हम अपने चारों ओर अनेक प्रकार के परिवर्तन देखते हैं। बर्फ पिघलकर पानी बन जाती है, पानी गर्म करने पर भाप बन जाता है, कागज जलकर राख हो जाता है, दूध खट्टा हो जाता है, और सिक्का जंग लगने पर काला या हरा हो जाता है। ये सभी परिवर्तन हैं। कुछ परिवर्तन बहुत तेजी से होते हैं, जैसे फटाखा फूटना, जबकि कुछ बहुत धीरे, जैसे पहाड़ों का अपरदन।
परिवर्तन किसी वस्तु या पदार्थ के रूप, आकार, अवस्था, रंग या गुण में होने वाला बदलाव है। हर परिवर्तन का कोई न कोई कारण होता है, जैसे गर्मी, ठंड, दबाव, नमी या रासायनिक क्रिया। परिवर्तनों का अध्ययन हमें बताता है कि पदार्थ कैसे व्यवहार करते हैं और प्रकृति में किस प्रकार की प्रक्रियाएँ घटित होती हैं।
परिवर्तनों को हम मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँट सकते हैं: भौतिक परिवर्तन और रासायनिक परिवर्तन। भौतिक परिवर्तन में केवल पदार्थ का रूप या अवस्था बदलती है, जबकि रासायनिक परिवर्तन में एक नया पदार्थ बनता है। इस अध्याय में हम इन दोनों प्रकार के परिवर्तनों को उदाहरण सहित समझेंगे।
भौतिक परिवर्तन वह परिवर्तन है जिसमें पदार्थ के केवल भौतिक गुण जैसे आकार, आकृति, अवस्था या रंग में परिवर्तन होता है, लेकिन कोई नया पदार्थ नहीं बनता है। भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का रासायनिक संघटन नहीं बदलता और इस परिवर्तन को अधिकांशतः उलटा (पुनः) किया जा सकता है।
बर्फ का पिघलकर पानी बनना भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है। बर्फ को पिघलाने से पानी मिलता है, और पानी को फिर जमाकर बर्फ बनाई जा सकती है। इसी प्रकार, जल का भाप बनना, भाप का संघनित होकर जल बनना, कागज का टुकड़े-टुकड़े होना, काँच का टूटना, और मोमबत्ती का जलकर पिघलना भौतिक परिवर्तन हैं। इनमें से कोई भी परिवर्तन कोई नया पदार्थ नहीं बनाता।
मोमबत्ती का जलना भौतिक और रासायनिक दोनों प्रकार का परिवर्तन माना जाता है। मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन है, क्योंकि पिघला मोम फिर जम सकता है, लेकिन मोम का जलकर राख और गैसों में बदलना रासायनिक परिवर्तन है, क्योंकि इसमें नए पदार्थ बनते हैं।
रासायनिक परिवर्तन वह परिवर्तन है जिसमें एक या एक से अधिक नए पदार्थों का निर्माण होता है। इसमें पदार्थों का रासायनिक संघटन बदल जाता है और इस परिवर्तन को सामान्य विधियों से उलटा नहीं किया जा सकता। रासायनिक परिवर्तन को रासायनिक अभिक्रिया भी कहते हैं।
कागज या लकड़ी का जलना रासायनिक परिवर्तन है, क्योंकि जलने पर राख और गैसें बनती हैं, जिनसे मूल पदार्थ वापस नहीं मिलता। दूध का खट्टा होकर दही बनना, लोहे का जंग लगना, खाना पकाना, फलों का पकना, दूध से पनीर बनना, और सोडा में नींबू का रस मिलाने पर बुलबुले निकलना रासायनिक परिवर्तनों के उदाहरण हैं।
रासायनिक परिवर्तन में कुछ संकेत दिखाई देते हैं, जैसे रंग में परिवर्तन, गैस का निकलना, गर्मी या प्रकाश का उत्पन्न होना, गंध का बनना, या अवक्षेप (तलछट) का बनना। इन संकेतों से हम पहचान सकते हैं कि रासायनिक परिवर्तन हुआ है या नहीं।
भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का केवल रूप बदलता है और कोई नया पदार्थ नहीं बनता, जबकि रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है। भौतिक परिवर्तन प्रायः उत्क्रमणीय (वापस बदलने योग्य) होता है, जबकि रासायनिक परिवर्तन प्रायः अनुत्क्रमणीय होता है। भौतिक परिवर्तन में पदार्थ के भौतिक गुण जैसे अवस्था और आकार बदलते हैं, जबकि रासायनिक परिवर्तन में पदार्थ का संघटन बदलता है।
उदाहरण के लिए, पानी को उबालने पर वह भाप बन जाता है (भौतिक परिवर्तन), लेकिन जब हम भाप को ठंडा करते हैं तो वह वापस पानी बन जाता है। जबकि दूध को खट्टा करने पर बना दही फिर कभी दूध नहीं बन सकता, इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है। इसी प्रकार, जल का जमना भौतिक परिवर्तन है, लेकिन लोहे का जंग लगना रासायनिक परिवर्तन है।
परिवर्तन हमारे दैनिक जीवन में हर जगह घटित होते हैं। आटे को गूंथना, रोटी बनाना, सब्जी पकाना, कपड़े सुखाना, मिट्टी के बर्तन बनाना और उन्हें पकाना, लोहे को गर्म करके मोड़ना, और कपड़े की सिलाई ये सभी परिवर्तन हैं। कुछ परिवर्तन वांछनीय होते हैं, जैसे भोजन पकाना, और कुछ अवांछनीय, जैसे फलों का सड़ना।
रबर बैंड को खींचकर लंबा करना और छोड़ते ही उसका वापस अपनी अवस्था में आना एक परिवर्तन है, जिसे उत्क्रमणीय परिवर्तन कहते हैं। लेकिन जब रबर बैंड टूट जाता है, तो वह परिवर्तन अनुत्क्रमणीय हो जाता है। इस प्रकार परिवर्तनों को उत्क्रमणीय (वापस होने वाले) और अनुत्क्रमणीय (वापस न होने वाले) में भी बाँटा जा सकता है।
| परिवर्तन | प्रकार | कारण |
|---|---|---|
| बर्फ का पिघलना | भौतिक | गर्मी |
| जल का भाप बनना | भौतिक | गर्मी |
| कागज का जलना | रासायनिक | अग्नि (दहन) |
| दूध का दही बनना | रासायनिक | जीवाणु / अम्ल |
| लोहे का जंग लगना | रासायनिक | नमी और वायु |
| काँच का टूटना | भौतिक | आघात |
| फलों का पकना | रासायनिक | पकने की प्रक्रिया |
| मोम का पिघलना | भौतिक | गर्मी |
| मोम का जलना | रासायनिक | दहन |
| लक्षण | भौतिक परिवर्तन | रासायनिक परिवर्तन |
|---|---|---|
| नए पदार्थ का निर्माण | नहीं होता | होता है |
| संघटन में परिवर्तन | नहीं | होता है |
| उत्क्रमणीयता | प्रायः उत्क्रमणीय | प्रायः अनुत्क्रमणीय |
| ऊर्जा परिवर्तन | कम या कोई नहीं | गर्मी/प्रकाश उत्पन्न या अवशोषित |
| उदाहरण | पानी जमना, बर्फ पिघलना | दही बनना, जंग लगना |
हमारे चारों ओर सतत परिवर्तन होते रहते हैं। परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं: भौतिक परिवर्तन, जिसमें पदार्थ का केवल रूप बदलता है और कोई नया पदार्थ नहीं बनता, तथा रासायनिक परिवर्तन, जिसमें एक नया पदार्थ बनता है। भौतिक परिवर्तन प्रायः उत्क्रमणीय होते हैं, जबकि रासायनिक परिवर्तन प्रायः अनुत्क्रमणीय होते हैं। बर्फ पिघलना, पानी का भाप बनना, काँच टूटना भौतिक परिवर्तन हैं, जबकि कागज जलना, दूध का दही बनना और लोहे का जंग लगना रासायनिक परिवर्तन हैं। परिवर्तनों का सही ज्ञान हमें प्रकृति की प्रक्रियाओं को समझने में मदद करता है और यह विज्ञान की नींव है।