यह अध्याय हमें भारत में राज्यों के विकास और राजाओं के उदय की कहानी बताता है। जब लोग कृषि और पशुपालन में निपुण हुए, तो उन्होंने बड़े-बड़े क्षेत्रों में बसना आरंभ किया। धीरे-धीरे इन क्षेत्रों में राजाओं ने अपना अधिकार स्थापित किया और कर वसूलना, सेना रखना तथा किले बनाना शुरू किया। इस प्रकार जनपदों से बड़े राज्य अर्थात महाजनपदों का उदय हुआ।
पूर्वी भारत में, विशेषकर मध्य गंगा की घाटी में, लोहे के औज़ारों के उपयोग से जंगल साफ करना आसान हो गया, जिससे खेती का विस्तार हुआ। इसी क्षेत्र में कई महाजनपद उभरे। इनमें मगध सबसे शक्तिशाली बना। वहीं, कुछ राज्य ऐसे भी थे जहाँ एक ही राजा नहीं, बल्कि बहुत से लोग मिलकर शासन करते थे; ऐसे राज्यों को 'गण' या 'संघ' कहा जाता था। वज्जि इसका प्रमुख उदाहरण है।
पिछले अध्याय में हमने सीखा कि जनपद वह क्षेत्र है जहाँ लोग बस गए हों। लगभग 600 ई.पू. से 300 ई.पू. तक भारतीय इतिहास में कई जनपद थे, जो बड़े होकर महाजनपद बन गए। एक महाजनपद में कई गाँव, नगर और कभी-कभी अनेक जनपद शामिल होते थे। महाजनपदों की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए मिट्टी, ईंट और पत्थर से किले (गढ़) बनाए गए।
महाजनपदों में बड़ी सेनाएँ होती थीं और वे कर वसूलते थे। कर से मिलने वाला धन सेना, किलों, सड़कों और महलों के रखरखाव में खर्च किया जाता था। उस समय के किसानों को फसल का एक हिस्सा कर के रूप में देना पड़ता था। इसके अलावा पशुपालकों, शिकारियों, कारीगरों और व्यापारियों से भी कर वसूला जाता था।
मध्य गंगा की घाटी में लोहे की खोज ने कृषि में क्रांति ला दी। लोहे के हल के फाल (ploughshare) से कठोर मिट्टी को जोतना आसान हो गया। लोहे की कुल्हाड़ियों से घने जंगलों को साफ किया जा सकता था। चावल की खेती में अधिक श्रम की आवश्यकता होती है, लेकिन उत्पादन भी अधिक होता था। अधिक उत्पादन से अधिक कर वसूला जा सकता था, इसलिए महाजनपद धनी बनते गए।
लोहे का उपयोग हथियार बनाने में भी होता था, जिससे महाजनपदों की सेनाएँ मजबूत हुईं। मगध जैसे राज्य, जिनके पास लोहे के अयस्क के स्रोत थे, विशेष रूप से शक्तिशाली बने।
प्राचीन ग्रंथों में भारतीय उपमहाद्वीप में सोलह (16) महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। इनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:
ये महाजनपद अधिकतर गंगा और उसकी सहायक नदियों की घाटी में स्थित थे। इनकी राजधानियाँ प्रायः किलों से घिरी होती थीं।
मगध उत्तर भारत का सबसे शक्तिशाली महाजनपद बना। इसके प्रमुख शासक बिम्बिसार और अजातशत्रु थे, जिन्होंने मगध के साम्राज्य का विस्तार किया। मगध की पहली राजधानी राजगृह थी, जो बाद में पाटलिपुत्र बन गई। मगध की शक्ति के कई कारण थे।
पहला, मगध में खेती के लिए उपजाऊ भूमि और समृद्ध फसलें होती थीं। दूसरा, मगध के जंगलों में हाथी मिलते थे, जिनका उपयोग सेना में किया जाता था। तीसरा, मगध के पास लोहे के अयस्क के स्रोत थे। चौथा, गंगा और सोन नदियाँ जल परिवहन के लिए सुविधाजनक मार्ग थीं। इन्हीं कारणों से मगध ने अन्य महाजनपदों को पराजित कर अपना विस्तार किया।
सभी महाजनपदों में राजाओं का शासन नहीं था। कुछ राज्य ऐसे भी थे, जहाँ बहुत से लोग मिलकर शासन करते थे। ऐसे राज्यों को 'गण' या 'संघ' कहा जाता था। गण शब्द का अर्थ है 'समूह' या 'समुदाय'। इन राज्यों में शासन बड़ी सभा द्वारा होता था, जिसमें प्रमुख व्यक्ति शामिल होते थे।
वज्जि इस प्रकार का सबसे प्रसिद्ध गणराज्य था, जो उत्तर बिहार में स्थित था। वज्जि में आठ राज्यों के समूह शामिल थे, जिनमें लिच्छवि सबसे प्रमुख था। बुद्ध के काल में वज्जि के शासकों की एक सभा थी, जिसमें 7,707 लोग शामिल होते थे। इस सभा में शासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती थी। मल्ल (कुशीनगर क्षेत्र) भी एक गणराज्य था।
गण या संघ में एक ही शासक नहीं होता था, बल्कि शासन सामूहिक रूप से होता था। सभा में उपस्थित सदस्य राज्य के प्रमुख मुद्दों पर निर्णय लेते थे। सभा की बैठकें नियमित रूप से होती थीं और सामान्यतः तयशुदा स्थान पर होती थीं। यह व्यवस्था एक 'प्रारंभिक गणराज्य' (early republic) के समान थी।
| महाजनपद | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|
| मगध | दक्षिण बिहार | राजगृह, बाद में पाटलिपुत्र |
| अंग | पूर्वी बिहार | चंपा |
| कोसल | अयोध्या क्षेत्र | श्रावस्ती |
| वत्स | कौशाम्बी क्षेत्र | कौशाम्बी |
| अवन्ति | मध्य प्रदेश | उज्जयिनी |
| गांधार | पश्चिमी पाकिस्तान | तक्षशिला |
| कारण | विवरण |
|---|---|
| उपजाऊ भूमि | अच्छी फसलें और अधिक कर |
| जंगलों में हाथी | सेना में उपयोग |
| लोहे के अयस्क के स्रोत | बेहतर हथियार |
| नदियाँ (गंगा-सोन) | सुविधाजनक जल परिवहन |
| विशेषता | राजतंत्र | गण/संघ |
|---|---|---|
| शासक | एक राजा | सभा के कई सदस्य |
| उदाहरण | मगध, कोसल | वज्जि, मल्ल |
| निर्णय | राजा लेता था | सभा सामूहिक रूप से |
इस अध्याय में हमने सीखा कि साधारण बस्तियों (जनपदों) से बड़े राज्यों (महाजनपदों) तक भारतीय समाज का विकास कैसे हुआ। लोहे के औज़ारों, समृद्ध कृषि और संगठित सेना ने महाजनपदों को शक्ति दी, जिसमें मगध सबसे आगे रहा। साथ ही, वज्जि जैसे गणराज्य दर्शाते हैं कि उस युग में सामूहिक शासन की व्यवस्था भी मौजूद थी। यह सामूहिक निर्णय लेने की प्रथा आधुनिक लोकतंत्र की आद्य रूप है। यह अध्याय राजनीतिक विकास और प्रशासन की उत्पत्ति को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।