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1. परिचय

अब तक हमने ज्यामितीय आकृतियों को पहचानना और उनके गुण समझना सीखा। परंतु क्या हम इन आकृतियों को स्वयं बना सकते हैं? रूलर, परकार, चाँद, विभाजक और सेट स्क्वायर जैसे उपकरणों की सहायता से हम विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों को सटीकता से बना सकते हैं। इसी कौशल का अध्ययन प्रायोगिक ज्यामिति (Practical Geometry) कहलाता है। इस अध्याय में हम रूलर और परकार का उपयोग करके रेखाखंड, वृत्त और कोण बनाना सीखेंगे। रेखाखंडों की माप करना और उनके प्रतिलिपि बनाना भी इसका भाग है।

प्रायोगिक ज्यामिति में सटीकता सबसे महत्वपूर्ण है। रेखा खींचने के लिए अच्छी धार वाली पेंसिल, सटीक रूप से चिह्नित रूलर और काम करने वाला परकार आवश्यक है। निर्माण (Construction) करते समय प्रत्येक चरण को ध्यान से करना चाहिए और आवश्यक चिह्नों (जैसे बिंदु) को स्पष्ट रूप से अंकित करना चाहिए। इस अध्याय में हम निर्माण की विधियों को चरणबद्ध रूप में सीखेंगे।

2. आवश्यक उपकरण

प्रायोगिक ज्यामिति के लिए हमें निम्नलिखित उपकरणों की आवश्यकता होती है। रूलर (Ruler) - रेखाएँ खींचने और लंबाई नापने के लिए। परकार (Compass) - वृत्त और चाप बनाने तथा लंबाई स्थानांतरित करने के लिए। विभाजक (Divider) - दो बिंदुओं के बीच की दूरी नापने के लिए। चाँद (Protractor) - कोण नापने और बनाने के लिए। सेट स्क्वायर (Set Square) - समकोण और समांतर रेखाएँ खींचने के लिए। इन उपकरणों का सही और सावधानी से उपयोग करना आवश्यक है। परकार का उपयोग करते समय उसकी नुकीली नोक को कागज पर स्थिर रखना चाहिए ताकि त्रिज्या बदल न जाए।

3. रेखाखंड की रचना (Construction of Line Segments)

रूलर से रेखाखंड बनाना

किसी दी गई लंबाई का रेखाखंड बनाने के लिए सबसे पहले रूलर को कागज पर रखकर उसकी लंबाई के अनुसार आरंभिक बिंदु और अंतिम बिंदु अंकित करते हैं। फिर इन दोनों बिंदुओं को रूलर की सहायता से जोड़ते हैं। प्राप्त रेखाखंड की लंबाई रूलर से जाँची जा सकती है।

परकार से रेखाखंड की प्रतिलिपि बनाना

किसी दिए गए रेखाखंड की बिल्कुल समान लंबाई का नया रेखाखंड बनाने के लिए परकार का उपयोग किया जाता है। विभाजक या परकार की नोक को दिए गए रेखाखंड के एक सिरे पर और पेंसिल को दूसरे सिरे पर रखकर दूरी नापते हैं। फिर कागज पर एक रेखा खींचकर उस पर इसी दूरी से चाप लगाते हैं। इस प्रकार बिंदु अंकित होता है और हमें दिए गए रेखाखंड के बराबर नया रेखाखंड प्राप्त होता है।

4. वृत्त की रचना (Construction of Circles)

दी गई त्रिज्या का वृत्त बनाने के लिए सबसे पहले परकार में त्रिज्या के बराबर दूरी स्थापित करते हैं। इसके लिए रूलर पर उतनी लंबाई की दूरी नापी जाती है। फिर कागज पर केंद्र बिंदु O अंकित करते हैं। परकार की नुकीली नोक को केंद्र O पर रखकर पेंसिल को घुमाते हैं, जिससे वृत्त बन जाता है। वृत्त बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि परकार की दूरी (त्रिज्या) पूरे समय समान बनी रहे। वृत्त बनाने के लिए परकार की पेंसिल वाली भुजा को हल्के से घुमाना चाहिए। इस प्रकार हम किसी भी त्रिज्या का वृत्त बना सकते हैं। वृत्त के बनाने से हमें केंद्र, त्रिज्या, व्यास और जीवा की अवधारणाओं का व्यावहारिक ज्ञान भी होता है।

5. कोणों की रचना (Construction of Angles)

60 अंश का कोण बनाना

रूलर से एक रेखा खींचते हैं और उस पर बिंदु O अंकित करते हैं। परकार से बिंदु O को केंद्र मानकर एक चाप खींचते हैं जो रेखा को बिंदु A पर काटता है। फिर उसी त्रिज्या से बिंदु A को केंद्र मानकर दूसरा चाप खींचते हैं, जो पहले चाप को बिंदु B पर काटता है। O और B को जोड़ने वाली रेखा खींचते हैं। प्राप्त कोण AOB = 60 अंश होता है।

120 अंश का कोण बनाना

120 अंश का कोण बनाने के लिए पहले 60 अंश का कोण बनाते हैं। फिर उसी त्रिज्या से बिंदु B (पहले चाप का अंतिम बिंदु) को केंद्र मानकर चाप लगाते हैं जो पहले चाप को बिंदु C पर काटता है। O और C को जोड़ने पर कोण AOC = 120 अंश प्राप्त होता है।

90 अंश का कोण बनाना

90 अंश का कोण बनाने के लिए रेखा पर बिंदु O अंकित करते हैं। O को केंद्र मानकर चाप खींचते हैं जो रेखा को दो बिंदुओं A और B पर काटता है। फिर A को केंद्र मानकर रेखा के ऊपर चाप खींचते हैं और B को केंद्र मानकर उसी त्रिज्या से दूसरा चाप, दोनों चाप बिंदु C पर मिलते हैं। O और C को जोड़ने पर कोण 90 अंश का प्राप्त होता है। इस विधि को हम चाँद से भी सत्यापित कर सकते हैं।

6. लंब रेखाएँ खींचना

किसी रेखा पर स्थित बिंदु से लंब खींचना

रेखा l पर बिंदु P दिया है। P को केंद्र मानकर रेखा के दोनों ओर समान दूरी पर दो बिंदु A और B अंकित करते हैं। फिर A को केंद्र मानकर एक चाप और B को केंद्र मानकर उसी त्रिज्या से दूसरा चाप खींचते हैं, जो रेखा के ऊपर या नीचे बिंदु C पर मिलते हैं। C और P को जोड़ने वाली रेखा, रेखा l पर लंब होती है।

किसी रेखा के बाहर स्थित बिंदु से लंब खींचना

रेखा l के बाहर बिंदु P है। P को केंद्र मानकर एक चाप खींचते हैं जो रेखा l को दो बिंदुओं A और B पर काटता है। फिर A और B को केंद्र मानकर दो चाप खींचते हैं जो बिंदु Q पर मिलते हैं। Q और P को जोड़ने वाली रेखा, रेखा l पर लंब होती है। इस प्रकार खींचा गया लंब, बिंदु P से रेखा l तक की सबसे छोटी दूरी को दर्शाता है, जिसे P की रेखा l से दूरी कहते हैं।

7. कोण का समद्विभाजन (Bisection of an Angle)

किसी कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करने को कोण का समद्विभाजन कहते हैं। उदाहरण के लिए, 60 अंश के कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करने पर 30 अंश के दो कोण प्राप्त होते हैं। विधि: कोण के शीर्ष O को केंद्र मानकर एक चाप खींचते हैं जो कोण की दोनों भुजाओं को A और B पर काटता है। फिर A और B को केंद्र मानकर दो चाप खींचते हैं जो बिंदु D पर मिलते हैं। D और O को जोड़ने वाली रेखा, कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करती है। इस प्रकार 60 अंश को विभाजित करके 30 अंश और 120 अंश को विभाजित करके 60 अंश का कोण प्राप्त किया जा सकता है। रेखाखंड का समद्विभाजन भी इसी प्रकार होता है, जिससे रेखाखंड दो बराबर भागों में बँट जाता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: उपकरण और उनके उपयोग

उपकरण उपयोग
रूलर रेखाएँ खींचना, लंबाई नापना
परकार वृत्त/चाप बनाना, लंबाई स्थानांतरित करना
विभाजक दूरी नापना
चाँद कोण नापना और बनाना
सेट स्क्वायर समकोण और समांतर रेखाएँ

तालिका 2: निर्माण की विधियाँ

निर्माण विधि सारांश
दी गई लंबाई का रेखाखंड रूलर से बिंदु अंकित करके जोड़ें
रेखाखंड की प्रतिलिपि परकार से दूरी नापकर स्थानांतरित करें
त्रिज्या का वृत्त परकार में त्रिज्या सेट करके घुमाएँ
60 अंश का कोण एक त्रिज्या के दो चापों से
120 अंश का कोण 60 अंश पर और एक चाप
90 अंश का कोण दो चापों के प्रतिच्छेदन से
कोण का समद्विभाजन दो चापों से मध्य रेखा

तालिका 3: रचना के नियम

नियम कारण
परकार की दूरी न बदलें त्रिज्या स्थिर रखने के लिए
बिंदुओं को स्पष्ट अंकित करें सटीक निर्माण के लिए
तीखी पेंसिल प्रयोग करें मोटी रेखाएँ गलती लाती हैं
निर्माण के बाद चाँद से जाँचें सत्यापन के लिए

माइंड मैप

flowchart TD A["प्रायोगिक ज्यामिति"] --> B["उपकरण"] B --> B1["रूलर, परकार, विभाजक, चाँद, सेट स्क्वायर"] A --> C["रेखाखंड की रचना"] C --> C1["रूलर से नापकर"] C --> C2["परकार से प्रतिलिपि"] A --> D["वृत्त की रचना"] D --> D1["केंद्र अंकित करके, त्रिज्या स्थिर रखकर"] A --> E["कोणों की रचना"] E --> E1["60 अंश, 120 अंश, 90 अंश"] A --> F["लंब रेखाएँ"] F --> F1["रेखा पर स्थित बिंदु से"] F --> F2["रेखा के बाहर स्थित बिंदु से"] A --> G["समद्विभाजन"] G --> G1["कोण का: 60 से 30, 120 से 60"] G --> G2["रेखाखंड का: दो बराबर भाग"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: 60 अंश के कोण की रचना

60 अंश के कोण की रचना O A B चरण 1: रेखा खींचकर O अंकित करें चरण 2: O केंद्र से चाप, बिंदु A प्राप्त चरण 3: A केंद्र से उसी त्रिज्या का चाप, बिंदु B चरण 4: O और B जोड़ें परिणाम: कोण AOB = 60 अंश Golden Rule: 60 अंश बनाने में दोनों चाप समान त्रिज्या के होने चाहिए, परकार की दूरी न बदलें। स्वर्ण नियम: 120 अंश बनाने के लिए B केंद्र से और एक चाप लगाएँ।

आरेख 2: कोण का समद्विभाजन

60 अंश के कोण का समद्विभाजन (30 अंश) O A B D चरण 1: O केंद्र से चाप, A और B बिंदु चरण 2: A और B केंद्र से समान त्रिज्या के चाप, बिंदु D चरण 3: O और D जोड़ें परिणाम: कोण AOD = कोण DOB = 30 अंश स्वर्ण नियम: समद्विभाजन से कोण दो बराबर भागों में बँटता है, 60 से 30 अंश और 120 से 60 अंश। Golden Rule: कोण बनाने के बाद चाँद से जाँच करें कि दोनों भाग समान हैं।

सामान्य गलतियाँ

  1. परकार की त्रिज्या बदलते रहना। चाप बनाते समय परकार की दूरी स्थिर रखनी चाहिए, अन्यथा कोण सही नहीं बनेगा।
  2. 60 अंश के कोण में दूसरा चाप अलग त्रिज्या का बनाना। दूसरा चाप भी पहले चाप जितनी ही त्रिज्या का होना चाहिए।
  3. वृत्त बनाते समय केंद्र को गलत स्थान पर रखना। परकार की नुकीली नोक को स्पष्ट अंकित केंद्र पर ही रखना चाहिए।
  4. कोण बनाने के बाद सत्यापन न करना। चाँद से जाँच करनी चाहिए कि कोण 60, 120 या 90 अंश का है।
  5. लंब खींचते समय चापों की त्रिज्या अलग-अलग रखना। लंब के निर्माण में दोनों चाप समान त्रिज्या के होने चाहिए।
  6. रेखाखंड नापते समय रूलर के शून्य से न शुरू करना। माप हमेशा शून्य चिह्न से शुरू होनी चाहिए।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. निर्माण के प्रश्न में पहले उपकरण तैयार रखें - तीखी पेंसिल, सटीक रूलर और ठीक से काम करने वाला परकार।
  2. 60 अंश बनाने के लिए परकार की दूरी रेखा की लंबाई के बराबर रखें और दोनों चाप समान त्रिज्या के बनाएँ।
  3. 90 अंश बनाने में याद रखें: पहले A और B दो बिंदु बनाएँ, फिर उनसे ऊपर या नीचे चाप।
  4. कोण का समद्विभाजन करने के बाद चाँद से जाँचें कि दोनों भाग समान हैं।
  5. रेखाखंड की प्रतिलिपि में परकार की दूरी को बिना बदले एक बार में स्थानांतरित करें।
  6. लंब के प्रश्न में चापों को रेखा के दोनों ओर स्पष्ट रूप से बनाएँ, जिससे प्रतिच्छेदन बिंदु स्पष्ट दिखे।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने ज्यामितीय आकृतियों की रचना करना सीखा। रूलर और परकार की सहायता से रेखाखंड, वृत्त, 60, 120 और 90 अंश के कोण, लंब रेखाएँ तथा कोण और रेखाखंड के समद्विभाजन की विधियाँ सीखीं। निर्माण में सटीकता, सावधानी और उपकरणों के सही उपयोग का विशेष महत्व है। प्रायोगिक ज्यामिति हमें सैद्धांतिक ज्यामिति को व्यावहारिक रूप में देखने की क्षमता देती है। ये कौशल आगे की कक्षाओं में त्रिभुजों, चतुर्भुजों और अन्य आकृतियों की रचना का आधार हैं। नियमित अभ्यास से निर्माण की दक्षता और सटीकता दोनों विकसित होती हैं, जिससे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त होते हैं।