दैनिक जीवन में हम अक्सर दो राशियों की तुलना करते हैं। मोहन की ऊँचाई 150 सेंटीमीटर है और सोहन की 180 सेंटीमीटर, तो हम कह सकते हैं कि सोहन मोहन से 30 सेंटीमीटर लंबा है। यह अंतर बताने का एक तरीका है। परंतु कभी-कभी हम तुलना भाग की सहायता से भी करते हैं, जैसे मोहन की ऊँचाई और सोहन की ऊँचाई का अनुपात 150 : 180 = 5 : 6 है। दो समान प्रकार की राशियों की तुलना, भाग के रूप में करने को अनुपात (Ratio) कहते हैं। अनुपात हमें बताता है कि एक राशि दूसरी राशि का कितना गुना है।
अनुपात और समानुपात के बिना जीवन की अनेक गणनाएँ अधूरी रह जातीं। खाना बनाते समय सामग्री का अनुपात, मानचित्र पर दूरी का अनुपात, पेंट मिलाने का अनुपात, स्कूल में लड़कों और लड़कियों का अनुपात - सभी में अनुपात का उपयोग होता है। इस अध्याय में हम अनुपात और समानुपात की अवधारणाओं को विस्तार से समझेंगे और सीखेंगे कि इनका उपयोग करके वास्तविक जीवन की समस्याओं को कैसे हल किया जाए।
दो समान प्रकार की राशियों की तुलना को अनुपात कहते हैं। यदि दो राशियाँ a और b हैं, तो उनका अनुपात a : b (a अनुपात b) लिखा जाता है, जिसे हम a/b भी लिख सकते हैं। अनुपात में दोनों राशियों की इकाई समान होनी चाहिए। अनुपात की कोई इकाई नहीं होती, यह केवल एक संख्या होती है। अनुपात हमेशा सरलतम रूप में लिखा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कक्षा में 20 लड़के और 30 लड़कियाँ हैं, तो लड़कों और लड़कियों का अनुपात 20 : 30 = 2 : 3 होगा। इस अनुपात का अर्थ है कि प्रत्येक 2 लड़कों पर 3 लड़कियाँ हैं।
अनुपात लिखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। पहली, दोनों राशियाँ एक ही प्रकार की होनी चाहिए (जैसे लंबाई की तुलना लंबाई से)। दूसरी, दोनों राशियों की इकाइयाँ समान होनी चाहिए - यदि एक मीटर में है और दूसरी सेंटीमीटर में, तो पहले दोनों को समान इकाई में बदलना होता है। तीसरी, अनुपात में क्रम महत्वपूर्ण होता है - 2 : 3 और 3 : 2 एक ही नहीं होते। चौथी, अनुपात का कोई मात्रक नहीं होता। अनुपात को भिन्न की तरह सरल किया जा सकता है, अर्थात दोनों पदों को उनके HCF से भाग देकर सरलतम रूप प्राप्त किया जाता है।
अनुपात को सरलतम रूप में लिखने के लिए दोनों पदों को उनके महत्तम समापवर्तक (HCF) से भाग देते हैं। उदाहरण के लिए, अनुपात 18 : 24 में 18 और 24 का HCF 6 है। दोनों को 6 से भाग देने पर 3 : 4 प्राप्त होता है। इसी प्रकार 20 : 30 का सरलतम रूप 2 : 3 है। सरलतम रूप में दोनों पद ऐसे होते हैं कि उनमें 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं होता। अनुपात को सरल रूप में लिखना तुलना को स्पष्ट बनाता है। जब दोनों पद भिन्न में हों, तो पहले उन्हें पूर्ण संख्याओं में बदला जाता है, फिर सरल किया जाता है। जब दोनों पद दशमलव में हों, तो उन्हें भी पूर्ण संख्या में बदलकर सरल किया जाता है।
जब दो अनुपात बराबर होते हैं, तो वे चारों राशियाँ समानुपात में होती हैं। उदाहरण के लिए, यदि 2 : 3 = 4 : 6, तो 2, 3, 4, 6 समानुपात में हैं। इसे हम 2 : 3 :: 4 : 6 भी लिखते हैं। समानुपात में बाहर वाले पदों (2 और 6) को अंतिम पद (या बाह्य पद) और बीच वाले पदों (3 और 4) को मध्य पद कहते हैं। समानुपात का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि अंतिम पदों का गुणनफल, मध्य पदों के गुणनफल के बराबर होता है। अर्थात 2 x 6 = 3 x 4 = 12। इस गुण का उपयोग अज्ञात पद ज्ञात करने में होता है।
यह जाँचने के लिए कि चार राशियाँ समानुपात में हैं या नहीं, हम उनके अनुपात बनाते हैं और देखते हैं कि दोनों अनुपात सरलतम रूप में बराबर हैं या नहीं। जैसे 4, 6, 12, 18 समानुपात में हैं या नहीं? पहला अनुपात 4 : 6 = 2 : 3 और दूसरा 12 : 18 = 2 : 3। दोनों बराबर हैं, अतः ये समानुपात में हैं। दूसरी विधि से, अंतिम पदों का गुणनफल 4 x 18 = 72 और मध्य पदों का गुणनफल 6 x 12 = 72, दोनों बराबर हैं, अतः समानुपात सत्य है।
अनुपात और समानुपात का दैनिक जीवन में अनेक अनुप्रयोग हैं। किसी चित्र को बड़ा या छोटा करने पर उसके भागों का अनुपात समान रहता है। मानचित्रों में वास्तविक दूरी और मानचित्र पर दूरी का अनुपात निश्चित होता है। रसोई में सामग्री के अनुपात, मशीनों की चाल, कीमत और मात्रा का संबंध आदि सभी में समानुपात का उपयोग होता है। जैसे यदि 2 किलो चावल का मूल्य 80 रुपये है, तो 5 किलो चावल का मूल्य ज्ञात करने के लिए हम समानुपात का प्रयोग करते हैं। समानुपात में अज्ञात पद को x मानकर अनुपातों को बराबर रखते हैं और हल करते हैं।
समानुपात की सहायता से हम किसी भी अज्ञात पद को ज्ञात कर सकते हैं। मान लीजिए 2 किलो सेब 100 रुपये के हैं, तो 5 किलो सेब का मूल्य क्या होगा? यहाँ किलो और मूल्य समानुपात में हैं। हम लिख सकते हैं: 2 : 5 = 100 : x, जहाँ x 5 किलो का मूल्य है। समानुपात के गुण से, 2 x x = 5 x 100, अर्थात 2x = 500, अतः x = 500 ÷ 2 = 250 रुपये। इस विधि में हम अंतिम पदों के गुणनफल और मध्य पदों के गुणनफल को बराबर करते हैं, फिर अज्ञात पद को अलग करके हल करते हैं।
| स्थिति | अनुपात | सरलतम रूप |
|---|---|---|
| 20 लड़के, 30 लड़कियाँ | 20 : 30 | 2 : 3 |
| 18 सेमी और 24 सेमी | 18 : 24 | 3 : 4 |
| 10 रुपये और 25 रुपये | 10 : 25 | 2 : 5 |
| 4 मीटर और 2 मीटर | 4 : 2 | 2 : 1 |
| राशियाँ | अनुपात | अंतिम पदों का गुणनफल | मध्य पदों का गुणनफल | समानुपात? |
|---|---|---|---|---|
| 4, 6, 12, 18 | 2:3 = 2:3 | 4 x 18 = 72 | 6 x 12 = 72 | हाँ |
| 2, 3, 4, 6 | 2:3 = 2:3 | 2 x 6 = 12 | 3 x 4 = 12 | हाँ |
| 3, 5, 6, 9 | 3:5 ≠ 6:9 (2:3) | 3 x 9 = 27 | 5 x 6 = 30 | नहीं |
| पद का नाम | अर्थ | उदाहरण (2 : 3 :: 4 : 6) |
|---|---|---|
| अंतिम (बाह्य) पद | पहला और चौथा पद | 2 और 6 |
| मध्य पद | दूसरा और तीसरा पद | 3 और 4 |
| गुणनफल | अंतिम x अंतिम = मध्य x मध्य | 2 x 6 = 3 x 4 |
इस अध्याय में हमने अनुपात और समानुपात की अवधारणाओं को विस्तार से समझा। अनुपात दो समान राशियों की तुलना है, जो सरलतम रूप में लिखी जाती है। जब दो अनुपात बराबर होते हैं, तो चारों राशियाँ समानुपात में होती हैं। समानुपात का प्रमुख गुण - अंतिम पदों का गुणनफल मध्य पदों के गुणनफल के बराबर होता है - अज्ञात पद ज्ञात करने में सहायक है। मूल्य-मात्रा, दूरी, सामग्री के अनुपात आदि में समानुपात का दैनिक उपयोग है। यह अध्याय आगे की कक्षाओं में प्रतिशत, लाभ-हानि, गति आदि के अध्ययन का आधार है। अनुपात-समानुपात का नियमित अभ्यास करने से इनके प्रयोग में दक्षता आती है।