भारत की जलवायु विविध प्रकार की है। यहाँ कहीं बहुत गर्मी, कहीं बहुत सर्दी, कहीं अधिक वर्षा और कहीं कम वर्षा होती है। भारत की जलवायु को 'मानसूनी जलवायु' कहा जाता है, क्योंकि मानसूनी हवाएँ भारत की जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। जलवायु के आधार पर ही भारत में विभिन्न प्रकार की वनस्पति और वन्य प्राणी पाए जाते हैं।
इस अध्याय में हम भारत की जलवायु, ऋतुओं, वनस्पति (वन) और वन्य प्राणियों के बारे में अध्ययन करेंगे। हम यह भी जानेंगे कि वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए क्या-क्या उपाय किए गए हैं। जलवायु, वनस्पति और वन्य प्राणी आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
'मौसम' और 'जलवायु' दो अलग अवधारणाएँ हैं। मौसम किसी स्थान का दैनिक या अल्पकालिक वातावरणीय अवस्था है, जो कुछ घंटों या दिनों में बदलती रहती है। जलवायु किसी स्थान का लंबे समय (वर्षों) तक देखा गया मौसम पैटर्न है। किसी स्थान की जलवायु उसके स्थान, ऊँचाई, समुद्र से दूरी और अक्षांश पर निर्भर करती है।
भारत की जलवायु मुख्य रूप से 'मानसूनी जलवायु' है। मानसून वे हवाएँ हैं, जो गर्मी में समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं और वर्षा लाती हैं, तथा सर्दी में स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं। मानसूनी वर्षा भारत की कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में कृषि का अधिकांश भाग मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।
भारत में चार प्रमुख ऋतुएँ पाई जाती हैं:
जलवायु और वर्षा के आधार पर भारत में विभिन्न प्रकार के वन और वनस्पति पाई जाती हैं। वर्षा के आधार पर वनस्पति को कई प्रकारों में बाँटा जा सकता है।
ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है, जैसे पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर भारत। इन वनों में घने, ऊँचे पेड़ और विभिन्न प्रकार के पौधे पाए जाते हैं। यहाँ आबनूस, महोगनी और रबर के पेड़ मिलते हैं।
ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा 70 से 200 सेंटीमीटर के बीच होती है। इन वनों के पेड़ शुष्क ऋतु में अपने पत्ते गिरा देते हैं। सागौन, साल, शीशम आदि इस प्रकार के वनों में मिलते हैं। ये वन भारत में सबसे अधिक फैले हुए हैं।
ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा 70 सेंटीमीटर से कम होती है, जैसे राजस्थान, गुजरात और पंजाब के कुछ भाग। इन वनों में कांटेदार पेड़ और झाड़ियाँ पाई जाती हैं, जैसे बबूल, खेजड़ी आदि।
समुद्र के किनारे मैंग्रोव वन पाए जाते हैं। सुंदरबन (पश्चिम बंगाल) का मैंग्रोव वन विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ बाघ, हिरण आदि पाए जाते हैं। इन वनों के पेड़ों की जड़ें खारे पानी में जीवित रहती हैं।
भारत की विभिन्न जलवायु और वनस्पति के कारण यहाँ विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणी पाए जाते हैं। भारत के वन्य प्राणियों में बाघ, शेर, हाथी, तेंदुआ, गैंडा, हिरण, भालू, बंदर, मोर, तोता आदि शामिल हैं।
वन और वन्य प्राणी प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनकी रक्षा आवश्यक है। वनों की कटाई और शिकार के कारण कई प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं। इनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
भारत में 'राष्ट्रीय उद्यान' (National Parks) और 'अभयारण्य' (Sanctuaries) बनाए गए हैं, जहाँ वन्य प्राणियों को प्राकृतिक वातावरण में संरक्षित किया जाता है। गिर, काजीरंगा, कान्हा, जिम कॉर्बेट, सुंदरबन आदि प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। इसके अलावा वन संरक्षण अधिनियम 1980 और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के द्वारा वनों और जीवों को कानूनी संरक्षण दिया गया है।
| ऋतु | काल | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| ग्रीष्म | मार्च-मई | गर्मी, लू |
| वर्षा | जून-सितंबर | मानसूनी वर्षा |
| शरद | अक्टूबर-नवंबर | संक्रमणकालीन, सुहावना मौसम |
| शीत | दिसंबर-फरवरी | ठंड, उत्तर में बर्फबारी |
| वन का प्रकार | वर्षा | उदाहरण क्षेत्र |
|---|---|---|
| उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन | 200 सेमी से अधिक | पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर |
| पर्णपाती वन | 70-200 सेमी | मध्य भारत |
| कांटेदार वन | 70 सेमी से कम | राजस्थान, गुजरात |
| मैंग्रोव वन | खारा जल | सुंदरबन |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| राष्ट्रीय पशु | बाघ |
| राष्ट्रीय पक्षी | मोर |
| बाघ संरक्षण | प्रोजेक्ट टाइगर |
| वन संरक्षण | वन संरक्षण अधिनियम 1980 |
भारत की मानसूनी जलवायु, विविध वनस्पति और समृद्ध वन्य जीवन इस देश की अद्भुत प्राकृतिक धरोहर हैं। वर्षा वनों से लेकर कांटेदार वनों तक और बाघ से लेकर गैंडे तक - भारत जैव विविधता का खजाना है। परंतु बढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई और शिकार के कारण यह धरोहर खतरे में है। इसलिए वनों और वन्य प्राणियों का संरक्षण आवश्यक है। राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और विभिन्न संरक्षण अधिनियम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे, क्योंकि हमारा जीवन इन्हीं प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है।