ज्यामिति गणित की वह शाखा है जो आकृतियों, रेखाओं, कोणों, बिंदुओं और ठोसों के गुणों का अध्ययन करती है। यह शब्द यूनानी शब्द 'जियो' (पृथ्वी) और 'मेट्रिया' (मापन) से बना है, अर्थात भूमि की माप। प्राचीन काल से ही मनुष्य भूमि की सीमाएँ नापने, भवन बनाने और विभिन्न वस्तुओं की आकृतियाँ समझने के लिए ज्यामिति का उपयोग करता आया है। हमारे चारों ओर ज्यामितीय आकृतियाँ हैं - पुस्तक का पृष्ठ, घड़ी का डायल, खिड़की की सलाखें, दीवार की टाइलें आदि सभी में ज्यामितीय आकृतियाँ छिपी हैं।
ज्यामिति की आधारभूत अवधारणाएँ बहुत सरल हैं, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण भी। बिंदु, रेखा, रेखाखंड, किरण, कोण, वृत्त, त्रिभुज, चतुर्भुज और वक्र जैसी अवधारणाएँ इस अध्याय का मूल आधार हैं। ये अवधारणाएँ आगे की कक्षाओं में ज्यामिति के अध्ययन का आधार तैयार करती हैं। इस अध्याय में हम इन मूल अवधारणाओं को उनके सरल रूपों में समझेंगे।
ज्यामिति में बिंदु वह स्थान है जिसकी कोई लंबाई, चौड़ाई या मोटाई नहीं होती। एक बिंदु केवल एक स्थान को निर्दिष्ट करता है। बिंदु को हम पेंसिल की नोक से बनाए गए छोटे से निशान से दर्शाते हैं। बिंदुओं को बड़े अक्षरों A, B, C, P, Q आदि से नामित किया जाता है। उदाहरण के लिए, मानचित्र पर किसी शहर की स्थिति, पुस्तक में अध्याय के आरंभ का स्थान आदि बिंदुओं के उदाहरण हैं। हम कह सकते हैं कि बिंदु स्थान निर्दिष्ट करता है, उसका कोई विस्तार नहीं होता।
एक रेखा बिंदुओं का एक समूह है जो दोनों दिशाओं में अनंत रूप से आगे बढ़ती है। इसका न तो कोई आरंभ है और न ही अंत। रेखा को हम दो बिंदुओं से दर्शाते हैं, जैसे रेखा AB। रेखा की कोई मोटाई नहीं होती, केवल लंबाई होती है। एक सीधी रेखा वह है जिसमें कोई मोड़ न हो। दो बिंदुओं से होकर केवल एक ही सीधी रेखा खींची जा सकती है, जबकि एक बिंदु से अनंत रेखाएँ खींची जा सकती हैं।
किसी रेखा के दो बिंदुओं के बीच का सीमित भाग रेखाखंड कहलाता है। रेखाखंड के दो अंतिम बिंदु होते हैं। उदाहरण के लिए, रेखाखंड AB में A और B दो अंतिम बिंदु हैं। रेखाखंड की लंबाई नापी जा सकती है, जबकि रेखा की लंबाई नहीं नापी जा सकती। रेखाखंड को हम टेढ़ा-मेढ़ा नहीं, बल्कि सीधा बनाते हैं।
जब एक रेखा का एक सिरा बिंदु पर स्थिर रहे और दूसरी ओर अनंत रूप से बढ़े, तो इसे किरण कहते हैं। किरण का एक अंतिम बिंदु होता है जिसे प्रारंभिक बिंदु कहते हैं। सूर्य से निकलने वाली किरणें, किसी स्रोत से निकलने वाली प्रकाश की किरणें किरण के उदाहरण हैं। किरण AB में A प्रारंभिक बिंदु है और यह B की ओर से अनंत तक जाती है।
जब हम कागज पर बिना पेंसिल उठाए कोई आकृति बनाते हैं, तो उसे वक्र कहते हैं। वक्र सीधा भी हो सकता है और टेढ़ा-मेढ़ा भी। रेखाखंड, किरण और रेखा भी वक्र के उदाहरण हैं। वक्र दो प्रकार के होते हैं - साधारण वक्र (जो स्वयं को नहीं काटता) और प्रतिच्छेदी वक्र (जो स्वयं को काटता है)। जो वक्र स्वयं को नहीं काटता और जिसका कोई सिरा खुला हो, उसे खुला वक्र कहते हैं। जिस वक्र का कोई सिरा न खुला हो, उसे बंद वक्र कहते हैं। वृत्त एक बंद वक्र का सबसे सरल उदाहरण है।
जब दो किरणें एक ही बिंदु से आरंभ होती हैं, तो वे मिलकर एक कोण बनाती हैं। वह उभयनिष्ठ बिंदु कोण का शीर्ष कहलाता है और दोनों किरणें कोण की भुजाएँ कहलाती हैं। कोण को हम ऐसी रचना द्वारा लिखते हैं - ∠ABC, जिसमें B शीर्ष है। कोणों को अंश (degree) में नापा जाता है। 90 अंश का कोण समकोण, 90 अंश से छोटा कोण न्यून कोण, 90 अंश से बड़ा पर 180 अंश से छोटा कोण अधिक कोण तथा 180 अंश का कोण सरल कोण कहलाता है। 360 अंश का कोण पूर्ण कोण होता है।
तीन रेखाखंडों से बनी बंद आकृति को त्रिभुज कहते हैं। त्रिभुज के तीन भुजाएँ, तीन शीर्ष और तीन कोण होते हैं। त्रिभुज ABC में A, B, C शीर्ष हैं और AB, BC, CA भुजाएँ हैं। किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग हमेशा 180 अंश होता है। त्रिभुज के कोई भी दो बिंदुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड त्रिभुज के अंदर ही रहता है। त्रिभुज के आधार पर सामने वाले शीर्ष से खींचा गया लंब उसकी ऊँचाई कहलाता है।
चार रेखाखंडों से बनी बंद आकृति को चतुर्भुज कहते हैं। चतुर्भुज की चार भुजाएँ, चार शीर्ष, चार कोण और दो विकर्ण होते हैं। विकर्ण चतुर्भुज के सम्मुख शीर्षों को जोड़ने वाला रेखाखंड है। किसी चतुर्भुज के चारों कोणों का योग 360 अंश होता है। वर्ग, आयत, समांतर चतुर्भुज, समचतुर्भुज और समलंब सभी चतुर्भुजों के उदाहरण हैं। वह चतुर्भुज जिसकी एक युग्म भुजाएँ समांतर हों, समलंब कहलाता है।
वृत्त एक बंद वक्र है जिसका प्रत्येक बिंदु एक निश्चित बिंदु से समान दूरी पर होता है। इस निश्चित बिंदु को वृत्त का केंद्र कहते हैं। केंद्र से वृत्त पर किसी बिंदु तक की दूरी को त्रिज्या कहते हैं। वृत्त के केंद्र से होकर जाने वाली जीवा, जो वृत्त के दो बिंदुओं को जोड़ती है, व्यास कहलाती है। व्यास त्रिज्या का दोगुना होता है। वृत्त पर स्थित दो बिंदुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड जीवा कहलाता है। जीवा वृत्त के चाप को दो भागों में बाँटती है। व्यास वृत्त की सबसे बड़ी जीवा है। वृत्त की परिधि और त्रिज्या का संबंध सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है: परिधि = 2 x पाई x त्रिज्या, जहाँ पाई का मान लगभग 22/7 या 3.14 होता है।
| अवधारणा | परिभाषा | विशेषता |
|---|---|---|
| बिंदु | वह स्थान जिसकी लंबाई, चौड़ाई या मोटाई नहीं | केवल स्थान निर्दिष्ट करता है |
| रेखा | दोनों दिशाओं में अनंत रूप से बढ़ने वाली | कोई आरंभ या अंत नहीं |
| रेखाखंड | दो बिंदुओं के बीच का सीमित भाग | लंबाई नापी जा सकती है |
| किरण | एक अंतिम बिंदु से एक दिशा में अनंत | एक प्रारंभिक बिंदु होता है |
| कोण | दो किरणों से बनी रचना | शीर्ष और दो भुजाएँ |
| कोण | माप | उदाहरण |
|---|---|---|
| न्यून कोण | 0 से 90 अंश | 45 अंश |
| समकोण | ठीक 90 अंश | 90 अंश |
| अधिक कोण | 90 से 180 अंश | 120 अंश |
| सरल कोण | ठीक 180 अंश | 180 अंश |
| पूर्ण कोण | ठीक 360 अंश | 360 अंश |
| आकृति | भुजाएँ | शीर्ष | कोणों का योग |
|---|---|---|---|
| त्रिभुज | 3 | 3 | 180 अंश |
| चतुर्भुज | 4 | 4 | 360 अंश |
| पंचभुज | 5 | 5 | 540 अंश |
| वृत्त | 0 (वक्र) | केंद्र | - |
इस अध्याय में हमने ज्यामिति की आधारभूत अवधारणाओं को समझा। बिंदु, रेखा, रेखाखंड, किरण, वक्र, कोण, त्रिभुज, चतुर्भुज और वृत्त जैसी अवधारणाएँ ज्यामिति की नींव हैं। कोणों के विभिन्न प्रकार और उनकी माप, त्रिभुज और चतुर्भुज के कोणों के योग, तथा वृत्त के केंद्र, त्रिज्या, व्यास, जीवा और चाप की समझ अत्यंत आवश्यक है। ये अवधारणाएँ आगे की कक्षाओं में प्रारंभिक आकृतियों की समझ (Understanding Elementary Shapes) और प्रायोगिक ज्यामिति का आधार बनती हैं। दैनिक जीवन में हमें अनेक ज्यामितीय आकृतियाँ मिलती हैं, जिन्हें अब हम वैज्ञानिक दृष्टि से समझ सकते हैं।