पृथ्वी केवल एक ठोस पिंड नहीं है; इसके चारों ओर वायु है, इसकी सतह पर जल और भूमि है, तथा इन सब पर जीवन पनपता है। पृथ्वी के इन विभिन्न क्षेत्रों को 'परिमंडल' (Domains/Spheres) कहते हैं। पृथ्वी को मुख्य रूप से चार परिमंडलों में बाँटा गया है - स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल और जैवमंडल।
स्थलमंडल पृथ्वी का ठोस भाग है, जलमंडल में सभी जल स्रोत शामिल हैं, वायुमंडल हमारे चारों ओर की वायु है, और जैवमंडल वह क्षेत्र है जहाँ सभी जीव निवास करते हैं। ये सभी परिमंडल आपस में जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। इस अध्याय में हम इन चारों परिमंडलों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
पृथ्वी का सबसे ऊपरी ठोस भाग 'स्थलमंडल' कहलाता है। यह चट्टानों और मिट्टी से बना है। स्थलमंडल में पर्वत, पठार, मैदान, घाटियाँ और अन्य भू-आकृतियाँ शामिल हैं। स्थलमंडल की सतह का अधिकांश भाग जल से ढका हुआ है, परंतु जो भाग जल से ऊपर है, वह महाद्वीप और द्वीप के रूप में दिखाई देता है।
पृथ्वी पर सात महाद्वीप हैं - एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया। इनमें से एशिया सबसे बड़ा महाद्वीप है, जिसमें भारत भी स्थित है। अंटार्कटिका बर्फ से ढका हुआ है और यहाँ स्थायी जनसंख्या नहीं है। ऑस्ट्रेलिया सबसे छोटा महाद्वीप है।
स्थलमंडल मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ खनिज पदार्थ, कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मिलते हैं। खेती के लिए मिट्टी स्थलमंडल का ही हिस्सा है। पर्वतों से नदियाँ निकलती हैं और वन हमें लकड़ी तथा ऑक्सीजन देते हैं।
पृथ्वी पर उपस्थित सभी जल स्रोत मिलकर 'जलमंडल' बनाते हैं। इसमें महासागर, समुद्र, नदियाँ, झीलें, तालाब और बर्फ शामिल हैं। पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका हुआ है। जल पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है और इसीलिए पृथ्वी को 'जल ग्रह' भी कहा जाता है।
पृथ्वी पर पाँच महासागर हैं - प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, दक्षिणी महासागर और आर्कटिक महासागर। इनमें प्रशांत महासागर सबसे बड़ा और सबसे गहरा महासागर है। इसका आकार इतना विशाल है कि यह सभी महाद्वीपों के क्षेत्रफल से भी बड़ा है।
महासागरों का जल खारा होता है। हिंद महासागर का नाम भारत के नाम पर रखा गया है। अटलांटिक महासागर दूसरा सबसे बड़ा महासागर है। आर्कटिक महासागर उत्तरी ध्रुव के चारों ओर स्थित है और अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है। दक्षिणी महासागर अंटार्कटिका के चारों ओर फैला हुआ है।
पृथ्वी के चारों ओर गैसों की एक मोटी परत 'वायुमंडल' कहलाती है। वायुमंडल में मुख्यतः नाइट्रोजन (78%) और ऑक्सीजन (21%) गैसें होती हैं। इनके अलावा कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन और जलवाष्प भी अल्प मात्रा में उपस्थित रहते हैं। वायुमंडल हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाता है और पृथ्वी का तापमान नियंत्रित करता है।
वायुमंडल की ऊपरी परत में 'ओजोन परत' होती है, जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV किरणों) को रोकती है। वायुमंडल के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता। वायु का उपयोग सांस लेने के अलावा वायु ऊर्जा (पवन ऊर्जा) उत्पन्न करने में भी होता है।
पृथ्वी का वह क्षेत्र जहाँ सभी जीव (पौधे, जानवर और सूक्ष्मजीव) निवास करते हैं, 'जैवमंडल' कहलाता है। जैवमंडल एक संकीर्ण क्षेत्र है, जहाँ स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल आपस में मिलते हैं। जैवमंडल में जीवों का जीवन वायु, जल और मिट्टी पर निर्भर करता है।
जैवमंडल में पौधे और जानवरों का संबंध आपस में होता है। पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं, जिसे जानवर खाते हैं। जानवरों से निकली कार्बन डाइऑक्साइड को पौधे अवशोषित करते हैं। इस प्रकार जैवमंडल में सभी जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं। मनुष्य भी जैवमंडल का ही हिस्सा है और उसे इसकी रक्षा करनी चाहिए।
| परिमंडल | विवरण | मुख्य घटक |
|---|---|---|
| स्थलमंडल | पृथ्वी का ठोस भाग | महाद्वीप, पर्वत, चट्टानें |
| जलमंडल | सभी जल स्रोत | महासागर, नदियाँ, झीलें |
| वायुमंडल | गैसों की परत | नाइट्रोजन, ऑक्सीजन |
| जैवमंडल | जीवों का क्षेत्र | पौधे, जानवर, मनुष्य |
| महाद्वीप | विशेषता |
|---|---|
| एशिया | सबसे बड़ा महाद्वीप |
| अफ्रीका | दूसरा सबसे बड़ा |
| उत्तरी अमेरिका | उत्तरी गोलार्ध |
| दक्षिणी अमेरिका | दक्षिणी गोलार्ध |
| अंटार्कटिका | बर्फ से ढका, बिना स्थायी जनसंख्या |
| यूरोप | एशिया के पश्चिम में |
| ऑस्ट्रेलिया | सबसे छोटा महाद्वीप |
| महासागर | विशेषता |
|---|---|
| प्रशांत | सबसे बड़ा और गहरा |
| अटलांटिक | दूसरा सबसे बड़ा |
| हिंद | भारत के नाम पर |
| दक्षिणी | अंटार्कटिका के चारों ओर |
| आर्कटिक | उत्तरी ध्रुव के चारों ओर |
पृथ्वी के चार परिमंडल - स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल और जैवमंडल - आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। महाद्वीप, महासागर, वायु और जीव-जंतु मिलकर पृथ्वी को जीवन योग्य बनाते हैं। जैवमंडल में सभी जीवों का जीवन चक्र एक-दूसरे पर निर्भर है। यदि इनमें से कोई भी परिमंडल असंतुलित हो जाए, तो पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है। इसीलिए हमें इन सभी परिमंडलों की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि मानव सहित सभी जीवों का अस्तित्व इन्हीं पर निर्भर है।