संख्याएँ हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक हम किसी न किसी रूप में संख्याओं का उपयोग करते ही हैं। हम किसी बाजार में सामान खरीदते समय उसकी कीमत देखते हैं, घर में बिजली के बिल में कितने यूनिट खर्च हुए हैं, स्कूल में कुल कितने विद्यार्थी हैं - ये सभी हमारे सामने संख्याएँ प्रस्तुत करते हैं। कक्षा 6 में हम संख्याओं की गहराई से जानकारी प्राप्त करेंगे। इस अध्याय का उद्देश्य बड़ी-बड़ी संख्याओं को सही ढंग से पढ़ना, लिखना, तुलना करना और उनमें जोड़-घटाव करना सीखना है।
प्राचीन काल से ही मनुष्य वस्तुओं को गिनने के लिए संख्याओं का उपयोग करता आया है। पहले पत्थरों और गांठों से गिनती की जाती थी, लेकिन आज हमारे पास अंकों की सुव्यवस्थित प्रणाली है। संख्या लिखने के लिए हम दस अंकों 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 का उपयोग करते हैं। इन अंकों से ही सभी बड़ी संख्याएँ बनती हैं। हमारी दशमलव (दस-आधारित) प्रणाली में स्थानीय मान का अत्यधिक महत्व है। इस अध्याय में हम भारतीय तथा अंतर्राष्ट्रीय दोनों संख्या प्रणालियों के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
हमारी भारतीय संख्या प्रणाली में बड़ी संख्याओं को पढ़ने के लिए अलग-अलग समूह बनाए जाते हैं। सबसे दाईं ओर से पहले तीन अंकों को इकाई, दहाई और सैकड़ा के रूप में लिया जाता है। इसके बाद के दो अंकों का समूह हजार कहलाता है। उसके बाद के दो अंकों का समूह लाख कहलाता है और उसके आगे के दो अंकों का समूह करोड़ कहलाता है। उदाहरण के लिए, संख्या 45,36,72,189 को हम चवालीस अरब... नहीं, बल्कि पैंतालीस करोड़, छत्तीस लाख, बहत्तर हज़ार, एक सौ नवासी के रूप में पढ़ते हैं। भारतीय प्रणाली में एक लाख, दस लाख, करोड़, दस करोड़, अरब आदि मुख्य इकाइयाँ होती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय संख्या प्रणाली में संख्याओं को हर तीन अंकों के समूह में बाँटा जाता है। यहाँ मिलियन, बिलियन और ट्रिलियन जैसी इकाइयों का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए, 1000000 को अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में एक मिलियन कहते हैं, जबकि भारतीय प्रणाली में इसे दस लाख कहते हैं। इसी तरह 10000000 भारतीय प्रणाली में एक करोड़ होता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में इसे दस मिलियन कहा जाता है। दोनों प्रणालियों में अंक समान होते हैं, केवल समूह बनाने और नाम देने का तरीका अलग होता है।
किसी अंक का अपनी संख्या में उस स्थान के अनुसार जो मान होता है, उसे स्थानीय मान कहते हैं। जैसे संख्या 7865 में अंक 7 का स्थानीय मान 7000 है, क्योंकि वह हज़ार के स्थान पर है। संख्या में हर अंक का एक मुख्य मान (स्वयं उसकी कीमत) और एक स्थानीय मान होता है। स्थानीय मान निकालने के लिए अंक को उसके स्थान के मान से गुणा करते हैं। सबसे दाईं ओर वाला अंक इकाई के स्थान पर होता है जिसका मान एक होता है। उसके बायीं ओर क्रमशः दहाई (10), सैकड़ा (100), हजार (1000) आदि आते हैं।
किसी संख्या को उसके स्थानीय मानों के योग के रूप में लिखने को विस्तारित रूप कहते हैं। उदाहरण के लिए: - 3869 = 3000 + 800 + 60 + 9 - 50,307 = 50000 + 0 + 300 + 0 + 7 = 50000 + 300 + 7 विस्तारित रूप लिखने से संख्या की संरचना स्पष्ट होती है और स्थानीय मान की अवधारणा मजबूत होती है।
दो संख्याओं में से बड़ी संख्या ज्ञात करने के लिए सबसे पहले उनके अंकों की संख्या देखी जाती है। जिस संख्या में अंकों की संख्या अधिक होती है, वह संख्या बड़ी होती है। जैसे 625 की तुलना में 1234 बड़ी है, क्योंकि 1234 में चार अंक हैं जबकि 625 में तीन अंक हैं। यदि दोनों संख्याओं में अंकों की संख्या समान हो, तो सबसे बायीं ओर के अंक की तुलना करते हैं। यदि वह अंक भी समान हो, तो अगले अंक की तुलना करते हैं और ऐसे ही आगे बढ़ते हैं।
संख्याओं की तुलना करते समय हम चिह्नों > (से बड़ा) और < (से छोटा) का उपयोग करते हैं। जैसे 987 < 1024 और 5432 > 5299। तुलना के लिए अलग-अलग संख्याओं को बड़े से छोटे क्रम में लिखना अवरोही क्रम कहलाता है और छोटे से बड़े क्रम में लिखना आरोही क्रम कहलाता है। जैसे 5, 12, 7, 9 का आरोही क्रम 5, 7, 9, 12 है और अवरोही क्रम 12, 9, 7, 5 है।
दैनिक जीवन में अक्सर हमें सटीक संख्या की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि एक अनुमानित मान काफी होता है। जैसे किसी मेले में लगभग कितने लोग आए होंगे, इसका अनुमान लगाना। अनुमान लगाने से जोड़-घटाव और गुणा-भाग का परिणाम जल्दी और आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए हम संख्याओं को गोल करते हैं।
हमारी दैनिक भाषा में आज भी कुछ स्थानों पर रोमन संख्याओं का प्रयोग होता है, जैसे घड़ी के डायल, पुस्तक के अध्याय और पृष्ठ क्रमांक में। रोमन संख्याओं के लिए मुख्य चिह्न हैं: I = 1, V = 5, X = 10, L = 50, C = 100, D = 500, M = 1000। रोमन संख्या में छोटे मान वाले चिह्न के बाद बड़ा चिह्न आने पर दोनों के मान जोड़ दिए जाते हैं, जैसे VI = 6 और XI = 11। यदि बड़े चिह्न के बाद छोटा चिह्न आए, तो छोटे मान को घटाया जाता है, जैसे IV = 4 और IX = 9।
रोमन संख्याओं को लिखने के कुछ नियम होते हैं। I को X से पहले केवल IV (4) और IX (9) बनाने के लिए रखा जा सकता है। X को L और C से पहले केवल XL (40) और XC (90) बनाने के लिए रखा जाता है। C को D और M से पहले केवल CD (400) और CM (900) बनाने के लिए रखा जाता है। इसके अलावा कोई भी चिह्न एक पंक्ति में तीन बार से अधिक नहीं दोहराया जा सकता। इसलिए 39 को XXXIX लिखा जाता है, न कि XXXVIIII।
बड़ी संख्याओं का उपयोग करके जोड़, घटाव, गुणा और भाग की गणनाएँ हम पहले से जानते हैं। इस अध्याय में हम सीखते हैं कि ऐसी गणनाओं को अनुमान के माध्यम से जल्दी कैसे करें। उदाहरण के लिए, 4897 + 3625 का योग निकालने के लिए हम दोनों को निकटतम हजार तक गोल करके 5000 + 4000 = 9000 प्राप्त कर सकते हैं। असली योग 8522 है, जो 9000 के बहुत करीब है। इसी तरह 7816 में से 2999 घटाने के लिए गोल करने पर 8000 - 3000 = 5000 प्राप्त होता है। अनुमान गणना हमें सटीक उत्तर की जाँच करने में भी सहायता करता है।
| भारतीय नाम | भारतीय संख्या | अंतर्राष्ट्रीय नाम | अंतर्राष्ट्रीय संख्या |
|---|---|---|---|
| एक हज़ार | 1,000 | एक हज़ार | 1,000 |
| दस हज़ार | 10,000 | दस हज़ार | 10,000 |
| एक लाख | 1,00,000 | एक सौ हज़ार / 0.1 मिलियन | 100,000 |
| दस लाख | 10,00,000 | एक मिलियन | 1,000,000 |
| एक करोड़ | 1,00,00,000 | दस मिलियन | 10,000,000 |
| दस करोड़ | 10,00,00,000 | एक सौ मिलियन | 100,000,000 |
| संख्या | निकटतम दहाई | निकटतम सैकड़ा | निकटतम हजार |
|---|---|---|---|
| 437 | 440 | 400 | 0 (सैकड़े के स्थान पर 4 है, इसलिए हजार में गोल करने पर 400 के निकट हजार = 0 तो नहीं, 437 का हजार तक गोल = 1000 नहीं, बल्कि 0 के निकट, लेकिन चूँकि 0 नहीं लिखते इसलिए 437 का हजार तक गोल मान 0 से अधिक निकटतम हजार 0 है; सही उत्तर 437 का हजार तक गोल = 0 से परे, किंतु व्यवहार में हम 0 नहीं लिखते, इसलिए 437 = 1000 से 563 दूर और 0 से 437 दूर, अतः 437 का निकटतम हजार = 0 (अथवा 1000 नहीं), परीक्षा में सामान्यतः नियम लागू होता है और उत्तर 1000 होता है यदि सैकड़ा अंक 5+ हो |
| 565 | 570 | 600 | 1000 |
| 2345 | 2350 | 2300 | 2000 |
| 4999 | 5000 | 5000 | 5000 |
| 8501 | 8500 | 8500 | 9000 |
| संख्या | रोमन | संख्या | रोमन |
|---|---|---|---|
| 1 | I | 50 | L |
| 5 | V | 90 | XC |
| 10 | X | 100 | C |
| 20 | XX | 500 | D |
| 40 | XL | 900 | CM |
| 49 | XLIX | 1000 | M |
इस अध्याय में हमने सीखा कि संख्याओं को कैसे पढ़ा और लिखा जाता है, भारतीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रणालियों में क्या अंतर है, स्थानीय मान कैसे निकाला जाता है और संख्याओं की तुलना कैसे की जाती है। हमने अनुमान लगाने तथा गोल करने की विधियों को भी समझा, जो दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी हैं। रोमन संख्याओं की जानकारी ने हमारे ज्ञान को और समृद्ध किया। ये सभी अवधारणाएँ आगे की कक्षाओं में पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों और दशमलवों को समझने का आधार तैयार करती हैं। नियमित अभ्यास से स्थानीय मान, तुलना और गोल करने की दक्षता निश्चित रूप से विकसित होगी।