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1. परिचय

संख्याओं की दुनिया अत्यंत रोचक है। इस अध्याय में हम संख्याओं के भीतर छिपे रहस्यों को जानेंगे। हम सीखेंगे कि संख्याएँ एक-दूसरे से किस प्रकार संबंधित होती हैं। गुणनखंड, गुणज, भाज्य और अभाज्य संख्याएँ, विभाज्यता के नियम, महत्तम समापवर्तक (HCF) और लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) जैसी अवधारणाएँ गणित की रीढ़ हैं। ये अवधारणाएँ न केवल परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि दैनिक जीवन में भी बहुत उपयोगी हैं। जैसे किसी समूह को समान भागों में बाँटना, वस्तुओं को सही तरीके से व्यवस्थित करना आदि।

जब दो या दो से अधिक संख्याओं को गुणा किया जाता है, तो प्राप्त गुणनफल को उन संख्याओं का गुणज कहते हैं और वे संख्याएँ गुणनफल की गुणनखंड (या गुणनखंड) कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 7 x 8 = 56, अतः 56, 7 और 8 का गुणज है, जबकि 7 और 8, 56 के गुणनखंड हैं। प्रत्येक संख्या स्वयं अपना एक गुणनखंड होती है और प्रत्येक संख्या 1 की गुणनखंड होती है। ये अवधारणाएँ संख्याओं की संरचना को समझने में सहायक हैं।

2. गुणनखंड और गुणज (Factors and Multiples)

किसी संख्या को पूर्णतः विभाजित करने वाली संख्याएँ उस संख्या के गुणनखंड कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 12 के गुणनखंड हैं 1, 2, 3, 4, 6 और 12, क्योंकि ये सभी 12 को पूर्णतः विभाजित करती हैं। किसी संख्या के गुणनखंडों को ज्ञात करने के लिए हम उस संख्या को 1, 2, 3... से क्रमशः भाग देते हैं। यदि भाग पूर्ण हो जाता है (शेषफल 0 आता है), तो वह संख्या गुणनखंड होती है। प्रत्येक संख्या के न्यूनतम गुणनखंड 1 और अधिकतम गुणनखंड स्वयं वह संख्या होती है।

किसी संख्या को किसी अन्य संख्या से गुणा करने पर प्राप्त संख्याएँ उस संख्या के गुणज कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 4 के गुणज हैं 4, 8, 12, 16, 20... ये सभी 4 x 1, 4 x 2, 4 x 3... से प्राप्त होती हैं। गुणजों की संख्या अनंत होती है। किसी संख्या का सबसे छोटा गुणज वह संख्या स्वयं होती है। गुणज ज्ञात करने के लिए हम संख्या को प्राकृत संख्याओं से क्रमशः गुणा करते हैं।

3. सम और विषम संख्याएँ (Even and Odd Numbers)

वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाज्य होती हैं, सम संख्याएँ (Even Numbers) कहलाती हैं, जैसे 2, 4, 6, 8, 10... सम संख्याओं के इकाई के स्थान पर 0, 2, 4, 6 या 8 होता है। वे संख्याएँ जो 2 से विभाज्य नहीं होतीं, विषम संख्याएँ (Odd Numbers) कहलाती हैं, जैसे 1, 3, 5, 7, 9... विषम संख्याओं के इकाई के स्थान पर 1, 3, 5, 7 या 9 होता है। सम और विषम संख्याओं के जोड़ने, घटाने और गुणा करने के कुछ विशेष नियम होते हैं। दो सम संख्याओं का योग सम होता है, दो विषम संख्याओं का योग सम होता है, परंतु एक सम और एक विषम संख्या का योग विषम होता है।

4. अभाज्य और भाज्य संख्याएँ (Prime and Composite Numbers)

वे संख्याएँ जिनके ठीक दो गुणनखंड होते हैं, अर्थात 1 और स्वयं वह संख्या, अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers) कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19... अभाज्य संख्याएँ हैं। संख्या 2 सबसे छोटी और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है। वे संख्याएँ जिनके दो से अधिक गुणनखंड होते हैं, भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers) कहलाती हैं, जैसे 4, 6, 8, 9, 10, 12... संख्या 1 न तो अभाज्य है और न ही भाज्य, क्योंकि इसका केवल एक ही गुणनखंड होता है।

5. विभाज्यता के नियम (Tests of Divisibility)

5.1 2 से विभाज्यता

यदि किसी संख्या के इकाई के स्थान पर 0, 2, 4, 6 या 8 हो, तो वह संख्या 2 से विभाज्य होती है।

5.2 3 से विभाज्यता

यदि किसी संख्या के सभी अंकों का योग 3 से विभाज्य हो, तो वह संख्या 3 से विभाज्य होती है। जैसे 639 में अंकों का योग 6 + 3 + 9 = 18, जो 3 से विभाज्य है, अतः 639, 3 से विभाज्य है।

5.3 5 से विभाज्यता

यदि किसी संख्या के इकाई के स्थान पर 0 या 5 हो, तो वह संख्या 5 से विभाज्य होती है।

5.4 6 से विभाज्यता

यदि कोई संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो, तो वह 6 से विभाज्य होती है।

5.5 9 से विभाज्यता

यदि किसी संख्या के सभी अंकों का योग 9 से विभाज्य हो, तो वह संख्या 9 से विभाज्य होती है। जैसे 891 में अंकों का योग 8 + 9 + 1 = 18, जो 9 से विभाज्य है, अतः 891, 9 से विभाज्य है।

5.6 10 से विभाज्यता

यदि किसी संख्या के इकाई के स्थान पर 0 हो, तो वह संख्या 10 से विभाज्य होती है।

6. महत्तम समापवर्तक (Highest Common Factor - HCF)

दो या दो से अधिक संख्याओं के उभयनिष्ठ गुणनखंडों में से सबसे बड़े गुणनखंड को उन संख्याओं का महत्तम समापवर्तक (HCF) या महत्तम सामान्य गुणनखंड कहते हैं। HCF ज्ञात करने की विधियाँ:

विधि 1: उभयनिष्ठ गुणनखंडों की सूची द्वारा

प्रत्येक संख्या के गुणनखंड लिखिए, उभयनिष्ठ गुणनखंडों में से सबसे बड़ा HCF होता है। जैसे 12 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 12 और 18 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 6, 9, 18। उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 2, 3, 6। अतः HCF = 6।

विधि 2: अभाज्य गुणनखंड विधि

प्रत्येक संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखिए और उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों का गुणनफल HCF होता है। जैसे 36 = 2 x 2 x 3 x 3 और 60 = 2 x 2 x 3 x 5। उभयनिष्ठ गुणनखंड 2, 2, 3 हैं, अतः HCF = 2 x 2 x 3 = 12।

7. लघुत्तम समापवर्त्य (Least Common Multiple - LCM)

दो या दो से अधिक संख्याओं के गुणजों में से सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज उन संख्याओं का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) कहलाता है। LCM ज्ञात करने की विधियाँ:

विधि 1: गुणजों की सूची द्वारा

प्रत्येक संख्या के कुछ गुणज लिखिए और सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज ज्ञात कीजिए। जैसे 4 के गुणज: 4, 8, 12, 16, 20, 24... और 6 के गुणज: 6, 12, 18, 24... उभयनिष्ठ गुणज 12, 24... हैं, अतः LCM = 12।

विधि 2: अभाज्य गुणनखंड विधि

प्रत्येक संख्या का अभाज्य गुणनखंड लिखिए। सभी गुणनखंडों में प्रत्येक अभाज्य संख्या की उच्चतम घात को गुणा कीजिए। जैसे 12 = 2 x 2 x 3 और 18 = 2 x 3 x 3। 2 की उच्चतम घात 2² और 3 की उच्चतम घात 3² है, अतः LCM = 2² x 3² = 4 x 9 = 36।

8. HCF और LCM के गुण

किसी संख्या का HCF कभी भी उस संख्या से बड़ा नहीं होता, जबकि LCM हमेशा उस संख्या से बड़ा या उसके बराबर होता है। किसी भी दो संख्याओं के HCF और LCM का गुणनफल उन दोनों संख्याओं के गुणनफल के बराबर होता है। अर्थात पहली संख्या x दूसरी संख्या = HCF x LCM। यह गुण केवल दो संख्याओं के लिए सत्य है। दैनिक जीवन में HCF और LCM के कई उपयोग हैं, जैसे समान भागों में बाँटना (HCF) और आवर्ती कार्यक्रमों का समय निकालना (LCM)।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: विभाज्यता के नियम

विभाज्यता नियम उदाहरण
2 से इकाई का अंक 0, 2, 4, 6, 8 326 (इकाई 6)
3 से अंकों का योग 3 से विभाज्य 639 (योग 18)
5 से इकाई का अंक 0 या 5 745 (इकाई 5)
6 से 2 और 3 दोनों से विभाज्य 618 (सम और अंक योग 15)
9 से अंकों का योग 9 से विभाज्य 891 (योग 18)
10 से इकाई का अंक 0 450 (इकाई 0)

तालिका 2: HCF और LCM की तुलना

गुण HCF LCM
पूर्ण रूप महत्तम समापवर्तक लघुत्तम समापवर्त्य
अर्थ सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज
मान संख्याओं से छोटा या बराबर संख्याओं से बड़ा या बराबर
उदाहरण (12, 18) 6 36
संबंध संख्या1 x संख्या2 = HCF x LCM संख्या1 x संख्या2 = HCF x LCM

तालिका 3: 1 से 20 तक अभाज्य संख्याएँ

प्रकार संख्याएँ
अभाज्य संख्याएँ (1 से 20) 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19
सम अभाज्य संख्या केवल 2
1 की स्थिति न अभाज्य, न भाज्य

माइंड मैप

flowchart TD A["संख्याओं के साथ खेलना"] --> B["गुणनखंड और गुणज"] B --> B1["गुणनखंड: 12 = 1,2,3,4,6,12"] B --> B2["गुणज: 4 के = 4,8,12,16..."] A --> C["सम और विषम संख्याएँ"] A --> D["अभाज्य व भाज्य संख्याएँ"] D --> D1["2,3,5,7,11... अभाज्य"] D --> D2["4,6,8,9... भाज्य"] A --> E["विभाज्यता के नियम"] E --> E1["2, 3, 5, 6, 9, 10"] A --> F["HCF: सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड"] A --> G["LCM: सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज"] F --> H["संख्या1 x संख्या2 = HCF x LCM"] G --> H

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: गुणनखंड और गुणज की अवधारणा

संख्या 12 के गुणनखंड और गुणज गुणनखंड छोटे होते हैं, गुणज बड़े और अनंत होते हैं गुणनखंड 1 2 3 4 6 12 गुणज 12 24 36 48 60 ... गुणनखंडों की संख्या सीमित होती है गुणजों की संख्या अनंत होती है Golden Rule: हर संख्या का सबसे छोटा गुणनखंड 1 और सबसे बड़ा गुणनखंड स्वयं वह संख्या है। स्वर्ण नियम: किसी संख्या का सबसे छोटा गुणज स्वयं वह संख्या होती है।

आरेख 2: HCF और LCM ज्ञात करने की अभाज्य गुणनखंड विधि

अभाज्य गुणनखंड विधि: 36 और 60 36 = 2 x 2 x 3 x 3 = 2² x 3² 60 = 2 x 2 x 3 x 5 = 2² x 3 x 5 HCF = उभयनिष्ठ गुणनखंड = 2 x 2 x 3 = 12 LCM = उच्चतम घातें = 2² x 3² x 5 = 180 HCF और LCM का संबंध पहली संख्या x दूसरी संख्या = HCF x LCM 36 x 60 = 12 x 180 = 2160, जाँच: 36 x 60 = 2160 स्वर्ण नियम: HCF के लिए केवल उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड लो, LCM के लिए सभी अभाज्य गुणनखंडों की उच्चतम घात लो। Golden Rule: यह संबंध केवल दो संख्याओं पर लागू होता है, तीन या अधिक संख्याओं पर नहीं।

सामान्य गलतियाँ

  1. संख्या 1 को अभाज्य संख्या मान लेना। 1 के केवल एक गुणनखंड होते हैं, इसलिए यह न तो अभाज्य है और न ही भाज्य।
  2. विभाज्यता के नियम में अंकों का योग के बजाय संख्या को ही 3 से भाग देना। याद रखें, 3 और 9 की विभाज्यता के लिए अंकों के योग का प्रयोग होता है।
  3. HCF और LCM में भ्रम होना। HCF छोटा होता है और LCM बड़ा। HCF सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड है, LCM सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज।
  4. गुणनखंड विधि से LCM निकालते समय केवल उभयनिष्ठ गुणनखंडों का गुणा करना। LCM के लिए सभी गुणनखंडों की उच्चतम घातें चाहिए।
  5. 2 से विभाज्यता की जाँच में संख्या के अंकों का योग देखना। 2 की विभाज्यता केवल इकाई के अंक पर निर्भर करती है।
  6. सम और विषम संख्याओं के योग का नियम भूल जाना, जैसे दो विषम संख्याओं का योग विषम मान लेना। वास्तव में दो विषम संख्याओं का योग सम होता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. अभाज्य संख्या पहचानने के लिए संख्या को 2, 3, 5, 7 जैसी छोटी अभाज्य संख्याओं से भाग दें। यदि किसी से विभाजित न हो तो वह अभाज्य है।
  2. विभाज्यता के प्रश्न में पहले 2 और 5 की जाँच करें (इकाई अंक देखकर), फिर 3 और 9 की (अंकों का योग देखकर)।
  3. HCF और LCM के प्रश्न में ध्यान रखें: बाँटना हो तो HCF, समय/पुनरावृत्ति हो तो LCM।
  4. सत्य/असत्य कथनों में याद रखें: 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
  5. प्रश्न में यदि केवल दो संख्याएँ हों और HCF या LCM में से एक दिया हो, तो संबंध संख्या1 x संख्या2 = HCF x LCM से दूसरा निकालें।
  6. अभाज्य गुणनखंड करते समय संख्या को छोटी अभाज्य संख्या से बार-बार भाग देकर सरल करें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने संख्याओं की संरचना को गहराई से समझा। गुणनखंड और गुणज की अवधारणाओं ने हमें बताया कि संख्याएँ एक-दूसरे से किस प्रकार जुड़ी हैं। सम, विषम, अभाज्य और भाज्य संख्याओं का वर्गीकरण संख्याओं को पहचानने में सहायक है। विभाज्यता के नियम बिना भाग दिए यह बताते हैं कि कोई संख्या किसी दूसरी संख्या से विभाज्य है या नहीं। HCF और LCM दैनिक जीवन के साथ-साथ आगे की कक्षाओं में भिन्नों के सरलीकरण का आधार हैं। इन सभी अवधारणाओं का नियमित अभ्यास करने से संख्याओं पर पकड़ मजबूत होगी और गणना की गति बढ़ेगी।