प्रकाश हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। सूर्य का प्रकाश ही हमें दिन में दिखाई देने योग्य बनाता है। जिस वस्तु से प्रकाश निकलता है या जो वस्तु प्रकाश उत्पन्न करती है, उसे प्रकाश स्रोत कहते हैं। सूर्य, तारे, बत्ती, मोमबत्ती, टॉर्च और बल्ब प्रकाश स्रोत हैं। जब प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है, तभी हम वस्तुओं को देख पाते हैं।
प्रकाश एक ऊर्जा है जो सरल रेखा में गमन करता है। प्रकाश की गमन की इस सरल रेखा को किरण कहते हैं। जब हम टॉर्च जलाते हैं, तो प्रकाश सीधी रेखा में आगे बढ़ता है। प्रकाश के सरल रेखीय गमन के कारण ही छायाएँ बनती हैं। जब कोई अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के मार्ग में आती है, तो उसके पीछे प्रकाश न पहुँच पाने के कारण अंधेरा हो जाता है, जिसे छाया कहते हैं।
इस अध्याय में हम प्रकाश के स्रोत, प्रकाश का सरल रेखीय गमन, छाया का निर्माण, और प्रकाश के परावर्तन के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे। हम यह भी जानेंगे कि दर्पण में हमारा प्रतिबिंब कैसे बनता है।
प्रकाश स्रोतों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है:
प्राकृतिक प्रकाश स्रोत: ये प्रकृति में स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं। सूर्य, तारे, जुगनू और बिजली की चमक प्राकृतिक प्रकाश स्रोत हैं। सूर्य पृथ्वी का मुख्य प्राकृतिक प्रकाश स्रोत है।
कृत्रिम प्रकाश स्रोत: ये मनुष्य द्वारा बनाए गए होते हैं। बल्ब, ट्यूबलाइट, मोमबत्ती, तेल का दीपक, टॉर्च और लेजर कृत्रिम प्रकाश स्रोत हैं।
जो वस्तुएँ स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करती हैं, उन्हें प्रकाशमान वस्तुएँ कहते हैं। जो वस्तुएँ प्रकाश उत्सर्जित नहीं करतीं, पर उनपर प्रकाश पड़ने पर दिखती हैं, उन्हें अप्रकाशमान वस्तुएँ कहते हैं। चंद्रमा और पृथ्वी अप्रकाशमान हैं, जो सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके दिखते हैं।
प्रकाश हमेशा सरल रेखा में चलता है। यह कभी भी टेढ़े मार्ग से नहीं चलता। इसका प्रमाण हम एक सरल प्रयोग से प्राप्त कर सकते हैं। तीन कार्डबोर्ड की प्लेटों में एक-एक छेद करके उन्हें सीध में रखने पर प्रकाश उन सबसे होकर गुजरता है। यदि बीच की प्लेट को थोड़ा हिला दिया जाए, तो प्रकाश नहीं गुजरता। इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश सरल रेखा में चलता है।
प्रकाश के सरल रेखीय गमन के कारण ही छायाएँ बनती हैं, किरणें (रश्मियाँ) सूर्य की ओर संकेत करती हैं, और सूर्यग्रहण तथा चंद्रग्रहण होते हैं। प्रकाश की किरणों के सरल रेखा में चलने के कारण ही हमें वस्तुओं का सही आकार और स्थान दिखाई देता है।
छाया वह अंधेरा क्षेत्र है जो किसी अपारदर्शी वस्तु द्वारा प्रकाश को रोके जाने पर उसके पीछे बनता है। छाया बनने के लिए तीन चीजें आवश्यक हैं: प्रकाश स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और परदा (जिस पर छाया पड़ती है)।
छाया की कुछ विशेषताएँ होती हैं: 1. छाया का रंग हमेशा काला या गहरा होता है, चाहे वस्तु का रंग कुछ भी हो। 2. छाया का आकार वस्तु के आकार से बड़ा, बराबर या छोटा हो सकता है, जो प्रकाश स्रोत की दूरी और कोण पर निर्भर करता है। 3. छाया वस्तु की आकृति जैसी हो सकती है, लेकिन वस्तु का विवरण (जैसे चेहरे की विशेषताएँ) छाया में स्पष्ट नहीं होता। 4. छाया स्वयं प्रकाश नहीं बनाती, यह केवल प्रकाश की अनुपस्थिति है। 5. पारदर्शी वस्तुओं की छाया नहीं बनती, क्योंकि उनमें से प्रकाश गुजर जाता है। अपारदर्शी वस्तुओं की स्पष्ट छाया बनती है। पारभासी वस्तुओं की धुंधली छाया बनती है।
प्रकाश स्रोत वस्तु के जितना करीब होता है, छाया उतनी बड़ी बनती है, और प्रकाश स्रोत दूर होने पर छाया छोटी होती है।
जब प्रकाश की किरणें किसी चिकनी चमकदार सतह (जैसे दर्पण) पर पड़ती हैं, तो वे वापस लौट जाती हैं। प्रकाश का वापस लौटना परावर्तन कहलाता है। परावर्तन के कारण ही हम दर्पण में अपना प्रतिबिंब देख पाते हैं।
दर्पण के कुछ नियम और विशेषताएँ हैं:
परावर्तन का उपयोग चमकदार सतहों, वाहनों के पीछे देखने वाले दर्पण, परिष्कृत यंत्रों और दूरबीनों में होता है।
प्रकाश के बिना जीवन संभव नहीं है। पौधे प्रकाश से अपना भोजन बनाते हैं। हमारे दैनिक कार्यों के लिए प्रकाश आवश्यक है। छाया से हमें दिन-रात का पता चलता है। छाया के अध्ययन से हम समय का अनुमान लगा सकते हैं। धूप घड़ी (सूर्य घड़ी) छाया के सिद्धांत पर आधारित होती है। वाहनों के पीछे के दर्पण, चश्मा, कैमरा और परावर्तक सभी प्रकाश के गुणों पर आधारित हैं।
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राकृतिक स्रोत | प्रकृति में स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं | सूर्य, तारे, जुगनू |
| कृत्रिम स्रोत | मनुष्य द्वारा बनाए जाते हैं | बल्ब, मोमबत्ती, टॉर्च |
| प्रकाशमान वस्तु | स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करती है | सूर्य, बल्ब |
| अप्रकाशमान वस्तु | परावर्तन से दिखती है | चंद्रमा, मेज, कुर्सी |
| कारक | आवश्यकता | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रकाश स्रोत | अनिवार्य | सूर्य, टॉर्च |
| वस्तु | अपारदर्शी | पुस्तक, हाथ |
| परदा | अनिवार्य | दीवार, जमीन |
| पारदर्शी वस्तु | छाया नहीं बनती | काँच |
| पारभासी वस्तु | धुंधली छाया | बटर पेपर |
प्रकाश ऊर्जा है जो सरल रेखा में चलती है। प्रकाश के स्रोत प्राकृतिक (सूर्य) और कृत्रिम (बल्ब) होते हैं। प्रकाश के सरल रेखीय गमन के कारण अपारदर्शी वस्तुएँ छाया बनाती हैं। छाया बनने के लिए प्रकाश स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और परदा आवश्यक हैं। चिकनी चमकदार सतहों पर प्रकाश के परावर्तन से दर्पण में प्रतिबिंब बनते हैं। प्रकाश का ज्ञान हमें प्रकाशिक यंत्रों, दर्पणों और छाया की घटनाओं को समझने में सहायता करता है। प्रकाश के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।