शहरों में लोगों की आजीविका के साधन ग्रामीण क्षेत्रों से बहुत अलग होते हैं। शहरों में लोग कारखानों, दफ्तरों, दुकानों, बैंकों, अस्पतालों और स्कूलों में काम करते हैं। कुछ लोग सड़कों पर ठेले लगाकर अपना काम करते हैं, तो कुछ बड़ी कंपनियों में नौकरी करते हैं। शहरों में आजीविका के अनेक अवसर होते हैं।
शहरों में रहने वाले लोगों में अमीर और गरीब दोनों होते हैं। कुछ लोग ऊँची इमारतों में रहते हैं, जबकि कुछ झुग्गियों में। यह अध्याय हमें शहर में आजीविका कमाने के विभिन्न तरीकों और वहाँ के लोगों के जीवन के बारे में बताता है। हम जानेंगे कि सड़क विक्रेता, कारखाने के मज़दूर और सरकारी कर्मचारी अपनी आजीविका कैसे चलाते हैं।
शहरों की सड़कों पर हमें कई विक्रेता मिलते हैं, जो ठेलों, रेहड़ियों और टोकरियों पर सामान बेचते हैं। इन्हें 'सड़क विक्रेता' कहा जाता है। सड़क विक्रेता विभिन्न प्रकार की चीज़ें बेचते हैं - सब्ज़ियाँ, फल, चाय, समोसे, कपड़े, खिलौने आदि। कुछ सड़क विक्रेता स्थिर होते हैं, जबकि कुछ जगह-जगह घूमकर बेचते हैं।
सड़क विक्रेताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनके पास स्थायी स्थान नहीं होता, इसलिए पुलिस या नगर निगम उन्हें हटा सकता है। उन्हें सामान बेचने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है, लेकिन कई विक्रेताओं के पास लाइसेंस नहीं होता। विक्रेताओं की आय अनिश्चित होती है - कुछ दिन अच्छी बिक्री होती है, तो कुछ दिन कुछ नहीं बिकता। सड़क विक्रेताओं को सामान खरीदने के लिए व्यापारियों से ऋण भी लेना पड़ता है।
शहरों में कई कारखाने और कार्यशालाएँ होती हैं, जहाँ हजारों मज़दूर काम करते हैं। कारखानों में मज़दूर कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खिलौने और अन्य उत्पाद बनाते हैं। कुछ मज़दूर कारखानों में नियमित काम करते हैं, जबकि कुछ केवल ठेके पर काम करते हैं।
ठेके पर काम करने वाले मज़दूरों को नियमित मज़दूरों से कम वेतन मिलता है और उन्हें स्वास्थ्य बीमा, पेंशन जैसी सुविधाएँ नहीं मिलतीं। कुछ मज़दूर ऐसे होते हैं, जिन्हें काम के अनुसार भुगतान मिलता है - जितना काम करोगे, उतना पैसा मिलेगा। ऐसे काम को 'ठेके का काम' या 'काम के आधार पर भुगतान' कहा जाता है। कारखानों में काम करने वाले मज़दूरों की संख्या शहरों में बहुत बड़ी है।
शहरों में सफाई कर्मचारी (सफाईकर्मी) सड़कों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते हैं। ये नगर निगम के कर्मचारी होते हैं या ठेके पर काम करते हैं। सफाई कर्मचारियों का काम बहुत कठिन होता है, परंतु समाज में उन्हें अक्सर उचित सम्मान नहीं मिलता।
कई शहरी घरों में 'घरेलू कामगार' काम करते हैं। ये घरेलू कामगार बर्तन धोते हैं, सफाई करते हैं, खाना बनाते हैं और बच्चों की देखभाल करते हैं। घरेलू कामगारों को अक्सर कम वेतन मिलता है और उनके पास कोई सुरक्षा नहीं होती। कई घरेलू कामगार महिलाएँ होती हैं, जिन्हें पूर्णकालिक या अंशकालिक काम मिलता है।
शहरों में कई लोग सरकारी कार्यालयों, बैंकों, अस्पतालों, स्कूलों और डाकघरों में काम करते हैं। सरकारी कर्मचारियों को नियमित वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाएँ मिलती हैं। वे सरकार की विभिन्न सेवाओं में कार्य करते हैं, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, रेलवे आदि।
इसके अलावा शहरों में बड़ी संख्या में निजी कंपनियाँ हैं, जिनमें लोग काम करते हैं। निजी कंपनियों में काम करने वालों को 'निजी क्षेत्र के कर्मचारी' कहते हैं। कुछ निजी कंपनियों में कर्मचारियों को अच्छा वेतन मिलता है, लेकिन कई छोटी कंपनियों में वेतन कम होता है और काम की सुरक्षा भी कम होती है। शहरों में कई व्यक्ति 'स्व-रोज़गार' भी करते हैं - जैसे दुकानदार, मैकेनिक, बढ़ई, प्लम्बर, नाई आदि, जो अपना व्यवसाय स्वयं चलाते हैं।
शहरों में आजीविका के अवसर अधिक होते हैं, परंतु वहाँ कई चुनौतियाँ भी हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण शहरों में नौकरी की प्रतिस्पर्धा अधिक होती है। कई लोग गाँवों से शहरों में काम की तलाश में आते हैं, परंतु उन्हें उचित वेतन वाली नौकरी मिलना कठिन होता है।
शहरों में कई कामगारों को निम्न स्थितियों में काम करना पड़ता है - लंबे समय तक काम, कम वेतन और काम की सुरक्षा का अभाव। सड़क विक्रेताओं को उनके सामान के लिए स्थान की समस्या होती है। इन चुनौतियों के बावजूद, शहरों में रोज़गार के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक होते हैं, इसलिए लोग शहरों की ओर आकर्षित होते हैं।
| साधन | उदाहरण |
|---|---|
| सड़क विक्रेता | सब्ज़ी, फल, चाय के ठेले |
| कारखाना मज़दूर | कपड़े, सामान बनाना |
| सफाई कर्मचारी | सड़कों की सफाई |
| घरेलू कामगार | बर्तन, सफाई, खाना |
| सरकारी/निजी नौकरी | बैंक, स्कूल, कंपनी |
| स्व-रोज़गार | दुकानदार, मैकेनिक |
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| नियमित मज़दूर | स्थिर वेतन, सुविधाएँ |
| ठेका मज़दूर | कम वेतन, कोई सुरक्षा नहीं |
| सरकारी कर्मचारी | वेतन, पेंशन, सुविधाएँ |
| निजी क्षेत्र के कर्मचारी | कंपनी में काम |
| समस्या | विवरण |
|---|---|
| स्थायी स्थान नहीं | पुलिस हटा सकती है |
| लाइसेंस नहीं | कई विक्रेताओं के पास लाइसेंस नहीं |
| अनिश्चित आय | कुछ दिन बिक्री नहीं |
| ऋण | सामान के लिए ऋण लेना पड़ता है |
शहरों में आजीविका के अनेक अवसर होते हैं, परंतु वहाँ की चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। सड़क विक्रेताओं से लेकर कारखाने के मज़दूरों, सफाई कर्मचारियों, घरेलू कामगारों और सरकारी-निजी कर्मचारियों तक - हर व्यक्ति अपने तरीके से शहर की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है। सड़क विक्रेताओं और ठेका मज़दूरों जैसे कमजोर वर्गों की स्थिति सुधारना आवश्यक है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि शहर की हर व्यवस्था उन लोगों के परिश्रम पर निर्भर है, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। हमें सभी कामगारों के काम का सम्मान करना चाहिए और उनके अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।