पृथ्वी हमारा घर है, लेकिन यह पूरे ब्रह्मांड का नहीं, बल्कि केवल सौरमंडल का एक छोटा सा हिस्सा है। रात में आकाश में चमकते तारे, सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रह - यह सब मिलकर हमारे ब्रह्मांड की विशालता को दर्शाते हैं। यह अध्याय हमें सौरमंडल के बारे में विस्तार से बताता है, जिसमें सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह और अन्य खगोलीय पिंड शामिल हैं।
ब्रह्मांड विशाल है, जिसमें अरबों आकाशगंगाएँ हैं। हमारी आकाशगंगा 'मंदाकिनी' या 'आकाशगंगा' कहलाती है। सौरमंडल इसी आकाशगंगा का एक छोटा सा हिस्सा है। सूर्य सौरमंडल का केंद्र है, जिसके चारों ओर ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह और धूमकेतु चक्कर लगाते हैं।
ब्रह्मांड में सब कुछ शामिल है - तारे, ग्रह, गैसें, धूल और समस्त पदार्थ। आकाश में दिखने वाले चमकते तारे वास्तव में अत्यंत बड़े और गर्म पिंड हैं, जो अपना प्रकाश स्वयं उत्पन्न करते हैं। सूर्य भी एक तारा है, जो हमारे सबसे निकट है। तारे प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं, इसलिए वे चमकते हैं।
आकाशगंगा तारों का एक विशाल समूह है। हमारी आकाशगंगा को 'मंदाकिनी' (Milky Way) कहते हैं। यह दूध के समान एक चमकती हुई पट्टी के रूप में दिखाई देती है। रात में आकाश में जो चमकीली पट्टी दिखाई देती है, वह हमारी आकाशगंगा है। पृथ्वी सहित संपूर्ण सौरमंडल इसी मंदाकिनी आकाशगंगा में स्थित है।
सूर्य एक तारा है, जो सौरमंडल का केंद्र है। सूर्य अत्यंत गर्म पिंड है, जिससे प्रकाश और ऊर्जा प्राप्त होती है। सूर्य के चारों ओर सभी ग्रह अपनी कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं। सूर्य पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल ही सौरमंडल के सभी पिंडों को अपने पास बांधे रखता है।
सूर्य पृथ्वी से लगभग 13 लाख गुना बड़ा है। यद्यपि सूर्य इतना बड़ा है, परंतु ब्रह्मांड में यह एक सामान्य तारा है। सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता, क्योंकि सूर्य से ही हमें प्रकाश, ऊष्मा और ऊर्जा मिलती है।
सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले आकाशीय पिंडों को 'ग्रह' कहते हैं। ग्रहों के पास अपना प्रकाश नहीं होता; वे सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकते हैं। सौरमंडल में आठ ग्रह हैं, जो सूर्य से दूरी के क्रम में इस प्रकार हैं:
इन सभी ग्रहों को याद रखने के लिए हिंदी में एक सूत्र है: "मेरी शुक्र पृथ्वी मंगल बृहस्पति शनि अरुण वरुण"।
पृथ्वी अपने स्थान से तीसरा ग्रह है और यह सौरमंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है। पृथ्वी को 'नीला ग्रह' कहा जाता है, क्योंकि इसका लगभग दो-तिहाई भाग जल से घिरा है। पृथ्वी पर जीवन संभव होने के कई कारण हैं।
सबसे पहले, पृथ्वी सूर्य से उचित दूरी पर है, जिससे यहाँ उचित तापमान रहता है। दूसरे, पृथ्वी पर वायु मंडल है, जो सांस लेने और ओजोन परत द्वारा सुरक्षा प्रदान करता है। तीसरे, पृथ्वी पर जल की उपलब्धता है। पृथ्वी को 'जल ग्रह' भी कहा जाता है। इन्हीं कारणों से पृथ्वी जीवन के लिए उपयुक्त ग्रह है।
ग्रहों के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पिंडों को 'उपग्रह' (Satellite) कहते हैं। चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3 लाख 84 हजार किलोमीटर दूर है। चंद्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। चंद्रमा पर वायु और जल नहीं है, इसलिए वहाँ जीवन संभव नहीं है।
चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर लगभग 27 दिनों में एक चक्कर पूरा करता है। चंद्रमा की सतह पर उभरे हुए गड्ढे और पर्वत हैं। 1969 में पहली बार अमेरिकी अंतरिक्ष यान 'अपोलो 11' ने मनुष्य को चंद्रमा पर पहुँचाया था, जिसमें नील आर्मस्ट्रांग पहले व्यक्ति बने थे।
मंगल और बृहस्पति के बीच के क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटे पिंड हैं, जिन्हें 'क्षुद्रग्रह' (Asteroids) कहते हैं। ये छोटे-छोटे पिंड सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। जब ये पिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण से जल जाते हैं या गर्म हो जाते हैं। इन जलते हुए पिंडों को 'उल्का' या 'टूटता तारा' कहते हैं। जो बड़े पिंड पृथ्वी की सतह पर गिरते हैं, उन्हें 'उल्कापिंड' (Meteorite) कहते हैं।
| क्रम | ग्रह | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| 1 | बुध | सबसे छोटा, सूर्य के सबसे निकट |
| 2 | शुक्र | सबसे चमकीला |
| 3 | पृथ्वी | जीवन वाला ग्रह |
| 4 | मंगल | लाल ग्रह |
| 5 | बृहस्पति | सबसे बड़ा ग्रह |
| 6 | शनि | वलयों वाला ग्रह |
| 7 | अरुण | अक्ष पर लेटा हुआ |
| 8 | वरुण | सबसे दूर |
| पिंड | विशेषता |
|---|---|
| तारा | स्वयं प्रकाश उत्पन्न करता है (जैसे सूर्य) |
| ग्रह | सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करते हैं |
| उपग्रह | ग्रहों के चारों ओर चक्कर लगाते हैं (चंद्रमा) |
| क्षुद्रग्रह | मंगल-बृहस्पति के बीच छोटे पिंड |
| धूमकेतु | पूँछ वाले आकाशीय पिंड |
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| उपनाम | नीला ग्रह, जल ग्रह |
| सूर्य से क्रम | तीसरा ग्रह |
| चंद्रमा की दूरी | लगभग 3,84,000 किमी |
| चंद्रमा का चक्कर | लगभग 27 दिन |
सौरमंडल में पृथ्वी एक अनोखा और सुंदर ग्रह है। सूर्य इसका केंद्र है और आठ ग्रह उसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी अपनी उचित दूरी, वायुमंडल और जल के कारण जीवन के लिए उपयुक्त एकमात्र ग्रह है। चंद्रमा इसका वफादार उपग्रह है। यह अध्याय हमें ब्रह्मांड की विशालता और हमारे सौरमंडल की सुव्यवस्था का परिचय कराता है। यह समझना आवश्यक है कि हमें इस बहुमूल्य ग्रह की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि पूरे ब्रह्मांड में हमें ज्ञात एकमात्र जीवन-योग्य ग्रह पृथ्वी ही है।