यह कविता 'द क्वारेल' अंग्रेज़ी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री एलिनोर फार्जन (Eleanor Farjeon) द्वारा रचित है। कविता में एक भाई और बहन के बीच हुए छोटे-से झगड़े का हास्यपूर्ण और मार्मिक वर्णन है। कवयित्री बताती हैं कि कैसे दोनों के बीच किसी छोटी-सी बात पर झगड़ा हो गया, और कैसे दोनों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा। इस झगड़े में दोनों में से कोई भी यह स्वीकार नहीं करना चाहता था कि उसकी गलती है।
कविता की शुरुआत में कवयित्री कहती हैं कि उन्होंने अपने भाई से झगड़ा किया, परंतु उन्हें स्पष्ट याद नहीं है कि झगड़ा किस बात पर हुआ। दोनों ने एक-दूसरे को भला-बुरा कहा, और यह झगड़ा कुछ देर तक चलता रहा। दोपहर में झगड़ा फिर से शुरू हो गया, और इस बार कवयित्री ने सोचा कि शायद गलती उनकी ही थी। उन्होंने अपने भाई से कहा कि शायद गलती मेरी है। इसके बाद स्थिति बदल गई।
कविता का सुंदर पहलू यह है कि शाम तक दोनों फिर से दोस्त बन गए और भाई ने उन्हें गले लगा लिया। यह कविता हमें सिखाती है कि छोटे-मोटे झगड़े रिश्तों को कमजोर नहीं बनाते, बल्कि क्षमा और प्रेम से रिश्ते और मजबूत होते हैं।
एलिनोर फार्जन (Eleanor Farjeon, 1881–1965) एक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवयित्री और बाल साहित्यकार थीं। उन्होंने बच्चों के लिए अनेक कविताएँ, कहानियाँ और नाटक लिखे। उनकी कविताएँ सरल, मधुर और जीवन के सामान्य अनुभवों पर आधारित होती हैं। उनकी प्रसिद्धि का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें 'Hans Christian Andersen Medal' जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाज़ा गया।
फार्जन की कविताओं में बचपन की मासूमियत, पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट और जीवन के छोटे-छोटे सुखों का सुंदर चित्रण मिलता है। 'द क्वारेल' में उन्होंने भाई-बहन के झगड़े और मेल-मिलाप को इस सहजता से चित्रित किया है कि हर बच्चा इसे अपने अनुभव से जोड़ सकता है।
कवयित्री कहती हैं कि उन्होंने अपने भाई से झगड़ा किया। उन्हें ठीक से याद नहीं कि झगड़ा किस बात पर शुरू हुआ, परंतु यह निश्चित है कि यह बहुत ज़ोरदार झगड़ा था। दोनों ने एक-दूसरे को बुरा-भला कहा, और दोनों ही अपनी गलती मानने से इनकार कर रहे थे। कवयित्री कहती हैं कि दोपहर में झगड़ा फिर से शुरू हो गया, और उस समय उन्होंने महसूस किया कि शायद गलती उनकी ही थी। उन्होंने भाई से कहा कि शायद यह मेरी गलती है।
दूसरे पद में कवयित्री बताती हैं कि जब उन्होंने अपनी गलती मानी, तो भाई का रवैया बदल गया। उनके भाई ने उन्हें गले लगा लिया, और दोनों फिर से पहले की तरह दोस्त बन गए। झगड़ा खत्म हो गया और रिश्ता और मजबूत हो गया। इस प्रकार कविता झगड़े से मेल-मिलाप तक की यात्रा को चित्रित करती है।
इस कविता का मूलभाव भाई-बहन के रिश्ते में प्यार और क्षमा है। झगड़ा छोटी-सी बात पर हुआ, परंतु जब कवयित्री ने अपनी गलती स्वीकार की, तो सारा मनमुटाव खत्म हो गया। यह दर्शाता है कि क्षमा और सच्चाई से कोई भी मतभेद दूर किया जा सकता है।
कविता का संदेश यह है कि अपनी गलती मानने में कोई बुराई नहीं है। जब हम अपनी गलती स्वीकार करते हैं, तो दूसरा व्यक्ति भी नरम पड़ जाता है और रिश्ते मजबूत होते हैं। छोटे-छोटे झगड़ों को बढ़ने नहीं देना चाहिए; समय रहते मेल-मिलाप कर लेना चाहिए।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कवयित्री | एलिनोर फार्जन (Eleanor Farjeon) |
| विषय | भाई-बहन का झगड़ा और मेल-मिलाप |
| झगड़े का कारण | स्पष्ट नहीं, छोटी-सी बात |
| कवयित्री की सोच | दोपहर में — शायद गलती मेरी है |
| अंत | भाई ने गले लगाया, दोस्ती बहाल |
| पद | मुख्य विषय |
|---|---|
| पहला पद | झगड़े की शुरुआत और दोष-विवाद |
| दूसरा पद | गलती मानने से मेल-मिलाप |
'द क्वारेल' कविता भाई-बहन के रिश्ते की सच्ची तस्वीर पेश करती है। छोटी-सी बात पर हुआ झगड़ा बढ़ता जाता है, परंतु जब कवयित्री अपनी गलती स्वीकार करती हैं, तो भाई का क्रोध शांत हो जाता है और दोनों फिर से दोस्त बन जाते हैं। यह कविता हमें सिखाती है कि गलती मानने में साहस और शक्ति होती है, और क्षमा तथा प्रेम से ही सच्चे रिश्ते बनते हैं। छोटे-मोटे झगड़ों को दिल पर नहीं लेना चाहिए — समय रहते मेल-मिलाप ही सुखद जीवन का रहस्य है।