हमारे चारों ओर अनेक आकृतियाँ हैं - घर की दीवार, दरवाजा, किताब, कुर्सी, गेंद, डिब्बा आदि। इन सभी वस्तुओं को ध्यान से देखने पर हमें ज्यामितीय आकृतियाँ दिखाई देती हैं। इस अध्याय में हम रेखाखंडों की लंबाई नापना, कोणों को पहचानना तथा मापना, विभिन्न प्रकार के त्रिभुजों और चतुर्भुजों की पहचान करना सीखेंगे। इसके अलावा हम घन, घनाभ, बेलन, शंकु और गोले जैसे त्रिविमीय (3D) आकारों के बारे में भी जानेंगे। यह अध्याय पिछले अध्याय में सीखी गई आधारभूत अवधारणाओं को आगे बढ़ाता है।
आकृतियों को समझने का अर्थ है उनकी लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई, कोण, समांतरता और लंबता जैसे गुणों को पहचानना। जब हम किसी आकृति का अध्ययन करते हैं, तो हम उसके अलग-अलग गुणों को नापते और तुलना करते हैं। इसी अध्ययन को आकृतियों की समझ कहते हैं। आज हम सीखेंगे कि रेखाखंडों को सटीक रूप से कैसे नापा जाए, कोणों को कैसे मापा जाए और विभिन्न आकृतियों को उनके गुणों के आधार पर कैसे वर्गीकृत किया जाए।
रेखाखंड की लंबाई नापने के लिए हम मुख्यतः सेंटीमीटर वाले रूलर (स्केल) का उपयोग करते हैं। रूलर पर सेंटीमीटर (cm) और मिलीमीटर (mm) के निशान होते हैं। रेखाखंड की लंबाई नापने के लिए रूलर के शून्य को रेखाखंड के एक सिरे पर रखते हैं और दूसरे सिरे पर पड़ने वाला निशान पढ़ते हैं। इस प्रकार प्राप्त संख्या रेखाखंड की लंबाई होती है। रेखाखंड की लंबाई को हम विभाजक (Divider) की सहायता से भी नाप सकते हैं। विभाजक से नापकर उसे रूलर पर रखने से अधिक सटीक माप प्राप्त होती है।
रेखाखंड की लंबाई की माप की इकाई सेंटीमीटर होती है। बड़ी दूरियों के लिए मीटर (m) और किलोमीटर (km) का उपयोग होता है। इन इकाइयों के संबंध याद रखना आवश्यक है: 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर, 1 किलोमीटर = 1000 मीटर और 1 सेंटीमीटर = 10 मिलीमीटर। जब हम दो रेखाखंडों की लंबाई नापते हैं, तो हम तुलना कर सकते हैं कि कौन सा लंबा और कौन सा छोटा है। दो रेखाखंडों की तुलना का सबसे सरल तरीका है उन्हें सीधा रखकर देखना, परंतु सटीक तुलना के लिए मापन आवश्यक है।
कोणों को नापने के लिए चाँद (Protractor) नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है। चाँद अर्धवृत्त के आकार का होता है जिस पर 0 से 180 अंश तक के निशान होते हैं। कोण नापने के लिए चाँद के केंद्र को कोण के शीर्ष पर रखते हैं और शून्य रेखा को कोण की एक भुजा पर मिलाते हैं। फिर दूसरी भुजा जिस अंक पर पड़ती है, वही कोण की माप होती है। कोणों की माप की इकाई अंश (degree) होती है जिसे अंश चिह्न (०) से दर्शाया जाता है।
कोणों के प्रकारों की पहचान करना महत्वपूर्ण है। न्यून कोण 0 से 90 अंश के बीच होता है, समकोण ठीक 90 अंश का होता है, अधिक कोण 90 से 180 अंश के बीच होता है, सरल कोण ठीक 180 अंश का होता है, प्रतिवर्ती कोण 180 से 360 अंश के बीच होता है और पूर्ण कोण 360 अंश का होता है। एक पूर्ण चक्कर 360 अंश का होता है, अर्थात घड़ी की सुई एक पूर्ण चक्कर में 360 अंश का कोण बनाती है। घड़ी में दो घंटे की सुई के बीच का कोण 30 अंश होता है, क्योंकि 360 ÷ 12 = 30।
जब दो रेखाएँ या रेखाखंड मिलकर ठीक 90 अंश का कोण बनाते हैं, तो उसे समकोण कहते हैं। एक किताब के कोने, कमरे की दीवारों का कोना समकोण के उदाहरण हैं। समकोण को हम बिंदुकित वर्ग से दर्शाते हैं।
यदि दो रेखाएँ परस्पर समकोण (90 अंश) पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो उन्हें लंब रेखाएँ कहते हैं। रेखा l और रेखा m के बीच का कोण 90 अंश हो तो हम लिखते हैं l ⟂ m, जिसका अर्थ है l, m पर लंब है। दीवार और फर्श, खिड़की की ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज सलाखें लंब रेखाओं के उदाहरण हैं।
वे रेखाएँ जो एक-दूसरे से कभी नहीं मिलतीं और हर बिंदु पर समान दूरी पर रहती हैं, समांतर रेखाएँ कहलाती हैं। समांतर रेखाओं के बीच की दूरी सदैव समान रहती है। रेल की पटरियाँ, कॉपी में बनी रेखाएँ समांतर रेखाओं के उदाहरण हैं। किसी सतह पर दो समांतर रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
त्रिभुजों को उनकी भुजाओं और कोणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
वह चतुर्भुज जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हों और चारों कोण समकोण (90 अंश) हों, वर्ग कहलाता है।
वह चतुर्भुज जिसके सम्मुख भुजाएँ बराबर हों और चारों कोण समकोण हों, आयत कहलाता है।
वह चतुर्भुज जिसकी सम्मुख भुजाएँ समांतर और बराबर हों, समांतर चतुर्भुज कहलाता है।
वह समांतर चतुर्भुज जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हों, समचतुर्भुज कहलाता है।
वह चतुर्भुज जिसकी केवल एक युग्म भुजाएँ समांतर हों, समलंब कहलाता है।
घन की 6 फलकें, 12 किनारे और 8 शीर्ष होते हैं। घन की सभी फलकें वर्गाकार होती हैं और सभी किनारे बराबर होते हैं। पासा घन का उदाहरण है।
घनाभ की 6 फलकें, 12 किनारे और 8 शीर्ष होते हैं। घनाभ की फलकें आयताकार होती हैं और सम्मुख फलकें बराबर होती हैं। ईंट और माचिस की डिबिया घनाभ के उदाहरण हैं।
बेलन में दो वृत्ताकार फलकें होती हैं जो एक-दूसरे के समांतर होती हैं। डिब्बा, पेंसिल, गिलास बेलन के उदाहरण हैं।
शंकु का आधार वृत्ताकार होता है और यह एक शीर्ष बिंदु पर समाप्त होता है। शंकु का सबसे अच्छा उदाहरण है क्रीम कोन या जन्मदिन की टोपी।
गोला वह आकृति है जिसका प्रत्येक फलक नहीं होता, बल्कि यह एक वक्र सतह से घिरा होता है। गेंद, संतरा, चाँद गोले के उदाहरण हैं।
| आधार | प्रकार | विशेषता |
|---|---|---|
| भुजाएँ | समबाहु त्रिभुज | तीनों भुजाएँ बराबर |
| भुजाएँ | समद्विबाहु त्रिभुज | दो भुजाएँ बराबर |
| भुजाएँ | विषमबाहु त्रिभुज | तीनों भुजाएँ असमान |
| कोण | न्यूनकोण त्रिभुज | तीनों कोण < 90 अंश |
| कोण | समकोण त्रिभुज | एक कोण = 90 अंश |
| कोण | अधिककोण त्रिभुज | एक कोण > 90 अंश |
| आकृति | फलकें | किनारे | शीर्ष |
|---|---|---|---|
| घन | 6 (वर्गाकार) | 12 | 8 |
| घनाभ | 6 (आयताकार) | 12 | 8 |
| बेलन | 2 (वृत्ताकार) + 1 वक्र | 2 | 0 |
| शंकु | 1 (वृत्ताकार) + 1 वक्र | 1 | 1 |
| गोला | 0 (पूर्ण वक्र) | 0 | 0 |
| कोण | माप |
|---|---|
| न्यून कोण | 0 से 90 अंश तक |
| समकोण | ठीक 90 अंश |
| अधिक कोण | 90 से 180 अंश तक |
| सरल कोण | ठीक 180 अंश |
| प्रतिवर्ती कोण | 180 से 360 अंश तक |
| पूर्ण कोण | ठीक 360 अंश |
इस अध्याय में हमने रेखाखंडों और कोणों की माप तथा विभिन्न आकृतियों की पहचान सीखी। लंब और समांतर रेखाओं की अवधारणाओं ने रेखाओं के पारस्परिक संबंधों को स्पष्ट किया। त्रिभुजों और चतुर्भुजों का वर्गीकरण उनकी भुजाओं और कोणों के गुणों पर आधारित है। त्रिविमीय आकृतियों, अर्थात घन, घनाभ, बेलन, शंकु और गोले की जानकारी ने हमारे आस-पास की वस्तुओं को वैज्ञानिक दृष्टि से देखने की क्षमता दी। ये सभी अवधारणाएँ आगे की कक्षाओं में क्षेत्रफल, आयतन और ठोस आकृतियों के अध्ययन का आधार हैं। इस अध्याय का अभ्यास करने से आकृतियों की सटीक पहचान करने की क्षमता विकसित होती है।