हमारा भोजन विभिन्न पोषक तत्वों से बना होता है, जिन्हें भोजन के घटक या पोषक तत्व कहते हैं। ये पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देते हैं, शरीर की वृद्धि करते हैं और उसकी मरम्मत करते हैं। भोजन के प्रमुख पोषक तत्व हैं: कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज लवण। इनके अलावा जल और रूक्षांश (रेशे) भी भोजन के महत्वपूर्ण घटक हैं।
संतुलित आहार का अर्थ है ऐसा भोजन, जिसमें ये सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में मौजूद हों। यदि भोजन में किसी एक पोषक तत्व की अधिकता या कमी हो जाए, तो शरीर में विभिन्न प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं। इन्हीं विकारों को आहारजन्य रोग या कमीजन्य रोग कहा जाता है। इस अध्याय में हम भोजन के विभिन्न घटकों, उनके स्रोतों, कार्यों और कमी से होने वाले रोगों का अध्ययन करेंगे।
हमें अपने भोजन की पहचान करना भी सीखना चाहिए, जैसे कौन से खाद्य पदार्थ में कौन सा पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। भोजन के घटकों को पहचानने के लिए हम सरल परीक्षण कर सकते हैं, जैसे स्टार्च का परीक्षण आयोडीन घोल से और प्रोटीन का परीक्षण कॉपर सल्फेट तथा कास्टिक सोडा से किया जाता है।
कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले मुख्य पोषक तत्व हैं। ये मुख्यतः शर्करा और स्टार्च के रूप में मौजूद होते हैं। चीनी, गुड़, शहद, फल और गन्ना प्राकृतिक शर्करा के स्रोत हैं, जबकि स्टार्च आलू, चावल, गेहूँ, मक्का और ब्रेड जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा प्रदान करने वाले भोजन के घटक कहा जाता है, क्योंकि ये शरीर को काम करने की शक्ति देते हैं।
हमारे दैनिक कार्यों जैसे दौड़ना, खेलना, पढ़ना और सोचना के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट से मिलती है। स्टार्च की पहचान करने के लिए हम आयोडीन के घोल का उपयोग करते हैं। जब आयोडीन घोल को किसी खाद्य पदार्थ पर डाला जाता है जिसमें स्टार्च होता है, तो उसका रंग नीला-काला हो जाता है।
प्रोटीन को शरीर के निर्माण खंड कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर की वृद्धि और मरम्मत में मुख्य भूमिका निभाता है। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों, त्वचा, बालों और नाखूनों का निर्माण करता है। प्रोटीन के मुख्य स्रोत हैं दालें, सोयाबीन, दूध, पनीर, अंडा, मांस, मछली और मूंगफली। ये सभी शरीर के निर्माण और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत में सहायक होते हैं।
प्रोटीन की पहचान के लिए हम कॉपर सल्फेट और कास्टिक सोडा के घोल का उपयोग करते हैं। जब खाद्य पदार्थ के मिश्रण में पहले कॉपर सल्फेट के 2 बूंद और फिर कास्टिक सोडा के 10 बूंद डाले जाते हैं, तो बैंगनी या बैंगनी-नीला रंग प्रोटीन की उपस्थिति दर्शाता है।
वसा भी शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन कार्बोहाइड्रेट की तुलना में वसा दोगुनी से अधिक ऊर्जा देती है। वसा शरीर में ऊर्जा का संचित रूप है। वसा के मुख्य स्रोत हैं घी, मक्खन, तेल, मूंगफली, तिल, अखरोट, बादाम और दूध। वसा हमारे शरीर में कोशिकाओं के निर्माण और आवश्यक फैटी एसिड प्रदान करने में भी सहायक होती है।
वसा की पहचान के लिए खाद्य पदार्थ को कागज पर रगड़कर देखा जा सकता है। यदि कागज पर चिकना (तैलीय) दाग रह जाता है, तो उस खाद्य पदार्थ में वसा उपस्थित होती है। यह वसा का सरल पहचान परीक्षण है। विशेष रूप से मूंगफली, गुड़हल या अखरोट को रगड़ने पर ऐसा तैलीय दाग दिखाई देता है।
विटामिन हमारे शरीर के स्वस्थ रहने के लिए बहुत आवश्यक हैं, भले ही इनकी आवश्यक मात्रा कम हो। विटामिन शरीर को रोगों से बचाते हैं और विभिन्न शारीरिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। विटामिन ए आँखों के लिए, विटामिन बी मस्तिष्क और तंत्रिकाओं के लिए, विटामिन सी मसूड़ों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए, तथा विटामिन डी हड्डियों के लिए आवश्यक है। विटामिन ए का प्रमुख स्रोत गाजर, पपीता, आम और मछली है, विटामिन बी का स्रोत अनाज और दालें हैं, विटामिन सी का स्रोत आँवला, नींबू, संतरा और अमरूद है, तथा विटामिन डी का स्रोत सूर्य का प्रकाश और अंडा है।
खनिज लवण भी शरीर के लिए आवश्यक हैं। कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों तथा दाँतों को मजबूत बनाते हैं, जो दूध, पनीर और हरी सब्जियों से मिलते हैं। लोहा रक्त में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आवश्यक है और यह पालक, चुकंदर, मांस और अंडे में पाया जाता है। आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के सही कार्य के लिए आवश्यक है, जो नमक और समुद्री खाद्य पदार्थों से मिलता है। रूक्षांश या रेशे पाचन में सहायता करते हैं और हरी सब्जियों तथा फलों से प्राप्त होते हैं।
संतुलित आहार वह भोजन है जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण और रूक्षांश सभी उचित मात्रा में मौजूद हों। काम करने वाले व्यक्तियों को कार्बोहाइड्रेट और वसा की अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है, बढ़ते बच्चों को प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है, जबकि खिलाड़ियों को अधिक ऊर्जा वाला भोजन चाहिए।
किसी पोषक तत्व की कमी से शरीर में विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं। प्रोटीन की कमी से क्वाशियोरकोर रोग होता है, जिसमें बच्चों का पेट फूल जाता है। विटामिन ए की कमी से रतौंधी (रात में दिखाई न देना) होती है। विटामिन बी की कमी से बेरी-बेरी रोग होता है। विटामिन सी की कमी से स्कर्वी रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से खून आता है। विटामिन डी की कमी से रिकेट्स (सूखा रोग) होता है, जिसमें हड्डियाँ कमजोर और टेढ़ी हो जाती हैं। विटामिन के की कमी से रक्त का थक्का नहीं जमता। आयोडीन की कमी से घेंघा रोग होता है। लोहे की कमी से एनीमिया (खून की कमी) होता है।
जल भोजन का एक अनिवार्य घटक है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, पाचन में सहायता करता है और शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। जल के बिना हम कुछ दिन ही जीवित रह सकते हैं। इसी प्रकार रूक्षांश (आहारी रेशे) भोजन के अबोध्य भाग होते हैं, जो पाचन तंत्र को साफ रखने और कब्ज को दूर करने में सहायता करते हैं। रूक्षांश हरी सब्जियों, फलों, साबुत अनाज और दालों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
| पोषक तत्व | मुख्य स्रोत | कार्य |
|---|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट | चावल, गेहूँ, आलू, गुड़, शहद | शरीर को ऊर्जा प्रदान करना |
| प्रोटीन | दालें, दूध, अंडा, मांस, सोयाबीन | शरीर की वृद्धि और मरम्मत |
| वसा | घी, मक्खन, तेल, मूंगफली | ऊर्जा का संचित भंडार बनाना |
| विटामिन ए | गाजर, आम, पपीता, मछली | आँखों की रोशनी के लिए |
| विटामिन सी | आँवला, नींबू, संतरा | रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना |
| विटामिन डी | सूर्य का प्रकाश, अंडा | हड्डियों को मजबूत बनाना |
| कैल्शियम | दूध, पनीर, हरी सब्जियाँ | हड्डियों और दाँतों का निर्माण |
| लोहा | पालक, चुकंदर, अंडा | हीमोग्लोबिन बनाना |
| रोग | किस पोषक तत्व की कमी | मुख्य लक्षण |
|---|---|---|
| क्वाशियोरकोर | प्रोटीन | पेट फूलना, बालों का झड़ना |
| रतौंधी | विटामिन ए | रात में दिखाई न देना |
| बेरी-बेरी | विटामिन बी | थकान, तंत्रिका कमजोरी |
| स्कर्वी | विटामिन सी | मसूड़ों से खून आना |
| रिकेट्स (सूखा रोग) | विटामिन डी | हड्डियाँ टेढ़ी होना |
| घेंघा | आयोडीन | गले में सूजन |
| एनीमिया | लोहा | खून की कमी, कमजोरी |
भोजन के प्रमुख घटक कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण, जल और रूक्षांश हैं। कार्बोहाइड्रेट और वसा ऊर्जा देते हैं, प्रोटीन वृद्धि और मरम्मत करते हैं, जबकि विटामिन और खनिज रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। किसी भी पोषक तत्व की कमी से क्वाशियोरकोर, रतौंधी, स्कर्वी, रिकेट्स, घेंघा जैसे रोग होते हैं। इसलिए हमें संतुलित आहार लेना चाहिए और अपनी थाली में सभी प्रकार के भोजन को शामिल करना चाहिए। खाने-पीने की अच्छी आदतें और स्वच्छ भोजन ही एक स्वस्थ शरीर की नींव हैं।