अंतर्राष्ट्रीय संगठन वे संस्थाएँ हैं जो विभिन्न देशों के बीच सहयोग, शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए बनाई जाती हैं। ये संगठन सदस्य देशों के बीच वार्ता, नीति निर्माण और संघर्ष समाधान के मंच का कार्य करते हैं। इनकी उत्पत्ति विश्व युद्धों के बाद हुई, जब देशों ने महसूस किया कि आपसी सहयोग के बिना विश्व शांति संभव नहीं है। प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1920 में 'लीग ऑफ नेशंस' (राष्ट्र संघ) की स्थापना हुई, परंतु यह संगठन द्वितीय विश्व युद्ध को रोकने में विफल रहा। द्वितीय विश्व युद्ध (1945) की समाप्ति के बाद 24 अक्टूबर 1945 को 'संयुक्त राष्ट्र संघ' (United Nations) की स्थापना हुई। इस अध्याय में हम संयुक्त राष्ट्र की संरचना, उसके अंग, सुरक्षा परिषद, सुधारों की माँग, विशेष एजेंसियाँ और विश्व व्यापार संगठन जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों का अध्ययन करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को 51 सदस्य देशों के साथ हुई। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व शांति और सुरक्षा बनाए रखना, राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना, अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करना और मानवाधिकारों का संरक्षण करना है। संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, इसके सभी सदस्य देश समानता और संप्रभुता के सिद्धांतों पर आधारित हैं। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुख्य अंग हैं- महासभा (General Assembly), सुरक्षा परिषद (Security Council), आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC), अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ), सचिवालय (Secretariat) और ट्रस्टीशिप परिषद (Trusteeship Council)।
महासभा संयुक्त राष्ट्र का मुख्य अंग है, जिसमें सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है। प्रत्येक सदस्य देश के पास एक वोट होता है। महासभा वर्ष में एक बार सामान्य सत्र के लिए इकट्ठा होती है और बजट, नए सदस्यों के प्रवेश, अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर चर्चा करती है। महासभा के प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं होते, परंतु वे अंतरराष्ट्रीय राय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो विश्व शांति और सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है। इसमें 15 सदस्य देश होते हैं, जिनमें से 5 स्थायी सदस्य (Permanent Members) होते हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन। इन पाँचों स्थायी सदस्यों के पास 'वीटो पावर' (Veto Power) होती है, जिसका अर्थ है कि कोई भी एक स्थायी सदस्य किसी भी प्रस्ताव को अकेले रोक सकता है। शेष 10 सदस्य दो साल के लिए महासभा द्वारा चुने जाते हैं, जिन्हें 'अस्थायी सदस्य' कहा जाता है। सुरक्षा परिषद के पास आर्थिक प्रतिबंध लगाने, सैन्य कार्रवाई करने और शांति सेनाएँ (Peacekeeping forces) भेजने की शक्ति है। हालाँकि, सुरक्षा परिषद के सुधार की माँग लंबे समय से हो रही है, क्योंकि इसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।
कई देश सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की माँग करते हैं। भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील जैसे देश 'जी-4' (G4) समूह में शामिल हैं, जो स्थायी सदस्यता की माँग करते हैं। इन देशों का कहना है कि सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना 1945 की वास्तविकताओं पर आधारित है, जबकि आज विश्व व्यवस्था बदल गई है। अफ्रीकी महाद्वीप को भी स्थायी प्रतिनिधित्व दिए जाने की माँग है। हालाँकि, स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति के कारण सुधार की प्रक्रिया धीमी रही है।
संयुक्त राष्ट्र की कई विशेष एजेंसियाँ हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) स्वास्थ्य क्षेत्र में, यूनेस्को (UNESCO) शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में, यूनिसेफ (UNICEF) बच्चों के अधिकारों के क्षेत्र में, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) श्रमिकों के क्षेत्र में कार्य करती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक आर्थिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्थाएँ हैं। इन एजेंसियों का उद्देश्य विभिन्न देशों में विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) गरीबी उन्मूलन और मानव विकास के क्षेत्रों में कार्य करता है। पर्यावरण के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) कार्य करता है।
संयुक्त राष्ट्र ने विश्व शांति और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी शांति सेनाएँ (Peacekeeping Forces) कई संघर्ष क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने उपनिवेशवाद के अंत, मानवाधिकारों के संरक्षण, आर्थिक विकास और मानवीय सहायता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालाँकि, इसकी सीमाएँ भी स्पष्ट हैं। सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति के कारण कई बार प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। शीत युद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र महाशक्तियों के टकराव के कारण अप्रभावी रहा। विकासशील देशों की माँगों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 की व्यवस्था पर आधारित है, जो वर्तमान विश्व की वास्तविकता के अनुरूप नहीं है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 1995 में हुई, जो वैश्विक व्यापार के नियमों को निर्धारित करता है। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। WTO व्यापार विवादों का समाधान करता है, व्यापार की बाधाओं को कम करता है और सभी सदस्य देशों के लिए समान व्यापार नियमों को सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC), अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), विश्व बैंक, आईएमएफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे संगठन महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्रीय स्तर पर सासार्क, आसियान, यूरोपीय संघ जैसे संगठन भी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, जी-20 (G20) प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करता है। ये सभी संगठन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में सहायक हैं।
| अंग | भूमिका |
|---|---|
| महासभा | सभी सदस्यों का प्रतिनिधित्व, एक देश एक वोट |
| सुरक्षा परिषद | विश्व शांति और सुरक्षा, 15 सदस्य |
| आर्थिक एवं सामाजिक परिषद | आर्थिक और सामाजिक विकास |
| अंतरराष्ट्रीय न्यायालय | अंतरराष्ट्रीय विवादों का न्यायिक समाधान |
| सचिवालय | संयुक्त राष्ट्र का प्रशासनिक निकाय |
| ट्रस्टीशिप परिषद | ट्रस्ट क्षेत्रों की निगरानी |
| एजेंसी | कार्य क्षेत्र |
|---|---|
| WHO | स्वास्थ्य |
| UNESCO | शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति |
| UNICEF | बच्चों के अधिकार |
| ILO | श्रम अधिकार |
| IMF | आर्थिक सहयोग |
| विश्व बैंक | विकास सहायता |
| UNDP | गरीबी उन्मूलन |
| UNEP | पर्यावरण |
अंतरराष्ट्रीय संगठन विश्व व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संयुक्त राष्ट्र विश्व का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई। इसके सुरक्षा परिषद में सुधार की माँग बढ़ती जा रही है, क्योंकि वर्तमान संरचना में विकासशील देशों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। विश्व व्यापार संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे संगठन वैश्विक व्यापार, आर्थिक विकास और स्वास्थ्य में योगदान देते हैं। भारत जैसे देश इन संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं और वैश्विक शासन में सुधार की माँग करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अध्ययन से विद्यार्थी विश्व राजनीति की संरचना और उसकी जटिलताओं को समझ सकते हैं।