हमारे चारों ओर अनेक सजीव प्राणी हैं। पेड़-पौधे, जानवर, पक्षी, कीड़े-मकोड़े और सूक्ष्मजीव सभी सजीव हैं। इसके विपरीत, पत्थर, कुर्सी, मेज, पुस्तक और खिलौने निर्जीव वस्तुएँ हैं। सजीवों और निर्जीवों के बीच का अंतर समझना विज्ञान का आधार है। सजीवों में जन्म, वृद्धि, श्वसन, पोषण, प्रजनन और मृत्यु जैसी विशेषताएँ होती हैं, जबकि निर्जीवों में ये नहीं होतीं।
सजीव जिस स्थान पर रहते हैं, उस स्थान को उनका परिवेश या आवास (Habitat) कहते हैं। प्रत्येक सजीव अपने परिवेश के अनुसार अपने शरीर और व्यवहार में ढल जाता है, इस क्षमता को अनुकूलन कहते हैं। उदाहरण के लिए, ऊँट रेगिस्तान में, मछली पानी में, और भालू ठंडे जंगलों में रहने के लिए अनुकूलित है।
इस अध्याय में हम सजीवों की विशेषताएँ, परिवेश के प्रकार, अनुकूलन के तरीके और सजीवों के आपसी संबंधों के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे। हम जानेंगे कि जीव अपने परिवेश से किस प्रकार प्रभावित होते हैं और उनके संरक्षण की आवश्यकता क्यों है।
सजीवों में निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ होती हैं:
पोषण (Nutrition): सजीव अपने शरीर की वृद्धि और ऊर्जा के लिए भोजन ग्रहण करते हैं। पौधे सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन बनाते हैं, जबकि जंतु पौधों या अन्य जंतुओं से भोजन प्राप्त करते हैं।
श्वसन (Respiration): सभी सजीव श्वसन करते हैं, जिसमें वे वायु से ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। मनुष्य फेफड़ों से, मछली गलफड़ों से और पौधे रंध्रों से श्वसन करते हैं।
गति (Movement): सजीव अपने शरीर के अंगों को हिला सकते हैं। जंतु चलते हैं, दौड़ते हैं या उड़ते हैं, जबकि पौधों में जड़, तना और पत्तियों की वृद्धि के रूप में गति दिखती है।
वृद्धि (Growth): सजीवों के शरीर में वृद्धि होती है। बच्चे बड़े होते हैं, पौधे बढ़ते हैं। वृद्धि जन्म के समय से मृत्यु तक जारी रहती है।
उत्तेजना (Response to Stimuli): सजीव अपने परिवेश में होने वाले परिवर्तनों पर प्रतिक्रिया करते हैं। सूर्य का प्रकाश, गर्मी, ठंड, ध्वनि और स्पर्श उत्तेजनाएँ हैं, जिन पर सजीव प्रतिक्रिया देते हैं।
प्रजनन (Reproduction): सजीव नए सजीव उत्पन्न करते हैं। पौधे बीजों से और जंतु शिशु या अंडों से अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाते हैं।
उत्सर्जन (Excretion): सजीव अपने शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हैं।
किसी सजीव का परिवेश वह स्थान है जहाँ वह रहता है, भोजन प्राप्त करता है, श्वसन करता है और प्रजनन करता है। परिवेश के दो मुख्य प्रकार हैं:
स्थलीय परिवेश (Terrestrial Habitat): यह जमीन पर स्थित परिवेश है। इसमें वन, घास के मैदान, रेगिस्तान, पर्वत और तटीय क्षेत्र शामिल हैं। शेर, हिरण, साँप, ऊँट, बाघ और भालू स्थलीय परिवेश के जीव हैं।
जलीय परिवेश (Aquatic Habitat): यह पानी में स्थित परिवेश है। इसमें नदियाँ, तालाब, झीलें, समुद्र और महासागर शामिल हैं। मछलियाँ, मगरमच्छ, डॉल्फिन, व्हेल, झींगा और शैवाल जलीय परिवेश के जीव हैं।
कुछ जीव अनेक प्रकार के परिवेश में रहते हैं, जैसे मेंढक जल और स्थल दोनों जगह रह सकता है। ऐसे जीवों को उभयचर कहते हैं।
सजीव अपने परिवेश में जीवित रहने के लिए अपने शरीर और व्यवहार में कुछ परिवर्तन करते हैं, इसे अनुकूलन कहते हैं। अनुकूलन के कुछ उदाहरण:
रेगिस्तानी जीवों का अनुकूलन: ऊँट अपने कूबड़ में वसा का भंडार रखता है और लंबे समय तक बिना पानी के रह सकता है। उसके पैर चौड़े होते हैं, जिससे वह गर्म रेत पर नहीं धंसता। उसकी पलकें और नासिका धूल से सुरक्षा करती हैं।
ठंडे क्षेत्रों का अनुकूलन: ध्रुवीय भालू के शरीर पर मोटा रोम और वसा की परत होती है, जो उसे ठंड से बचाती है। उसका सफेद रंग बर्फ में उसे छिपने में सहायक होता है।
जलीय जीवों का अनुकूलन: मछली का चिकना शरीर और पंख पानी में तैरने में सहायक होते हैं। गलफड़ों से वह पानी में घुली ऑक्सीजन ग्रहण करती है।
पौधों का अनुकूलन: कैक्टस की पत्तियाँ काँटों में बदल गई हैं, जिससे जल की हानि कम होती है। इनका तना मोटा होता है जो जल संचय करता है। जलीय पौधों जैसे कमल की पत्तियाँ चौड़ी होती हैं, जो पानी की सतह पर तैरती हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र में सजीव एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। कुछ संबंध भोजन से होते हैं (भोजन श्रृंखला), कुछ सहारे से, और कुछ लाभ से। जीवों के आपसी संबंध के कुछ उदाहरण:
परागण (Pollination): तितलियाँ और मधुमक्खियाँ फूलों से रस चूसती हैं और फूलों के पराग को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाती हैं, जिससे निषेचन होता है।
फल और बीजों का फैलाव: जंतु फल खाते हैं और बीज दूर-दूर फैल जाते हैं, जिससे नए पौधे उगते हैं।
मिट्टी में सुधार: केंचुआ मिट्टी को खोदता है, जिससे मिट्टी में वायु संचार बेहतर होता है और पौधों की जड़ें अच्छी तरह बढ़ती हैं।
सजीव अपने परिवेश पर निर्भर करते हैं। वनों की कटाई, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और शिकार से कई जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। कुछ जीवों को विलुप्त होने का खतरा है, इसलिए हमें प्राकृतिक परिवेश की रक्षा करनी चाहिए। पेड़ लगाना, जल बचाना, वन्यजीवों की रक्षा करना और कचरे का सही निपटान करना पर्यावरण संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं।
| विशेषता | स्पष्टीकरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| पोषण | भोजन ग्रहण करना | पौधे, जंतु |
| श्वसन | ऑक्सीजन लेना, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना | मनुष्य, मछली |
| गति | शरीर का हिलना | जंतु, पौधों की वृद्धि |
| वृद्धि | शरीर का बढ़ना | बच्चे, पौधे |
| प्रजनन | नए सजीव उत्पन्न करना | बीज, शिशु |
| उत्सर्जन | अपशिष्ट बाहर निकालना | पसीना, मल |
| जीव | परिवेश | अनुकूलन |
|---|---|---|
| ऊँट | रेगिस्तान | कूबड़ में वसा, चौड़े पैर |
| ध्रुवीय भालू | ठंडा क्षेत्र | मोटा रोम, वसा की परत |
| मछली | जल | गलफड़े, पंख, चिकना शरीर |
| कैक्टस | रेगिस्तान | काँटे, मोटा जल-संचयी तना |
| कमल | जल | चौड़ी तैरती पत्तियाँ |
सजीवों में पोषण, श्वसन, गति, वृद्धि, प्रजनन, उत्सर्जन और उत्तेजना पर प्रतिक्रिया जैसी विशेषताएँ होती हैं, जो निर्जीवों में नहीं पाई जातीं। सजीव अपने परिवेश (स्थलीय या जलीय) में रहते हैं और जीवित रहने के लिए अनुकूलन करते हैं। ऊँट, ध्रुवीय भालू, मछली और कैक्टस के अनुकूलन से हमें पता चलता है कि प्रकृति ने हर जीव को उसके परिवेश के अनुरूप सजाया है। सजीवों के आपसी संबंध पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं। इसलिए हमें अपने परिवेश की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि परिवेश की रक्षा ही सभी सजीवों की रक्षा है।