भारत विविधता का देश है। यहाँ विभिन्न भाषाएँ बोली जाती हैं, विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, विभिन्न प्रकार के भोजन खाए जाते हैं और विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं। इसी को 'विविधता' कहते हैं। विविधता का अर्थ है विभिन्नता या भिन्नता। जब लोगों के रहन-सहन, भाषा, धर्म, खान-पान और परंपराओं में अंतर होता है, तो उसे विविधता कहते हैं।
भारत में विविधता के कई कारण हैं। हजारों वर्षों से विभिन्न समुदाय भारत में आते-जाते रहे हैं, जिन्होंने अपनी संस्कृति को भारतीय संस्कृति में मिलाया। इसके अलावा भारत की विशाल भूगोलिक विविधता - पहाड़, मैदान, रेगिस्तान, समुद्र तट - ने भी लोगों के जीवन को अलग-अलग ढंग से प्रभावित किया है। इस अध्याय में हम विविधता के अर्थ और उसके महत्व को समझेंगे।
भारत में विविधता के दो प्रमुख कारण हैं। पहला कारण है - विभिन्न प्रकार का भूगोल। भारत के अलग-अलग भागों की जलवायु, भूमि और प्राकृतिक संसाधन अलग-अलग हैं। उदाहरण के लिए, लद्दाख में ठंडा और शुष्क जलवायु है, जबकि केरल में गर्म और आर्द्र जलवायु है। इसी कारण वहाँ के लोगों का जीवन-निर्वाह और संस्कृति अलग-अलग है।
दूसरा कारण है - इतिहास। विभिन्न कालों में विभिन्न समुदाय भारत आए, जैसे व्यापारी, विजेता और तीर्थयात्री। उन्होंने भारत की संस्कृति में अपने रीति-रिवाज, भाषाएँ और धर्म जोड़े। सदियों से चली यह प्रक्रिया आज भी जारी है। आज के भारत में हर क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है, परंतु सभी एक साथ 'भारतीय' हैं।
लद्दाख भारत के जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में स्थित एक ऊँचा पर्वतीय क्षेत्र है, जिसे 'ठंडा रेगिस्तान' कहा जाता है। यहाँ हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियाँ हैं। यहाँ के अधिकांश लोग बौद्ध धर्म का पालन करते हैं और मठों में भिक्षु ध्यान करते हैं। गर्मियों में यहाँ की ज़मीन पर फसलें उगाई जाती हैं। लद्दाख के लोग खेती और पशुपालन से अपना जीवन यापन करते हैं।
केरल दक्षिण भारत का एक राज्य है, जो मसालों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। प्राचीन काल में यहाँ से काली मिर्च, इलायची, लौंग आदि मसालों का व्यापार होता था। इसी कारण विभिन्न देशों के व्यापारी केरल आए। केरल में लोग हिंदू, मुस्लिम, ईसाई जैसे विभिन्न धर्मों का पालन करते हैं और विभिन्न प्रकार के भोजन का आनंद लेते हैं। केरल के चर्च, मंदिर और मस्जिदें साथ-साथ स्थित हैं।
भारत में हजारों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। भारत के संविधान में अनेक भाषाओं को मान्यता दी गई है। हिंदी और अंग्रेज़ी केंद्र सरकार की राजभाषाएँ हैं, जबकि प्रत्येक राज्य की अपनी राजभाषा है। संविधान की आठवीं अनुसूची में कई भाषाओं को सूचीबद्ध किया गया है।
भारतीय भाषाएँ मुख्यतः दो भाषा परिवारों से संबंधित हैं - हिंद-आर्य भाषाएँ (जैसे हिंदी, बंगाली, मराठी) और द्रविड़ भाषाएँ (जैसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम)। इन सभी भाषाओं के बोलने वाले एक साथ रहते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं।
भारत में विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग सदियों से एक साथ रहते आए हैं। वे एक-दूसरे के त्योहारों में भाग लेते हैं, एक-दूसरे की भाषा सीखते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। यही 'विविधता में एकता' है।
इसका एक सुंदर उदाहरण यह है कि कंबोडिया जैसे देश में भी रामायण की कहानी प्रचलित है, जो दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति ने दूसरे देशों को भी प्रभावित किया है। विविधता कोई समस्या नहीं है; यह हमारी ताकत है। विभिन्न विचारों और अनुभवों के कारण समाज समृद्ध होता है।
विविधता हमारे जीवन को समृद्ध बनाती है। विभिन्न संस्कृतियों के लोगों से हम नई चीजें सीखते हैं। विभिन्न भाषाएँ सीखने से हमारा ज्ञान बढ़ता है। विभिन्न त्योहारों का आनंद हमें आपस में जोड़ता है। यदि सभी लोग एक जैसे होते, तो हमारी संस्कृति इतनी रंगीन नहीं होती।
इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों के लोग अलग-अलग चीजों में निपुण होते हैं - कुछ कृषि में, कुछ कला में, कुछ व्यापार में। यह विविधता ही देश की प्रगति का आधार है। विविधता का सम्मान करना और सभी के साथ समान व्यवहार करना ही 'विविधता की समझ' है।
| बिंदु | लद्दाख | केरल |
|---|---|---|
| स्थान | जम्मू-कश्मीर | दक्षिण भारत |
| जलवायु | ठंडा, शुष्क (ठंडा रेगिस्तान) | गर्म, आर्द्र |
| प्रमुख धर्म | बौद्ध धर्म | हिंदू, मुस्लिम, ईसाई |
| प्रसिद्ध | मठ, बर्फीले पहाड़ | मसालों का व्यापार |
| भाषा परिवार | उदाहरण |
|---|---|
| हिंद-आर्य | हिंदी, बंगाली, मराठी |
| द्रविड़ | तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम |
| कारण | विवरण |
|---|---|
| भूगोल | विभिन्न जलवायु और भू-आकृतियाँ |
| इतिहास | व्यापारी, विजेता और तीर्थयात्रियों का आगमन |
विविधता भारत की पहचान है। भूगोल और इतिहास ने मिलकर भारत को ऐसा देश बनाया है जहाँ हर क्षेत्र, हर भाषा और हर संस्कृति का अपना स्थान है। लद्दाख के बौद्ध मठ से लेकर केरल के मसाले बाजार तक - हर जगह विविधता झलकती है। विविधता का सम्मान करना और सभी के साथ समान व्यवहार करना ही हमें सच्चे अर्थ में भारतीय बनाता है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि भिन्नताएँ दूरियाँ नहीं बढ़ातीं, बल्कि हमें एक-दूसरे के निकट लाती हैं।