अब तक हमने अंकों और संख्याओं के साथ गणित के नियमों को सीखा। परंतु गणित में कुछ ऐसी स्थितियाँ भी आती हैं जिनमें संख्याएँ ज्ञात नहीं होतीं। ऐसी अज्ञात संख्याओं को दर्शाने के लिए हम अक्षरों, जैसे a, b, c, x, y आदि, का उपयोग करते हैं। अज्ञात संख्या को दर्शाने वाले अक्षर को चर (Variable) कहते हैं। चर का मान बदल सकता है। अक्षरों और संख्याओं से बनी गणितीय भाषा ही बीजगणित (Algebra) कहलाती है। बीजगणित का उपयोग ऐसी समस्याओं को हल करने में होता है जिनमें अज्ञात मान ज्ञात करना होता है।
बीजगणित शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द 'अल-जबर' से हुई है, जिसका अर्थ है 'पुनः स्थापित करना'। प्राचीन भारत में भी बीजगणित के क्षेत्र में बहुत कार्य हुआ था। बीजगणित हमें सामान्य नियमों को अक्षरों की सहायता से व्यक्त करने की क्षमता देता है। जैसे किसी संख्या को हम x कहें, तो उसके दोगुने को 2x और उसमें 3 जोड़ने को x + 3 लिखा जा सकता है। इस अध्याय में हम चर, बीजीय व्यंजक और समीकरणों के बारे में सीखेंगे।
ऐसी राशि जिसका मान बदलता रहता है या जिसका मान ज्ञात नहीं है, चर कहलाती है। चर को हम अक्षरों से दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि हम किसी कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या को n से दर्शाते हैं, तो n एक चर है, क्योंकि विभिन्न कक्षाओं में इसका मान भिन्न-भिन्न हो सकता है। चर के स्थान पर हम कोई भी संख्या रख सकते हैं। यदि n = 5 हो, तो n + 3 = 8 और यदि n = 10 हो, तो n + 3 = 13। इस प्रकार व्यंजक का मान चर के मान पर निर्भर करता है। चर को नियम लिखने में भी प्रयोग किया जाता है, जैसे वर्ग का परिमाप = 4 x भुजा, जिसमें भुजा एक चर है।
संख्याओं, चरों तथा उन पर होने वाली संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) से बने व्यंजक को बीजीय व्यंजक कहते हैं। जैसे x + 3, 2y - 5, 4n, a/2 आदि बीजीय व्यंजक हैं। किसी व्यंजक में जोड़ या घटाव के चिह्नों से अलग होने वाले भागों को उस व्यंजक के पद (Terms) कहते हैं। जैसे व्यंजक 2x + 3y - 5 में तीन पद हैं - 2x, 3y और -5। जो पद केवल संख्या से बना होता है, उसे अचर पद (Constant term) कहते हैं, जैसे -5। संख्या और चर का गुणनफल जैसे 2x में 2 को चर x का गुणांक (Coefficient) कहते हैं।
हम शब्दों से व्यंजक बना सकते हैं। 'किसी संख्या में 5 जोड़ें' को x + 5 लिखते हैं। 'किसी संख्या के दोगुने में 3 जोड़ें' को 2x + 3 लिखते हैं। 'किसी संख्या का आधा' को x/2 लिखते हैं। 'किसी संख्या में से 7 घटाएँ' को x - 7 लिखते हैं। इन व्यंजकों को बनाने के लिए चर और संक्रियाओं के संबंध को सही ढंग से समझना आवश्यक है।
किसी बीजीय व्यंजक का मान ज्ञात करने के लिए चर के स्थान पर दी गई संख्या रखकर गणना करते हैं। उदाहरण के लिए, व्यंजक 2x + 3 का मान x = 5 पर = 2 x 5 + 3 = 10 + 3 = 13 होगा। इसी प्रकार x = 7 पर 2 x 7 + 3 = 14 + 3 = 17 होगा। चर के विभिन्न मानों पर व्यंजक के मान भिन्न-भिन्न होते हैं। व्यंजक का मान ज्ञात करने के लिए हम पहले चर का मान व्यंजक में रखते हैं, फिर गुणा या भाग, तत्पश्चात जोड़ या घटाव की संक्रियाएँ करते हैं।
एक समीकरण में दो व्यंजक होते हैं जो बराबर (=) चिह्न द्वारा जुड़े होते हैं। जैसे x + 4 = 9 एक समीकरण है। समीकरण में चर का वह मान ज्ञात करना होता है जो समीकरण को संतुष्ट करता है, अर्थात जिससे दोनों पक्ष बराबर हो जाएँ। चर के इस मान को समीकरण का हल (Solution) कहते हैं। समीकरण x + 4 = 9 का हल x = 5 है, क्योंकि 5 + 4 = 9। समीकरण में बराबर चिह्न के बाईं ओर के भाग को बायाँ पक्ष (LHS) और दाईं ओर के भाग को दायाँ पक्ष (RHS) कहते हैं।
छोटे समीकरणों को हल करने की सरल विधि परीक्षण और त्रुटि विधि है। इसमें हम चर के विभिन्न मानों को समीकरण में रखकर जाँचते हैं कि किस मान पर बायाँ पक्ष, दाएँ पक्ष के बराबर होता है। जिस मान पर दोनों पक्ष बराबर होते हैं, वही समीकरण का हल होता है। उदाहरण के लिए, समीकरण 2x = 10 में, x = 5 रखने पर 2 x 5 = 10, जो दाएँ पक्ष के बराबर है, अतः हल x = 5 है। इस विधि को टेबल बनाकर भी प्रयोग किया जाता है।
कुछ समीकरणों को केवल अवलोकन से हल किया जा सकता है। जैसे x + 5 = 9 में, x वह संख्या है जिसमें 5 जोड़ने पर 9 मिलता है, अर्थात x = 9 - 5 = 4। इसी प्रकार x - 3 = 7 में, x = 7 + 3 = 10। यदि x/2 = 6 हो, तो x = 6 x 2 = 12। ये सरल उल्टी संक्रियाओं (जोड़ के विपरीत घटाव, गुणा के विपरीत भाग) द्वारा हल होते हैं।
बीजगणित का महत्वपूर्ण उपयोग गणितीय नियमों को चरों द्वारा लिखना है। उदाहरण के लिए, वर्ग का परिमाप = 4 x भुजा को हम p = 4a लिख सकते हैं, जहाँ a भुजा है। आयत का परिमाप = 2 x (लंबाई + चौड़ाई) को p = 2(l + b) लिखते हैं। किसी संख्या का दोगुना = 2n, संख्या का आधा = n/2। इस प्रकार सामान्य नियमों को अक्षरों में लिखना ही बीजगणित की सबसे बड़ी उपयोगिता है। इन्हीं नियमों के माध्यम से हम किसी भी मान के लिए परिणाम तुरंत निकाल सकते हैं।
बीजगणित का उपयोग दैनिक जीवन की अनेक समस्याओं में होता है। किसी अज्ञात संख्या को ज्ञात करना, किसी पैटर्न को पहचानना, व्यापार में लाभ-हानि की गणना, दूरी, समय और चाल से संबंधित समस्याएँ आदि बीजगणित की सहायता से हल की जाती हैं। जैसे 'किसी संख्या में 7 जोड़ने पर 15 मिलता है, वह संख्या ज्ञात करो' - इस समस्या को समीकरण x + 7 = 15 बनाकर हल किया जा सकता है। बीजगणित आगे की कक्षाओं में गणित की सबसे महत्वपूर्ण शाखा बन जाता है, इसलिए इस अध्याय की नींव मजबूत होना आवश्यक है।
| शब्द | बीजीय व्यंजक |
|---|---|
| किसी संख्या में 5 जोड़ें | x + 5 |
| किसी संख्या में से 7 घटाएँ | x - 7 |
| किसी संख्या का दोगुना | 2x |
| किसी संख्या के दोगुने में 3 जोड़ें | 2x + 3 |
| किसी संख्या का आधा | x/2 |
| किसी संख्या के तिगुने में से 4 घटाएँ | 3x - 4 |
| समीकरण | हल |
|---|---|
| x + 4 = 9 | x = 5 |
| x - 3 = 7 | x = 10 |
| 2x = 10 | x = 5 |
| x/2 = 6 | x = 12 |
| x + 5 = 9 | x = 4 |
| व्यंजक | चर का मान | व्यंजक का मान |
|---|---|---|
| 2x + 3 | x = 5 | 13 |
| 2x + 3 | x = 7 | 17 |
| 4n | n = 6 | 24 |
| n/2 + 1 | n = 10 | 6 |
| 3y - 4 | y = 5 | 11 |
इस अध्याय में हमने बीजगणित की मूल अवधारणाओं - चर, बीजीय व्यंजक, पद, गुणांक और समीकरण - को समझा। चर की सहायता से हम सामान्य नियमों को संक्षिप्त रूप में लिख सकते हैं। व्यंजकों का मान ज्ञात करना और समीकरणों को परीक्षण-त्रुटि या अवलोकन द्वारा हल करना सीखा। बीजगणित गणित की वह शाखा है जो अज्ञात राशियों से संबंधित समस्याओं का हल ढूँढने में सहायक है। यह अध्याय आगे की कक्षाओं में बीजगणितीय व्यंजकों की संक्रियाएँ, रैखिक समीकरण और बहुपद के अध्ययन की नींव रखता है। चर और व्यंजकों का नियमित अभ्यास बीजगणित में दक्षता विकसित करता है।