कंप्यूटर केवल दो अंकों — 0 और 1 — को समझता है। इसलिए कंप्यूटर में संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न संख्या पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। संख्या पद्धति वह विधि है जिसके द्वारा संख्याओं को लिखा और पढ़ा जाता है। मनुष्य दशमलव (Decimal) पद्धति का उपयोग करता है, जबकि कंप्यूटर द्विआधारी (Binary) पद्धति का। इस अध्याय में हम चार मुख्य संख्या पद्धतियों — दशमलव, द्विआधारी, अष्टक और षोडश आधारी — तथा उनके आपसी रूपांतरण को विस्तार से सीखेंगे।
2. संख्या पद्धति के मूल तत्व
किसी भी संख्या पद्धति के तीन मुख्य तत्व होते हैं:
आधार (Base/Radix): वह संख्या जो यह बताती है कि उस पद्धति में कुल कितने अंक प्रयोग होते हैं।
अंक (Digits): उस पद्धति में प्रयुक्त प्रतीक।
स्थानीय मान (Place Value): किसी अंक का मान उसके स्थान के अनुसार आधार की घातों से गुणा करके निकाला जाता है।
3. चार प्रमुख संख्या पद्धतियाँ
3.1 दशमलव संख्या पद्धति (Decimal System)
आधार: 10
प्रयुक्त अंक: 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9
यह मानव द्वारा प्रयुक्त सबसे सामान्य पद्धति है। जैसे 245 = 2×10² + 4×10¹ + 5×10⁰।
3.2 द्विआधारी संख्या पद्धति (Binary System)
आधार: 2
प्रयुक्त अंक: केवल 0 और 1
कंप्यूटर इसी पद्धति में कार्य करता है, क्योंकि इसके परिपथ केवल दो अवस्थाओं — चालू (1) और बंद (0) — को पहचानते हैं। प्रत्येक 0 या 1 को एक 'बिट' (Bit) कहते हैं। 8 बिट मिलकर एक 'बाइट' (Byte) बनाते हैं।
3.3 अष्टक संख्या पद्धति (Octal System)
आधार: 8
प्रयुक्त अंक: 0 से 7 तक
यह द्विआधारी संख्याओं को छोटा करने के लिए उपयोग होती है।
3.4 षोडश आधारी संख्या पद्धति (Hexadecimal System)
आधार: 16
प्रयुक्त अंक: 0 से 9 और A, B, C, D, E, F (जहाँ A=10, B=11, C=12, D=13, E=14, F=15)
यह कंप्यूटर में मेमोरी एड्रेस और रंगों (जैसे HTML में #FF0000) को दर्शाने के लिए उपयोग होती है।
4. संख्या पद्धतियों का रूपांतरण
4.1 द्विआधारी से दशमलव में रूपांतरण
द्विआधारी संख्या के प्रत्येक अंक (बिट) को उसके स्थान के अनुसार 2 की घात से गुणा करके जोड़ते हैं।
उदाहरण: 1011₂ को दशमलव में बदलें।
1×2³ + 0×2² + 1×2¹ + 1×2⁰ = 8 + 0 + 2 + 1 = 11
अतः 1011₂ = 11₁₀
4.2 दशमलव से द्विआधारी में रूपांतरण
दशमलव संख्या को 2 से बार-बार भाग देते हैं और शेष (Remainder) को नीचे से ऊपर की ओर लिखते हैं।
द्विआधारी अंकों को दाईं ओर से चार-चार के समूह में बाँटते हैं।
उदाहरण: 10111110₂ → 1011 | 1110 → B | E → BE₁₆
4.5 द्विआधारी जोड़ (Binary Addition)
द्विआधारी संख्याओं का जोड़ निम्नलिखित चार नियमों के अनुसार किया जाता है:
0 + 0 = 0, 1 + 0 = 1, 0 + 1 = 1 और 1 + 1 = 10 (यहाँ 0 लिखते हैं और 1 आगे 'कैरी' होता है)।
उदाहरण: 101₂ + 011₂ = 1000₂।
1 + 1 = 10, अतः दाईं ओर से जोड़ने पर 1+1=0 लिखते हैं और 1 कैरी होता है; आगे भी इसी प्रकार योग करने पर अंतिम परिणाम 1000₂ प्राप्त होता है। इसी प्रकार द्विआधारी घटाव में 1 - 1 = 0, 1 - 0 = 1, 0 - 0 = 0 होता है। द्विआधारी अंकगणित कंप्यूटर की ALU (अंकगणितीय तर्क इकाई) में होने वाली सभी गणनाओं का आधार है।
4.6 अष्टक और षोडश आधारी रूपांतरण के अधिक उदाहरण
दशमलव संख्या 30 को अष्टक में बदलने के लिए 30 को 8 से बार-बार भाग देते हैं: 30 ÷ 8 = 3, शेष 6; 3 ÷ 8 = 0, शेष 3। शेष को नीचे से ऊपर लिखने पर 36₈ प्राप्त होता है। इसी प्रकार, दशमलव 30 को षोडश आधारी में बदलने के लिए 30 ÷ 16 = 1, शेष 14; 14 को अक्षर E से लिखा जाता है, अतः परिणाम 1E₁₆ होता है। इससे स्पष्ट होता है कि वही 'भाग और शेष' की विधि हर आधार पर लागू होती है, केवल भाजक (Divisor) बदल जाता है — 2 के स्थान पर 8 या 16। यदि शेष 10 से बड़ा हो, तो षोडश आधारी में उसे A से F तक के अक्षरों से लिखते हैं। इस विधि का बार-बार अभ्यास करने से रूपांतरण सहज और शीघ्र हो जाता है।
5. दशमलव, द्विआधारी, अष्टक और षोडश आधारी की तुलना
दशमलव
द्विआधारी
अष्टक
षोडश आधारी
0
0
0
0
1
1
1
1
2
10
2
2
3
11
3
3
4
100
4
4
5
101
5
5
6
110
6
6
7
111
7
7
8
1000
10
8
9
1001
11
9
10
1010
12
A
11
1011
13
B
12
1100
14
C
13
1101
15
D
14
1110
16
E
15
1111
17
F
6. बिट, बाइट और मेमोरी इकाइयाँ
बिट (Bit): सबसे छोटी डेटा इकाई, मान 0 या 1।
बाइट (Byte): 8 बिट मिलकर 1 बाइट बनाते हैं। एक अक्षर को स्टोर करने में 1 बाइट की आवश्यकता होती है।
किलोबाइट (KB): 1 KB = 1024 बाइट।
मेगाबाइट (MB): 1 MB = 1024 KB।
गीगाबाइट (GB): 1 GB = 1024 MB।
टेराबाइट (TB): 1 TB = 1024 GB।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: चारों संख्या पद्धतियाँ
पद्धति
आधार
प्रयुक्त अंक
उपयोग
दशमलव
10
0 से 9
मानव गणना
द्विआधारी
2
0, 1
कंप्यूटर
अष्टक
8
0 से 7
द्विआधारी को छोटा करना
षोडश आधारी
16
0-9, A-F
मेमोरी एड्रेस, रंग
तालिका 2: मेमोरी इकाइयाँ
इकाई
मान
1 बिट
0 या 1
1 बाइट
8 बिट
1 KB
1024 बाइट
1 MB
1024 KB
1 GB
1024 MB
1 TB
1024 GB
तालिका 3: रूपांतरण याद रखने की कुंजी
रूपांतरण
विधि
द्विआधारी → दशमलव
2 की घात से गुणा कर जोड़ें
दशमलव → द्विआधारी
2 से भाग देकर शेष लिखें
द्विआधारी → अष्टक
तीन-तीन बिट के समूह
द्विआधारी → षोडश आधारी
चार-चार बिट के समूह
माइंड मैप
graph TD
A["संख्या पद्धतियाँ"] --> B["दशमलव (आधार 10)"]
A --> C["द्विआधारी (आधार 2)"]
A --> D["अष्टक (आधार 8)"]
A --> E["षोडश आधारी (आधार 16)"]
C --> F["कंप्यूटर की भाषा"]
F --> G["बिट = 0 या 1"]
G --> H["8 बिट = 1 बाइट"]
H --> I["1024 बाइट = 1 KB"]
A --> J["रूपांतरण विधियाँ"]
J --> K["द्विआधारी → दशमलव"]
J --> L["दशमलव → द्विआधारी"]
J --> M["द्विआधारी → अष्टक"]
J --> N["द्विआधारी → षोडश आधारी"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: दशमलव से द्विआधारी रूपांतरण (13₁₀ = 1101₂)
आरेख 2: द्विआधारी से दशमलव रूपांतरण (1011₂ = 11₁₀)
सामान्य गलतियाँ
शेषफल को ऊपर से नीचे लिखना: दशमलव से द्विआधारी रूपांतरण में शेषफल को हमेशा नीचे से ऊपर लिखना चाहिए।
आधार की घात गलत रखना: घात हमेशा दाईं ओर से 2⁰ (शून्य) से शुरू होती है, 2¹ से नहीं।
अष्टक और षोडश आधारी में अंक गलत लिखना: अष्टक में 8 और 9 नहीं होते; षोडश आधारी में 10-15 को A-F से लिखा जाता है।
बिट और बाइट में भ्रम: बिट सबसे छोटी इकाई है (0 या 1), जबकि बाइट = 8 बिट।
KB, MB, GB के मान 1000 समझना: कंप्यूटर में ये 1024 के गुणकों में होते हैं (1 KB = 1024 बाइट)।
द्विआधारी में केवल 0,1 मानते हुए गलत अंक लिखना: द्विआधारी में 2, 3 जैसे अंक नहीं हो सकते।
रूपांतरण में तीन/चार बिट के समूह दाएँ से नहीं बनाना: समूह हमेशा दाईं ओर से बनाए जाते हैं।
षोडश आधारी में अक्षरों का मान याद रखें: A=10, B=11, C=12, D=13, E=14, F=15।
उत्तर के साथ आधार (₂, ₈, ₁₀, ₁₆) अवश्य लिखें।
अभ्यास के लिए 5 से 10 संख्याओं का रूपांतरण स्वयं करें।
निष्कर्ष
संख्या पद्धतियाँ कंप्यूटर विज्ञान की आधारशिला हैं। कंप्यूटर द्विआधारी भाषा में कार्य करता है, जबकि मनुष्य दशमलव में। रूपांतरण विधियों को समझकर हम दोनों के बीच संबंध स्थापित कर सकते हैं। अष्टक और षोडश आधारी पद्धतियाँ द्विआधारी संख्याओं को संक्षिप्त रूप में लिखने में सहायक होती हैं। इस ज्ञान का उपयोग आगे प्रोग्रामिंग और कंप्यूटर मेमोरी की समझ में होगा।