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1. परिचय

इस अध्याय में हम अर्धचालक पदार्थों और उनसे बने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अध्ययन करेंगे। अर्धचालक वे पदार्थ होते हैं जिनकी चालकता चालकों (जैसे ताँबा) और अचालकों (जैसे रबर) के बीच होती है। सिलिकॉन और जर्मेनियम सबसे सामान्य अर्धचालक हैं। अर्धचालक पदार्थों में डोपन (Doping) द्वारा n-प्रकार और p-प्रकार अर्धचालक बनाए जाते हैं। इन्हीं से p-n संधि डायोड, ट्रांजिस्टर और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाए जाते हैं। आधुनिक कंप्यूटर, मोबाइल और संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स इन्हीं अर्धचालक उपकरणों पर आधारित हैं।

2. अर्धचालक की ऊर्जा बैंड संरचना (Energy Bands in Solids)

ठोस पदार्थों में परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा स्तर मिलकर ऊर्जा बैंड बनाते हैं। मुख्य बैंड:

  1. संयोजकता बैंड (Valence Band): वह बैंड जो संयोजकता इलेक्ट्रॉनों से पूर्णतया भरा रहता है।
  2. चालन बैंड (Conduction Band): वह बैंड जो या तो खाली रहता है या आंशिक रूप से भरा होता है।
  3. निषिद्ध ऊर्जा अंतराल (Forbidden Energy Gap): संयोजकता और चालन बैंड के बीच का ऊर्जा अंतराल, जहाँ इलेक्ट्रॉन नहीं रह सकते।

चालकों, अर्धचालकों और अचालकों में भेद:

पदार्थ निषिद्ध अंतराल (E_g)
चालक (धातु) $E_g = 0$ या बैंड ओवरलैप
अर्धचालक $E_g \approx 1$ eV (Si: 1.14 eV, Ge: 0.67 eV)
अचालक $E_g > 3$ eV (हीरा: 5.8 eV)

अर्धचालकों की चालकता ताप बढ़ने पर बढ़ती है (चालकों के विपरीत), क्योंकि ताप से इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में संक्रमण करते हैं।

3. आंतरिक अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor)

शुद्ध (डोपन-रहित) अर्धचालक को आंतरिक अर्धचालक कहते हैं। सिलिकॉन में प्रत्येक सिलिकॉन परमाणु अपने 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉनों द्वारा 4 पड़ोसी परमाणुओं से सहसंयोजक बंध बनाता है। कमरे के ताप पर कुछ सहसंयोजक बंध टूटते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन-छिद्र युग्म उत्पन्न होते हैं। इनमें:

आंतरिक अर्धचालक में $n_e = n_h$ होता है।

4. अपद्रव्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductor)

शुद्ध अर्धचालक में अशुद्धता मिलाकर उसकी चालकता नियंत्रित की जाती है। इस प्रक्रिया को डोपन (Doping) कहते हैं।

n-प्रकार अर्धचालक:

सिलिकॉन में पंचसंयोजक (Pentavalent) अशुद्धता (फॉस्फोरस, आर्सेनिक, एंटीमनी) मिलाने से बनता है। प्रत्येक अशुद्धता परमाणु अपने 4 इलेक्ट्रॉन बंध के लिए देता है, और 5वाँ इलेक्ट्रॉन मुक्त रह जाता है। इससे अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन (दाता, Donor) मिलते हैं। बहुसंख्यक वाहक इलेक्ट्रॉन और अल्पसंख्यक वाहक छिद्र होते हैं।

p-प्रकार अर्धचालक:

सिलिकॉन में त्रिसंयोजक (Trivalent) अशुद्धता (बोरॉन, एल्युमिनियम, इंडियम) मिलाने से बनता है। प्रत्येक अशुद्धता परमाणु में एक बंध अधूरा रहता है, जिसे छिद्र (ग्राही, Acceptor) कहते हैं। बहुसंख्यक वाहक छिद्र और अल्पसंख्यक वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं।

यद्यपि n-प्रकार अर्धचालक में अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, परंतु समग्र रूप से यह विद्युत उदासीन रहता है, क्योंकि परमाणुओं का कुल आवेश संतुलित होता है।

5. p-n संधि (p-n Junction)

जब p-प्रकार और n-प्रकार अर्धचालकों को एक साथ मिलाया जाता है, तो उनके बीच की सीमा पर p-n संधि बनती है। संधि के निकट विसरण के कारण आवेश वाहक पुनः संयोजित होते हैं और एक आवेश-विहीन क्षेत्र (Depletion Region) बनता है। इस क्षेत्र में बाधक विभव (Barrier Potential) होता है। सिलिकॉन के लिए बाधक विभव लगभग 0.7 V और जर्मेनियम के लिए 0.3 V होता है।

अग्र अभिनति (Forward Bias):

जब p-प्रकार को बैटरी के धन टर्मिनल से और n-प्रकार को ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है, तो अग्र अभिनति कहलाती है। इसमें बाधक विभव घटता है और धारा आसानी से प्रवाहित होती है।

पश्च अभिनति (Reverse Bias):

जब p-प्रकार को ऋण टर्मिनल से और n-प्रकार को धन टर्मिनल से जोड़ा जाता है, तो पश्च अभिनति होती है। इसमें बाधक विभव बढ़ता है और धारा लगभग शून्य होती है (केवल अल्पसंख्यक वाहकों की छोटी धारा)।

6. p-n संधि डायोड (p-n Junction Diode)

p-n संधि डायोड में एक दिशा में धारा प्रवाह की अनुमति होती है, इसलिए इसे एकदिशीय चालक कहते हैं। डायोड की विशेषताएँ:

अग्र अभिनति में:

पश्च अभिनति में:

डायोड का उपयोग: 1. दिष्टकारी (Rectifier) के रूप में — AC को DC में बदलना 2. संसूचक (Detector) के रूप में — AM सिग्नल का संसूचन 3. लाइट एमिटिंग डायोड (LED) 4. ज़ेनर डायोड — वोल्टता नियमन में

पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifier):

दो डायोडों और केंद्र-टैप ट्रांसफार्मर द्वारा बना पूर्ण तरंग दिष्टकारी प्रत्यावर्ती वोल्टता के दोनों अर्धचक्रों में धारा प्रवाहित करता है। इसकी दक्षता अर्ध तरंग दिष्टकारी से अधिक होती है।

7. ज़ेनर डायोड (Zener Diode)

ज़ेनर डायोड विशेष रूप से डोपित पश्च-अभिनत डायोड है जो भंजन क्षेत्र में कार्य करता है। यह वोल्टता नियमन (Voltage Regulation) में उपयोग होता है। पश्च अभिनति में भंजन वोल्टता के बाद भी धारा बढ़ने पर भी वोल्टता स्थिर रहती है।

8. ट्रांजिस्टर (Transistor)

ट्रांजिस्टर तीन टर्मिनलों वाला अर्धचालक उपकरण है। यह दो प्रकार के होते हैं — n-p-n और p-n-p। इसमें तीन क्षेत्र होते हैं: उत्सर्जक (Emitter, E), आधार (Base, B) और संग्राहक (Collector, C)।

ट्रांजिस्टर की संरचना:

ट्रांजिस्टर के मुख्य उपयोग:

  1. एम्प्लीफायर (प्रवर्धक) — सिग्नल की तीव्रता बढ़ाना
  2. स्विच (Switch) — संतृप्ति और विच्छेद क्षेत्र में
  3. ऑसिलेटर — दोलन उत्पन्न करना

ट्रांजिस्टर में धारा संबंध:

$$I_E = I_B + I_C$$

प्रत्यावर्ती धारा प्रवर्धन गुणांक:

$$\beta = \frac{\Delta I_C}{\Delta I_B}$$

n-p-n ट्रांजिस्टर में इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं, जो उत्सर्जक से संग्राहक की ओर प्रवाहित होते हैं। आधार बहुत पतला होने के कारण अधिकांश वाहक आधार से होकर संग्राहक में पहुँच जाते हैं।

9. डिजिटल इलेक्ट्रॉनिकी (Digital Electronics)

डिजिटल इलेक्ट्रॉनिकी में केवल दो अवस्थाएँ होती हैं — उच्च (1) और निम्न (0)। तर्क गेट (Logic Gates) डिजिटल परिपथों के मूलभूत खंड हैं:

मूल गेट:

  1. OR गेट: $Y = A + B$ (कम से कम एक इनपुट 1 होने पर आउटपुट 1)
  2. AND गेट: $Y = A \cdot B$ (दोनों इनपुट 1 होने पर आउटपुट 1)
  3. NOT गेट: $Y = \bar{A}$ (इनपुट का व्युत्क्रम)

व्युत्पन्न गेट:

  1. NAND गेट: $Y = \overline{A \cdot B}$
  2. NOR गेट: $Y = \overline{A + B}$
  3. XOR गेट: $Y = A\bar{B} + \bar{A}B$

NAND और NOR गेट को सार्वत्रिक गेट (Universal Gates) कहते हैं, क्योंकि इनसे कोई भी अन्य गेट बनाया जा सकता है। NAND गेट की सत्य सारणी: जब दोनों इनपुट 1 हों तभी आउटपुट 0, अन्यथा आउटपुट 1।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: गेट सत्य सारणी

A B AND OR NAND NOR
0 0 0 0 1 1
0 1 0 1 1 0
1 0 0 1 1 0
1 1 1 1 0 0

तालिका 2: अर्धचालक उपकरण

उपकरण टर्मिनल मुख्य उपयोग
p-n डायोड 2 (एनोड, कैथोड) दिष्टकारी
ज़ेनर डायोड 2 वोल्टता नियमन
LED 2 प्रकाश उत्सर्जन
ट्रांजिस्टर 3 (E, B, C) प्रवर्धन, स्विचिंग

माइंड मैप

graph TD A["अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी"] --> B["अर्धचालक"] B --> B1["आंतरिक"] B --> B2["n-प्रकार (दाता)"] B --> B3["p-प्रकार (ग्राही)"] A --> C["p-n संधि"] C --> C1["अग्र अभिनति"] C --> C2["पश्च अभिनति"] A --> D["डायोड"] D --> D1["दिष्टकारी"] D --> D2["ज़ेनर"] D --> D3["LED"] A --> E["ट्रांजिस्टर"] E --> E1["n-p-n"] E --> E2["p-n-p"] E --> E3["IE = IB + IC"] A --> F["डिजिटल इलेक्ट्रॉनिकी"] F --> F1["AND, OR, NOT"] F --> F2["NAND, NOR (सार्वत्रिक)"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: p-n संधि डायोड — अग्र और पश्च अभिनति

p-n संधि डायोड p n अवक्षय क्षेत्र अग्र अभिनति धारा प्रवाह अग्र: बाधक विभव घटता है, धारा अधिक पश्च: बाधक विभव बढ़ता है, धारा लगभग शून्य Si: 0.7 V, Ge: 0.3 V (बाधक विभव) स्वर्ण नियम: डायोड एकदिशीय चालक है, अग्र में चालक पश्च में अचालक पश्च अभिनति में केवल अल्पसंख्यक वाहकों की धारा

आरेख 2: n-p-n ट्रांजिस्टर

n-p-n ट्रांजिस्टर n (उत्सर्जक) भारी डोपित p (आधार) n (संग्राहक) सबसे बड़ा E (उत्सर्जक) B (आधार) C (संग्राहक) IE = IB + IC, β = ΔIC/ΔIB आधार बहुत पतला, अधिकांश इलेक्ट्रॉन संग्राहक तक पहुँचते हैं Golden Rule: IE = IB + IC, β = ΔIC/ΔIB, प्रवर्धन हेतु CE

सामान्य गलतियाँ

  1. n-प्रकार अर्धचालक को कुल ऋणावेशित मानना; वास्तव में यह विद्युत उदासीन होता है।
  2. p-n संधि की अग्र अभिनति में बैटरी का टर्मिनल संयोजन उलट देना।
  3. जर्मेनियम और सिलिकॉन के बाधक विभव (0.3 V और 0.7 V) को आपस में बदल देना।
  4. ट्रांजिस्टर के टर्मिनलों (E, B, C) की डोपन सांद्रता का क्रम भूलना — E भारी, B हल्का, C मध्यम।
  5. NAND गेट की सत्य सारणी में आउटपुट को AND के बराबर लिखना; NAND, AND का व्युत्क्रम होता है।
  6. अर्धचालक की चालकता ताप पर बढ़ती है, इसे चालकों जैसा (घटना) मानना।
  7. ट्रांजिस्टर में $I_E = I_B + I_C$ के स्थान पर $I_E = I_B \times I_C$ लिखना।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. n-प्रकार और p-प्रकार अर्धचालकों की डोपन प्रक्रिया और वाहकों का विवरण सैद्धांतिक प्रश्नों में आता है।
  2. डायोड की अग्र और पश्च अभिनति के आरेख और व्यवहार लिखना सीखें।
  3. ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ-उत्सर्जक (CE) विन्यास में धारा प्रवर्धन गुणांक β = ΔI_C/ΔI_B के संख्यात्मक प्रश्न हल करें।
  4. तर्क गेटों की सत्य सारणियाँ (AND, OR, NOT, NAND, NOR) बनाना सीखें।
  5. सार्वत्रिक गेट (NAND, NOR) की अवधारणा याद रखें।
  6. पूर्ण तरंग दिष्टकारी का आरेख और उसका सिद्धांत लिखें।
  7. अर्धचालकों में तापीय चालकता और डोपन के प्रभाव की संकल्पनाओं को समझें।

निष्कर्ष

अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी आधुनिक प्रौद्योगिकी की रीढ़ है। अर्धचालक पदार्थों के गुणों को समझकर n-प्रकार और p-प्रकार अर्धचालक बनाए जाते हैं, जिनसे p-n संधि, डायोड और ट्रांजिस्टर बनते हैं। डायोड का उपयोग दिष्टकरण में, ज़ेनर डायोड का वोल्टता नियमन में और ट्रांजिस्टर का प्रवर्धन तथा स्विचिंग में होता है। डिजिटल इलेक्ट्रॉनिकी के तर्क गेट कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों का आधार हैं। इन संकल्पनाओं की गहरी समझ इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार और कंप्यूटर विज्ञान के आगे के अध्ययन के लिए आवश्यक है। अगले अध्याय — संचार व्यवस्था — में हम इन्हीं उपकरणों के उपयोग का अध्ययन करेंगे।