हमारे दैनिक जीवन में अनेक प्रकार का कचरा (अपशिष्ट) उत्पन्न होता है। रसोई के बचे भोजन, सब्जियों के छिलके, कागज, प्लास्टिक, काँच, धातु, कपड़े और बैटरियाँ कचरे के उदाहरण हैं। कचरा वह पदार्थ है जिसकी अब हमें आवश्यकता नहीं रहती और हम उसे फेंक देते हैं। कचरे का सही ढंग से संग्रहण और निपटान न होने पर वह पर्यावरण को प्रदूषित करता है।
कचरे की समस्या शहरों और गाँवों दोनों में गंभीर होती जा रही है। प्लास्टिक जैसे अविनाशी पदार्थों के कारण यह समस्या और बढ़ गई है। कचरे के गलत निपटान से भूमि, जल और वायु प्रदूषित होते हैं तथा बीमारियाँ फैलती हैं। इसलिए कचरे का उचित वर्गीकरण, संग्रहण और निपटान आवश्यक है।
इस अध्याय में हम कचरे के प्रकार, कचरे का संग्रहण, कचरे के निपटान की विधियाँ, 3-R नियम (कम करो, पुन: उपयोग करो, पुनर्चक्रण करो) और कचरे से उत्पन्न समस्याओं के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
कचरे को मुख्यतः दो प्रकारों में बाँटा जाता है:
जैविक (सड़ने वाला) कचरा: यह कचरा समय के साथ विघटित हो जाता है। इसे सड़ने योग्य या जैव अपघटनीय कचरा कहते हैं। रसोई का बचा भोजन, सब्जियों और फलों के छिलके, पत्तियाँ, घास और लकड़ी जैविक कचरा है। यह मिट्टी में खाद के रूप में बदल सकता है।
अजैविक (न सड़ने वाला) कचरा: यह कचरा आसानी से विघटित नहीं होता। इसे न सड़ने योग्य या अजैव अपघटनीय कचरा कहते हैं। प्लास्टिक, काँच, धातु, रबर, बैटरी और पॉलिथीन इसके उदाहरण हैं। यह कचरा सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में रहता है और प्रदूषण फैलाता है।
कचरे का वर्गीकरण करके सड़ने योग्य और न सड़ने योग्य कचरे को अलग-अलग डिब्बों में रखने से उसका निपटान आसान हो जाता है।
कचरे को नियमित रूप से एकत्र करना उसके निपटान की पहली सीढ़ी है। शहरों में नगर निगम या नगर पालिका घर-घर से कचरा एकत्र करती है। घरों में हमें सड़ने योग्य और न सड़ने योग्य कचरे को अलग-अलग कूड़ेदान में रखना चाहिए। गीले (जैविक) कचरे को हरे डिब्बे में और सूखे (अजैविक) कचरे को नीले या अलग डिब्बे में रखने की व्यवस्था होती है। कचरे के डिब्बे साफ रखने चाहिए ताकि मक्खियाँ, मच्छर और चूहे न पनपें।
कचरा इकट्ठा करने वाले कूड़ादान, कूड़े का ढेर और डस्टबिन साफ-सुथरे होने चाहिए। कचरे को खुले में नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि ढके हुए कूड़ेदान में डालना चाहिए।
कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए निम्नलिखित विधियाँ अपनाई जाती हैं:
लैंडफिल (भूमि भराव): शहर के बाहर बड़े गड्ढों में कचरे को जमा करके उसे मिट्टी से ढक दिया जाता है। इस विधि को लैंडफिल कहते हैं। इसमें कचरा धीरे-धीरे विघटित होता है। आधुनिक लैंडफिल में कचरे की परत को मिट्टी की परत से ढका जाता है।
खाद बनाना (कम्पोस्टिंग): जैविक (सड़ने वाले) कचरे को गड्ढे में डालकर उसे मिट्टी और पानी के साथ मिलाकर खाद बनाई जाती है। सूक्ष्मजीव इस कचरे को विघटित करके खाद बना देते हैं। यह खाद खेतों के लिए उपजाऊ होती है। किचन गार्डन में भी घर के जैविक कचरे से खाद बनाई जा सकती है।
जलाना (Incineration): कुछ कचरे, विशेषकर अस्पतालों के कचरे को विशेष भट्टियों में जलाया जाता है। इसे भस्मीकरण कहते हैं। जलाने से कचरे की मात्रा घट जाती है, लेकिन इससे वायु प्रदूषण होता है, इसलिए यह सबसे उत्तम विधि नहीं है।
पुनर्चक्रण (Recycling): काँच, प्लास्टिक, धातु और कागज जैसे न सड़ने वाले कचरे को एकत्र करके उसे नए उत्पादों में बदला जाता है। इस प्रक्रिया को पुनर्चक्रण कहते हैं। पुराने कागज से नया कागज, पुराने काँच से नया काँच और पुराने प्लास्टिक से नया प्लास्टिक बनता है।
कचरे की समस्या को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने 3-R नियम बताया है:
Reduce (कम करो): कचरा पैदा होने से पहले उसे कम करना चाहिए। कम खरीदें, कम उपयोग करें। पैकेजिंग वाली वस्तुएँ कम लें।
Reuse (पुन: उपयोग करो): वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनका दोबारा उपयोग करें। जैसे पुराने जार को घर में भंडारण के लिए, पुराने कागज को नोट बनाने के लिए, और कपड़े के थैले का बार-बार उपयोग करें।
Recycle (पुनर्चक्रण करो): जिन वस्तुओं का उपयोग नहीं हो सकता, उन्हें पुनर्चक्रण के लिए भेजें, ताकि उनसे नई वस्तुएँ बन सकें।
कचरे का गलत निपटान कई समस्याएँ पैदा करता है:
कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए हम घर से ही सही आदतें अपना सकते हैं:
| जैविक (सड़ने वाला) कचरा | अजैविक (न सड़ने वाला) कचरा |
|---|---|
| सब्जियों के छिलके | प्लास्टिक |
| बचा भोजन | काँच |
| फलों के छिलके | धातु |
| पत्तियाँ और घास | पॉलिथीन |
| लकड़ी | रबर, बैटरी |
| विधि | विवरण | उदाहरण / उपयोग |
|---|---|---|
| लैंडफिल | गड्ढे में कचरा दबाना | शहर का कचरा |
| कम्पोस्टिंग | जैविक कचरे से खाद | किचन गार्डन |
| भस्मीकरण | विशेष भट्टी में जलाना | अस्पताल का कचरा |
| पुनर्चक्रण | नए उत्पाद बनाना | कागज, काँच, धातु |
कचरा हमारे दैनिक जीवन का अनिवार्य भाग है, लेकिन इसका सही प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। कचरा जैविक (सड़ने वाला) और अजैविक (न सड़ने वाला) दो प्रकार का होता है। कचरे के संग्रहण के लिए अलग-अलग डिब्बों का उपयोग करना चाहिए। निपटान की विधियों में लैंडफिल, कम्पोस्टिंग, भस्मीकरण और पुनर्चक्रण शामिल हैं। 3-R नियम - कम करो, पुन: उपयोग करो और पुनर्चक्रण करो - कचरे की समस्या का स्थायी समाधान है। सही कचरा प्रबंधन न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखता है, बल्कि बीमारियों से भी बचाता है। स्वच्छ परिवेश ही स्वस्थ जीवन का आधार है।