दैनिक जीवन में हमें अनेक राशियों की तुलना करनी पड़ती है, जैसे दो वस्तुओं के मूल्य, विद्यार्थियों की संख्या, दो भिन्न-भिन्न आकार के पैकेटों की मात्रा आदि। राशियों की तुलना करने का सरलतम तरीका अनुपात (Ratio) और प्रतिशत (Percentage) है। अनुपात से दो राशियों की तुलना होती है, जबकि प्रतिशत 100 के सापेक्ष मान को दर्शाता है। इस अध्याय में हम अनुपात, समानुपात, प्रतिशत, प्रतिशत की वृद्धि-कमी, लाभ-हानि, साधारण ब्याज और मूल्य वृद्धि (कर) की गणना का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय वित्तीय समझ का आधार है, क्योंकि बाजार की हर गणना अनुपात और प्रतिशत पर निर्भर करती है।
दो समान प्रकार की राशियों की तुलना करने के लिए उनके बीच के संबंध को अनुपात कहते हैं। अनुपात $a : b$ या $\frac{a}{b}$ के रूप में लिखा जाता है, जहाँ $a$ को पूर्ववर्ती और $b$ को परवर्ती पद कहते हैं। अनुपात हमेशा सरलतम रूप में लिखा जाता है। उदाहरण के लिए, 20 मीटर और 15 मीटर का अनुपात = $20 : 15 = 4 : 3$। अनुपात की तुलना केवल समान इकाई वाली राशियों से की जाती है; मीटर और किलोग्राम का अनुपात नहीं निकाला जा सकता।
यदि दो अनुपात बराबर हों, तो वे समानुपात में होते हैं। $a : b = c : d$ को $a : b :: c : d$ लिखते हैं, और इसे समानुपात कहते हैं। समानुपात में $ad = bc$ होता है (बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल)।
उदाहरण: यदि 4 पेन का मूल्य 20 रुपये है, तो 7 पेन का मूल्य ज्ञात करने के लिए समानुपात $4 : 7 = 20 : x$ बनाते हैं। फिर $4x = 7 \times 20 = 140$, अतः $x = 35$ रुपये।
प्रतिशत का अर्थ है 'प्रति सौ'। किसी राशि का प्रतिशत उसे 100 के भागों में व्यक्त करता है। 'प्रतिशत' को '%' चिह्न से दर्शाया जाता है। $$\text{प्रतिशत} = \frac{\text{अभीष्ट मान}}{\text{कुल मान}} \times 100$$
$$\text{वृद्धि %} = \frac{\text{वृद्धि का मान}}{\text{मूल मान}} \times 100$$ उदाहरण के लिए, यदि किसी वस्तु का मूल्य 200 रुपये से बढ़कर 250 रुपये हो जाता है, तो वृद्धि = 50 रुपये, अतः वृद्धि प्रतिशत $= \frac{50}{200} \times 100 = 25\%$।
क्रय मूल्य (Cost Price, CP) वह मूल्य है जिस पर वस्तु खरीदी जाती है, और विक्रय मूल्य (Selling Price, SP) वह मूल्य है जिस पर वस्तु बेची जाती है। $$\text{लाभ} = SP - CP \quad \text{(जब } SP > CP\text{)}$$ $$\text{हानि} = CP - SP \quad \text{(जब } CP > SP\text{)}$$ $$\text{लाभ %} = \frac{\text{लाभ}}{CP} \times 100, \quad \text{हानि %} = \frac{\text{हानि}}{CP} \times 100$$
उदाहरण: एक वस्तु 120 रुपये में खरीदकर 150 रुपये में बेची गई। लाभ = 30 रुपये, लाभ प्रतिशत $= \frac{30}{120} \times 100 = 25\%$। यह ध्यान रखना चाहिए कि लाभ और हानि प्रतिशत हमेशा क्रय मूल्य पर निकाला जाता है, विक्रय मूल्य पर नहीं।
साधारण ब्याज वह ब्याज है जो मूलधन के सीधे अनुपात में होता है। इसे निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है: $$\text{साधारण ब्याज} (SI) = \frac{P \times R \times T}{100}$$ यहाँ $P$ = मूलधन (Principal), $R$ = ब्याज की दर प्रति वर्ष (Rate), $T$ = समय (वर्षों में)।
$$\text{मिश्रधन} (A) = P + SI$$ उदाहरण: 5000 रुपये पर 2 वर्षों के लिए $5\%$ प्रति वर्ष की दर से ब्याज $= \frac{5000 \times 5 \times 2}{100} = 500$ रुपये। मिश्रधन $= 5000 + 500 = 5500$ रुपये।
किसी वस्तु के अंकित मूल्य पर कर लगाने पर उसका अंतिम मूल्य बढ़ जाता है। यदि किसी वस्तु का मूल्य 2000 रुपये है और उस पर $18\%$ GST लगता है, तो कर की राशि $= \frac{18}{100} \times 2000 = 360$ रुपये और अंतिम मूल्य $= 2360$ रुपये।
छूट अंकित मूल्य पर दी जाती है। विक्रय मूल्य = अंकित मूल्य - छूट। यदि अंकित मूल्य 500 रुपये पर $20\%$ छूट है, तो छूट $= 100$ रुपये और विक्रय मूल्य $= 400$ रुपये।
राशियों की तुलना के प्रश्नों में पहले दी गई सूचना को ध्यानपूर्वक पढ़कर अनुपात, प्रतिशत, लाभ-हानि या ब्याज का उपयुक्त सूत्र लगाना होता है। उदाहरण के लिए, "एक कक्षा में 40 विद्यार्थियों में से 30% लड़कियाँ हैं" तो लड़कियों की संख्या $= \frac{30}{100} \times 40 = 12$ होगी। "एक परीक्षा में 60% अंक प्राप्त करने पर 90 अंक मिले तो कुल अंक" $= \frac{90}{60} \times 100 = 150$ होंगे। ऐसे प्रश्नों में प्रतिशत को भिन्न या अनुपात में बदलकर सरलता से हल किया जाता है।
| प्रतिशत | भिन्न | दशमलव |
|---|---|---|
| 10% | 1/10 | 0.1 |
| 20% | 1/5 | 0.2 |
| 25% | 1/4 | 0.25 |
| 50% | 1/2 | 0.5 |
| 75% | 3/4 | 0.75 |
| 100% | 1 | 1 |
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| लाभ | SP - CP |
| हानि | CP - SP |
| लाभ प्रतिशत | (लाभ ÷ CP) × 100 |
| हानि प्रतिशत | (हानि ÷ CP) × 100 |
| साधारण ब्याज | (P × R × T) ÷ 100 |
| मिश्रधन | P + SI |
| वृद्धि प्रतिशत | (वृद्धि ÷ मूल मान) × 100 |
राशियों की तुलना हमारे दैनिक वित्तीय जीवन का आधार है। अनुपात और प्रतिशत से राशियों की तुलना, लाभ-हानि से व्यापार की गणना, और साधारण ब्याज से बचत एवं ऋण की समझ प्राप्त होती है। इन अवधारणाओं की दृढ़ समझ से बाजार, बैंक और रोजमर्रा की गणनाएँ सरल हो जाती हैं। सूत्रों को याद रखना और नियमित अभ्यास इस अध्याय में सफलता की कुंजी है।