भोजन वह पदार्थ है जिसे खाकर हमें ऊर्जा प्राप्त होती है और जो हमारे शरीर की वृद्धि एवं मरम्मत में सहायक होता है। सभी सजीवों को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। मनुष्य, जानवर, पक्षी, कीड़े-मकोड़े, और पेड़-पौधे सभी अपने जीवन को बनाए रखने के लिए भोजन पर निर्भर रहते हैं। भोजन के बिना कोई भी सजीव लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता।
भोजन न केवल हमें भूख से बचाता है, बल्कि यह शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति भी देता है। सही मात्रा में संतुलित भोजन खाने से शरीर स्वस्थ और तंदुरुस्त रहता है। हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो विभिन्न प्रकार के भोजन से प्राप्त होते हैं। इसी कारण हमें अपने दैनिक आहार में विविधता रखनी चाहिए।
यह अध्याय हमें बताता है कि हमारा भोजन किन स्रोतों से आता है, कौन से जीव किस प्रकार का भोजन ग्रहण करते हैं, और भोजन के उत्पादन में कौन-कौन लोग योगदान देते हैं। हम यह भी सीखेंगे कि पौधे और जंतु हमारे भोजन के मुख्य स्रोत कैसे हैं और कच्चे व पके भोजन में क्या अंतर है।
हमारे शरीर को भोजन की आवश्यकता कई कारणों से होती है। सबसे पहले, भोजन हमें ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे हम दौड़ सकते हैं, खेल सकते हैं, पढ़ सकते हैं और सभी दैनिक क्रियाएं कर सकते हैं। दूसरे, भोजन शरीर की वृद्धि के लिए आवश्यक है, क्योंकि बचपन से वयस्क होने तक शरीर में लगातार वृद्धि होती रहती है। तीसरे, भोजन से प्राप्त पोषक तत्व घाव भरने, हड्डियों को मजबूत करने और मांसपेशियों की मरम्मत में सहायता करते हैं। चौथे, भोजन हमें रोगों से बचाता है, क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन और खनिज हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
हमारे भोजन के मुख्य स्रोत दो हैं: पौधे और जंतु।
पौधों से हमें अनेक प्रकार का भोजन मिलता है। पौधे के विभिन्न भागों से विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं। गेहूँ, चावल, मक्का और बाजरा अनाज हैं, जो पौधों के बीज हैं। दालें, जैसे मूंग, चना, मसूर और अरहर, भी बीज हैं। फल जैसे आम, केला, सेब और संतरा पौधों के खाद्य भाग हैं, जबकि सब्जियाँ जैसे आलू, गाजर, पालक और फूलगोभी विभिन्न पौधों के अलग-अलग भागों से प्राप्त होती हैं। मसालों जैसे हल्दी, जीरा, धनिया और मिर्च का उपयोग भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। चाय, कॉफी, चीनी और शहद जैसे पदार्थ भी पौधों से ही प्राप्त होते हैं। पौधों से प्राप्त भोजन को वनस्पति भोजन या शाकाहारी भोजन कहा जाता है।
जंतुओं से भी हमें अनेक प्रकार का भोजन मिलता है। गाय, भैंस और बकरी के दूध से हमें दूध, दही, पनीर, घी और मक्खन मिलता है। अंडे, मांस, मछली, चिकन और झींगा जैसे खाद्य पदार्थ जंतुओं से प्राप्त होते हैं। जंतुओं से प्राप्त भोजन को पशु भोजन या मांसाहारी भोजन कहा जाता है। शहद भी जंतुओं (मधुमक्खियों) द्वारा बनाया जाता है, जिसे हम भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं।
कुछ खाद्य पदार्थ कच्चे खाए जा सकते हैं, जैसे फल, सलाद, गाजर और मूली। लेकिन कुछ खाद्य पदार्थों को कच्चा खाना हानिकारक हो सकता है, इसलिए उन्हें पकाकर खाना चाहिए। आलू, चावल, दाल, सब्जियाँ और मांस को पकाकर खाया जाता है। पकाने से भोजन पचाने में आसान हो जाता है, उसका स्वाद बढ़ जाता है, और उसमें मौजूद हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि हमें खाना पकाकर खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि कुछ पदार्थ कच्चे अवस्था में पचते नहीं हैं।
जंतुओं को उनके भोजन के आधार पर तीन श्रेणियों में बाँटा गया है। जो जंतु केवल पौधों का भोजन (घास, पत्ते, फल, अनाज) खाते हैं, उन्हें शाकाहारी कहते हैं, जैसे गाय, बकरी, हिरण, खरगोश और भैंस। जो जंतु अन्य जंतुओं का मांस खाते हैं, उन्हें मांसाहारी कहते हैं, जैसे शेर, बाघ, भेड़िया और लोमड़ी। जो जंतु पौधों और जंतुओं दोनों का भोजन ग्रहण करते हैं, उन्हें सर्वाहारी कहते हैं। मनुष्य, कौआ, चूहा और भालू सर्वाहारी जंतुओं के उदाहरण हैं।
सजीवों के बीच भोजन संबंधी संबंध को भोजन श्रृंखला कहते हैं। इसमें हर जीव अपने से पहले वाले जीव को खाता है। उदाहरण के लिए, घास खरगोश का भोजन है, खरगोश बाज का भोजन है, और बाज का कोई शिकारी खाता है। इस प्रकार घास से खरगोश तक और खरगोश से बाज तक भोजन का संबंध बनता है, जिसे भोजन श्रृंखला कहते हैं। भोजन श्रृंखला की शुरुआत हमेशा हरे पौधों से होती है, क्योंकि हरे पौधे ही सूर्य के प्रकाश की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इस प्रकार, पौधे सभी सजीवों के भोजन का आधार हैं।
हम जो भोजन खाते हैं, उसे तैयार करने में कई लोगों का योगदान होता है। किसान खेतों में अनाज, सब्जियाँ और फल उगाते हैं। मजदूर कटाई और कटाई के बाद की क्रियाओं में मदद करते हैं। दूधवाले दूध लाते हैं, मछुआरे मछली पकड़ते हैं, और पशुपालक जंतुओं को पालते हैं। इसके अलावा ढोने वाले, दुकानदार, परिवहन करने वाले और कुक कई प्रकार से योगदान देते हैं। इस प्रकार भोजन के उत्पादन, परिवहन और वितरण में बहुत से लोगों का योगदान शामिल है।
| खाद्य पदार्थ | पौधे से / जंतु से | पौधे का कौन सा भाग |
|---|---|---|
| गेहूँ, चावल, मक्का | पौधे | बीज |
| मूंग, चना, अरहर | पौधे | बीज (दालें) |
| आम, केला, सेब | पौधे | फल |
| आलू, गाजर, शलजम | पौधे | जड़ / कंद |
| पालक, मेथी | पौधे | पत्तियाँ |
| फूलगोभी, ब्रोकली | पौधे | पुष्प (फूल) |
| दूध, दही, पनीर | जंतु (गाय, भैंस, बकरी) | पशु उत्पाद |
| अंडा, मांस, मछली | जंतु | पशु उत्पाद |
| शहद | जंतु (मधुमक्खी) | कीट उत्पाद |
| श्रेणी | आहार | उदाहरण |
|---|---|---|
| शाकाहारी | केवल पौधों का भोजन | गाय, बकरी, हिरण, हाथी, खरगोश |
| मांसाहारी | अन्य जंतुओं का मांस | शेर, बाघ, भेड़िया, बाज |
| सर्वाहारी | पौधे और जंतु दोनों | मनुष्य, कौआ, चूहा, भालू |
भोजन सभी सजीवों के जीवन का आधार है। हमारा भोजन मुख्यतः पौधों और जंतुओं से प्राप्त होता है। पौधों से हमें अनाज, दालें, फल, सब्जियाँ और मसाले मिलते हैं, जबकि जंतुओं से दूध, अंडा, मांस और मछली मिलती है। जंतु अपने आहार के आधार पर शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी होते हैं। भोजन श्रृंखला की शुरुआत हरे पौधों से होती है, इसलिए पौधे संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। हमें अपने भोजन की उत्पत्ति को समझना चाहिए और भोजन उपलब्ध कराने वाले किसानों, पशुपालकों और अन्य श्रमिकों के योगदान का सम्मान करना चाहिए। भोजन की बर्बादी न करना और संतुलित आहार लेना ही एक स्वस्थ जीवन की कुंजी है।