दक्षिण एशिया विश्व का वह क्षेत्र है जिसमें सात देश शामिल हैं- भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव। इस क्षेत्र को 'भारतीय उपमहाद्वीप' भी कहा जाता है। इन देशों में साझा सांस्कृतिक विरासत, औपनिवेशिक इतिहास और अनेक सामान्य चुनौतियाँ हैं। 1985 में इन देशों के सहयोग के लिए 'दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन' (SAARC) की स्थापना की गई। दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की स्थिति अलग-अलग देशों में भिन्न रही है। जहाँ भारत और श्रीलंका में लोकतंत्र मजबूत हुआ, वहीं पाकिस्तान में सैन्य शासन और लोकतंत्र के बीच उतार-चढ़ाव रहा। बांग्लादेश में भी सैन्य शासन का अनुभव रहा है। इस अध्याय में हम दक्षिण एशिया के देशों की राजनीतिक स्थिति, क्षेत्रीय सहयोग, प्रमुख विवाद, सैन्यवाद और भारत की भूमिका का विश्लेषण करेंगे।
दक्षिण एशिया के सातों देशों का अपना-अपना राजनीतिक इतिहास रहा है। भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ और उसने संसदीय लोकतंत्र को अपनाया। पाकिस्तान भी 1947 में बना, लेकिन वहाँ सैन्य शासन ने बार-बार सत्ता पर कब्जा किया (1958-71 में अयूब खान, 1977-88 में जिया-उल-हक, 1999-2008 में परवेज़ मुशर्रफ)। बांग्लादेश 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बना और शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में लोकतंत्र की शुरुआत हुई, किंतु बाद में सैन्य शासन का अनुभव किया। नेपाल में 2008 तक राजतंत्र था, जिसके बाद वहाँ संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना हुई। भूटान में राजतंत्र सीमित लोकतंत्र में परिवर्तित हुआ। श्रीलंका में लोकतंत्र विद्यमान है, लेकिन वहाँ तमिल अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर गृह युद्ध (1983-2009) हुआ। मालदीव छोटा द्वीपीय देश है, जहाँ 2008 में पहला बहुदलीय चुनाव हुआ।
भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश है, जो क्षेत्रफल, जनसंख्या और आर्थिक क्षमता की दृष्टि से सबसे बड़ा है। भारत के साथ उसके सभी पड़ोसी देशों की साझा सीमाएँ हैं, इसलिए भारत इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने हमेशा क्षेत्रीय शांति और सहयोग की वकालत की है। भारत के 'गुजराल सिद्धांत' (1996-98) ने पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों और आपसी लाभ के सिद्धांत पर जोर दिया। भारत ने सासार्क (SAARC) में प्रमुख भूमिका निभाई और उसकी पहल पर 'दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र' (SAFTA) 2006 में लागू हुआ।
दक्षिण एशिया में अनेक प्रमुख मुद्दे और विवाद हैं। सबसे गंभीर मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंध है। कश्मीर का विवाद 1947 से ही दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद है, जिस पर 1947-48, 1965 और 1999 में युद्ध हुए। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद भी दक्षिण एशिया की सुरक्षा को प्रभावित करता है। श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यकों का मुद्दा गृह युद्ध का कारण बना, जिसमें लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) संगठन सक्रिय था। नेपाल और भूटान में माओवादी विद्रोह (नेपाल में 1996-2006) की समस्या रही। इस क्षेत्र में आतंकवाद, गरीबी, भ्रष्टाचार, जातीय संघर्ष, पर्यावरणीय समस्याएँ और जल संसाधनों के विवाद जैसी साझा चुनौतियाँ हैं। सिंधु जल संधि (1960) भारत-पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे की महत्वपूर्ण संधि है।
दक्षिण एशिया में सैन्य शासन का प्रमुख उदाहरण पाकिस्तान है, जहाँ सैन्य शासकों ने लंबे समय तक सत्ता संभाली। 1958-71 तक अयूब खान, 1977-88 तक जिया-उल-हक और 1999-2008 तक परवेज़ मुशर्रफ ने शासन किया। बांग्लादेश में भी 1975-90 तक सैन्य शासन रहा। इन देशों में सैन्य शासन के कारण लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमजोर हुईं, मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ और आर्थिक विकास प्रभावित हुआ। दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की स्थिति को समझने के लिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भारत में लोकतंत्र मजबूत बना रहा, जबकि पड़ोसी देशों में लोकतंत्र और सैन्य शासन के बीच संघर्ष रहा।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की स्थापना 1985 में हुई। इसके संस्थापक सदस्यों में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव शामिल थे। 2007 में अफगानिस्तान भी इसका सदस्य बना। सासार्क का उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों में आर्थिक सहयोग, सामाजिक विकास, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाना है। सासार्क के तहत 2006 में 'दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र' (SAFTA) लागू हुआ, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देना है। हालाँकि, भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के कारण सासार्क का प्रभाव सीमित रहा है। सासार्क की सफलता की तुलना अक्सर आसियान से की जाती है, जो आर्थिक सहयोग में अधिक सफल रहा है। भारत दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश होने के नाते क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक, राजनयिक और सांस्कृतिक संबंध बनाए रखे हैं। 'गुजराल सिद्धांत' (1996-98) में तत्कालीन विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने पड़ोसी देशों को पारस्परिक रूप से बिना अपेक्षा सहायता देने की नीति अपनाने का सुझाव दिया। भारत ने श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव जैसे देशों को विभिन्न क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है। दक्षिण एशिया के भविष्य में क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना, आपसी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, गरीबी उन्मूलन, व्यापार विस्तार और आतंकवाद के विरुद्ध साझा रणनीति विकसित करना महत्वपूर्ण होगा। कुल मिलाकर दक्षिण एशिया का भविष्य उसके देशों के आपसी सहयोग पर निर्भर करता है।
| देश | स्वतंत्रता/स्थिति | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| भारत | 1947 | संसदीय लोकतंत्र, सबसे बड़ा देश |
| पाकिस्तान | 1947 | बार-बार सैन्य शासन |
| बांग्लादेश | 1971 | पाकिस्तान से अलग, सैन्य शासन का अनुभव |
| नेपाल | 2008 में गणराज्य | राजतंत्र से लोकतंत्र |
| भूटान | सीमित लोकतंत्र | राजतंत्र से परिवर्तन |
| श्रीलंका | 1948 | तमिल गृह युद्ध (1983-2009) |
| मालदीव | 2008 में बहुदलीय चुनाव | द्वीपीय देश |
| विवाद/घटना | विवरण |
|---|---|
| कश्मीर विवाद | 1947 से भारत-पाकिस्तान के बीच, 1947-48, 1965, 1999 में युद्ध |
| बांग्लादेश मुक्ति | 1971 युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण |
| श्रीलंका गृह युद्ध | तमिल अल्पसंख्यक, LTTE, 1983-2009 |
| सिंधु जल संधि | 1960, भारत-पाकिस्तान जल बंटवारा |
| नेपाल माओवादी विद्रोह | 1996-2006 |
दक्षिण एशिया विश्व का महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें सात देश अपनी अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाओं के साथ सह-अस्तित्व में हैं। इस क्षेत्र में भारत सबसे बड़ा और सबसे स्थिर लोकतंत्र है, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैन्य शासन का अनुभव रहा है। कश्मीर विवाद, श्रीलंका का गृह युद्ध, आतंकवाद और गरीबी इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियाँ हैं। सासार्क जैसे क्षेत्रीय संगठन आपसी सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं, परंतु भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण उनकी सफलता सीमित रही है। भारत इस क्षेत्र की स्थिरता में प्रमुख भूमिका निभाता है। दक्षिण एशिया का भविष्य उसके देशों के बीच आपसी सहयोग, शांति और आर्थिक साझेदारी पर निर्भर करेगा। विद्यार्थियों के लिए यह अध्याय भारत और उसके पड़ोसियों के संबंधों को समझने की बुनियाद है।