अब तक हमने ज्यामितीय आकृतियों को पहचानना और उनके गुण समझना सीखा। परंतु क्या हम इन आकृतियों को स्वयं बना सकते हैं? रूलर, परकार, चाँद, विभाजक और सेट स्क्वायर जैसे उपकरणों की सहायता से हम विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों को सटीकता से बना सकते हैं। इसी कौशल का अध्ययन प्रायोगिक ज्यामिति (Practical Geometry) कहलाता है। इस अध्याय में हम रूलर और परकार का उपयोग करके रेखाखंड, वृत्त और कोण बनाना सीखेंगे। रेखाखंडों की माप करना और उनके प्रतिलिपि बनाना भी इसका भाग है।
प्रायोगिक ज्यामिति में सटीकता सबसे महत्वपूर्ण है। रेखा खींचने के लिए अच्छी धार वाली पेंसिल, सटीक रूप से चिह्नित रूलर और काम करने वाला परकार आवश्यक है। निर्माण (Construction) करते समय प्रत्येक चरण को ध्यान से करना चाहिए और आवश्यक चिह्नों (जैसे बिंदु) को स्पष्ट रूप से अंकित करना चाहिए। इस अध्याय में हम निर्माण की विधियों को चरणबद्ध रूप में सीखेंगे।
प्रायोगिक ज्यामिति के लिए हमें निम्नलिखित उपकरणों की आवश्यकता होती है। रूलर (Ruler) - रेखाएँ खींचने और लंबाई नापने के लिए। परकार (Compass) - वृत्त और चाप बनाने तथा लंबाई स्थानांतरित करने के लिए। विभाजक (Divider) - दो बिंदुओं के बीच की दूरी नापने के लिए। चाँद (Protractor) - कोण नापने और बनाने के लिए। सेट स्क्वायर (Set Square) - समकोण और समांतर रेखाएँ खींचने के लिए। इन उपकरणों का सही और सावधानी से उपयोग करना आवश्यक है। परकार का उपयोग करते समय उसकी नुकीली नोक को कागज पर स्थिर रखना चाहिए ताकि त्रिज्या बदल न जाए।
किसी दी गई लंबाई का रेखाखंड बनाने के लिए सबसे पहले रूलर को कागज पर रखकर उसकी लंबाई के अनुसार आरंभिक बिंदु और अंतिम बिंदु अंकित करते हैं। फिर इन दोनों बिंदुओं को रूलर की सहायता से जोड़ते हैं। प्राप्त रेखाखंड की लंबाई रूलर से जाँची जा सकती है।
किसी दिए गए रेखाखंड की बिल्कुल समान लंबाई का नया रेखाखंड बनाने के लिए परकार का उपयोग किया जाता है। विभाजक या परकार की नोक को दिए गए रेखाखंड के एक सिरे पर और पेंसिल को दूसरे सिरे पर रखकर दूरी नापते हैं। फिर कागज पर एक रेखा खींचकर उस पर इसी दूरी से चाप लगाते हैं। इस प्रकार बिंदु अंकित होता है और हमें दिए गए रेखाखंड के बराबर नया रेखाखंड प्राप्त होता है।
दी गई त्रिज्या का वृत्त बनाने के लिए सबसे पहले परकार में त्रिज्या के बराबर दूरी स्थापित करते हैं। इसके लिए रूलर पर उतनी लंबाई की दूरी नापी जाती है। फिर कागज पर केंद्र बिंदु O अंकित करते हैं। परकार की नुकीली नोक को केंद्र O पर रखकर पेंसिल को घुमाते हैं, जिससे वृत्त बन जाता है। वृत्त बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि परकार की दूरी (त्रिज्या) पूरे समय समान बनी रहे। वृत्त बनाने के लिए परकार की पेंसिल वाली भुजा को हल्के से घुमाना चाहिए। इस प्रकार हम किसी भी त्रिज्या का वृत्त बना सकते हैं। वृत्त के बनाने से हमें केंद्र, त्रिज्या, व्यास और जीवा की अवधारणाओं का व्यावहारिक ज्ञान भी होता है।
रूलर से एक रेखा खींचते हैं और उस पर बिंदु O अंकित करते हैं। परकार से बिंदु O को केंद्र मानकर एक चाप खींचते हैं जो रेखा को बिंदु A पर काटता है। फिर उसी त्रिज्या से बिंदु A को केंद्र मानकर दूसरा चाप खींचते हैं, जो पहले चाप को बिंदु B पर काटता है। O और B को जोड़ने वाली रेखा खींचते हैं। प्राप्त कोण AOB = 60 अंश होता है।
120 अंश का कोण बनाने के लिए पहले 60 अंश का कोण बनाते हैं। फिर उसी त्रिज्या से बिंदु B (पहले चाप का अंतिम बिंदु) को केंद्र मानकर चाप लगाते हैं जो पहले चाप को बिंदु C पर काटता है। O और C को जोड़ने पर कोण AOC = 120 अंश प्राप्त होता है।
90 अंश का कोण बनाने के लिए रेखा पर बिंदु O अंकित करते हैं। O को केंद्र मानकर चाप खींचते हैं जो रेखा को दो बिंदुओं A और B पर काटता है। फिर A को केंद्र मानकर रेखा के ऊपर चाप खींचते हैं और B को केंद्र मानकर उसी त्रिज्या से दूसरा चाप, दोनों चाप बिंदु C पर मिलते हैं। O और C को जोड़ने पर कोण 90 अंश का प्राप्त होता है। इस विधि को हम चाँद से भी सत्यापित कर सकते हैं।
रेखा l पर बिंदु P दिया है। P को केंद्र मानकर रेखा के दोनों ओर समान दूरी पर दो बिंदु A और B अंकित करते हैं। फिर A को केंद्र मानकर एक चाप और B को केंद्र मानकर उसी त्रिज्या से दूसरा चाप खींचते हैं, जो रेखा के ऊपर या नीचे बिंदु C पर मिलते हैं। C और P को जोड़ने वाली रेखा, रेखा l पर लंब होती है।
रेखा l के बाहर बिंदु P है। P को केंद्र मानकर एक चाप खींचते हैं जो रेखा l को दो बिंदुओं A और B पर काटता है। फिर A और B को केंद्र मानकर दो चाप खींचते हैं जो बिंदु Q पर मिलते हैं। Q और P को जोड़ने वाली रेखा, रेखा l पर लंब होती है। इस प्रकार खींचा गया लंब, बिंदु P से रेखा l तक की सबसे छोटी दूरी को दर्शाता है, जिसे P की रेखा l से दूरी कहते हैं।
किसी कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करने को कोण का समद्विभाजन कहते हैं। उदाहरण के लिए, 60 अंश के कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करने पर 30 अंश के दो कोण प्राप्त होते हैं। विधि: कोण के शीर्ष O को केंद्र मानकर एक चाप खींचते हैं जो कोण की दोनों भुजाओं को A और B पर काटता है। फिर A और B को केंद्र मानकर दो चाप खींचते हैं जो बिंदु D पर मिलते हैं। D और O को जोड़ने वाली रेखा, कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करती है। इस प्रकार 60 अंश को विभाजित करके 30 अंश और 120 अंश को विभाजित करके 60 अंश का कोण प्राप्त किया जा सकता है। रेखाखंड का समद्विभाजन भी इसी प्रकार होता है, जिससे रेखाखंड दो बराबर भागों में बँट जाता है।
| उपकरण | उपयोग |
|---|---|
| रूलर | रेखाएँ खींचना, लंबाई नापना |
| परकार | वृत्त/चाप बनाना, लंबाई स्थानांतरित करना |
| विभाजक | दूरी नापना |
| चाँद | कोण नापना और बनाना |
| सेट स्क्वायर | समकोण और समांतर रेखाएँ |
| निर्माण | विधि सारांश |
|---|---|
| दी गई लंबाई का रेखाखंड | रूलर से बिंदु अंकित करके जोड़ें |
| रेखाखंड की प्रतिलिपि | परकार से दूरी नापकर स्थानांतरित करें |
| त्रिज्या का वृत्त | परकार में त्रिज्या सेट करके घुमाएँ |
| 60 अंश का कोण | एक त्रिज्या के दो चापों से |
| 120 अंश का कोण | 60 अंश पर और एक चाप |
| 90 अंश का कोण | दो चापों के प्रतिच्छेदन से |
| कोण का समद्विभाजन | दो चापों से मध्य रेखा |
| नियम | कारण |
|---|---|
| परकार की दूरी न बदलें | त्रिज्या स्थिर रखने के लिए |
| बिंदुओं को स्पष्ट अंकित करें | सटीक निर्माण के लिए |
| तीखी पेंसिल प्रयोग करें | मोटी रेखाएँ गलती लाती हैं |
| निर्माण के बाद चाँद से जाँचें | सत्यापन के लिए |
इस अध्याय में हमने ज्यामितीय आकृतियों की रचना करना सीखा। रूलर और परकार की सहायता से रेखाखंड, वृत्त, 60, 120 और 90 अंश के कोण, लंब रेखाएँ तथा कोण और रेखाखंड के समद्विभाजन की विधियाँ सीखीं। निर्माण में सटीकता, सावधानी और उपकरणों के सही उपयोग का विशेष महत्व है। प्रायोगिक ज्यामिति हमें सैद्धांतिक ज्यामिति को व्यावहारिक रूप में देखने की क्षमता देती है। ये कौशल आगे की कक्षाओं में त्रिभुजों, चतुर्भुजों और अन्य आकृतियों की रचना का आधार हैं। नियमित अभ्यास से निर्माण की दक्षता और सटीकता दोनों विकसित होती हैं, जिससे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त होते हैं।