन का योग मानना; यह गुणनफल होता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. दर्पण और लेंस के सूत्रों के संख्यात्मक प्रश्न परीक्षा में बहुत आम हैं; चिह्न परिपाटी के साथ अभ्यास करें।
  2. लेंस निर्माता का सूत्र और लेंसों के संयोजन की क्षमता का सूत्र याद रखें।
  3. कुल आंतरिक परावर्तन की शर्तें और प्रकाशीय तंतु का सिद्धांत सैद्धांतिक प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
  4. स्नेल का नियम और क्रांतिक कोण से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न हल करें।
  5. प्रिज्म सूत्र $n = \sin[(A+\delta_m)/2]/\sin(A/2)$ याद रखें।
  6. सूक्ष्मदर्शी और दूरदर्शी के आवर्धन सूत्र तथा उनकी रचना आरेख सहित लिखना सीखें।
  7. चिह्न परिपाटी को ध्यान से समझें — वस्तु की दूरी दर्पण/लेंस के लिए हमेशा ऋणात्मक होती है।

निष्कर्ष

किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र अध्याय प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन और विक्षेपण की संकल्पनाओं को स्पष्ट करता है। दर्पण सूत्र, लेंस सूत्र, स्नेल का नियम और प्रिज्म सूत्र इस अध्याय के केंद्रीय बिंदु हैं। कुल आंतरिक परावर्तन का उपयोग प्रकाशीय तंतु में होता है, जो आधुनिक संचार का आधार है। सूक्ष्मदर्शी और दूरदर्शी जैसे प्रकाशिक यंत्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन संकल्पनाओं की दृढ़ समझ अगले अध्याय — तरंग प्रकाशिकी — के लिए आवश्यक है। नियमित अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।