संख्याओं की दुनिया अत्यंत रोचक है। इस अध्याय में हम संख्याओं के भीतर छिपे रहस्यों को जानेंगे। हम सीखेंगे कि संख्याएँ एक-दूसरे से किस प्रकार संबंधित होती हैं। गुणनखंड, गुणज, भाज्य और अभाज्य संख्याएँ, विभाज्यता के नियम, महत्तम समापवर्तक (HCF) और लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) जैसी अवधारणाएँ गणित की रीढ़ हैं। ये अवधारणाएँ न केवल परीक्षा में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि दैनिक जीवन में भी बहुत उपयोगी हैं। जैसे किसी समूह को समान भागों में बाँटना, वस्तुओं को सही तरीके से व्यवस्थित करना आदि।
जब दो या दो से अधिक संख्याओं को गुणा किया जाता है, तो प्राप्त गुणनफल को उन संख्याओं का गुणज कहते हैं और वे संख्याएँ गुणनफल की गुणनखंड (या गुणनखंड) कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 7 x 8 = 56, अतः 56, 7 और 8 का गुणज है, जबकि 7 और 8, 56 के गुणनखंड हैं। प्रत्येक संख्या स्वयं अपना एक गुणनखंड होती है और प्रत्येक संख्या 1 की गुणनखंड होती है। ये अवधारणाएँ संख्याओं की संरचना को समझने में सहायक हैं।
किसी संख्या को पूर्णतः विभाजित करने वाली संख्याएँ उस संख्या के गुणनखंड कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 12 के गुणनखंड हैं 1, 2, 3, 4, 6 और 12, क्योंकि ये सभी 12 को पूर्णतः विभाजित करती हैं। किसी संख्या के गुणनखंडों को ज्ञात करने के लिए हम उस संख्या को 1, 2, 3... से क्रमशः भाग देते हैं। यदि भाग पूर्ण हो जाता है (शेषफल 0 आता है), तो वह संख्या गुणनखंड होती है। प्रत्येक संख्या के न्यूनतम गुणनखंड 1 और अधिकतम गुणनखंड स्वयं वह संख्या होती है।
किसी संख्या को किसी अन्य संख्या से गुणा करने पर प्राप्त संख्याएँ उस संख्या के गुणज कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 4 के गुणज हैं 4, 8, 12, 16, 20... ये सभी 4 x 1, 4 x 2, 4 x 3... से प्राप्त होती हैं। गुणजों की संख्या अनंत होती है। किसी संख्या का सबसे छोटा गुणज वह संख्या स्वयं होती है। गुणज ज्ञात करने के लिए हम संख्या को प्राकृत संख्याओं से क्रमशः गुणा करते हैं।
वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाज्य होती हैं, सम संख्याएँ (Even Numbers) कहलाती हैं, जैसे 2, 4, 6, 8, 10... सम संख्याओं के इकाई के स्थान पर 0, 2, 4, 6 या 8 होता है। वे संख्याएँ जो 2 से विभाज्य नहीं होतीं, विषम संख्याएँ (Odd Numbers) कहलाती हैं, जैसे 1, 3, 5, 7, 9... विषम संख्याओं के इकाई के स्थान पर 1, 3, 5, 7 या 9 होता है। सम और विषम संख्याओं के जोड़ने, घटाने और गुणा करने के कुछ विशेष नियम होते हैं। दो सम संख्याओं का योग सम होता है, दो विषम संख्याओं का योग सम होता है, परंतु एक सम और एक विषम संख्या का योग विषम होता है।
वे संख्याएँ जिनके ठीक दो गुणनखंड होते हैं, अर्थात 1 और स्वयं वह संख्या, अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers) कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19... अभाज्य संख्याएँ हैं। संख्या 2 सबसे छोटी और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है। वे संख्याएँ जिनके दो से अधिक गुणनखंड होते हैं, भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers) कहलाती हैं, जैसे 4, 6, 8, 9, 10, 12... संख्या 1 न तो अभाज्य है और न ही भाज्य, क्योंकि इसका केवल एक ही गुणनखंड होता है।
यदि किसी संख्या के इकाई के स्थान पर 0, 2, 4, 6 या 8 हो, तो वह संख्या 2 से विभाज्य होती है।
यदि किसी संख्या के सभी अंकों का योग 3 से विभाज्य हो, तो वह संख्या 3 से विभाज्य होती है। जैसे 639 में अंकों का योग 6 + 3 + 9 = 18, जो 3 से विभाज्य है, अतः 639, 3 से विभाज्य है।
यदि किसी संख्या के इकाई के स्थान पर 0 या 5 हो, तो वह संख्या 5 से विभाज्य होती है।
यदि कोई संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो, तो वह 6 से विभाज्य होती है।
यदि किसी संख्या के सभी अंकों का योग 9 से विभाज्य हो, तो वह संख्या 9 से विभाज्य होती है। जैसे 891 में अंकों का योग 8 + 9 + 1 = 18, जो 9 से विभाज्य है, अतः 891, 9 से विभाज्य है।
यदि किसी संख्या के इकाई के स्थान पर 0 हो, तो वह संख्या 10 से विभाज्य होती है।
दो या दो से अधिक संख्याओं के उभयनिष्ठ गुणनखंडों में से सबसे बड़े गुणनखंड को उन संख्याओं का महत्तम समापवर्तक (HCF) या महत्तम सामान्य गुणनखंड कहते हैं। HCF ज्ञात करने की विधियाँ:
प्रत्येक संख्या के गुणनखंड लिखिए, उभयनिष्ठ गुणनखंडों में से सबसे बड़ा HCF होता है। जैसे 12 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 12 और 18 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 6, 9, 18। उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 2, 3, 6। अतः HCF = 6।
प्रत्येक संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखिए और उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों का गुणनफल HCF होता है। जैसे 36 = 2 x 2 x 3 x 3 और 60 = 2 x 2 x 3 x 5। उभयनिष्ठ गुणनखंड 2, 2, 3 हैं, अतः HCF = 2 x 2 x 3 = 12।
दो या दो से अधिक संख्याओं के गुणजों में से सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज उन संख्याओं का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) कहलाता है। LCM ज्ञात करने की विधियाँ:
प्रत्येक संख्या के कुछ गुणज लिखिए और सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज ज्ञात कीजिए। जैसे 4 के गुणज: 4, 8, 12, 16, 20, 24... और 6 के गुणज: 6, 12, 18, 24... उभयनिष्ठ गुणज 12, 24... हैं, अतः LCM = 12।
प्रत्येक संख्या का अभाज्य गुणनखंड लिखिए। सभी गुणनखंडों में प्रत्येक अभाज्य संख्या की उच्चतम घात को गुणा कीजिए। जैसे 12 = 2 x 2 x 3 और 18 = 2 x 3 x 3। 2 की उच्चतम घात 2² और 3 की उच्चतम घात 3² है, अतः LCM = 2² x 3² = 4 x 9 = 36।
किसी संख्या का HCF कभी भी उस संख्या से बड़ा नहीं होता, जबकि LCM हमेशा उस संख्या से बड़ा या उसके बराबर होता है। किसी भी दो संख्याओं के HCF और LCM का गुणनफल उन दोनों संख्याओं के गुणनफल के बराबर होता है। अर्थात पहली संख्या x दूसरी संख्या = HCF x LCM। यह गुण केवल दो संख्याओं के लिए सत्य है। दैनिक जीवन में HCF और LCM के कई उपयोग हैं, जैसे समान भागों में बाँटना (HCF) और आवर्ती कार्यक्रमों का समय निकालना (LCM)।
| विभाज्यता | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| 2 से | इकाई का अंक 0, 2, 4, 6, 8 | 326 (इकाई 6) |
| 3 से | अंकों का योग 3 से विभाज्य | 639 (योग 18) |
| 5 से | इकाई का अंक 0 या 5 | 745 (इकाई 5) |
| 6 से | 2 और 3 दोनों से विभाज्य | 618 (सम और अंक योग 15) |
| 9 से | अंकों का योग 9 से विभाज्य | 891 (योग 18) |
| 10 से | इकाई का अंक 0 | 450 (इकाई 0) |
| गुण | HCF | LCM |
|---|---|---|
| पूर्ण रूप | महत्तम समापवर्तक | लघुत्तम समापवर्त्य |
| अर्थ | सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड | सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज |
| मान | संख्याओं से छोटा या बराबर | संख्याओं से बड़ा या बराबर |
| उदाहरण (12, 18) | 6 | 36 |
| संबंध | संख्या1 x संख्या2 = HCF x LCM | संख्या1 x संख्या2 = HCF x LCM |
| प्रकार | संख्याएँ |
|---|---|
| अभाज्य संख्याएँ (1 से 20) | 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19 |
| सम अभाज्य संख्या | केवल 2 |
| 1 की स्थिति | न अभाज्य, न भाज्य |
इस अध्याय में हमने संख्याओं की संरचना को गहराई से समझा। गुणनखंड और गुणज की अवधारणाओं ने हमें बताया कि संख्याएँ एक-दूसरे से किस प्रकार जुड़ी हैं। सम, विषम, अभाज्य और भाज्य संख्याओं का वर्गीकरण संख्याओं को पहचानने में सहायक है। विभाज्यता के नियम बिना भाग दिए यह बताते हैं कि कोई संख्या किसी दूसरी संख्या से विभाज्य है या नहीं। HCF और LCM दैनिक जीवन के साथ-साथ आगे की कक्षाओं में भिन्नों के सरलीकरण का आधार हैं। इन सभी अवधारणाओं का नियमित अभ्यास करने से संख्याओं पर पकड़ मजबूत होगी और गणना की गति बढ़ेगी।