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1. परिचय

इस अध्याय में हम प्रकाश के तरंग स्वरूप का अध्ययन करेंगे। जहाँ किरण प्रकाशिकी में प्रकाश को सरल रेखा में संचरण करने वाला माना जाता था, वहीं तरंग प्रकाशिकी में प्रकाश को विद्युतचुंबकीय तरंग माना जाता है। हाइगेन्स ने प्रकाश के तरंग सिद्धांत का प्रतिपादन किया। तरंग प्रकाशिकी में व्यतिकरण (Interference), विवर्तन (Diffraction) तथा ध्रुवण (Polarization) जैसी घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग, फ्रेस्नेल तथा फ्राउनहोफर विवर्तन तथा ध्रुवण के नियम इस अध्याय के मुख्य विषय हैं। प्रकाश के तरंग रूप को समझना आधुनिक भौतिकी की नींव है।

2. हाइगेन्स का सिद्धांत (Huygens' Principle)

हाइगेन्स ने 1678 में प्रकाश का तरंग सिद्धांत प्रस्तुत किया। इसके अनुसार:

  1. प्रकाश का प्रत्येक बिंदु नई गोलाकार तरंगों का स्रोत होता है, जिन्हें द्वितीयक तरंगिकाएँ (Secondary Wavelets) कहते हैं।
  2. इन द्वितीयक तरंगिकाओं की अभिबंध (Envelope) अग्रभाग (Wavefront) को निर्धारित करती है।
  3. आगे के किसी भी क्षण पर नया तरंग अग्रभाग द्वितीयक तरंगिकाओं के आच्छादन से प्राप्त होता है।

हाइगेन्स के सिद्धांत द्वारा परावर्तन और अपवर्तन के नियमों को ज्यामितीय रूप से सिद्ध किया जा सकता है। तरंग अग्रभाग (Wavefront) दो प्रकार के होते हैं — समतल (Plane) तथा गोलाकार (Spherical)। स्रोत से काफी दूरी पर गोलाकार तरंग अग्रभाग लगभग समतल हो जाता है।

3. व्यतिकरण (Interference)

जब दो संगत (Coherent) प्रकाश तरंगें अध्यारोपित होती हैं, तो प्रकाश की तीव्रता का पुनर्वितरण होता है। इस घटना को व्यतिकरण कहते हैं। व्यतिकरण के दो प्रकार हैं:

रचनात्मक व्यतिकरण (Constructive Interference)

जब दोनों तरंगों का पथांतर तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणज ($0, \lambda, 2\lambda, \ldots$) होता है, तो तीव्रता अधिकतम होती है:

$$\Delta x = n\lambda, \quad n = 0, 1, 2, \ldots$$

विध्वंसक व्यतिकरण (Destructive Interference)

जब पथांतर विषम गुणज ($\lambda/2, 3\lambda/2, \ldots$) होता है, तो तीव्रता न्यूनतम (शून्य) होती है:

$$\Delta x = (2n+1)\frac{\lambda}{2}, \quad n = 0, 1, 2, \ldots$$

तीव्रता का संबंध

$I_1$ और $I_2$ तीव्रता वाली दो तरंगों के अध्यारोपण पर:

$$I = I_1 + I_2 + 2\sqrt{I_1 I_2}\cos\phi$$

यदि $I_1 = I_2 = I_0$, तो:

$$I_{max} = 4I_0, \quad I_{min} = 0$$

4. यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग (Young's Double Slit Experiment)

यंग ने 1801 में दो स्लिटों से प्रकाश गुजारकर व्यतिकरण प्रदर्शित किया। इस प्रयोग से प्रकाश के तरंग स्वरूप का प्रमाण मिला। स्लिटों से दूरी $D$ पर पर्दे पर व्यतिकरण फ्रिंज बनते हैं। दो स्लिटों के बीच की दूरी $d$ हो, तो:

फ्रिंज की चौड़ाई:

$$\beta = \frac{\lambda D}{d}$$

उज्ज्वल फ्रिंज की स्थिति:

$$y_n = \frac{n\lambda D}{d}$$

अदीप्त फ्रिंज की स्थिति:

$$y_n = \frac{(2n+1)\lambda D}{2d}$$

यंग के प्रयोग की शर्तों के अनुसार स्लिटें बहुत पतली और निकट होनी चाहिए। यंग के प्रयोग में पर्दे पर बनी फ्रिंजें सामान रूप से समान चौड़ाई की होती हैं। यदि स्लिटें एक-दूसरे के निकट हों (d कम), तो फ्रिंज चौड़ी होती हैं।

व्यतिकरण के लिए शर्तें:

  1. स्रोत संगत (Coherent) होने चाहिए — दोनों में स्थिर फेज संबंध हो।
  2. दोनों तरंगों की आवृत्ति समान हो।
  3. दोनों तरंगों के आयाम समान या लगभग समान हों।

5. प्रकाश के तरंग सिद्धांत के प्रमाण

तरंग सिद्धांत को सिद्ध करने वाली मुख्य घटनाएँ व्यतिकरण और विवर्तन हैं। इन घटनाओं को कण सिद्धांत (न्यूटन का कणिका सिद्धांत) द्वारा समझाया नहीं जा सकता। इसके अतिरिक्त ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होता है, जो यह सिद्ध करता है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।

6. विवर्तन (Diffraction)

जब प्रकाश किसी संकीर्ण छिद्र या बाधा के किनारे से गुजरता है, तो वह अपने सरल रेखीय पथ से विचलित हो जाता है और बाधा के किनारों में प्रवेश करता है। इस घटना को विवर्तन कहते हैं। विवर्तन प्रत्येक प्रकार की तरंगों में होता है, परंतु प्रकाश का तरंगदैर्घ्य बहुत कम होने के कारण यह सामान्य स्थितियों में स्पष्ट नहीं दिखता।

एकल स्लिट विवर्तन (Single Slit Diffraction)

चौड़ाई $a$ की एकल स्लिट के विवर्तन में केन्द्रीय उच्चिष्ठ (Central Maximum) सबसे चमकीला और सबसे चौड़ा होता है। निम्निष्ठ की स्थिति:

$$a\sin\theta = n\lambda$$

केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई:

$$2\theta = \frac{2\lambda}{a}$$

केन्द्रीय उच्चिष्ठ दोनों ओर के द्वितीयक उच्चिष्ठों से दोगुना चौड़ा होता है।

विवर्तन की विशेषताएँ:

  1. एकल स्लिट विवर्तन में केन्द्रीय उच्चिष्ठ सबसे चमकीला और सबसे चौड़ा होता है।
  2. द्वितीयक उच्चिष्ठों की तीव्रता केन्द्रीय से बहुत कम होती है।
  3. जब स्लिट की चौड़ाई तरंगदैर्घ्य के बराबर हो जाती है, तो विवर्तन अधिकतम स्पष्ट होता है।
  4. स्लिट की चौड़ाई बढ़ाने पर विवर्तन प्रभाव कम होता है।

7. ध्रुवण (Polarization)

सामान्य प्रकाश में विद्युत क्षेत्र सभी दिशाओं में कंपन करता है। जब प्रकाश किसी विशेष तल में कंपन करने लगता है, तो उसे ध्रुवित प्रकाश कहते हैं। ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होता है, जो सिद्ध करता है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ हैं।

ब्रूस्टर का नियम (Brewster's Law):

जब परावर्तित और अपवर्तित किरणें परस्पर लंबवत होती हैं, तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः ध्रुवित होता है। इस कोण को ध्रुवण कोण ($i_p$) कहते हैं:

$$\tan i_p = n$$

यहाँ $n$ माध्यम का अपवर्तनांक है। कांच के लिए ध्रुवण कोण लगभग $57^\circ$ होता है।

मालस का नियम (Malus' Law):

ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता जब विश्लेषक (Analyzer) से गुजरती है:

$$I = I_0 \cos^2\theta$$

यहाँ $\theta$ ध्रुवक और विश्लेषक के अक्षों के बीच का कोण है। जब $\theta = 90^\circ$, तो तीव्रता शून्य होती है।

ध्रुवण के उपयोग:

  1. कैमरे के लेंस में चमक कम करने के लिए ध्रुवण फिल्टर।
  2. सनग्लासेज में।
  3. 3D चलचित्र में।
  4. बिम्ब में तनाव का पता लगाने में।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: महत्वपूर्ण सूत्र

घटना सूत्र
फ्रिंज चौड़ाई $\beta = \lambda D/d$
उज्ज्वल फ्रिंज $y_n = n\lambda D/d$
अदीप्त फ्रिंज $y_n = (2n+1)\lambda D/2d$
एकल स्लिट निम्निष्ठ $a\sin\theta = n\lambda$
केन्द्रीय उच्चिष्ठ कोण $2\theta = 2\lambda/a$
ब्रूस्टर नियम $\tan i_p = n$
मालस नियम $I = I_0\cos^2\theta$

तालिका 2: व्यतिकरण और विवर्तन की तुलना

गुण व्यतिकरण विवर्तन
स्रोत दो स्लिट एक स्लिट
फ्रिंज समान चौड़ाई असमान चौड़ाई
तीव्रता समान घटती जाती है

माइंड मैप

graph TD A["तरंग प्रकाशिकी"] --> B["हाइगेन्स सिद्धांत"] B --> B1["द्वितीयक तरंगिकाएँ"] B --> B2["तरंग अग्रभाग"] A --> C["व्यतिकरण"] C --> C1["रचनात्मक: nλ"] C --> C2["विध्वंसक: (2n+1)λ/2"] C --> C3["यंग का प्रयोग β = λD/d"] A --> D["विवर्तन"] D --> D1["एकल स्लिट"] D --> D2["a sinθ = nλ"] A --> E["ध्रुवण"] E --> E1["ब्रूस्टर: tan ip = n"] E --> E2["मालस: I = I₀cos²θ"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग

यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग S₁ S₂ एकवर्णी स्रोत पर्दा फ्रिंजें β = λD/d, उज्ज्वल फ्रिंज y = nλD/d सभी फ्रिंजें समान चौड़ाई की होती हैं स्वर्ण नियम: β = λD/d, पथांतर nλ पर उज्ज्वल फ्रिंज

आरेख 2: एकल स्लिट विवर्तन

एकल स्लिट विवर्तन स्लिट (चौड़ाई a) फ्रिंज केन्द्रीय उच्चिष्ठ केन्द्रीय उच्चिष्ठ सबसे चौड़ा और चमकीला निम्निष्ठ: a sinθ = nλ केन्द्रीय उच्चिष्ठ कोणीय चौड़ाई 2λ/a Golden Rule: केन्द्रीय उच्चिष्ठ द्वितीयक से दोगुना चौड़ा

सामान्य गलतियाँ

  1. व्यतिकरण और विवर्तन की फ्रिंजें समान चौड़ाई की होती हैं यह भ्रम; व्यतिकरण की फ्रिंजें समान, विवर्तन की असमान होती हैं।
  2. एकल स्लिट विवर्तन के निम्निष्ठ की स्थिति $a\sin\theta = n\lambda$ के स्थान पर $(2n+1)\lambda/2$ लिखना; विवर्तन में उच्चिष्ठ हेतु भिन्न शर्त है।
  3. व्यतिकरण के लिए स्रोतों की संगतता (Coherence) को महत्व न देना; असंगत स्रोतों से स्थायी व्यतिकरण संभव नहीं।
  4. मालस के नियम में कोण $\theta$ को गलत परिभाषित करना; यह दोनों पोलरॉइड के अक्षों के बीच का कोण है।
  5. ध्रुवण को अनुदैर्घ्य तरंगों का गुण मानना; यह केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होता है।
  6. फ्रिंज चौड़ाई $\beta = \lambda D/d$ में $d$ को स्लिट से पर्दे की दूरी मानना; $d$ दो स्लिटों के बीच की दूरी है।
  7. हाइगेन्स सिद्धांत में द्वितीयक तरंगिकाओं की अवधारणा को न समझना।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग का आरेख बनाकर फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र $\beta = \lambda D/d$ लिखना सीखें।
  2. रचनात्मक और विध्वंसक व्यतिकरण की शर्तें याद रखें ($n\lambda$ और $(2n+1)\lambda/2$)।
  3. एकल स्लिट विवर्तन में निम्निष्ठ और केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई के सूत्र रटें।
  4. ध्रुवण पर ब्रूस्टर नियम $\tan i_p = n$ और मालस नियम $I = I_0\cos^2\theta$ के प्रश्नों का अभ्यास करें।
  5. हाइगेन्स के सिद्धांत की व्याख्या और परावर्तन/अपवर्तन के नियमों की व्युत्पत्ति सैद्धांतिक प्रश्नों में आती है।
  6. व्यतिकरण और विवर्तन की तुलनात्मक तालिका याद रखें।
  7. तीव्रता संबंध $I = I_1 + I_2 + 2\sqrt{I_1I_2}\cos\phi$ तथा $I_{max} = 4I_0$, $I_{min} = 0$ के संख्यात्मक अभ्यास करें।

निष्कर्ष

तरंग प्रकाशिकी प्रकाश के तरंग स्वरूप को स्थापित करता है। हाइगेन्स का सिद्धांत, व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण प्रकाश की तरंग प्रकृति के प्रबल प्रमाण हैं। यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग और एकल स्लिट विवर्तन प्रकाश की तरंग प्रकृति को समझाने वाले क्लासिक प्रयोग हैं। ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होने से सिद्ध होता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है। इन संकल्पनाओं की समझ आधुनिक प्रकाशिकी, होलोग्राफी और ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंटेशन के लिए आवश्यक है। अगले अध्याय — विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति — में हम प्रकाश के कण रूप का अध्ययन करेंगे, जो तरंग संकल्पना को पूरक करता है।