यह पाठ 'गोलू ग्रोज़ अ नोज़' (Golu Grows a Nose) एक काल्पनिक और रोचक कहानी है, जो एक छोटे हाथी के बच्चे 'गोलू' (Golu) के बारे में है। यह कहानी लेखक रुडयार्ड किपलिंग (Rudyard Kipling) के प्रसिद्ध संग्रह 'जस्ट सो स्टोरीज़' (Just So Stories) से ली गई है। कहानी में बताया गया है कि प्राचीन काल में हाथियों की नाक छोटी होती थी। गोलू भी एक ऐसा हाथी का बच्चा है, जिसकी नाक छोटी है। वह बहुत जिज्ञासु है और हमेशा सवाल पूछता रहता है, इसलिए उसे सब 'सताने वाला' कहते हैं।
कहानी में गोलू की जिज्ञासा का वर्णन है। वह हर चीज़ के बारे में सवाल पूछता है — पक्षियों के खाने, मगरमच्छ के भोजन, और अन्य जानवरों के बारे में। उसकी यह जिज्ञासा उसे एक रोमांचक यात्रा पर ले जाती है। एक दिन वह मगरमच्छ (crocodile) के बारे में जानने के लिए नदी की ओर जाता है। यह यात्रा उसके जीवन में एक बड़ा बदलाव लाती है — उसकी छोटी नाक लंबी और सूँड़ (trunk) बन जाती है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि जिज्ञासा और सवाल पूछना बुरा नहीं है। गोलू की जिज्ञासा के कारण ही उसे अपनी सूँड़ मिली, जो हाथी के लिए सबसे उपयोगी अंग बनी। कहानी हास्यपूर्ण और कल्पनाशील है, जो बच्चों को बहुत पसंद आती है। यह हमें बताती है कि नई चीज़ें सीखने और खोजने की इच्छा हमें आगे बढ़ाती है।
रुडयार्ड किपलिंग (Rudyard Kipling, 1865-1936) एक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी लेखक थे, जिन्हें 1907 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में 'द जंगल बुक' (The Jungle Book) और 'जस्ट सो स्टोरीज़' (Just So Stories) शामिल हैं। उनकी कहानियाँ कल्पनाशील, रोचक और बच्चों के लिए अत्यंत मनोरंजक हैं। 'गोलू ग्रोज़ अ नोज़' उनकी 'जस्ट सो स्टोरीज़' से ली गई है, जिसमें वे बताते हैं कि हाथियों की सूँड़ कैसे बनी। उनकी शैली में हास्य, कल्पना और प्रकृति का अद्भुत संगम है।
कहानी की शुरुआत प्राचीन काल से होती है, जब हाथियों की नाक छोटी होती थी। गोलू एक ऐसा हाथी का बच्चा है, जिसकी नाक छोटी है। वह बहुत जिज्ञासु है और हर विषय पर सवाल पूछता है। वह पूछता है कि शुतुरमुर्ग के पंख कैसे होते हैं, जिराफ़ के धब्बे कैसे बनते हैं, दरियाई घोड़े की आँखें कैसी होती हैं, और मगरमच्छ का भोजन क्या होता है। उसकी जिज्ञासा के कारण हर कोई उसे 'सताने वाला गोलू' कहता है।
एक दिन गोलू मगरमच्छ के बारे में जानने के लिए नदी की ओर जाता है। रास्ते में उसे एक पक्षी मिलता है, जो उसे बताता है कि मगरमच्छ नदी में रहता है। गोलू नदी के किनारे पहुँचता है और मगरमच्छ से पूछता है कि क्या वह मगरमच्छ है। मगरमच्छ अपने आप को सही बताता है और गोलू को बताता है कि वह उसे मीठे फल का नमूना दिखाएगा। गोलू मगरमच्छ के करीब जाता है, और मगरमच्छ उसकी छोटी नाक पकड़ लेता है और उसे खींचने लगता है।
गोलू डर जाता है और पीछे खींचता है। इस खींचतान में उसकी छोटी नाक लंबी होती जाती है। तभी एक अजगर (python) मदद करने आता है और गोलू की पूँछ पकड़कर खींचता है। दोनों के बीच खींचतान जारी रहती है, और गोलू की नाक और लंबी होती जाती है। अंत में मगरमच्छ नाक छोड़ देता है, और गोलू की नाक एक लंबी सूँड़ बन जाती है।
पहले तो गोलू अपनी लंबी नाक से परेशान होता है, परंतु जल्द ही उसे पता चलता है कि सूँड़ बहुत उपयोगी है। वह सूँड़ से मिज्जियाँ मार सकता है, फल तोड़ सकता है, पानी पी सकता है, और अपनी पीठ को धूल से साफ कर सकता है। इस प्रकार गोलू की सूँड़ उसके लिए सबसे उपयोगी अंग बन जाती है, और हाथियों की यही सूँड़ आज तक बनी हुई है।
कहानी के मुख्य पात्र हैं — गोलू (हाथी का बच्चा), मगरमच्छ, अजगर (python) और गोलू की माँ। गोलू जिज्ञासु, चतुर और सवाल पूछने वाला हाथी का बच्चा है। मगरमच्छ चालाक और धोखेबाज़ है, जो गोलू की नाक पकड़कर खींचता है। अजगर मददगार है, जो गोलू को मगरमच्छ से मुक्त कराता है। गोलू की माँ स्नेहमयी है, जो अपने बेटे को समझाती है। ये पात्र मिलकर कहानी को रोचक और मनोरंजक बनाते हैं।
इस पाठ का मूलभाव जिज्ञासा और खोज का महत्व है। गोलू की जिज्ञासा के कारण ही उसे अपनी सूँड़ मिली। यदि उसने सवाल नहीं पूछा होता और खोज नहीं की होती, तो उसे सूँड़ नहीं मिलती। कहानी का संदेश यह है कि जिज्ञासा और सवाल पूछना बुरा नहीं है; यह हमें नई चीज़ें सीखने और आगे बढ़ने में मदद करता है।
पाठ का दूसरा संदेश यह है कि हर अनुभव, चाहे वह कठिन ही क्यों न हो, हमें कुछ नया सिखाता है। गोलू की नाक खिंचने का अनुभव शुरू में दर्दनाक था, परंतु उससे उसे सूँड़ मिली, जो अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। यह कहानी हमें सिखाती है कि कठिनाइयाँ कभी-कभी हमें महत्वपूर्ण लाभ देती हैं। साथ ही, कहानी यह भी बताती है कि किसी अपरिचित से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि मगरमच्छ ने गोलू को धोखा दिया था।
| पात्र | भूमिका |
|---|---|
| गोलू | जिज्ञासु हाथी का बच्चा |
| मगरमच्छ | चालाक, धोखेबाज़ |
| अजगर (Python) | मददगार |
| गोलू की माँ | स्नेहमयी |
| घटना | परिणाम |
|---|---|
| गोलू की जिज्ञासा | नदी की यात्रा |
| मगरमच्छ से मुलाकात | नाक खिंचना |
| अजगर की मदद | नाक और लंबी |
| नाक छूटना | लंबी सूँड़ बनना |
| सूँड़ का उपयोग | अनेक लाभ |
'गोलू ग्रोज़ अ नोज़' रुडयार्ड किपलिंग की एक काल्पनिक और रोचक कहानी है, जो बताती है कि हाथियों की सूँड़ कैसे बनी। गोलू एक जिज्ञासु हाथी का बच्चा है, जिसकी नाक छोटी थी। उसकी जिज्ञासा उसे मगरमच्छ की खोज में नदी तक ले जाती है, जहाँ चालाक मगरमच्छ उसकी नाक पकड़कर खींचता है। अजगर की मदद से वह मुक्त होता है, परंतु उसकी नाक लंबी सूँड़ बन जाती है। पहले तो गोलू परेशान होता है, परंतु जल्द ही सूँड़ उसके लिए सबसे उपयोगी अंग बन जाती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जिज्ञासा और सवाल पूछना हमें नई खोजों तक ले जाता है, और कठिन अनुभव कभी-कभी सबसे बड़ा वरदान साबित होते हैं। साथ ही, यह अपरिचितों से सावधान रहने का भी संकेत देती है।