💻
⌨️
🖱️
🖥️
💾
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

कंप्यूटर केवल दो अंकों — 0 और 1 — को समझता है। इसलिए कंप्यूटर में संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न संख्या पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। संख्या पद्धति वह विधि है जिसके द्वारा संख्याओं को लिखा और पढ़ा जाता है। मनुष्य दशमलव (Decimal) पद्धति का उपयोग करता है, जबकि कंप्यूटर द्विआधारी (Binary) पद्धति का। इस अध्याय में हम चार मुख्य संख्या पद्धतियों — दशमलव, द्विआधारी, अष्टक और षोडश आधारी — तथा उनके आपसी रूपांतरण को विस्तार से सीखेंगे।

2. संख्या पद्धति के मूल तत्व

किसी भी संख्या पद्धति के तीन मुख्य तत्व होते हैं:

3. चार प्रमुख संख्या पद्धतियाँ

3.1 दशमलव संख्या पद्धति (Decimal System)

3.2 द्विआधारी संख्या पद्धति (Binary System)

3.3 अष्टक संख्या पद्धति (Octal System)

3.4 षोडश आधारी संख्या पद्धति (Hexadecimal System)

4. संख्या पद्धतियों का रूपांतरण

4.1 द्विआधारी से दशमलव में रूपांतरण

द्विआधारी संख्या के प्रत्येक अंक (बिट) को उसके स्थान के अनुसार 2 की घात से गुणा करके जोड़ते हैं।

उदाहरण: 1011₂ को दशमलव में बदलें।

1×2³ + 0×2² + 1×2¹ + 1×2⁰ = 8 + 0 + 2 + 1 = 11

अतः 1011₂ = 11₁₀

4.2 दशमलव से द्विआधारी में रूपांतरण

दशमलव संख्या को 2 से बार-बार भाग देते हैं और शेष (Remainder) को नीचे से ऊपर की ओर लिखते हैं।

उदाहरण: 13₁₀ को द्विआधारी में बदलें।

13 ÷ 2 = 6, शेष 1 6 ÷ 2 = 3, शेष 0 3 ÷ 2 = 1, शेष 1 1 ÷ 2 = 0, शेष 1

नीचे से ऊपर शेष लिखने पर: 1101₂

अतः 13₁₀ = 1101₂

4.3 द्विआधारी से अष्टक में रूपांतरण

द्विआधारी अंकों को दाईं ओर से तीन-तीन के समूह में बाँटते हैं और प्रत्येक समूह को अष्टक में बदलते हैं।

उदाहरण: 101110₂ → दाएँ से तीन-तीन: 101 | 110 → 5 | 6 → 56₈

4.4 द्विआधारी से षोडश आधारी में रूपांतरण

द्विआधारी अंकों को दाईं ओर से चार-चार के समूह में बाँटते हैं।

उदाहरण: 10111110₂ → 1011 | 1110 → B | E → BE₁₆

4.5 द्विआधारी जोड़ (Binary Addition)

द्विआधारी संख्याओं का जोड़ निम्नलिखित चार नियमों के अनुसार किया जाता है: 0 + 0 = 0, 1 + 0 = 1, 0 + 1 = 1 और 1 + 1 = 10 (यहाँ 0 लिखते हैं और 1 आगे 'कैरी' होता है)।

उदाहरण: 101₂ + 011₂ = 1000₂।

1 + 1 = 10, अतः दाईं ओर से जोड़ने पर 1+1=0 लिखते हैं और 1 कैरी होता है; आगे भी इसी प्रकार योग करने पर अंतिम परिणाम 1000₂ प्राप्त होता है। इसी प्रकार द्विआधारी घटाव में 1 - 1 = 0, 1 - 0 = 1, 0 - 0 = 0 होता है। द्विआधारी अंकगणित कंप्यूटर की ALU (अंकगणितीय तर्क इकाई) में होने वाली सभी गणनाओं का आधार है।

4.6 अष्टक और षोडश आधारी रूपांतरण के अधिक उदाहरण

दशमलव संख्या 30 को अष्टक में बदलने के लिए 30 को 8 से बार-बार भाग देते हैं: 30 ÷ 8 = 3, शेष 6; 3 ÷ 8 = 0, शेष 3। शेष को नीचे से ऊपर लिखने पर 36₈ प्राप्त होता है। इसी प्रकार, दशमलव 30 को षोडश आधारी में बदलने के लिए 30 ÷ 16 = 1, शेष 14; 14 को अक्षर E से लिखा जाता है, अतः परिणाम 1E₁₆ होता है। इससे स्पष्ट होता है कि वही 'भाग और शेष' की विधि हर आधार पर लागू होती है, केवल भाजक (Divisor) बदल जाता है — 2 के स्थान पर 8 या 16। यदि शेष 10 से बड़ा हो, तो षोडश आधारी में उसे A से F तक के अक्षरों से लिखते हैं। इस विधि का बार-बार अभ्यास करने से रूपांतरण सहज और शीघ्र हो जाता है।

5. दशमलव, द्विआधारी, अष्टक और षोडश आधारी की तुलना

दशमलव द्विआधारी अष्टक षोडश आधारी
0 0 0 0
1 1 1 1
2 10 2 2
3 11 3 3
4 100 4 4
5 101 5 5
6 110 6 6
7 111 7 7
8 1000 10 8
9 1001 11 9
10 1010 12 A
11 1011 13 B
12 1100 14 C
13 1101 15 D
14 1110 16 E
15 1111 17 F

6. बिट, बाइट और मेमोरी इकाइयाँ

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: चारों संख्या पद्धतियाँ

पद्धति आधार प्रयुक्त अंक उपयोग
दशमलव 10 0 से 9 मानव गणना
द्विआधारी 2 0, 1 कंप्यूटर
अष्टक 8 0 से 7 द्विआधारी को छोटा करना
षोडश आधारी 16 0-9, A-F मेमोरी एड्रेस, रंग

तालिका 2: मेमोरी इकाइयाँ

इकाई मान
1 बिट 0 या 1
1 बाइट 8 बिट
1 KB 1024 बाइट
1 MB 1024 KB
1 GB 1024 MB
1 TB 1024 GB

तालिका 3: रूपांतरण याद रखने की कुंजी

रूपांतरण विधि
द्विआधारी → दशमलव 2 की घात से गुणा कर जोड़ें
दशमलव → द्विआधारी 2 से भाग देकर शेष लिखें
द्विआधारी → अष्टक तीन-तीन बिट के समूह
द्विआधारी → षोडश आधारी चार-चार बिट के समूह

माइंड मैप

graph TD A["संख्या पद्धतियाँ"] --> B["दशमलव (आधार 10)"] A --> C["द्विआधारी (आधार 2)"] A --> D["अष्टक (आधार 8)"] A --> E["षोडश आधारी (आधार 16)"] C --> F["कंप्यूटर की भाषा"] F --> G["बिट = 0 या 1"] G --> H["8 बिट = 1 बाइट"] H --> I["1024 बाइट = 1 KB"] A --> J["रूपांतरण विधियाँ"] J --> K["द्विआधारी → दशमलव"] J --> L["दशमलव → द्विआधारी"] J --> M["द्विआधारी → अष्टक"] J --> N["द्विआधारी → षोडश आधारी"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: दशमलव से द्विआधारी रूपांतरण (13₁₀ = 1101₂)

दशमलव से द्विआधारी रूपांतरण 13₁₀ = ?₂ 13 ÷ 2 = 6 6 ÷ 2 = 3 3 ÷ 2 = 1 1 ÷ 2 = 0 1 0 1 1 शेषफल शेष को नीचे से ऊपर लिखें: 1101 स्वर्ण नियम: शेष को हमेशा नीचे से ऊपर लिखें 13₁₀ = 1101₂

आरेख 2: द्विआधारी से दशमलव रूपांतरण (1011₂ = 11₁₀)

द्विआधारी से दशमलव रूपांतरण 1011₂ = ?₁₀ 1 1×2³ = 8 0 0×2² = 0 1 1×2¹ = 2 1 1×2⁰ = 1 योग = 8 + 0 + 2 + 1 = 11 1011₂ = 11₁₀ Golden Rule: घात दाईं ओर से 2⁰ से शुरू होती है हर बिट × 2^(स्थान) का योग ही उत्तर है अष्टक में 2 के स्थान पर 8 और षोडश आधारी में 16 रखें

सामान्य गलतियाँ

  1. शेषफल को ऊपर से नीचे लिखना: दशमलव से द्विआधारी रूपांतरण में शेषफल को हमेशा नीचे से ऊपर लिखना चाहिए।
  2. आधार की घात गलत रखना: घात हमेशा दाईं ओर से 2⁰ (शून्य) से शुरू होती है, 2¹ से नहीं।
  3. अष्टक और षोडश आधारी में अंक गलत लिखना: अष्टक में 8 और 9 नहीं होते; षोडश आधारी में 10-15 को A-F से लिखा जाता है।
  4. बिट और बाइट में भ्रम: बिट सबसे छोटी इकाई है (0 या 1), जबकि बाइट = 8 बिट।
  5. KB, MB, GB के मान 1000 समझना: कंप्यूटर में ये 1024 के गुणकों में होते हैं (1 KB = 1024 बाइट)।
  6. द्विआधारी में केवल 0,1 मानते हुए गलत अंक लिखना: द्विआधारी में 2, 3 जैसे अंक नहीं हो सकते।
  7. रूपांतरण में तीन/चार बिट के समूह दाएँ से नहीं बनाना: समूह हमेशा दाईं ओर से बनाए जाते हैं।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. 2 की घातें याद रखें: 2⁰=1, 2¹=2, 2²=4, 2³=8, 2⁴=16, 2⁵=32, 2⁶=64, 2⁷=128, 2⁸=256।
  2. रूपांतरण प्रश्न में पूरी विधि लिखें; चरणबद्ध उत्तर अधिक अंक दिलाता है।
  3. 0 से 15 तक की दशमलव संख्याओं का द्विआधारी, अष्टक व षोडश आधारी मान कंठस्थ करें।
  4. मेमोरी इकाइयों का क्रम याद रखें: बिट → बाइट → KB → MB → GB → TB।
  5. षोडश आधारी में अक्षरों का मान याद रखें: A=10, B=11, C=12, D=13, E=14, F=15।
  6. उत्तर के साथ आधार (₂, ₈, ₁₀, ₁₆) अवश्य लिखें।
  7. अभ्यास के लिए 5 से 10 संख्याओं का रूपांतरण स्वयं करें।

निष्कर्ष

संख्या पद्धतियाँ कंप्यूटर विज्ञान की आधारशिला हैं। कंप्यूटर द्विआधारी भाषा में कार्य करता है, जबकि मनुष्य दशमलव में। रूपांतरण विधियों को समझकर हम दोनों के बीच संबंध स्थापित कर सकते हैं। अष्टक और षोडश आधारी पद्धतियाँ द्विआधारी संख्याओं को संक्षिप्त रूप में लिखने में सहायक होती हैं। इस ज्ञान का उपयोग आगे प्रोग्रामिंग और कंप्यूटर मेमोरी की समझ में होगा।