हमारे दैनिक जीवन में अनेक पदार्थ मिश्रण के रूप में मिलते हैं। दूध, चाय, नमकीन पानी, मिट्टी में मिला भूसा, चावल में मिली पत्थर के टुकड़े, तेल में पानी या पानी में मिली धूल - ये सभी मिश्रण के उदाहरण हैं। इन मिश्रणों से हमें अक्सर एक शुद्ध पदार्थ अलग करने की आवश्यकता होती है। मिश्रण से किसी एक पदार्थ को अलग करने की प्रक्रिया को पृथक्करण (Separation) कहते हैं।
पृथक्करण की विधि का चुनाव मिश्रण के घटकों के गुणों पर निर्भर करता है। क्या हमें ठोस को ठोस से अलग करना है, ठोस को द्रव से अलग करना है, द्रव को द्रव से अलग करना है, या गैस को द्रव से? प्रत्येक स्थिति में अलग-अलग विधियाँ अपनाई जाती हैं। इन विधियों को समझने के लिए हमें घटकों के आकार, घनत्व, घुलनशीलता और अन्य गुणों का ज्ञान होना चाहिए।
इस अध्याय में हम विभिन्न पृथक्करण विधियों का अध्ययन करेंगे, जिनमें हाथ से चुनना, थ्रेसिंग, विंडोइंग, छानना, चालनी (छलनी), अवसादन, निस्तारण, निस्पंदन (छानना), वाष्पीकरण और आसवन प्रमुख हैं। इन विधियों का उपयोग घर, किसानों, अस्पतालों और उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है।
जब दो या दो से अधिक पदार्थ किसी निश्चित अनुपात में मिलकर एक साथ मौजूद होते हैं, तो उसे मिश्रण कहते हैं। मिश्रण के घटक अपने गुण बरकरार रखते हैं और उन्हें भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है। मिश्रण दो प्रकार के होते हैं: समांगी मिश्रण, जिसमें घटक समान रूप से मिले होते हैं (जैसे नमक का पानी), और विषमांगी मिश्रण, जिसमें घटक अलग-अलग दिखते हैं (जैसे रेत और चीनी)।
मिश्रण के घटकों को अलग करने की आवश्यकता कई कारणों से होती है। कभी हमें दूषित पदार्थ को निकालना होता है, जैसे दाल से पत्थर। कभी हमें उपयोगी घटक प्राप्त करना होता है, जैसे गन्ने से चीनी। कभी हमें पदार्थ को शुद्ध करना होता है, जैसे दूध से क्रीम अलग करना। इस प्रकार पृथक्करण की विधियाँ हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
जब मिश्रण में दो ठोस पदार्थ होते हैं, तो उन्हें निम्नलिखित विधियों से अलग किया जाता है:
हाथ से चुनना (Handpicking): जब मिश्रण के घटक आकार में बड़े हों और उनमें अंतर स्पष्ट हो, तो हाथ से चुनकर अलग किया जा सकता है। जैसे दाल से पत्थर के टुकड़े, चावल से भूसा और आटे से मोटे कण।
थ्रेसिंग (दाँवना): खेती में अनाज को भूसे से अलग करने के लिए कटे हुए पौधों को पीटा जाता है, जिससे दाने अलग हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को थ्रेसिंग कहते हैं।
विंडोइंग (ओसाई): थ्रेसिंग के बाद मिश्रण को ऊँचाई से हवा की ओर फेंका जाता है। हल्का भूसा हवा से उड़ जाता है और भारी अनाज नीचे गिर जाता है। इस विधि को विंडोइंग कहते हैं।
चालनी से छानना (Sieving): जब मिश्रण के घटकों के कणों का आकार अलग-अलग होता है, तो छलनी (चालनी) का उपयोग किया जाता है। आटे से चोकर, बजरी से रेत और चावल से चोकर अलग करने के लिए छानना विधि का उपयोग होता है। छोटे कण छलनी के छिद्रों से गिर जाते हैं और बड़े कण ऊपर रह जाते हैं।
ठोस और द्रव के मिश्रण को अलग करने की मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:
अवसादन (Sedimentation) और निस्तारण (Decantation): जब मिश्रण में मौजूद ठोस कण भारी होते हैं और द्रव में नहीं घुलते, तो उन्हें कुछ समय तक शांत रखने पर वे तल पर बैठ जाते हैं। इसे अवसादन कहते हैं। इसके बाद ऊपर का साफ द्रव धीरे-धीरे झुकाकर दूसरे बर्तन में उड़ेल दिया जाता है, जिसे निस्तारण कहते हैं। गंदे पानी से गाद निकालना इसका उदाहरण है।
निस्पंदन (Filtration): जब ठोस कण बहुत सूक्ष्म हों, तो उन्हें फिल्टर पेपर से अलग किया जाता है। द्रव छिद्रों से गुजर जाता है, जबकि ठोस कण फिल्टर पेपर पर रह जाते हैं। पारदर्शी तरल को निस्यंद और बचा हुआ ठोस पदार्थ को तलछट कहते हैं। चाय छानना, पानी को शुद्ध करना और दूध छानना निस्पंदन के उदाहरण हैं।
वाष्पीकरण (Evaporation): जब हमें घुले हुए ठोस को द्रव से अलग करना होता है, तो वाष्पीकरण का उपयोग होता है। मिश्रण को गर्म करने पर द्रव वाष्प बनकर उड़ जाता है और ठोस पीछे रह जाता है। समुद्री जल से नमक प्राप्त करना वाष्पीकरण का सबसे अच्छा उदाहरण है। किसान खेतों में सूरज की गर्मी से भी इसी प्रकार जल वाष्पित करते हैं।
आसवन (Distillation): कभी-कभी हमें द्रव को भी बचाना होता है। तब वाष्पीकरण के बाद वाष्प को ठंडा करके वापस द्रव में बदल दिया जाता है। इस प्रक्रिया को आसवन या ऊर्ध्वपातन-संघनन कहते हैं। इस विधि से गंदे पानी से शुद्ध जल प्राप्त किया जाता है।
जब मिश्रण में दो द्रव होते हैं, जो एक-दूसरे में नहीं घुलते (जैसे तेल और पानी), तो उन्हें अवसादन और निस्तारण से अलग किया जा सकता है। तेल का घनत्व पानी से कम होता है, इसलिए तेल ऊपर तैरता है और पानी नीचे। ऊपर की परत को अलग करके दोनों द्रवों को पृथक किया जाता है। इसके लिए पृथक्करण फनल का भी उपयोग होता है।
जल में घुली गैस को अलग करने के लिए मिश्रण को गर्म किया जाता है। गर्म करने पर गैस वाष्प के रूप में बाहर निकल जाती है। पानी को उबालने पर उसमें घुली ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड गैसें बाहर निकल जाती हैं। कार्बोनेटेड पेय पदार्थों को खोलने पर घुली कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर निकलती है, यह भी गैस-द्रव पृथक्करण का ही उदाहरण है।
जल पृथ्वी का एक अनमोल प्राकृतिक संसाधन है। बारिश, नदियों और तालाबों से पानी मिलता है, लेकिन यह अक्सर गंदा होता है। गंदे पानी में मिट्टी, कीटाणु और अनेक अशुद्धियाँ होती हैं। अवसादन, निस्तारण, निस्पंदन और आसवन द्वारा गंदे पानी को शुद्ध किया जा सकता है। जल को पीने योग्य बनाने के लिए उसे उबालना या जल शोधक का उपयोग करना चाहिए। स्वच्छ जल ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है, इसलिए जल की बचत करना हम सबका कर्तव्य है।
| विधि | किससे किसे अलग करते हैं | उदाहरण |
|---|---|---|
| हाथ से चुनना | ठोस से ठोस | दाल से पत्थर |
| थ्रेसिंग | अनाज से भूसा | खेत में अनाज दाँवना |
| विंडोइंग | अनाज से भूसा | हवा में उछालकर |
| चालनी (छानना) | बड़े कण से छोटे कण | आटे से चोकर |
| अवसादन | ठोस को द्रव के तल | गंदे पानी से गाद |
| निस्तारण | तलछट से साफ द्रव | तल पर बैठे कण से पानी |
| निस्पंदन | सूक्ष्म ठोस को द्रव से | चाय छानना |
| वाष्पीकरण | घुला ठोस द्रव से | समुद्री जल से नमक |
| आसवन | द्रव को बचाकर अलग करना | गंदे पानी से शुद्ध जल |
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| शुद्ध पदार्थ | एक ही प्रकार के कणों से बना | शुद्ध जल, शुद्ध चीनी, सोना |
| समांगी मिश्रण | घटक समान रूप से मिले | नमक का पानी, चीनी का घोल |
| विषमांगी मिश्रण | घटक अलग-अलग दिखते हैं | रेत और चीनी, दाल और पत्थर |
मिश्रण से घटकों को अलग करने की प्रक्रिया को पृथक्करण कहते हैं। घटकों के गुणों के अनुसार हाथ से चुनना, थ्रेसिंग, विंडोइंग, चालनी, अवसादन, निस्तारण, निस्पंदन, वाष्पीकरण और आसवन जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। ये विधियाँ न केवल घर में बल्कि खेती, उद्योग और विज्ञान प्रयोगशालाओं में भी महत्वपूर्ण हैं। जल जैसे प्राकृतिक संसाधन को शुद्ध करने में भी पृथक्करण विधियाँ हमारी सहायता करती हैं। इन विधियों का सही ज्ञान हमें स्वच्छ भोजन, शुद्ध जल और स्वस्थ जीवन प्रदान करता है।