यह पाठ 'द रेबेल' (The Rebel) कवि डी. जे. एनराइट (D. J. Enright) द्वारा लिखी गई एक व्यंग्यात्मक (satirical) कविता है। कविता में एक 'विद्रोही' (rebel) बच्चे का वर्णन है, जो हर काम में दूसरों के विपरीत करता है। जब सभी लोग कुछ एक तरह से करते हैं, तो यह विद्रोही बच्चा ठीक उसके विपरीत करता है। यह कविता उस बच्चे के व्यवहार का हास्यपूर्ण और व्यंग्यात्मक चित्रण है, जो हमेशा भीड़ से अलग दिखना चाहता है।
कविता में बताया गया है कि जब सभी लोग छोटे बाल रखते हैं, तो विद्रोही बच्चा लंबे बाल रखता है। जब सभी लंबे बाल रखते हैं, तो वह अपने बाल छोटे कर लेता है। जब सभी मीटिंग में बोलते हैं, तो वह चुप रहता है। जब सभी चुप रहते हैं, तो वह बोलना शुरू कर देता है। इस तरह वह हर स्थिति में दूसरों के विपरीत आचरण करता है। यह व्यवहार कविता को हास्यप्रद बनाता है।
यह कविता मूलतः विद्रोही होने के अर्थ पर व्यंग्य करती है। यह बताती है कि विद्रोह होना (rebellious) अपने आप में बुरा नहीं है, बल्कि सच्चा विद्रोह तब होता है जब हम अन्याय के विरुद्ध खड़े हों। परंतु केवल दूसरों के विपरीत करने के लिए विपरीत करना (बिना किसी कारण के) बुद्धिमत्ता नहीं है। कविता हमें सोचने पर मजबूर करती है कि विद्रोह का सही अर्थ क्या है।
डी. जे. एनराइट (D. J. Enright, 1920-2002) एक ब्रिटिश कवि, उपन्यासकार और शिक्षक थे। उन्होंने विभिन्न देशों में पढ़ाया, जिससे उन्हें विभिन्न संस्कृतियों को समझने का अवसर मिला। उनकी कविताओं में व्यंग्य, हास्य और मानवीय व्यवहार का गहरा चित्रण मिलता है। 'द रेबेल' उनकी प्रसिद्ध कविताओं में से एक है, जिसमें उन्होंने विद्रोही स्वभाव के बच्चे के व्यवहार पर सूक्ष्म व्यंग्य किया है। उनकी भाषा सरल और संवाद-शैली में होती है, जो पाठक को सीधे संबोधित करती है।
कविता में कवि एक विद्रोही बच्चे का वर्णन करता है, जो हर परिस्थिति में दूसरों के विपरीत कार्य करता है। कविता की शुरुआत में बताया गया है कि जब सभी के बाल छोटे होते हैं, तो विद्रोही के बाल लंबे होते हैं। इसके विपरीत, जब सभी के बाल लंबे होते हैं, तो वह अपने बाल कटवा लेता है।
कविता में आगे बताया गया है कि जब सभी लोग किसी सभा या मीटिंग में भाषण देते हैं, तो विद्रोही चुप रहता है। परंतु जब सभी चुप रहते हैं, तो वही बोलना शुरू कर देता है। जब हर कोई किसी चीज़ की प्रशंसा करता है, तो वह उसकी आलोचना करता है। जब सब आलोचना करते हैं, तो वह प्रशंसा करने लगता है। जब दूसरे विनम्र होते हैं, तो वह अपमानजनक व्यवहार करता है, और जब सब अपमानजनक होते हैं, तो वह विनम्र बन जाता है।
कवि बताता है कि ऐसा व्यवहार करने वाला विद्रोही अकेला रह जाता है, क्योंकि लोग उसके अजीब व्यवहार से परेशान हो जाते हैं। कविता के अंत में कवि पूछता है कि क्या हम वास्तव में ऐसा व्यवहार करना चाहेंगे? इस प्रकार कविता विद्रोही होने के दिखावे पर व्यंग्य करती है। कवि यह दर्शाता है कि बिना किसी उद्देश्य के केवल विपरीत चलना कोई गुण नहीं है।
कविता की मुख्य पंक्तियों का अर्थ: - 'जब हर किसी के बाल छोटे होते हैं, तो विद्रोही के बाल लंबे होते हैं' — विद्रोही हर बात में विपरीत चलता है। - 'जब हर किसी के बाल लंबे होते हैं, तो वह अपने बाल कटवा लेता है' — विपरीत स्थिति में वह फिर विपरीत करता है। - 'जब हर कोई बोलता है, तो वह चुप रहता है; जब हर कोई चुप होता है, तो वह बोलता है' — उसका व्यवहार हमेशा उल्टा होता है। - 'जब सब विनम्र होते हैं, तो वह अपमानजनक होता है' — वह सामाजिक व्यवहार का विरोध करता है।
इस कविता का मूलभाव है दिखावटी विद्रोह (superficial rebellion) पर व्यंग्य। कवि उस बच्चे के व्यवहार का चित्रण करता है, जो बिना किसी कारण के हर बात में दूसरों के विपरीत चलता है। ऐसा विद्रोह सोच-समझकर नहीं, बल्कि केवल ध्यान आकर्षित करने के लिए होता है। कविता का संदेश यह है कि सच्चा विद्रोह तभी मूल्यवान है जब वह किसी न्यायपूर्ण उद्देश्य के लिए हो, जैसे अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना।
पाठ का दूसरा संदेश यह है कि हमें स्वयं का मार्ग (own path) चुनना चाहिए, परंतु यह मार्ग सोच-समझकर चुना जाना चाहिए, न कि केवल दूसरों के विपरीत जाने की ज़िद से। कविता यह भी दर्शाती है कि ऐसा विद्रोही व्यवहार व्यक्ति को अकेला कर देता है। हालाँकि कवि यह भी स्वीकार करता है कि यदि विद्रोह न हो, तो दुनिया में कोई बदलाव नहीं आएगा — विद्रोह का संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।
| स्थिति | दूसरे लोग | विद्रोही |
|---|---|---|
| बाल | छोटे | लंबे |
| बाल | लंबे | छोटे |
| बोलना | सब बोलते हैं | चुप |
| चुप रहना | सब चुप | बोलता है |
| प्रशंसा | सब प्रशंसा | आलोचना |
| आलोचना | सब आलोचना | प्रशंसा |
| कविता का तत्व | विवरण |
|---|---|
| मूलभाव | दिखावटी विद्रोह पर व्यंग्य |
| संदेश | सच्चा विद्रोह न्याय के लिए होता है |
| कवि | डी. जे. एनराइट |
| शैली | व्यंग्यात्मक, संवाद-शैली |
'द रेबेल' कविता डी. जे. एनराइट का व्यंग्यात्मक और हास्यपूर्ण चित्रण है, जिसमें एक ऐसे बच्चे का वर्णन है जो हर स्थिति में दूसरों के विपरीत आचरण करता है। कवि यह दर्शाता है कि बिना किसी कारण के केवल विपरीत चलना विद्रोह नहीं है, बल्कि दिखावा है, जो अकेलेपन की ओर ले जाता है। सच्चा विद्रोह वही है जो अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है। कविता हमें सिखाती है कि हमें सोच-समझकर अपना मार्ग चुनना चाहिए, न कि केवल दूसरों के विपरीत जाने की ज़िद से। साथ ही, कवि यह भी मानता है कि यदि विद्रोह न हो, तो दुनिया में कोई बदलाव नहीं आएगा — इसलिए विद्रोह संतुलित और उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए।