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1. परिचय

पूर्ण संख्याएँ 0, 1, 2, 3... से आरंभ होती हैं। परंतु दैनिक जीवन में हमें ऐसी परिस्थितियाँ भी मिलती हैं जिनमें 0 से कम मानों की आवश्यकता होती है। जैसे तापमान 5 अंश सेल्सियस से नीचे गिरने पर -5 अंश सेल्सियस, भूमि के स्तर से नीचे 100 मीटर को -100 मीटर, बैंक खाते में 500 रुपये निकलवाने पर -500 रुपये जैसी संख्याओं का उपयोग होता है। इन्हीं 0 से छोटी संख्याओं को ऋणात्मक संख्याएँ कहते हैं। पूर्ण संख्याओं और ऋणात्मक संख्याओं को मिलाकर पूर्णांक (Integers) बनते हैं।

पूर्णांकों में सभी ऋणात्मक संख्याएँ (-1, -2, -3...) और सभी पूर्ण संख्याएँ (0, 1, 2, 3...) शामिल हैं। पूर्णांकों को हम ऋण चिह्न (-) के साथ या बिना किसी चिह्न के लिख सकते हैं। धनात्मक पूर्णांकों को कभी-कभी धन चिह्न (+) के साथ भी लिखा जाता है। संख्या 0 न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक। पूर्णांकों की संख्या अनंत है। इस अध्याय में हम पूर्णांकों की तुलना, जोड़ और घटाव की विधियाँ सीखेंगे।

2. पूर्णांकों का प्रदर्शन और तुलना

पूर्णांकों को संख्या रेखा पर प्रदर्शित किया जाता है। संख्या रेखा पर 0 को बीच में लिया जाता है। 0 के दाईं ओर धनात्मक पूर्णांक (1, 2, 3...) और 0 के बाईं ओर ऋणात्मक पूर्णांक (-1, -2, -3...) होते हैं। 0 से जितनी दूर बाईं ओर जाते हैं, संख्या उतनी ही छोटी होती जाती है। उदाहरण के लिए, -3, -2 से छोटी है, -5, -1 से छोटी है। संख्या रेखा पर दाईं ओर की संख्या हमेशा बाईं ओर की संख्या से बड़ी होती है।

पूर्णांकों की तुलना करते समय यह याद रखना सबसे महत्वपूर्ण है कि किसी भी ऋणात्मक पूर्णांक की तुलना में 0 बड़ा होता है और हर धनात्मक पूर्णांक 0 से बड़ा होता है। जैसे -5 < 0 < 5। दो ऋणात्मक संख्याओं में वह बड़ी होती है जो 0 के निकट होती है, अर्थात जिसका संख्यात्मक मान छोटा होता है। जैसे -2 > -5। ऋणात्मक संख्याओं की तुलना में संख्यात्मक मान उलटा कार्य करता है, यही विद्यार्थियों के लिए सबसे जटिल भाग है।

3. पूर्णांकों का क्रमबद्ध लेखन

पूर्णांकों को आरोही क्रम में (सबसे छोटी से सबसे बड़ी) लिखने के लिए हम सबसे पहले सबसे ऋणात्मक संख्या लिखते हैं। जैसे -6, -4, -1, 0, 3, 5 आरोही क्रम में लिखने पर -6, -4, -1, 0, 3, 5 ही होता है, क्योंकि यह पहले से आरोही है। अवरोही क्रम में सबसे बड़ी संख्या पहले लिखी जाती है। जैसे 5, 3, 0, -1, -4, -6। क्रमबद्ध लिखने के प्रश्नों में संख्या रेखा पर संख्याओं का स्थान देखना सबसे सरल उपाय है, क्योंकि रेखा पर बाईं ओर से दाईं ओर ही आरोही क्रम होता है।

4. पूर्णांकों का योग (Addition of Integers)

पूर्णांकों का योग संख्या रेखा पर सरलता से समझा जा सकता है। धनात्मक संख्या जोड़ने पर हम दाईं ओर चलते हैं और ऋणात्मक संख्या जोड़ने पर बाईं ओर चलते हैं। उदाहरण के लिए, 3 + (-2) के लिए 3 से शुरू करके 2 कदम बाईं ओर चलते हैं और 1 पर पहुँचते हैं। इसी प्रकार (-4) + 6 के लिए -4 से शुरू करके 6 कदम दाईं ओर चलते हैं और 2 पर पहुँचते हैं।

सम चिह्न वाले पूर्णांकों का योग

जब दोनों पूर्णांक धनात्मक हों, तो उनके मान जोड़कर धन चिह्न लगाते हैं, जैसे 4 + 5 = 9। जब दोनों ऋणात्मक हों, तो उनके संख्यात्मक मान जोड़कर ऋण चिह्न लगाते हैं, जैसे (-4) + (-5) = -9।

भिन्न चिह्न वाले पूर्णांकों का योग

जब एक पूर्णांक धनात्मक और दूसरा ऋणात्मक हो, तो बड़े संख्यात्मक मान में से छोटे संख्यात्मक मान को घटाते हैं और बड़े मान वाली संख्या का चिह्न लगाते हैं। जैसे (-9) + 6 में 9 - 6 = 3, और 9 बड़ा है जिसका चिह्न ऋण है, अतः उत्तर -3 होगा। इसी प्रकार 9 + (-6) = 3 होगा।

योज्य तत्समक और योज्य प्रतिलोम

किसी पूर्णांक में 0 जोड़ने पर वही पूर्णांक प्राप्त होता है, इसलिए 0 पूर्णांकों का योज्य तत्समक है। किसी पूर्णांक a के लिए, उसका योज्य प्रतिलोम -a होता है, क्योंकि a + (-a) = 0। उदाहरण के लिए, 7 का योज्य प्रतिलोम -7 है और -7 का योज्य प्रतिलोम 7 है। योग एक क्रम-विनिमेय संक्रिया है, अर्थात a + b = b + a पूर्णांकों पर भी लागू होता है।

5. पूर्णांकों का घटाव (Subtraction of Integers)

पूर्णांकों का घटाव योग की सहायता से किया जाता है। किसी पूर्णांक में से किसी पूर्णांक को घटाने के लिए, उसके योज्य प्रतिलोम को जोड़ा जाता है। अर्थात a - b = a + (-b) होता है। उदाहरण के लिए, 7 - 3 = 7 + (-3) = 4 और (-5) - 2 = (-5) + (-2) = -7। संख्या रेखा पर घटाव के लिए यदि घटाए जाने वाली संख्या धनात्मक है तो बाईं ओर चलते हैं और यदि ऋणात्मक है तो दाईं ओर चलते हैं। जैसे 5 - (-2) के लिए 5 से शुरू करके 2 कदम दाईं ओर चलते हैं और 7 पर पहुँचते हैं, क्योंकि (-2) को घटाने का अर्थ है -2 का योज्य प्रतिलोम 2 जोड़ना।

घटाव में क्रम-विनिमेय गुण लागू नहीं होता। जैसे 7 - 4 = 3 परंतु 4 - 7 = -3। घटाव करते समय चिह्नों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दो ऋणात्मक संख्याओं का घटाव, जैसे (-8) - (-5) = (-8) + 5 = -3। यहाँ ध्यान दें कि (-5) को घटाने का अर्थ 5 जोड़ना है।

6. पूर्णांकों के गुण (Properties of Integers)

पूर्णांकों पर जोड़ और गुणा क्रम-विनिमेय तथा साहचर्य गुणों का पालन करते हैं। पूर्णांकों के लिए 0 योज्य तत्समक और 1 गुणात्मक तत्समक होता है। गुणा का वितरण, योग और घटाव दोनों पर होता है। परंतु पूर्णांकों का भाग सदैव संभव नहीं होता। उदाहरण के लिए, (-6) ÷ 2 = -3 तो संभव है, परंतु 2 ÷ (-6) पूर्णांक में उत्तर नहीं देता। इसलिए यह कहा जाता है कि पूर्णांक भाग के अंतर्गत संवृत नहीं हैं। दैनिक जीवन में पूर्णांकों का उपयोग ऊँचाई, गहराई, तापमान, धन-ऋण जैसी स्थितियों को दर्शाने में होता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: पूर्णांकों का योग

स्थिति नियम उदाहरण
धनात्मक + धनात्मक मान जोड़ें, धन चिह्न 4 + 5 = 9
ऋणात्मक + ऋणात्मक मान जोड़ें, ऋण चिह्न (-4) + (-5) = -9
धनात्मक + ऋणात्मक बड़े में से छोटा घटाएँ, बड़े का चिह्न 9 + (-6) = 3, (-9) + 6 = -3
कोई पूर्णांक + 0 वही पूर्णांक 7 + 0 = 7
a + (-a) 0 (योज्य प्रतिलोम) 7 + (-7) = 0

तालिका 2: पूर्णांकों की तुलना

कथन सत्यता
-5 < 0 सत्य
0 < 5 सत्य
-2 > -5 सत्य
-1 > 0 असत्य
3 > -3 सत्य

तालिका 3: संक्रियाएँ और चिह्न

संक्रिया संख्या रेखा पर दिशा उदाहरण
धनात्मक जोड़ना दाईं ओर 3 + 2 = 5
ऋणात्मक जोड़ना बाईं ओर 3 + (-2) = 1
धनात्मक घटाना बाईं ओर 5 - 3 = 2
ऋणात्मक घटाना दाईं ओर 5 - (-3) = 8

माइंड मैप

flowchart TD A["पूर्णांक: धनात्मक, 0, ऋणात्मक"] --> B["संख्या रेखा: 0 से दाईं ओर धन, बाईं ओर ऋण"] A --> C["तुलना: ऋणात्मक < 0 < धनात्मक"] C --> C1["-2 > -5 (0 के निकट वाला बड़ा)"] A --> D["योग"] D --> D1["सम चिह्न: मान जोड़ें, चिह्न वही"] D --> D2["भिन्न चिह्न: बड़े में से छोटा घटाएँ"] A --> E["घटाव: a - b = a + (-b)"] A --> F["योज्य तत्समक 0, योज्य प्रतिलोम a का -a"] A --> G["गुण: जोड़ व गुणा संवृत, भाग संवृत नहीं"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: पूर्णांकों की संख्या रेखा

पूर्णांकों की संख्या रेखा -5 -3 -1 0 1 3 5 बाईं ओर ऋणात्मक दाईं ओर धनात्मक तुलना के उदाहरण: -3 < 0 < 3 -2 > -5 (0 के निकट वाली बड़ी) संख्या रेखा पर दाईं ओर की संख्या हमेशा बड़ी Golden Rule: किसी भी ऋणात्मक पूर्णांक की तुलना में 0 बड़ा होता है। स्वर्ण नियम: दो ऋणात्मक संख्याओं में 0 के निकट वाली संख्या बड़ी होती है।

आरेख 2: पूर्णांकों का योग - भिन्न चिह्न

(-9) + 6 की गणना (-9) ऋणात्मक बड़ा + 6 धनात्मक छोटा नियम बड़े में से छोटा घटाओ 9 - 6 = 3 संख्यात्मक मान घटाओ 9 बड़ा है, चिह्न = ऋण अतः उत्तर ऋणात्मक (-9) + 6 = -3 जाँच: -3 संख्या रेखा पर 0 से बाईं ओर है, यह सही उत्तर है अन्य उदाहरण: (-4) + (-5) = -9 (सम चिह्न, मान जोड़ें) 9 + (-6) = 3 (भिन्न चिह्न, बड़ा धन) स्वर्ण नियम: भिन्न चिह्नों के योग में बड़े संख्यात्मक मान वाली संख्या का चिह्न उत्तर में लगता है। Golden Rule: सम चिह्नों के योग में संख्यात्मक मान जोड़े जाते हैं और चिह्न वही रहता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. दो ऋणात्मक संख्याओं की तुलना में भ्रम, जैसे -5 को -2 से बड़ा मानना। वास्तव में -2 > -5 होता है, क्योंकि -2, 0 के निकट है।
  2. भिन्न चिह्नों के योग में संख्यात्मक मान जोड़ देना। जैसे (-9) + 6 = -15 लिखना। सही उत्तर -3 है, क्योंकि बड़े में से छोटे मान को घटाया जाता है।
  3. ऋणात्मक संख्या घटाते समय गलत दिशा में चलना। 5 - (-2) में दाईं ओर चलना होता है, उत्तर 7 आता है, -3 नहीं।
  4. योज्य प्रतिलोम को योज्य तत्समक समझ लेना। तत्समक 0 होता है जबकि किसी संख्या a का प्रतिलोम -a होता है।
  5. 0 को धनात्मक या ऋणात्मक संख्या कह देना। 0 न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक।
  6. घटाव में क्रम बदलने पर उत्तर वही मान लेना। 7 - 4 = 3 परंतु 4 - 7 = -3, घटाव में क्रम-विनिमेय गुण नहीं होता।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. तुलना के प्रश्नों में संख्या रेखा का चित्र मन में बनाएँ या खींचें, दाईं ओर वाली संख्या बड़ी होती है।
  2. योग के प्रश्न में पहले दोनों संख्याओं के चिह्न देखें - समान चिह्न हो तो जोड़ें, भिन्न हो तो घटाएँ।
  3. घटाव को हमेशा योग में बदलें: a - b = a + (-b)। इससे चिह्नों की गलतियाँ कम होंगी।
  4. ऋणात्मक संख्या को घटाते समय दो चिह्नों (- -) को (+) में बदल दें।
  5. क्रमबद्ध लिखने के प्रश्न में सबसे छोटी संख्या (सबसे ऋणात्मक) पहले लिखें।
  6. सत्य/असत्य कथनों में 0 के गुणों को याद रखें: a + 0 = a और a + (-a) = 0।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने पूर्णांकों की अवधारणा को समझा। ऋणात्मक संख्याओं का परिचय, संख्या रेखा पर प्रदर्शन, तुलना और क्रमबद्ध लेखन का ज्ञान प्राप्त किया। पूर्णांकों का योग और घटाव करने की विधियाँ, योज्य तत्समक और योज्य प्रतिलोम की अवधारणाएँ इस अध्याय के प्रमुख बिंदु हैं। तापमान, ऊँचाई-गहराई, धन-ऋण जैसी वास्तविक परिस्थितियों में पूर्णांकों का उपयोग दैनिक जीवन से जुड़ता है। पूर्णांकों की यह समझ आगे की कक्षाओं में परिमेय संख्याओं और बीजगणित को सीखने का मजबूत आधार है। चिह्नों के नियमों का नियमित अभ्यास करने से पूर्णांकों की गणना सरल हो जाती है।