हमारे दैनिक जीवन में हम बहुत सी जानकारियाँ एकत्र करते हैं और उनका उपयोग करते हैं। जैसे कक्षा में कितने विद्यार्थी हैं, उनमें से कितने लड़के और कितनी लड़कियाँ हैं, सप्ताह में किस दिन सबसे अधिक छात्र उपस्थित होते हैं, किस फल को सबसे अधिक विद्यार्थी पसंद करते हैं। ऐसी एकत्र की गई जानकारियों को आँकड़े (Data) कहते हैं। आँकड़ों के संग्रह, वर्गीकरण और प्रस्तुति के विज्ञान को आँकड़ों का प्रबंधन या सांख्यिकी कहते हैं।
कच्चे आँकड़े (जैसे 12, 15, 18, 12, 15) को समझना कठिन होता है। इसलिए आँकड़ों को व्यवस्थित और सारणीबद्ध किया जाता है ताकि उनसे जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके। आँकड़ों को प्रस्तुत करने के सरल तरीके हैं - सारणी (Table), दंड आलेख (Bar Graph), चित्रालेख (Pictograph) और परिवेश आलेख। इन विधियों से बड़ी मात्रा में जानकारी को सरल और सुंदर रूप में दिखाया जा सकता है। इस अध्याय में हम आँकड़ों को व्यवस्थित करना, उनकी तालिका बनाना और विभिन्न आलेखों द्वारा प्रस्तुत करना सीखेंगे।
आँकड़ों का संग्रह विभिन्न विधियों से किया जा सकता है - सर्वेक्षण, प्रश्नावली, अवलोकन आदि। संग्रह के बाद आँकड़ों को व्यवस्थित करना आवश्यक है। बिना व्यवस्थित किए गए आँकड़ों को कच्चे आँकड़े (Raw Data) कहते हैं। कच्चे आँकड़ों को क्रमबद्ध करना और उनकी बारंबारता ज्ञात करना आँकड़ों का व्यवस्थित करना कहलाता है। किसी घटना या मान के कितनी बार आने की गिनती को उसकी बारंबारता (Frequency) कहते हैं।
आँकड़ों को व्यवस्थित करने के लिए हम टैली चिह्नों (Tally Marks) का उपयोग करते हैं। प्रत्येक घटना के लिए एक रेखा खींची जाती है, और पाँचवीं घटना के लिए पिछली चार रेखाओं पर तिरछी रेखा खींचकर समूह बनाया जाता है। इस प्रकार पाँच घटनाओं का एक समूह हो जाता है, जिसे |||| के रूप में लिखते हैं। टैली चिह्नों से बारंबारता की गिनती आसान हो जाती है। टैली चिह्नों से बनी सारणी को बारंबारता सारणी कहते हैं।
जिस आलेख में आँकड़ों को चित्रों या प्रतीकों की सहायता से दर्शाया जाता है, उसे चित्रालेख कहते हैं। चित्रालेख में प्रत्येक चित्र किसी निश्चित संख्या को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, यदि एक सेब का चित्र 10 सेबों को दर्शाता है, तो 2 चित्र 20 सेब दर्शाएँगे। चित्रालेख में यह जानकारी कुंजी (Key) में लिखी जाती है, जैसे "एक चित्र = 10 सेब"। चित्रालेख बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि सभी चित्र समान आकार और समान मूल्य के हों। चित्रालेख से आँकड़ों को समझना रोचक और आसान होता है, विशेषकर बच्चों के लिए।
आँकड़ों को प्रदर्शित करने का सबसे सामान्य तरीका दंड आलेख है। इसमें आँकड़ों को आयतों (दंडों) के रूप में दर्शाया जाता है। दंड आलेख में एक क्षैतिज रेखा (आधार रेखा) और एक ऊर्ध्वाधर रेखा होती है। आधार रेखा पर वस्तुओं या श्रेणियों के नाम लिखे जाते हैं और ऊर्ध्वाधर रेखा पर संख्याएँ (मान) अंकित होती हैं। प्रत्येक श्रेणी के लिए उसकी मात्रा के अनुसार एक दंड खींचा जाता है। दंड की ऊँचाई उसके मान को दर्शाती है। दंड आलेख में सभी दंड समान चौड़ाई के होते हैं और एक-दूसरे से समान दूरी पर होते हैं। सबसे लंबा दंड सबसे अधिक मान को दर्शाता है।
दंड आलेख को पढ़ने के लिए हम सबसे पहले दंड की ऊँचाई को ऊर्ध्वाधर रेखा पर अंकित संख्या से मिलाते हैं। दंड जितना लंबा होता है, उसका मान उतना ही अधिक होता है। दंड आलेख से दो अलग-अलग श्रेणियों की तुलना करना, सबसे अधिक और सबसे कम मान ज्ञात करना आसान होता है। जैसे यदि विभिन्न विषयों में प्राप्त अंकों का दंड आलेख हो, तो हम देख सकते हैं कि किस विषय में सबसे अधिक और किसमें सबसे कम अंक प्राप्त हुए।
आँकड़ों से दंड आलेख बनाने के लिए पहले बारंबारता सारणी तैयार की जाती है। सारणी में श्रेणियों की बारंबारता लिखी होती है। फिर आधार रेखा पर श्रेणियों के नाम और ऊर्ध्वाधर रेखा पर बारंबारता अंकित की जाती है। हर श्रेणी के लिए उचित ऊँचाई का दंड खींचा जाता है। दंड आलेख को पढ़ते समय कुंजी और मापनी (scale) का ध्यान रखना चाहिए। मापनी यह बताती है कि दंड आलेख में 1 सेंटीमीटर कितने मान को दर्शाता है। उचित मापनी चुनना आलेख को सटीक बनाता है।
आँकड़ों को एकत्र करने और प्रस्तुत करने के बाद उनकी व्याख्या की जाती है। व्याख्या का अर्थ है आँकड़ों से निष्कर्ष निकालना। जैसे दंड आलेख को देखकर बताना कि किस श्रेणी की बारंबारता सबसे अधिक है, सबसे कम है, दो श्रेणियों में कितना अंतर है, कुल कितना है आदि। आँकड़ों की व्याख्या हमें निर्णय लेने में सहायता करती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी दुकान में विभिन्न किताबों की बिक्री के आँकड़े हों, तो व्याख्या से पता चलता है कि किस किताब की माँग सबसे अधिक है, ताकि दुकानदार उसी की अधिक मात्रा मँगवाए।
कुछ आँकड़ों के समूह में, सभी संख्याओं का योग निकालकर संख्याओं की संख्या से भाग देने पर जो मान प्राप्त होता है, उसे माध्य (Mean) या औसत कहते हैं। माध्य = (सभी संख्याओं का योग) ÷ (संख्याओं की संख्या)। उदाहरण के लिए, यदि 5 विद्यार्थियों के अंक 40, 50, 60, 70, 80 हैं, तो माध्य = (40 + 50 + 60 + 70 + 80) ÷ 5 = 300 ÷ 5 = 60। माध्य हमें आँकड़ों के प्रतिनिधि मान के बारे में बताता है। किसी परीक्षा में कक्षा का औसत प्राप्तांक निकालने के लिए भी माध्य का उपयोग होता है।
| विधि | वर्णन | उपयोग |
|---|---|---|
| कच्चे आँकड़े | बिना व्यवस्थित की गई जानकारी | संग्रह के तुरंत बाद |
| बारंबारता सारणी | टैली चिह्नों सहित गिनती | व्यवस्थित गिनती |
| चित्रालेख | चित्रों/प्रतीकों द्वारा | रोचक प्रस्तुति |
| दंड आलेख | आयतों द्वारा | तुलना और स्पष्टता |
| बारंबारता | टैली चिह्न | लिखित रूप |
|---|---|---|
| 1 | I | एक |
| 2 | II | दो |
| 3 | III | तीन |
| 4 | IIII | चार |
| 5 | ~~IIII~~ (तिरछी रेखा सहित) | पाँच का समूह |
| आँकड़े | योग | माध्य |
|---|---|---|
| 2, 4, 6 | 12 | 12 ÷ 3 = 4 |
| 10, 20, 30 | 60 | 60 ÷ 3 = 20 |
| 5, 15, 25, 35 | 80 | 80 ÷ 4 = 20 |
| 40, 50, 60, 70, 80 | 300 | 300 ÷ 5 = 60 |
इस अध्याय में हमने आँकड़ों के संग्रह, व्यवस्थित करने और प्रस्तुत करने की विधियों को सीखा। बारंबारता सारणी, टैली चिह्न, चित्रालेख और दंड आलेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने के प्रमुख साधन हैं। आँकड़ों की व्याख्या से हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं, जो निर्णय लेने में सहायक होते हैं। माध्य या औसत की अवधारणा आँकड़ों का प्रतिनिधि मान ज्ञात करने में सहायक है। दैनिक जीवन में समाचार पत्र, रिपोर्ट, खेलों के आँकड़े आदि सभी इसी अध्ययन का भाग हैं। आँकड़ों का प्रबंधन आगे की कक्षाओं में सांख्यिकी (Statistics) के विस्तृत अध्ययन का आधार है। इस अध्याय का अभ्यास करने से जानकारियों का विश्लेषण करने की क्षमता विकसित होती है।